वाराणसी में सर्वश्रेष्ठ विवाह वकील
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भारत विवाह वकीलों द्वारा उत्तरित कानूनी प्रश्न
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- क्या विवाह को शून्य और शून्य घोषित किया जा सकता है?
- मैं फ्रेंच हूं और फ्रांस में रहती हूं। मैंने भारत के हाथरस में एक भारतीय से शादी की थी। वह दिल्ली के टैगोर गार्डन में रहता है। उसने मेरे साथ धोखा किया और वह वीजा तथा पैसों में रुचि रखता था। उसने एक नकली शादी का कार्ड बनाया, मुझसे कुछ...
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वकील का उत्तर LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH द्वारा
आपके द्वारा प्रदान की गई जानकारी के आधार पर यह विवाह शुरू से ही शून्य है और इसे भारतीय परिवार न्यायालय द्वारा शून्य घोषित किया जा सकता हैजैसा कि आपने बताया, चूंकि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना वैध...
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1. वाराणसी, भारत में विवाह कानून के बारे में: वाराणसी, भारत में विवाह कानून का संक्षिप्त अवलोकन
वाराणसी उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख शहर है जहां विवाह कानून पूरे भारत की तरह लागू होते हैं।
वाराणसी के निवासियों के लिए प्रमुख कानून हिन्दू विवाह अधिनियम 1955, विशेष विवाह अधिनियम 1954 और शरीयत-आधारित व्यक्तिगत कानून जैसे कानूनों के दायरे में आते हैं।
पंजीकरण, तलाक, उम्र, दायित्व और अन्य विवाह सम्बद्ध प्रक्रियाओं के लिए जिला परिवार न्यायालय, तहसील दफ्तर और नगर पालिका पंजीयन कार्यालय से संपर्क आवश्यक रहता है।
This Act may be called the Hindu Marriage Act, 1955.
हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 के आधिकारिक पाठ में यह उद्घोष है जो हिन्दू विवाहों को विनियमित करता है।
This Act may be called the Special Marriage Act, 1954.
विशेष विवाह अधिनियम, 1954 भी असंस्कारिक/उच्च-धर्मीय विवाहों के पंजीकरण और solemnization के लिए आधार बनता है।
This Act may be called the Prohibition of Child Marriage Act, 2006.
प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड मैरिज एक्ट, 2006 बाल विवाह रोकथाम हेतु प्रयुक्त मुख्य अधिनियम है।
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: विवाह कानूनी सहायता के लिए 4-6 विशिष्ट परिदृश्य
- हिन्दू विवाह अधिनियम के दायरे से बाहर आने वाले मुद्दे - अगर विवाह पंजीकरण, आयु सत्यापन, या वैधता पर आपत्ति हो तो वाराणसी के डीएलएसए या जिला परिवार न्यायालय की सहायता अनिवार्य हो सकती है।
- इंटर्फेथ विवाह और SMA के अंतर्गत पंजीकरण - यदि आप बहिरंग विवाह चाहते हैं या धर्म अलग होने पर विवाह को कानूनी मान्यता चाहते हैं तो वैधानिक मार्ग स्पष्ट करें।
- तलाक, पालन-पोषण और मुआवजे के मामलों में - वाराणसी के परिवार न्यायालय में अनुशासनिक सूट, मुआवजा, child custody आदि के लिए वकील आवश्यक होता है।
- घरेलू हिंसा या दहेज-उत्पीड़न के मामलों में - महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा हेतु दया-उपचार, संरक्षण आदेश और कार्यवाई के लिए कानूनी सलाह जरूरी है।
- पोषण और алиमान के निवारण - विवाह-विच्छेद के बाद सुनवाई और धाराओं के अनुरूप सहायता प्राप्त करने हेतु वकील की जरूरत रहती है।
- वाराणसी में विवाह प्रमाण-पत्र, प्रवास या वीजा के लिए - ई-फाइलिंग और स्थानीय रिकॉर्ड के सत्यापन हेतु कानूनी मार्गदर्शन चाहिए।
नोट: यह जानकारी कानूनी सलाह नहीं है। जिला स्तर पर एक अनुभवहीन वकील से पहले स्पष्ट परामर्श लें ताकि आपकी विशिष्ट स्थिति के अनुसार सही कदम तय हो सकें।
3. स्थानीय कानून अवलोकन: वाराणसी, भारत में विवाह को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून
- हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 - हिन्दू जाति के दोनों पक्षों के विवाहों को वैधानिक ढांचे में लाने के लिए बना है।
- विशेष विवाह अधिनियम, 1954 - Inter-faith और धर्म से स्वतंत्र विवाह की solemnization और पंजीकरण की व्यवस्था देता है।
- शरीयत-आधारित व्यक्तिगत कानून (शरीयत ऐक्ट) 1937 - मुस्लिम व्यक्तियों के विवाह-परिवार संबंधी मामलों को नियंत्रित करता है।
वाराणसी में इन अधिनियमों के अलावा बाल विवाह रोकथाम हेतु प्रोटिज़न ऑफ चाइल्ड मैरिज ऐक्ट, 2006 लागू है।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वाराणसी में हिन्दू विवाह पंजीकरण कहाँ कराना चाहिए?
