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क्या विवाह को शून्य और शून्य घोषित किया जा सकता है?
विवाह परिवार तलाक और अलगाव
मैं फ्रेंच हूं और फ्रांस में रहती हूं। मैंने भारत के हाथरस में एक भारतीय से शादी की थी। वह दिल्ली के टैगोर गार्डन में रहता है। उसने मेरे साथ धोखा किया और वह वीजा तथा पैसों में रुचि रखता था। उसने एक नकली शादी का कार्ड बनाया, मुझसे कुछ...
वकील का उत्तर LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH द्वारा

आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर यह विवाह शुरू से ही शून्य है और इसे भारतीय परिवार न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जा सकता हैजैसा कि आपने बताया, चूंकि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना वैध...

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1 उत्तर

झारग्राम, भारत में विवाह कानून के बारे में

यह गाइड झारग्राम (झारखंड) के निवासियों के लिए विवाह कानून का संक्षिप्त अवलोकन देता है. केंद्र और राज्य के कानूनों के संयुक्त प्रभाव से विवाह संबंधी अधिकार और दायित्व बनते हैं. प्रमुख कानूनों में हिंदू विवाह अधिनियम, विविध धर्म के लिए विशेष अधिनियम और बाल विवाह रोकथाम अधिनियम शामिल हैं.

मुख्य कानून चार अनुभागों को कवर करते हैं: वैवाहिक दूरी, वैधानिकता, पंजीकरण और तलाक या विच्छेद के उपाय. ये कानून विवाह में गारंटी देते हैं कि दोनों पक्ष समान अधिकार और सुरक्षा पा सकें. राज्य स्तर पर इन कानूनों के साथ पंजीकरण नियम भी लागू होते हैं ताकि प्रमाण और अधिकार साफ-साफ रहते हैं.

मुख्य कानूनों के उदाहरण में Hindu Marriage Act 1955, Special Marriage Act 1954 और Prohibition of Child Marriage Act 2006 शामिल हैं. इन कानूनों के कारण विवाह की वैधता, पंजीकरण और बाल विवाह रोकथाम स्पष्ट होती है. झारग्राम के निवासी इन्हें मानते हुए अपने विवाह और उनसे जुड़े अधिकारों की सुरक्षा करते हैं.

झारग्राम में विवाह पंजीकरण के नियम भी केंद्रीय कानूनों के अनुरूप चलते हैं. पंजीकरण से प्रमाण पत्र मिलते हैं और दावे, दायित्व, व वैवाहिक स्थिति के प्रमाण सहज प्राप्त होते हैं. नीचे दिए गए उद्धरण इन कानूनों के आधिकारिक दृष्टिकोण को स्पष्ट करते हैं:

“Special Marriage Act, 1954 provides for civil marriages between persons of different religions.”

स्रोत: National Portal of India

“Child marriage is illegal under the Prohibition of Child Marriage Act, 2006.”

स्रोत: Ministry of Women and Child Development

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • परिदृश्य 1 - Interfaith विवाह के मामले में SMA के अनुसार पंजीकरण और सुरक्षा की आवश्यकता हो सकती है. Ranchi, Jamshedpur जैसे शहरों में जोड़े कानूनी सलाह लेते हैं. अदालत-सम्बन्धी प्रक्रियाओं में वकील मार्गदर्शन आवश्यक रहता है.

    कानून के तहत प्रक्रिया और फॉर्मलिटीज समझने में अधिवक्ता मदद करते हैं ताकि पंजीकरण सही और सुरक्षित हो सके.

  • परिदृश्य 2 - बाल विवाह से जुड़ी चिंताओं पर PCMA 2006 के अनुसार संरक्षण व सहायता चाहिए. झारखंड में माता-पिता या परिवार के सदस्यों के विरुद्ध शिकायतें भी उठती हैं. एक कानूनी सलाहकार आवश्यक कदम बताता है.

    उचित तर्क और त्वरित राहत के लिये वकील जरूरी हो सकता है ताकि बाल विवाह से जुड़े कानूनी परिणाम स्पष्ट हों.

  • परिदृश्य 3 - विवाह-विच्छेद (तलाक) या विच्छेद के मामलों में तकनीकी निदेश और दाखिल-खारिज की आवश्यकता होती है. HMA के अनुसार Grounds दिखाने होते हैं. झारखंड के निवासी एक अनुभवी अधिवक्ता से मार्गदर्शन लेते हैं.

    तीव्र और सही कानून-आधारित प्रक्रिया के लिये पेशेवर सहायता लाभदायक रहती है.

  • परिदृश्य 4 - विवाह के बाद संपत्ति, विरासत या दायित्वों के मामलों में वैधानिक स्पष्टता चाहिए. परिवारिक संपत्ति, जीविका और रख-रखाव के दायित्वों के लिये वकील की मदद जरूरी है. विशेषकर तलाक, वैध वसूली और अन्य दावों के प्रकार स्पष्ट होते हैं.

    सही दस्तावेज और आवेदन-प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिये कानूनी सलाहकार की भूमिका अहम रहती है.

  • परिदृश्य 5 - विवाह पंजीकरण से जुड़े प्रमाण और अधिकार पाने के लिए कानूनी मार्गदर्शन आवश्यक है. पंजीकरण में देरी या गलतियों पर वकील शिकायत-निपटारण कराते हैं. यह प्रमाण भविष्य के दावों के लिए अहम है.

    पूरे दस्तावेज़ीकरण के साथ उचित प्रक्रिया अपनाने के लिये अधिवक्ता सहायता लाभदायक रहेगी.

