अजमेर में सर्वश्रेष्ठ गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ वकील

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SonisVision Corporate Firm
अजमेर, भारत

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सोनिसविजन कॉर्पोरेट फर्म, जिसका संस्थापक भव्यप्रीत सिंह सोनी हैं, भारत में एक प्रतिष्ठित कानूनी सेवा प्रदाता है,...
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1. अजमेर, भारत में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ कानून का संक्षिप्त अवलोकन

अजमेर में गैर-लाभकारी संस्थाओं के संचालन के लिए राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कानून लागू होते हैं. प्रमुख कानूनों में समाज पंजीकरण अधिनियम 1860, भारतीय ट्रस्ट कानून 1882, तथा कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत सेक्शन 8 कंपनियाँ शामिल हैं. साथ ही विदेशी फंडिंग के लिए फॉरिन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट 2010 अनिवार्य है.

राज्य स्तर पर राजस्थान में राजस्थान पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1959 और राजस्थान सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 1958 जैसे कानून सक्रिय रहते हैं. इन कानूनों के तहत अजमेर के स्थानीय ट्रस्ट और सोसाइटी को पंजीकरण, अनुपालन और वार्षिक अकाउंटिंग का पालन करना होता है. आयकर विभाग से 12A और 80G जैसी रियायतें भी दानकर्ता हेतु मिलती हैं, जिन्हें NGOs को लाभ मिलता है.

“Section 8 Companies shall not distribute profits to the members.” यह मौलिक नियम Section 8 Companies के संदर्भ में MCA के आधिकारिक दिशानिर्देशों में है.

MCA - Section 8 Companies

“No foreign contribution shall be received by any person except under registration or prior permission of the Central Government.” यह FCRA का मूल नियम है.

FCRA Official Portal

“Donations to a registered trust or institution are eligible for deduction under section 80G of the Income Tax Act.” यह आयकर विभाग की सामान्य उपलब्धि है.

Income Tax Department - 80G

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • FCRA पंजीकरण और मान्यता संबंधी मामलों में सहायता Ajmer-आधारित NGO विदेशी योगदान पंजीकरण के लिए आवेदन या नवीनीकरण कराते समय कानूनी मार्गदर्शन चाहती है. अनुज्ञप्ति के नियम कमजोरियों के कारण आवेदन असफल हो सकता है.

  • 12A और 80G पंजीकरण के लिए आवेदन और अनुपालन दानदाताओं को कर लाभ मिलने के लिए यह आवश्यक है. गलत मौका-चयन या गलत दस्तावेज 제출 से पंजीकरण अटक सकता है.

  • राजस्थान राज्य कानूनों के अनुसार पंजीकरण-आलोचनाएं Ajmer में ट्रस्ट और सोसाइटी का पंजीकरण सही ढंग से किया जाए, इसके लिए स्थानीय अधिकारी और नियमों की परंपरागत समझ जरूरी है.

  • चारा-संविदेशी अनुबंध और अनुदान समझौते फंडिंग एजेंसियों के साथ अनुबंधों में नियम-शर्तें स्पष्ट करनी होती हैं ताकि दायित्व सुनिश्चित हों.

  • जोखिम-नियोजन और कम्प्लायंस वित्तीय लेखा-जोखा, ऑडिट, टीडीएस आदि नियमों के उल्लंघन पर दंड हो सकता है; अनुभवी advokats मदद लें.

  • विस्थापन या परिसमापन जैसी प्रक्रिया अगर संस्थान बंद होती है तो वैधानिक क्लियर-अप और दायित्वों की सही निकासी आवश्यक है.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • राजस्थान पब्लिक ट्रस्ट अधिनियम 1959 ट्रस्ट के पंजीकरण, 관리 और लेखा-जोखा आवश्यकताओं को निर्धारित करता है. Ajmer में ट्रस्ट इसी कानून के अंतर्गत आते हैं.

  • राजस्थान सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम 1958 सोसाइटियों के पंजीकरण, संविधान, सामान्य बैठक और भ्रष्टाचार-नियमन से जुड़ी धाराओं को संचालित करता है.

  • Foreign Contribution Regulation Act 2010 (FCRA) फॉरेन फंडिंग के प्रवेश, उपयोग और निरीक्षण पर केंद्रीय नियंत्रण लागू करता है. Ajmer के NGO भी इसके अंतर्गत आते हैं.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या अजमेर में NGO पंजीकरण के लिए कौन-कौन से दस्तावेज आवश्यक हैं?

पंजीकरण के लिए संस्थागत उद्देश्यों का स्पष्ट विवरण, board minutes, पहचान पत्र, पते का प्रमाण, बैंक खाते के विवरण और पहले से जमा अनुपालन प्रमाण प्रस्तुत करें. आवेदन online MCA portal पर किया जा सकता है.

FCRA पंजीकरण के लिए कितनी समयसीमा रहती है?

पंजीकरण के लिए आवेदन Central Government को प्रस्तुत करें. सामान्यतः 6 से 12 महीने के भीतर निर्णय आता है, पर केस-विशिष्ट समय अलग हो सकता है.

