पटना में सर्वश्रेष्ठ खनन कानून वकील

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Giri Law Associates
पटना, भारत

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गिरी लॉ एसोसिएट्स व्यापक प्रकार के मुकदमेबाज़ी और लेन-देन संबंधी सेवाएँ प्रदान करता है, जिसमें व्यापार और रियल...
Advocate Ankit Kumar Singh
पटना, भारत

2018 में स्थापित
उनकी टीम में 1 व्यक्ति
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एडवोकेट अंकित कुमार सिंह की विशेषज्ञता में आपका स्वागत है – प्रतिष्ठित पटना हाई कोर्ट में आपके विश्वसनीय कानूनी...
Advocate Radha Raman Roy

Advocate Radha Raman Roy

15 minutes मुफ़्त परामर्श
पटना, भारत

1987 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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वकील राधा रमण रॉय, पटना के सर्वश्रेष्ठ वकील, आपराधिक, तलाक, संपत्ति, वैवाहिक, पारिवारिक और नागरिक कानून में 35 से...
LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
पटना, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

1. पटना, भारत में खनन कानून कानून का संक्षिप्त अवलोकन

पटना, बिहार में खनन कानून केंद्र-राज्य साझे नियम से संचालित होते हैं। केंद्रीय कानून MMDR अधिनियम 1957 खनन लाइसेंस और खनन leases के प्रावधान तय करता है।

स्थानीय स्तर पर MCDR नियम और बिहार के मिनरल नियमस्थापकों सेProcedural नियम बनते हैं ताकि अनुपालन सरल रहे।

"The Mines and Minerals (Development and Regulation) Act, 1957 empowers the Central Government to make rules for grant of prospecting licences and mining leases."
"The MMDR Amendment Act 2015 introduced auction of mineral blocks as the preferred method of allocation."
"Environmental clearance is mandatory for mining projects under the Environmental Protection Act."

नोट : पटना-आधार पर खनन गतिविधियाँ अक्सर नदी-किनारे, नदी-घाट, और जिला-स्तरीय खान अधिकारों से जुड़ी होती हैं। अनुभवी अधिवक्ता कानून-प्रक्रिया में गति और जोखिम कम करने में मदद करते हैं।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • पटना जिले के गंगा नदी किनारे रेत खनन के लिए आवेदन करते समय पात्रता, अनुदान-नियम, और समुदायिक विरोध से संबन्धित कठिनाइयाँ हो सकती हैं; एक कानून सलाहकार अनुपालन गाइडेंस दे सकता है।
  • अवैध खनन की शिकायत दर्ज करना हो तो स्थानीय प्रशासन और कोर्ट-हॉल में सही धाराओं के आधार पर मामला ठोस बनाना जरूरी होता है।
  • Environmental clearance (EIA) के लिए पटना में परियोजना-ध्वनियाँ और विरोधी पक्षों के तर्क से सामना होता है; ऐसे मामलों में अनुभवी advocoate की जरूरत रहती है।
  • कैप्टिव खनन (captive mining) के नियम बदल रहे हैं; पटना-आधारित इकाइयों के लिए end-use और transfer-conditions समझना महत्वपूर्ण है।
  • स्थानीय भूमि-स्वामित्व और खनन अधिकार को लेकर किसानों और उद्योगपतियों के बीच विवाद आ जाते हैं; चिकनी-समझौते के लिए वकील मदद करते हैं।
  • खनन के मामलों में पर्यावरण और वन कानून का समन्वय आवश्यक होता है; अदालतीन निर्णयों के अनुसार सावधानी बरतना पड़ता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • Mines and Minerals Development and Regulation Act, 1957 (MMDR Act) - खनन लाइसेंस, prospecting licences और खनन नियंत्रण का मुख्य ढांचा।
  • Mines and Minerals (Development and Regulation) Rules - आवेदन, नवीनकरण, रिन्यूअल, और अनुपालन‑चेकलिस्ट जारी करते हैं।
  • Bihar Minor Mineral Concession Rules (BMCR) - पटना और बिहार के भीतर छोटे खनन के लिए विशेष अनुमति-नियम तय करते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

खनन कानून क्या है और यह पटना में कैसे लागू होता है?

यह केंद्रीय कानून और बिहार के नियमों का समूह है जो खनन लाइसेंस,permits, और दायित्व निर्धारित करता है। पटना में स्थानीय विभाग और जिला प्रशासन भी अनुपालन जाँच करते हैं।

पटना में मिनरल-लाइसेंस के लिए आवेदन कैसे करें?

