पटना में सर्वश्रेष्ठ विलय और अधिग्रहण वकील

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Giri Law Associates
पटना, भारत

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गिरी लॉ एसोसिएट्स व्यापक प्रकार के मुकदमेबाज़ी और लेन-देन संबंधी सेवाएँ प्रदान करता है, जिसमें व्यापार और रियल...
Paramarsh Legal Associates
पटना, भारत

उनकी टीम में 6 लोग
English
परामर्श लीगल एसोसिएट्स पटना स्थित एक विधिक फर्म है जो कॉर्पोरेट, बैंकिंग व वित्त, रियल एस्टेट, श्रम व रोजगार तथा...
पटना, भारत

1956 में स्थापित
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तरकांत झा एंड एसोसिएट्स बिहार के सबसे पुराने और भरोसेमंद लॉ फर्मों में से एक है, जिसकी स्थापना 1956 में हुई थी और इसका...
Advocate Ankit Kumar Singh
पटना, भारत

2018 में स्थापित
उनकी टीम में 1 व्यक्ति
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Hindi
एडवोकेट अंकित कुमार सिंह की विशेषज्ञता में आपका स्वागत है – प्रतिष्ठित पटना हाई कोर्ट में आपके विश्वसनीय कानूनी...
Advocate Radha Raman Roy

Advocate Radha Raman Roy

15 minutes मुफ़्त परामर्श
पटना, भारत

1987 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
वकील राधा रमण रॉय, पटना के सर्वश्रेष्ठ वकील, आपराधिक, तलाक, संपत्ति, वैवाहिक, पारिवारिक और नागरिक कानून में 35 से...
Legal Pinnacle
पटना, भारत

English
लीगल पिनेकल एक प्रमुख भारतीय फुल सेवा और बहु-अनुशासनात्मक लॉ फर्म है, जिसके प्रधान कार्यालय पटना और दिल्ली में...
LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
पटना, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. पटना, भारत में विलय और अधिग्रहण कानून का संक्षिप्त अवलोकन

पटना, बिहार में विलय और अधिग्रहण कानून भारत के केंद्रीय कानूनों से संचालित होते हैं. प्रमुख ढांचे में Companies Act, 2013, SEBI (Substantial Acquisition of Shares and Takeovers) Regulations, 2011 और Competition Act, 2002 शामिल हैं.

यह ढांचा सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध कंपनियाँ दोनों पर लागू होता है. विलय-सम्भवता योजनाओं के लिए NCLT की मंजूरी आवश्यक होती है, जबकि रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) पटना के कार्यालय में पंजीकरण की प्रक्रियाएं संभाली जाती हैं.

“AAEC टेस्ट से यह निर्धारित होता है कि प्रस्तावित संयोजन प्रतिस्पर्धा पर प्रभाव डालता है या नहीं।”

संदर्भ उद्धरण: आयोग के अनुसार AAEC परीक्षण का उद्देश्य संयोजन के प्रतिस्पर्धा पर संभावित असर को निर्धारित करना है. देखें: Competition Commission of India (CCI).

“Open Offer नियम SEBI के नियम 2011 के अनुसार होता है, यदि खरीदार voting rights में 25 प्रतिशत या अधिक हिस्सेदारी हासिल करता है।”

संदर्भ उद्धरण: SEBI (Substantial Acquisition of Shares and Takeovers) Regulations, 2011. देखें: SEBI Takeover Regulations.

“विदेशी निवेश और विदेशी विनिमय नियमों के अंतर्गत cross-border merger और acquisition पर RBI-फेमा नीति लागू होती है।”

संदर्भ उद्धरण: RBI-FEMA नीति और विदेशी निवेश मार्गदर्शन. देखें: RBI FDI Guidelines.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

परिदृश्य 1: पटना में सूचीबद्ध कंपनी के हिस्सेदारी का बड़े पैमाने पर अधिग्रहण

यदि किसी पटना-आधारित निवेशक ने 25 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी खरीदी, तो SEBI के अनुसार खुला प्रस्ताव (open offer) अनिवार्य होगा. इस चरण में कानूनी सलाह जरूरी है ताकि खुला प्रस्ताव समय पर और सही शर्तों पर पूरा हो सके.

ऐसे मामलों में आपको संपूर्ण due diligence, disclosure, और केबिनेट-डायरेक्टर्स के हितों का संरक्षण करना होता है. निर्णय-निर्माण के साथ संबंधित सभी दस्तावेजों की जाँच जरूरी है. नोट: यह प्रक्रिया सूचीबद्ध कंपनियों पर अधिक प्रभाव डालती है.