स्थानीय पंजीयन कार्यालय और नगर निगम की विवाह पंजीयन इकाई में पंजीकरण कराया जा सकता है। इसके लिए दो-तीन सप्ताह के भीतर आवश्यक दस्तावेज देने होते हैं।
क्या inter-faith विवाह Special Marriage Act के अंतर्गत पंजीकृत हो सकता है?
हाँ, inter-faith विवाह SMA के अंतर्गत किया जा सकता है ताकि धर्म से स्वतंत्र वैधानिकता मिल सके।
वाराणसी में विवाह पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज क्या-क्या हैं?
पहचान पत्र, आयु प्रमाण, निवास प्रमाण, विवाह से जुड़े दोनों पक्षों के पासपोर्ट साइज़ फोटो और आवश्यक शुल्क रसीद दस्तावेज में शामिल होते हैं।
अगर विवाह वैध नहीं माना जाए तो क्या प्रक्रिया है?
यह स्थिति कानून-नियंत्रित कारणों से उत्पन्न हो सकती है। वैधानिक समाधान के लिए परिवार न्यायालय में याचिका दायर की जा सकती है।
तलाक के बाद कितनी राशि मुआवजे के रूप में दी जाती है?
मुआवजे की राशि मामले के कारण और अदालत के फैसले पर निर्भर करती है। उचित क्षतिपूर्ति के लिए अधिवक्ता की सलाह जरूरी है।
वाराणसी में कौनसी अदालत तलाक के मामलों की सुनवाई करती है?
Varanasi जिला न्यायालय के Family Court में तलाक के मामलों की सुनवाई होती है।
क्या बच्चे की देखभाल के मामले SMA के अंतर्गत तय होते हैं?
नहीं SMA विवाह के पंजीकरण से जुड़ा है; बच्चों की देखभाल के मामलों में custody और maintenance से जुड़ी बातें HMA या अन्य संगत धाराओं के तहत तय होती हैं।
किस प्रकार के दस्तावेज जन्म-प्रमाण से जुड़ी दिक्कत हल होते हैं?
कभी-कभी जन्म प्रमाण-पत्र में नाम-उच्चारण व आयु-सत्यापन गलत हो सकता है। अदालत के निर्देश से संशोधन कर सकते हैं।
क्या विदेश नागरिक भी वाराणसी में विवाह कर सकते हैं?
हाँ SMA के अंतर्गत या सभ्यताक्रम के अनुसार विवाह किया जा सकता है, परंतु वैधता के लिए अतिरिक्त दस्तावेज की जरूरत पड़ती है।
क्या विवाह प्रमाणपत्र में गलती हो जाए तो कैसे सुधारें?
स्थानीय पंजीयन कार्यालय में संशोधन हेतु आवेदन दें। अदालत की अनुमति से संशोधन भी संभव है।
कौन सा कानून बच्चों के विवाह को रोकता है?
Prohibition of Child Marriage Act, 2006 बच्चों के विवाह पर रोक लगाता है और 18 वर्ष से कम आयु पर विवाह मान्यता नहीं देता है।
वाराणसी में विवाह के बाद आयु सत्यापन क्यों जरूरी है?
आयु सत्यापन से विवाह वैधानिकता स्पष्ट होती है और बाद में कोई कानूनी आपत्ति न रहे, यह सुनिश्चित होता है।
5. अतिरिक्त संसाधन
- राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) - महिलाओं के अधिकार और कानूनी सहायता के लिए संपर्क-सूत्र. www.ncw.nic.in
- उत्तर प्रदेश स्टेट लॉ सवायता प्राधिकरण (UPLSA) - राज्य स्तर पर मुफ्त/कम शुल्क वकालत सेवाएं. uplsa.gov.in
- वाराणसी जिला विधि सेवा प्राधिकरण (DLSA) और ई- Courts पोर्टल - स्थानीय कानूनी सहायता और परिवार न्यायालय के दस्तावेज. districts.ecourts.gov.in/varanasi
6. अगले कदम: विवाह वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया
- अपनी स्थिति के अनुसार हिन्दू, SMA या शरीयत कानून में विशेषज्ञता वाले अधिवक्ता निर्धारित करें।
- वाराणसी जिले के DLSA या जिला बार काउंसिल से रेफरल प्राप्त करें।
- कई वकीलों के साथ प्रारम्भिक परामर्श निर्धारित करें ताकि उनके अनुभव और फीस समझ में आए।
- अपने केस-डॉक्यूमेंट्स एकत्रित करें जैसे पहचान, विवाह प्रमाण-पत्र, आयु-प्रमाण आदि।
- फीस संरचना, घंटे दर, और नियत शुल्क को लिखित में लें।
- कानूनी स्टेप्स और अनुमानित समयरेखा के बारे में स्पष्ट बातचीत करें।
- आवश्यक हो तो स्थानीय कोर्ट में उपयुक्त दाखिलों के लिए दस्तावेज तैयार कराएं।
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