12A/80G पंजीकरण में किन बातों पर ध्यान दें?

दस्तावेजों में सत्यापन के लिए लाभार्थी विवरण और तैयार लेखा-जोखा होना चाहिए. दानदाता को कर लाभ तभी मिलता है जब NGO 12A/80G पंजीकृत हो.

राजस्थानी पंजीकरण के लिए स्थानीय अधिकारी से किस प्रकार संपर्क करें?

AJMER के जिला प्रशासन कार्यालय या राज्य के समाज कल्याण विभाग से संपर्क करें. आवश्यक फॉर्म और पंजीकरण शुल्क के बारे में वही जानकारी देंगे.

NGO के बोर्ड में स्वतंत्र निदेशक रखने की क्या जरूरत है?

लोक-हित के दायित्वों के अनुपालन के लिए पारदर्शी बोर्ड आवश्यक है. कई कानूनों में उचित संरचना और आंतरिक नियंत्रण अपेक्षित हैं.

द्वितीयक दायित्व जैसे ऑडिट और वार्षिक रपट किसके द्वारा दाखिल करनी होती है?

गैर-लाभकारी संस्थाओं को ऑडिट करते हुए वार्षिक आय-व्यय रिपोर्ट और फंक्शनिंग रपट जमा करनी चाहिए. यह आम तौर पर सरकार की सार्वजनिक रजिस्टर में दर्ज होता है.

अगर NGO विदेशी सहायता नहीं लेती है तो क्या नियम सरल होते हैं?

हां, लेकिन अनेक अन्य अनुपालनों को पूरा करना होता है. फंडिंग-रिलायंस कम होने से compliances हलके होते हैं, पर आंतरिक लेखा-जोखा मजबूत रखना जरूरी है.

Ajmer में कानून-मानदंडों का उल्लंघन होने पर क्या कदम उठाने चाहिए?

सबसे पहले सलाहकार वकील से परामर्श लें. स्थानीय अदालतों और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर शिकायतों का समाधान करें.

NGO पंजीकरण के बिना दान स्वीकार करने पर क्या होता है?

यह अवैध है और दानकर्ता को कर-लाभ से वंचित करने के साथ साथ कानूनी कार्रवाइयाँ हो सकती हैं. तुरंत पंजीकरण एवं अनुपालन शुरू करें.

कौन से कोर्ट Ajmer-आधारित मामलों की सुनवाई करता है?

Ajmer जिले के मामलों के लिए स्थानीय अदालतें और राजस्थान उच्च न्यायालय के अंतर्गत प्रक्रियाएं चलती हैं. कानूनी सहायता से सही न्यायिक दायरे को समझना आवश्यक है.

NGO के साथ अनुबंध कैसे सुरक्षित किया जाए?

अनुदान समझौते में देयताओं, समय-रेखा, रिपोर्टिंग, वितरण-मानदण्ड और विवाद निपटान के प्रावधान स्पष्ट रखें. एक अनुभवी advokat से वकीली जाँच कराएं.

Donation receipts कितने समय तक रखना चाहिए?

आमतौर पर 7 वर्ष तक रिकॉर्ड रखना उचित रहता है. यह आयकर और रिकॉर्ड-रखाव के नियम के अनुरूप होता है.

यदि सेबी जैसे नियम लागू हों तो NGO को क्या करना चाहिए?

सेबी के नियम मुख्यतः बदलाव-कार्य में वित्तीय प्रकटन, बोर्ड-नीति और संस्थागत पारदर्शिता पर केंद्रित होते हैं. विशेष मामलों में सलाह लें.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • GuideStar India NGO प्रोफाइल और पारदर्शिता के लिए एक प्रमुख प्लेटफार्म है. वेबसाइट: guidestarindia.org

  • GiveIndia दानकर्ता-समर्थक मंच है और NGOs के चयन में मदद करता है. वेबसाइट: giveindia.org

  • Charities Aid Foundation India NPOs के लिए फंडिंग और पारदर्शिता संबंधी सेवाएं देती है. वेबसाइट: cafi.org.in

6. अगले कदम

  1. अपनी संस्था की जरूरतें स्पष्ट करें जिनमें पंजीकरण, अनुपालन, और अनुबंध शामिल हों.
  2. Ajmer-आधारित बार असोसिएशन या स्थानीय NGO नेटवर्क से संदर्भ लें.
  3. NGO-विशेष कानून में अनुभव रखने वाले advokat की प्राथमिक सूची बनाएं.
  4. प्रारंभिक बैठक के लिए लक्षित सवाल और प्रस्तुति सामग्री तैयार रखें.
  5. पूर्व पंजीकरण, फCRA, 12A/80G आदि के दस्तावेज एकत्र करें.
  6. संविदा-उद्धरण और शुल्क संरचना clear करें, engagement letter पर हस्ताक्षर करें.
  7. काम शुरू करने के बाद नियमित फॉर्म-फाइलिंग और ऑडिट-तैयार रहें.

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