परिदृश्य 2: बिहार-आधारित निजी कंपनी का एक बड़ी समूह/कंपनी के साथ विलय

नॉन-लिस्टेड ऐक्वायरी में भी schemes of arrangement के लिए NCLT मंजूरी आवश्यक रहती है. Patna RoC में फाइलिंग और स्टेकहोल्डर कंसेंशन का ख्याल रखना होगा.

इसमें शेयरहोल्डर समूह, क्रेडिटर्स और कर्मचारी वर्ग के हितों का संतुलन बनाना जरूरी होता है. अनुभवी advi-sor के साथ ग्राम्य-औद्योगिक क्लस्टर के साथ स्थानीय प्रक्रियाओं की समझ मदद करती है.

परिदृश्य 3: cross-border M&A में फिडे-FDI अनुमोदन और RBI नीतियों का अनुपालन

विदेशी निवेश के मामले में RBI-फेमा नियमों के अनुसार prior approval और FDI policy के अनुरूप कदम उठाने होंगे. बिहार-स्थानीय कंपनी के लिए विदेशी निवेशकों के साथ अनुबंधों का सही दस्तावेजीकरण आवश्यक है.

कानूनी सलाहकार cross-border due diligence, tax implications, और transfer pricing के मुद्दों में मार्गदर्शन देंगे. स्थानीय संस्थागत सहयोग से प्रक्रियाएं सुगम रहती हैं.

परिदृश्य 4: प्रतिस्पर्धा-सम्बन्धी चिंताओं के साथ M&A

CCi के AAEC परीक्षण के आधार पर आयोग तय करेगा कि संयोजन प्रतिस्पर्धा पर नुकसान पहुंचाएगा या नहीं. बिहार में बाजार-स्तर पर प्रभावी प्रतिस्पर्धा बनाए रखना आवश्यक है.

इसमें विलय-पूर्व संधारणीय डेटा, पूर्व-स्वीकृति वार्ता और आशंकाओं का समाधान शामिल है. क्लोजिंग से पहले सभी पक्षों के साथ स्पष्ट संवाद रखना लाभकारी होता है.

परिदृश्य 5: distressed M&A और IBC के अंतर्गत पुनर्गठन

IBC के माध्यम से दिवालिया या संकटग्रस्त कंपनियों का पुनर्गठन भी M&A नोटिस के अंतर्गत आता है. पटना निवासी अधिवक्ता वैधानिक समय-सीमाओं और क्रेडिटर्स-हक के अनुरूप योजना बनाते हैं.

उचित संरचना और क्रियान्वयन से कर्मचारियों के अधिकार और देयताओं का सुरक्षित निवारण संभव रहता है. विशेषज्ञ साथ रहने से लागू नियमों के दायरे में रहकर नुकसान रोका जा सकता है.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

कानून 1: Companies Act, 2013 (धारा 230-234) - schemes of arrangement

यह धारा मर्जर-स्कीम के लिए NCLT की मंजूरी आवश्यक बताती है. Patna RoC के माध्यम से फाइलिंग और विविध कागजात जमा होते हैं. क्षेत्रीय अदालतों की प्रक्रिया स्थानीय सफलता के लिए अहम है.

ध्यान दें कि निजी कंपनियों और सूचीबद्ध कंपनियों के लिए प्रक्रियाओं में भिन्नताएं हो सकती हैं. महत्वपूर्ण: सभी विचलनों पर विस्तृत due diligence जरूरी है.

“Open Offer Trigger: 25% voting rights या अधिक।”

संदर्भ स्रोत: SEBI Takeover Regulations. देखें: SEBI Takeover Regulations.

कानून 2: Competition Act, 2002 - AAEC परीक्षण

यह कानून संयोजन की Competition Commission of India (CCI) द्वारा समीक्षा की व्यवस्था बनाता है. AAEC आधार पर यह देखता है कि संयोजन प्रतिस्पर्धा पर कितना प्रभाव डालेगा.

Patna सहित सभी शहरों में यह मानक लागू होता है और किसी भी संयोजन को आंशिक या व्यापक रूप से रोक सकता है. अधिक जानकारी: CCI

“The Commission shall determine whether a proposed combination causes an appreciable adverse effect on competition.”

स्रोत: CCI.

कानून 3: FEMA व RBI की FDI नीति

विदेशी निवेश और cross-border M&A पर FEMA और RBI नियम लागू होते हैं. इन नियमों के अनुसार FDI प्रकरणों में prior approvals आवश्यक होते हैं. Bihar-आधारित कंपनियाँ विदेशी निवेश के मामलों में RBI-निर्देशों का पालन करेंगी.

