जयपुर में सर्वश्रेष्ठ सैन्य तलाक वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड

LEGATIO LEGAL
जयपुर, भारत

2017 में स्थापित
उनकी टीम में 3 लोग
English
लेगैटिओ लीगल जयपुर, भारत में स्थित एक प्रतिष्ठित कानूनी फर्म है, जो कॉर्पोरेट संस्थाओं और व्यक्तियों दोनों को...
Dhee Legal Advisors
जयपुर, भारत

English
Dhee लीगल एडवाइजर्स, जिसका मुख्यालय भारत में स्थित है, एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है जिसे उसकी व्यापक कानूनी सेवाओं के लिए...
जयपुर, भारत

2015 में स्थापित
English
सन् 2015 में प्रबंध भागीदार श्री अजातशत्रु एस. मीना द्वारा स्थापित, एएसएम लॉ चैंबर्स तेजी से भारत में एक अग्रणी...

English
अनिल कुमार एडवोकेट एवं कंसल्टेंट्स जयपुर, भारत में स्थित एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है, जिसका पारिवारिक कानून, आपराधिक...
SURANA LAW CHAMBER
जयपुर, भारत

2022 में स्थापित
English
सुराना लॉ चैंबर, जोकि बापू नगर, जयपुर, राजस्थान में स्थित है, एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है जो नागरिक विधि, आपराधिक...
Prabhansh Sharma and Associates
जयपुर, भारत

English
प्रभांश शर्मा एंड एसोसिएट्स जयपुर, राजस्थान में स्थित एक गतिशील विधिक फर्म है जो आपराधिक न्याय, तलाक सेवाएँ और...
जयपुर, भारत

2015 में स्थापित
English
केपी एसोसिएट्स जयपुर और नई दिल्ली में कार्यालयों वाला एक पूर्ण-सेवा विधिक फर्म है, जो विविध ग्राहकों को व्यापक...

English
SAG Legal जयपुर स्थित एक कानून फर्म है जो आपराधिक, नागरीय और पारिवारिक मामलों को संभालती है, जिसमें विशेष रूप से जमानत...
The Infinite Law Firm
जयपुर, भारत

English
The Infinite Law Firm, headquartered in Jaipur, was founded by Advocate Supriya Saxena to advance the concept that law is infinite, wherein every remedy is available to a client. The firm began as a small team of lawyers and has grown into a multi-litigation office with experienced lawyers from...
जैसा कि देखा गया

1. जयपुर, भारत में सैन्य तलाक कानून का संक्षिप्त अवलोकन

जयपुर, राजस्थान में सैन्य तलाक के मामले सामान्य नागरिक तलाक कानून से निपटते हैं। सेना कर्मी हो या उनके परिवारजन, तलाक civil court के अंतर्गत आता है। हिंदू विवाह अधिनियम 1955 और अलग-अलग वैवाहिक समझौतों के प्रावधान यहां लागू होते हैं, भले ही पति-पत्नी सेना में क्यों न हों।

जयपुर की फैमिली कोर्ट्स वहीं जिला न्यायालय के अंतर्गत तलाक, रख-रखाव, बाल सुरक्षा जैसे मुद्दों को निपटाती है। सेवा निवृत्ति के बाद पेंशन और अन्य सेवाकालीन लाभ की शर्तें सेवा मामले-आधारित न्यायाधिकरणों से जुड़ सकती हैं।

“किसी भी विवाह के विच्छेद के लिये दोनों पक्षों में तलाक की याचिका एक जिला न्यायालय में दायर की जा सकती है, यदि दूसरे पक्ष ने petitioner के साथ क्रूरता या अन्य Grounds पर व्यवहार किया हो.”

Source: Hindu Marriage Act 1955 - Section 13 (Divorce grounds)

“फैमिली कोर्ट में विवाह, तलाक, रख-रखाव और बाल विवाह-सम्बंधी disputes के त्वरित समाधान के लिये एक अलग न्यायालय-व्यवस्था स्थापित की गई है.”