  • परिदृश्य 6 - Domestic violence, maintenance और संरक्षण आदेशों के मामलों में त्वरित कानूनी सहायता मिलती है. HL के तहत राहत पाने के लिये वकील तथ्य-साक्ष्यों के साथ अदालत में पेश होते हैं. न्यायिक प्रक्रिया में कानूनी मार्गदर्शन जरूरी है.

    इस प्रकार के मामलों में संयमित और विशेषज्ञ सलाह सबसे सफल परिणाम देती है.

स्थानीय कानून अवलोकन

झारखंड में विवाह को नियंत्रित करने वाले मुख्य कानून हैं:

  • Hindu Marriage Act, 1955 - हिन्दू समुदाय के लिए वैवाहिक प्रक्रिया, अधिकार और दायित्व निर्धारित करता है.
  • Special Marriage Act, 1954 - धर्म से स्वतंत्र नागरिक विवाह के लिए civil framework देता है.
  • Prohibition of Child Marriage Act, 2006 - बाल विवाह रोकता है और दायित्वों को स्पष्ट करता है.

इन कानूनों की क्रियान्वयन प्रकृति राज्य नियमों के साथ मिलकर चलती है. परिणामस्वरूप विवाह के पंजीकरण, प्रमाण, तलाक और दीर्घकालिक अधिकार स्पष्ट रहते हैं.

“The Special Marriage Act, 1954 provides for civil marriages between persons of different religions.”

स्रोत: IndiCode/National Portal

“Child marriage is illegal under PCMA 2006.”

स्रोत: wcd.nic.in

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विवाह कब वैध माना जाता है?

विवाह तब वैध माना जाता है जब कानून-निर्दिष्ट प्रक्रियाएं पूरी हों, दोनों पक्ष सहमति दें और आवश्यक प्रमाण मौजूद हों. ये आधार HMA, SMA और PCMA के नियमों पर निर्भर करते हैं.

झारखंड में आयु सीमा क्या है?

क़ानूनी मानक अनुसार विवाहित युवक-युवती की आयु 18 वर्ष से कम न हो. पुरुषों के लिए कुछ स्थितियों में 21 वर्ष की आयु मान्य हो सकती है. विशिष्ट स्थितियों में स्थानीय न्यायिक निर्णय भी प्रभाव डालते हैं.

Interfaith विवाह के लिए कौन सा कानून लागू होता है?

Interfaith विवाह के लिए Special Marriage Act 1954 लागू होता है. यह धर्म से ऊपर उठकर नागरिक विवाह को मान्यता देता है.

क्या विवाह पंजीकरण अनिवार्य है?

कई जगहों पर पंजीकरण आवश्यक माना गया है ताकि प्रमाण मिल सके. HMA, SMA और PCMA में पंजीकरण की वैधानिक अनिवार्यता निरंतर पद-चिह्नित है, पर राज्य-विशिष्ट नियम भिन्न हो सकते हैं.

तलाक के कौन-से आधार मान्य हैं?

Hindu Marriage Act के अंतर्गत तलाक के कई आधार हो सकते हैं, जैसे अनुचित व्यवहार, शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न, लापरवाही आदि. SMA के अंतर्गत भी लागू प्रावधान होते हैं.

विवाह के बाद Maintenance कैसे मिल सकता है?

Tribunal या अदालत Maintenance के लिए आदेश दे सकती है. यह पूर्वविवाह जीवन-यात्रा, आय-स्थिति और बच्चों की ज़रूरत पर निर्भर होता है.

Dowry से जुड़ी शिकायतें कैसे दर्ज होती हैं?

Dowry प्रथा विरुद्ध कानून के तहत शिकायत दर्ज कराई जा सकती है. PCMA के साथ साथ IPC की संबंधित धाराओं के अंतर्गत भी कार्यवाही संभव है.

बाल विवाह की स्थिति में क्या करें?

बाल विवाह होने पर तुरंत निकाह-स्थल के विरुद्ध कानूनी सहायता लें. PCMA के अनुसार बाल विवाह अवैध माना जाता है और बचाव के कानून उपलब्ध हैं.

Annulment और Divorce में क्या अंतर है?

Annulment विवाह को वैध न रहने की स्थिति से वापस लेता है, जबकि Divorce विवाह को खत्म कर देता है. कारण और कानूनी प्रक्रिया अलग होती है.

कौन से दस्तावेज आवश्यक होते हैं?

आमतौर पर पहचान पत्र, जन्म प्रमाण, पते के प्रमाण, शादी-करार के दस्तावेज आदि चाहिए होते हैं. SMA/HMA के अनुसार विशिष्ट फॉर्म भरने होते हैं.

अगर विवाह पंजीकरण अभी तक नहीं हुआ है तो क्या करें?

स्थानीय न्यायिक सेवाओं से संपर्क करें. पंजीकरण के लिए आवेदन, आवश्यक प्रमाण और समय-सीमा की जानकारी ली जा सकती है.

अतिरिक्त संसाधन

अगले कदम

  1. अपने मामले का स्पष्ट उद्देश्य तय करें और प्रमुख सवाल लिख लें.
  2. सभी आवश्यक दस्तावेज एकत्र करें: पहचान, आय प्रमाण, विवाह-संबंधी पत्र आदि.
  3. अपने जिला-क्षेत्र के परिवार कानून के वकील खोजें और प्राथमिक जानकारी लें.
  4. उनकी विशेषज्ञताओं, फीस और उपलब्धता की तुलना करें.
  5. पहले परामर्श की तिथि निर्धारित करें और तैयारी करें.
  6. प्रश्नों के जवाब नोट करें और लिखित मूल्यांकन मांगें.
  7. फैसला करें कि आपको कौन सा वकील उचित लग रहा है और आगे की कार्रवाई शुरू करें.

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