तथ्यात्मक मार्गदर्शन हेतु RBI के FDI पन्ने देखें. नोट: FEMA सेटिंग्स समय-समय पर अपडेट होती हैं.

“Foreign exchange management under FEMA governs cross-border transactions including M&A.”

स्रोत: RBI फिडी गाइडलाइंस. देखें: RBI FDI Guidelines.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विलय और अधिग्रहण कानून क्या है?

यह नियमों का सेट है जो कंपनियों के एकीकरण, शेयर-हस्तांतरण और शेयरहोल्डर्स के हितों की रक्षा करता है.

पटना में M&A के लिए कौन-कौन से अधिकारी जिम्मेदार हैं?

Roc Patna, NCLT, SEBI और CCI प्रमुख संस्थाएं हैं. सूचीबद्ध कंपनियों पर SEBI, और AAEC पर CCI निर्णय लेती है.

Open Offer कब और कैसे शुरू होता है?

जब किसी खरीदार ने 25% या उससे अधिक voting rights हासिल कर लिए. SEBI नियम 2011 यह बताता है.

क्या हर M&A के लिए NCLT मंजूरी चाहिए?

स्कीम ऑफ़ अरेजमेंट के लिए NCLT मंजूरी अनिवार्य है. अन्य प्रकार के निजी कॉन्ट्रैक्शन में आवश्यक नहीं हो सकता है.

Cross-border M&A में किसे पहले मंजूरी चाहिए?

FDI नीति के अनुसार RBI और सरकार से approvals चाहिए. फर्में FDI के नियमों के अनुसार दस्तावेज जमा करती हैं.

Competition issues होने पर क्या कदम उठाने चाहिए?

AAEC समस्या पर CCI से clearance या modification की मांग की जा सकती है. पूर्व-निगरानी और दस्तावेजीकरण अहम हैं.

IBC के माध्यम से distressed M&A कैसे चलते हैं?

IBC के तहत पुनर्गठन योजना NCLT से मंजूर होनी चाहिए. पटना क्षेत्र के क्रेडिटर्स के हितों को भी संरक्षित किया जाता है.

Tax implications M&A पर क्या होते हैं?

टैक्स impact प्रकार-पर-परिस्थिति पर निर्भर करते हैं. CGST, IGST, stamp duty और capital gains पर विशेष नियम लागू होते हैं.

कम से कम कितने दस्तावेज चाहिए?

ड्यू-डिलिजेंस, due diligence reports, COMPREHENSIVE disclosure और share transfer agreements आवश्यक होते हैं.

किस प्रकार की due diligence सबसे अधिक जरूरी है?

Financial, regulatory, litigation, IP rights और employee matters की diligence सबसे अधिक आवश्यक मानी जाती है.

क्या M&A में employees के अधिकार प्रभावित होते हैं?

हाँ, नियुक्तियाँ, severance, और continuity of service के प्रावधान व्यापार-समझौतों में शामिल किये जाते हैं.

पटना निवासियों के लिए व्यावहारिक सलाह क्या है?

स्थानीय कानून दल के साथ शुरुआती बातचीत करें. RoC Patna से फाइलिंग समय की मांगों को समझें. SEBI, CCI, RBI के नियमों से अद्यतन रहें.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • SEBI - Securities and Exchange Board of India. Open offer और takeover नियम. https://www.sebi.gov.in/
  • CCI - Competition Commission of India. AAEC परीक्षण और संयोजन की समीक्षा. https://cci.gov.in/
  • FICCI - Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry. उद्योग नेटवर्क और M&A पर मार्गदर्शन. https://ficci.in/

6. अगले कदम

  1. अपने डील प्रकार और लक्ष्य कंपनी की प्रकृति स्पष्ट करें।
  2. पटना RoC और NCLT प्रक्रियाओं के बारे में स्थानीय विशेषज्ञ से चर्चा करें।
  3. SEBI, CCI और RBI नीतियों की समीक्षा करें और आवश्यक approvals सूची बनाएं।
  4. ड्यू-डिलिजेंस चेकलिस्ट बनाकर वित्तीय, कानूनी और कर-सम्बंधी मुद्दे सूचीबद्ध करें।
  5. पात्र सलाहकारों के साथ प्रारम्भिक परामर्श करें और engagement letter प्राप्त करें।
  6. Open offer, disclosure और शर्तों के लिए एक स्पष्ट रोडमैप बनाएं।
  7. फॉर्म-फाइलिंग और समय-सीमाओं के लिए एक रीयल-टाइम कैलेंडर बनाएं।

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