चंडीगढ़ में सर्वश्रेष्ठ गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ वकील
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चंडीगढ़, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
1. चंडीगढ़, भारत में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ कानून के बारे में: चंडीगढ़, भारत में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ कानून का संक्षिप्त अवलोकन
चंडीगढ़ UT में गैर-लाभकारी संस्थाओं के पंजीकरण के मुख्य मार्ग हैं: सोसाइटी (Societies) के अंतर्गत पंजीकरण, ट्रस्ट (Trust) के अंतर्गत पंजीकरण, और कंपनियों Act के अंतर्गत Section 8 कंपनी बनना। इन तीनों मार्गों के लिए स्थानीय पंजीयक और केंद्र सरकार के नियम लागू होते हैं।
कानून का उद्देश्य संस्थाओं के उद्देश्य, संचालन और पारदर्शिता को सुनिश्चित करना है ताकि दानदाताओं और הציבור को सही जानकारी मिले। स्थानीय रूप से चंडीगढ़ प्रशासन और पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय की भूमिका महत्वपूर्ण है, खासकर पंजीकरण, अनुपालना और विवाद निपटान में।
No person shall receive any foreign contribution except with the prior permission of the Central Government.
Source: fcraonline.nic.in
Registration under section 12A grants exemption from income tax for eligible charitable trusts and organizations.
Source: incometaxindia.gov.in
The profits and income of a section 8 company shall be applied solely towards the promotion of its objects and no dividend shall be paid to its members.
Source: mca.gov.in
इस प्रकार Chandigarh निवासियों के लिए उपयुक्त पंजीकरण मार्ग का चयन, फॉर्मेटिंग, और अनुपालना स्थानीय नियमों के अनुसार अत्यंत आवश्यक है।
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ कानून की सहायता के लिए 4-6 विशिष्ट परिदृश्य
- परियोजना-विशिष्ट पंजीकरण चुनना - Chandigarh में एक NGO को Section 8 कंपनी बनना है या सोसाइटी बनानी है, यह निर्णय और फॉर्म-फाइलिंग जटिल हो सकती है। एक अनुभवी अधिवक्ता सही मार्ग चुनने में मदद करेगा।
- विदेशी योगदान (FCRA) प्राप्त करना - यदि संस्थे को विदेश से दान चाहिए, तो फर्स्ट-प्रमिशन और वार्षिक रिटर्न सहित अनुपालना की जरूरत होती है। एक कानून सलाहकार प्रक्रियाओं को व्यवस्थित कर सकता है।
- 12A और 80G टैक्स एक्सेम्प्शन के लिए आवेदन - कर-छूट प्राप्त करने हेतु आवश्यक रजिस्ट्रेशन का सही समय और सही डॉक्यूमेंट महत्वपूर्ण हैं। एक वकील डाक्यूमेंट-चेकलिस्ट बना देगा।
- आंतरिक गवर्नेंस और बोर्ड संरचना - Chandigarh के स्थानीय नियमों के अनुसार निदेशक-समिति, न्यूनतम उपस्थितिकरन और ट्रस्ट-या सोसाइटी के मानक नियम स्थापित करना आवश्यक है।
- वार्षिक अनुपालना और दायित्व - सोसाइटी/ट्रस्ट/Section 8 कंपनी के वार्षिक रजिस्ट्रेशन, आय-कर रिटर्न और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स जमा करना पड़ता है; त्रुटि पर दंड हो सकता है।
- चंदा-उद्धार एवं रिकॉर्ड-कीपिंग - दानदाताओं के लिए देय टेक्स-फायदे और रिकॉर्ड-कीपिंग में गलतियाँ चलना जोखिम पैदा कर सकती हैं; कानूनी मार्गदर्शन से ये कम होते हैं।
3. स्थानीय कानून अवलोकन: चंडीगढ़, भारत में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून
- Societies Registration Act, 1860 - सोसाइटियाँ पंजीकृत करने के लिए मुख्य कानून है; Chandigarh UT में इसका प्रावधान और पंजीकरण प्रक्रिया प्रायः इसी के अंतर्गत होती है।
- Indian Trusts Act, 1882 - ट्रस्ट संरचना के लिए प्रमुख कानून है; उद्देश्य, ट्रस्ट-समिति, ट्रस्ट की परिसंपत्ति और जवाबदेही स्पष्ट करता है।
- Companies Act, 2013 (Section 8 Companies) - गैर-लाभकारी कंपनियों के गठन, शासन और लाभ-प्रबंधन के नियम निर्धारित करता है; लाभार्थियों के लिए न्यूनतम लाभांश का निषेध है।
नोट: विदेशी योगदान (FCRA) के लिए Foreign Contribution Regulation Act, 2010 भी Chandigarh में लागू है; इसका अनुपालन केंद्रीय गृह मंत्रालय के FCRA पोर्टल द्वारा नियंत्रित होता है।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या मुझे NGO पंजीकरण करवाना आवश्यक है?