Source: Family Courts Act 1984

यह स्पष्ट है कि सैन्य तलाक के लिये Jaipur-आवासी व्यक्ति को सामान्य नागरिक कानून के दायरे में ही न्याय मिलता है। साथ ही, सैन्य यात्राओं, स्थानांतरण और ड्यूटी शेड्यूल को अदालतें निर्णय लेते समय सेवाकालीन परिस्थितियों के अनुरूप देखते हैं।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • पारिवारिक असमंजस और दायित्वों का विभाजन: तलाक के साथ मौलिक अधिकार, बच्चों के पालन-पोषण और संपत्ति-वितरण जैसे मुद्दे होते हैं। एक अनुभवी advokat इन परिसीमाओं को स्पष्ट कर सकता है।
  • सेना ड्यूटी और स्थानांतरण के कारण प्रक्रियात्मक विलंब: Jaipur-आधारित वकील ड्यूटी शेड्यूल के अनुरूप समय-सारिणी बनाकर केस मैनेज कर सकता है।
  • पेंशन, भत्ते और रक्षा-सेवा से जुड़ी सुविधाओं का विभाजन: AFT तथा सेवा-सम्बन्धी शर्तों के कारण निजी संधियों के साथ नियंत्रण की जरूरत होती है।
  • बाल custody और visitation के कानूनी मानदंड: सेना कर्मी के शेड्यूल के अनुसार बच्चों के सर्वांगीण हित पर निर्णय लेना होता है।
  • Mutual consent divorce और समय-सीमा: अगर दंपति सहमत है तो कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार सही क्रम बनाना जरूरी है।
  • इंटर-फेथ केस और नागरिक-सेना परिवार: inter-religious विवाह में Special Marriage Act के तहत समाधान की जरूरत बनती है।

Jaipur में एक अनुभवहीन अधिवक्ता से गलत सलाह मिल सकती है। एक अनुभवी legal advisor से अनुमानित खर्च, न्यायालय के रुख, और निपटान की संभावित तारीखें स्पष्ट मिलती हैं।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • हिंदू विवाह अधिनियम 1955 - विवाह-सम्बन्धी तलाक, क्रूरता, परित्याग आदि Grounds पर तलाक का अधिकार देता है।
  • फैमिली कोर्ट्स एक्ट 1984 - जिला-स्तर पर फैमिली कोर्ट बनाने का उद्देश्य, ताकि तलाक, रख-रखाव और बाल-संरक्षण जैसे मुद्दे तेजी से सुलझें।
  • क्राईमा क्रिमिनल प्रोसीजर कोड (CrPC) धारा 125 - पत्नी, पूर्व पत्नी, नाबालिग बच्चे और बुजुर्ग माता-पिता के Maintenance के लिये अदालत आदेश दे सकती है।

सेना कर्मियों के स्थान-परिवर्तन, दायित्व-जोखिम और पेंशन के मुद्दे फैमिली कोर्ट के साथ-साथ सेवा-प्रशासनिक निकायों के भी विचार में रहते हैं। Jaipur में Family Court Jaipur-1 और Jaipur-2 जैसी इकाइयाँ हैं; वे नागरिक तलाक मामलों को निपटाती हैं।

उद्धरण और आधिकारिक संदर्भ: Hindu Marriage Act 1955 - Official Text, e-courts Portal, NALSA - National Legal Services Authority

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या सैन्य तलाक के लिये स्थानीय फैमिली कोर्ट Jaipur में याचिका दायर करनी चाहिए?

हाँ, यदि दोनों पक्ष Hindu या inter-religious विवाह है, तो तलाक की याचिका Jaipur के Family Court में दायर की जा सकती है। स्थानांतरण के कारण यदि पति-पत्नी अलग जगह रहते हों, तो स्थान-आधारित वैध न्यायालय चुना जा सकता है।

क्या सेना में रहते हुए तलाक प्रक्रिया धीमी या मुश्किल हो सकती है?

कभी-कभी हाँ, क्योंकि ड्यूटी शेड्यूल और पोस्टिंग से सुनवाई में देरी हो सकती है। किन्तु e-filing और वीडियो-हearing से समस्या कम होती है।

क्या Maintenance के लिये CrPC धारा 125 लागू होगी?

हाँ, यदि आय-सम्पन्नता के आधार पर पति-व पत्नी या अन्य आश्रितों के लिये पर्याप्त साधन हों। अदालत ऐसे आदेश दे सकती है ताकि बच्चों की देखभाल और जीवन-यापन सरल हो।

Custody के मुद्दे में सेना के ड्यूटी शेड्यूल का क्या प्रभाव है?