अधिकृत साइट पर ऑनलाइन आवेदन करें, आवश्यक दस्तावेज संलग्न करें, और स्थानीय Mines & Geology विभाग से शुल्क सत्यापित करें। नियम समय-सीमा और फॉर्मेट निर्धारित करते हैं।

कैप्टिव खनन क्या है और पटना क्षेत्र में इसका महत्त्व क्या है?

कैप्टिव खनन वह योजना है जिसमें खनन इकाई को अपने व्यवसाय के लिए ही खनन अधिकार मिलते हैं। ऐसे मामलों में end-use-conditions लागू होते हैं।

क्या पर्यावरण साफ़‑सफाई (EC) अनिवार्य है?

हाँ, अधिकांश खनन प्रोजेक्ट के लिए Environmental Clearance अनिवार्य है और MoEFCC के मानदंडों के अनुसार पूरा किया जाना चाहिए।

खान-खतरे या अवैध खनन से कैसे निपटें?

स्थानीय पुलिस, राजस्व विभाग, और Mines & Geology विभाग के आधिकारिक शिकायत-प्रक्रिया से शिकायत दर्ज करें; अदालत में पक्ष-कार्रवाई की जा सकती है।

खनन से होने वाले राजस्व के लिए कितनी देयतें लगती हैं?

राजस्व-कर, रॉयल्टी और स्थानीय शुल्क खनन क्षेत्र और खनन स्तर पर निर्भर करते हैं; वकील सही गणना और भुगतान-तिथियाँ बताता है।

स्थानीय आबादी के अधिकार कैसे सुरक्षित रहते हैं?

एनवायरनमेंटल और पब्लिक-हियरिंग प्रक्रियाओं में समुदाय-हितों का प्रतिनिधित्व किया जाता है; किसी भी लाभ-हानि का उचित प्रमाणन जरूरी है।

पटना में खनन मामले में कौन-से रिकॉर्ड रखने चाहिए?

अनुमतियाँ, आवेदन-CSRF, हिस्सेदारी-स्वामित्व, भौगोलिक-मानचित्र, पर्यावरण-आकलन, और निरीक्षण-पत्र संचित रखें।

गलत-फहमी पर क्या कदम उठाने चाहिए?

सबूत के साथ अधिकारी को लिखित शिकायत दें; अगर संतुष्टि नहीं मिलती तो उच्च न्यायालय या संबंधित अपीलीय मंच से मार्गदर्शन लें।

नया कानून परिवर्तन कब से प्रभावी होता है?

MMDR 2015 संशोधन और 2015 के बाद के नियम ऑनलाइन-पोर्टल और नीलामी-व्यवस्था से जुड़ते हैं।

पटना में खनन-परियोजना के लिए वन-आधार सूची कैसी बनी?

वन-अनुमोदन और森林-स्थल के संरक्षण के नियम लागू होते हैं; यदि खनन वन-भूमि पर है तो Forest Conservation Act के अनुसार प्रक्रिया करनी चाहिए।

कानूनी सलाहकार कैसे चुनें?

खनन-विषयक अनुभव, Patna‑based कानून-रणनीति, और पूर्व-फीस‑फॉर्म की स्पष्टता देखें।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Ministry of Mines, Government of India - आधिकारिक जानकारी, नीलामी प्रक्रिया और MMDR से जुड़ी गाइडलाइनों के लिए: mines.gov.in
  • Indian Bureau of Mines (IBM) - खनन संसाधन, मानक और भू-आकृति से जुड़ी जानकारी: ibm.gov.in
  • Central Pollution Control Board (CPCB) - पर्यावरण-आकलन, पर्यावरणीय स्वीकृति और प्रदूषण-नियमन से जुड़ी आधिकारिक जानकारी: cpcb.nic.in

6. अगले कदम

  1. पटना में अपनी खनन गतिविधि का प्रकार और स्थान तय करें।
  2. कौन-सा परमिट चाहिए, यह Mine & Geology विभाग से सत्यापित करें।
  3. आवश्यक दस्तावेज एकत्रित कर के ऑनलाइन आवेदन तैयार करें।
  4. पत्रकारिता, कानून-विशेषज्ञ या वकील से प्रारम्भिक परामर्श लें।
  5. आवेदन-प्रक्रिया के समय-सीमा और फीस स्पष्ट करें।
  6. ऑनलाइन पोर्टल और सरकारी गाइडलाइनों के अनुसार अनुपालन-चेकलिस्ट बनाएं।
  7. कानूनी प्रतिनिधि की सेवाओं के लिए शुल्क और अनुबंध स्पष्ट करें।

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