यह निर्भर करता है कि आप की गतिविधियाँ किस संरचना के अंतर्गत संचालित होंगी। सामान्यतः समाज या ट्रस्ट के रूप में पंजीकरण लाभप्रद होता है ताकि दान और आय-कर प्रक्रियाओं में स्पष्टता हो।
Chandigarh में पंजीकरण के लिए कौन-सी सबसे उपयुक्त संरचना है?
यह आपके उद्देश्य, फंडिंग मॉडल और शासन-चयन पर निर्भर है। Section 8 कंपनी वैश्विक परियोजनाओं के लिए उपयुक्त हो सकती है, जबकि सोसाइटी स्थानीय कार्यक्रमों में सरल हो सकती है।
विदेशी योगदान प्राप्त करने के लिए मुझे क्या करना चाहिए?
विदेशी योगदान के लिए पूर्व-अनुमति और नियमित वार्षिक रिटर्न दाखिल करना होता है। योजना बनाते समय FCRA के नियम स्पष्ट कर लें।
12A और 80G पंजीकरण कब और कैसे प्राप्त होते हैं?
12A से आय कर छूट मिलती है, और 80G से दाताओं को कटौती मिलती है। एक-nGo वकील आवेदन-प्रक्रिया, दस्तावेज़ और समयसीमा तय करने में मदद करेगा।
क्या NGOs को हर साल रजिस्ट्रेशन और रिपोर्ट देनी होती है?
हाँ, सोसाइटी/ट्रस्ट/Section 8 कंपनी के अनुसार वार्षिक रजिस्ट्रेशन और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स जमा करने पड़ते हैं।
NGO के लिए कौन-सी वित्तीय रिकॉर्ड जरूरी होते हैं?
बहीखाते, आय-कार्य सुधर, दान-वितरण, और परियोजना-आय का पूर्ण रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है ताकि अनुपालना आसान हो।
क्या Chandigarh में किसी विशेष विद्याविधि की आवश्यकता है?
स्थानीय पंजीयक के नियम के अनुसार पंजीकरण, बोर्ड-गठन और वार्षिक रिपोर्टिंग की प्रक्रियाएं निर्धारित होती हैं।
FCRA के नियम कब-कब बदले गए हैं?
FCRA नियम 2010 के अंतर्गत विदेशी योगदान पर पूर्व-अनुमति और वार्षिक रिटर्न अनिवार्य होता है; हाल-चाल में अनुपालना सख्त होती है।
NGO से जुड़े कर-छूट के लाभ मँगाने के लिए क्या चाहिए?
12A और 80G जैसी टैक्स-छूट के लिए सही दस्तावेज़ीकरण और सत्यापन जरूरी है; एक कानूनी विशेषज्ञ सहायता दे सकता है।
क्या पंजीकरण के बाद NGO का नाम, उद्देश्य या संरचना बदली जा सकती है?
नाम, उद्देश्य या संरचना में重大 परिवर्तन के लिए नियमों के अनुसार बोर्ड और पंजीयक की अनुमति चाहिए होती है, और कुछ परिवर्तन रजिस्ट्री में दाखिल करने होते हैं।
NGO के लिए अवकाश-सम्बन्धी आपातकालीन समाधान कब चाहिए?
यदि अनुपालना में देरी हो या दायित्वों का उल्लंघन हो, तो तुरंत अनुभवी वकील से परामर्श लेकर स्थिति सुधारना चाहिए।
5. अतिरिक्त संसाधन
- NGO Darpan - राष्ट्रीय पोर्टल for NGOs, पंजीकरण जानकारी और डाटा देखरेख: https://ngodarpan.gov.in/
- GuideStar India - NGO profiles औरGovernance transparency के लिए एक प्रतिष्ठित डेटाबेस: https://www.guidestarindia.org
- FCra Online (Ministry of Home Affairs) - Foreign Contributions के अनुपालनों के लिए आधिकारिक पोर्टल: https://fcraonline.nic.in
6. अगले कदम
- अपने NGO के उद्देश्य, संरचना और फंडिंग मॉडल स्पष्ट करें ताकि सही पंजीकरण मार्ग चुना जा सके।
- Chandigarh के अनुभवी कानूनकार से Initial consultation लें ताकि स्थानीय नियम समझ में आएं।
- पंजीकरण के पहले आवश्यक दस्तावेज़-चेकलिस्ट बनाएं और अप्लिकेशन के समयलाइन निर्धारित करें।
- यदि विदेश योगदान चाहिए, तो FCRA अनुपालन की पूरी तैयारी करें और पूर्व अनुमति-प्रक्रिया समझें।
- 12A और 80G जैसे टैक्स-छूट अवसरों के लिए आवश्यक फॉर्म और डाक्यूमेंट्स एकत्र करें।
- बोर्ड संरचना, नियुक्तियाँ और गोवर्नेंस नीति तैयार करें।
- वार्षिक रजिस्ट्रेशन और फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स जमा करने की विभागीय प्रक्रिया तय करें।
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