सेना ड्यूटी के कारण अदालत Welfare of the child को महत्व देगी। आम तौर पर custody सिंगल-या joint care के अनुसार तय होता है और नेटवर्क-समर्थन के अनुरूप रहता है।

Claims for pension या final settlement में तलाक के बाद क्या होता है?

पेंशन और सेवाकालीन लाभों का विभाजन civil कानून के अंतर्गत होता है। Armed Forces Tribunal (AFT) सेवा से जुड़े मामलों को देख सकता है, लेकिन तलाक के वितरण के लिये फैमिली कोर्ट अधिक प्रासंगिक होता है।

Mutual consent divorce के लिए कितना समय लगता है?

Mutual consent divorce में पहले छह महीने का waiting period चाहिए, बाद में court decree मिल सकता है। यह Jaipur की फैमिली कोर्ट के चार्ज-शीट के अनुसार होता है।

Interfaith विवाह के मामलों में कौन सा कानून लागू होता है?

Interfaith विवाह के लिये Special Marriage Act 1954 लागू होता है, और तलाक की प्रक्रिया फैमिली कोर्ट के भीतर होती है।

क्या सेवाकर्मी को तलाक के दौरान ड्यूटी से छुटी मिलती है?

यह सामान्यतः निजी निर्णय नहीं है; पर अदालत सेवाकर्मी के ड्यूटी-शेड्यूल को ध्यान में रखकर hearingschedule तय कर सकती है।

क्या तलाक के दौरान अलिमनी या किराए-भत्ते का फिक्स होना संभव है?

हाँ, अदालत алимента-राशि तय कर सकती है, खासकर बच्चों के लिये राशन, शिक्षण, मेडिकल खर्च आदि को कवर करने के लिये।

क्या Jaipur से बाहर पोस्टिंग होने पर भी याचिका दाखिल की जा सकती है?

हाँ, यदि व्यक्ति की प्राथमिक निवास Jaipur- Jaipur में है या अंतिम निवास Jaipur माना जाता है, तो Jaipur Family Court में याचिका दायर की जा सकती है।

कौनसा दस्तावेज़ आवश्यक होगा?

पहचान, विवाह प्रमाणपत्र, बच्चो के जन्म प्रमाण, आय-सम्पन्नता के प्रमाण, ड्यूटी-चिट्ठी आदि सामान्य दस्तावेज़ होते हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • NALSA - National Legal Services Authority - https://nalsa.gov.in
  • Rajasthan State Legal Services Authority - https://rslsa.rajasthan.gov.in
  • Ministry of Defence - Sainik Welfare - https://www.mod.gov.in

ये संस्थान कानूनी सहायता, मुफ्त सलाह और मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। Jaipur क्षेत्र में कानूनी सहायता के लिए वेब-लिंक उपयोगी संसाधन बनते हैं।

6. अगले कदम

  1. Jaipur-आधारित विश्वसनीय समकक्ष वकील/अधिवक्ता सूची देखें।
  2. पहचान-प्रमाण, विवाह प्रमाणपत्र और बच्चों के जन्म-प्रमाणपत्र तैयार रखें।
  3. स्पष्ट तलाक- Grounds औरMaintenance-आवश्यकताओं की एक सूची बनायें।
  4. Family Court Jaipur के दाखिले, वीडियो-हियरिंग और ई-फाइलिंग के बारे में जानकारी प्राप्त करें।
  5. उचित समय-रेखा के अनुसार अदालत-समय-सारिणी बनायें।
  6. NALSA या RSLSA से नि:शुल्क कानूनी सहायता का विकल्प जाँचें।
  7. पेंशन, तथ्यों और दायित्वों के लिये सेवा-आयुक्त से आवश्यक दस्तावेज सुनिश्चित करें।

आख़िर में, Jaipur निवासियों के लिये यह कहा जा सकता है कि सैन्य तलाक के मामले में सही वकील, उपयुक्त कानून-ency के साथ-साथ सेवाकालीन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए रणनीति बनाना सफलता की कुंजी है।

आधिकारिक स्रोत और संदर्भ: Hindu Marriage Act 1955, e-courts Portal, NALSA

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