गया में सर्वश्रेष्ठ गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ वकील
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गया, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
1. गया, भारत में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ कानून के बारे में
भारत में गैर-लाभकारी संस्थाओं का कानून ढाँचा तीन प्रमुख संरचनाओं पर केंद्रित है: Section 8 के अंतर्गत पंजीकृत कंपनियाँ, ट्रस्ट (Indian Trusts Act 1882) और सोसाइटीज़ (Societies Registration Act 1860)। इन सभी का लक्ष्य लाभ कमाने के लिए नहीं बल्कि सामाजिक सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि सार्वजनिक उद्देश्य पूरा करना होता है।
कई संगठनों को आयकर कानून के तहत छूट मिलती है, जैसे 12A-12AA और 80G, ताकि वे अपने दानकर्ताओं के लिए योग्य हो सकें। साथ ही विदेशी योगदान को नियंत्रित करने के लिए FCRA 2010 लागू है, जिसमें पंजीकरण और वार्षिक रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है।
“FCRA 2010 विदेशी योगदानों के प्राप्तिकरण और उनके उपयोग को नियंत्रित करने के लिए कानून बनाता है; किसी भी संस्था के लिए विदेशी योगदान स्वीकार करने से पहले पंजीकरण या पूर्व अनुमति आवश्यक है।”
“टैक्स अधिकारों के अंतर्गत चारित्री संस्थाओं और ट्रस्टों की आय 12A/12AA से मुक्त हो सकती है यदि वे निर्धारित शर्तें पूरी करते हैं।”
“कंपनी अधिनियम 2013 के अंतर्गत Section 8 कंपनियाँ सामाजिक उद्देश्य के लिए बनाई जाती हैं और लाभ कमाने के लिए नहीं होतीं; इनके प्रॉफिट्स को संस्था के उद्देश्य में ही वापस लगाया जाता है।”
गया, बिहार से निवास करने वाले व्यक्तियों के लिए यह समझना जरूरी है कि स्थानीय राज्य स्तर पर Trusts और Societies की पंजीकरण आवश्यकताएं अलग हो सकती हैं। साथ ही CSR दाताओं के लिए कॉरपोरेट कानून के अनुसार अनुपालन अनिवार्य होता है।
स्रोत और आधिकारिक लिंक
- Ministry of Corporate Affairs
- Foreign Contribution Regulation Act (FCRA) साइट
- Income Tax Department
- India Code - कानूनों की आधिकारिक कॉपी
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
गया, भारत से संबंधित गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाओं के लिए कई पंजीकरण, अनुपालन और अनुबंध से जुड़ी कानूनी जटिलताएँ होती हैं। नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं जिनमें एक अनुभवी अधिवक्ता की मदद लाभदायक रहती है।
- पंजीकरण चयन एवं संरचना निर्धारण - Section 8 कंपनी, ट्रस्ट या सोसाइटी की संरचना कौन सी सही रहेगी, यह निर्णय और पंजीकरण के दस्तावेज तय करने में वकील मार्गदर्शन देता है। उदा
- विदेशी योगदान/ FCRA अनुपालन - विदेशी फंडिंग लेने या देने के समय लाइसेंस, अनुमतियाँ और वार्षिक रिटर्न की प्रक्रियाएं जटिल होती है। ऐसे मामलों में FCRA लाइसेंस के लिए आवेदन बनवाने, आय-व्यय लेखा-जोखा और रिकॉर्ड-कीपिंग की सलाह आवश्यक रहती है।
- कर उद्देश्य के लिए 12A/12AA-80G पंजीकरण - टैक्स छूट के लिए इन पंजीकरणों की योग्यता और अनुपालनों की स्पष्ट जानकारी जरूरी होती है; गलत विवरण पर रद्दीकरण या कर-देयता बढ़ने का जोखिम रहता है।
- CSR अनुपालन और दान अनुबंध - कंपनियाँ CSR के नियमों के अनुरूप दान कैसे करें, दान-समझौते की शर्तें, आडिट और रिपोर्टिंग कैसे करनी है, यह सब वकील की सहायता से स्पष्ट होता है।
- धन-प्रबंधन और आंतरिक प्रशासन - बोर्ड मीटिंग, ट्रस्ट-खाते, ऑडिट, गोपनीयता एवं हितधारक एग्रीमेंट जैसी चीजें सही दस्तावेजों के साथ नियंत्रित करनी पड़ती हैं।
- विधिक मामलों में संक्रमण या समाकलन - संस्था बंद करने, दान-धन का वितरण, संपत्ति के सत्यापित वितरण आदि परिस्थितियों में कानूनी सलाह अनिवार्य है।
उच्च-ज्ञात संस्थाओं के उदाहरण के साथ, एक कानूनी विशेषज्ञ पंजीकरण-निर्माण, विदेशी योगदान, कर छूट और दान अनुबंध जैसे मामलों में मार्गदर्शन देता है।
3. स्थानीय कानून अवलोकन
गया, भारत में गैर-लाभकारी संस्थाओं को नियंत्रित करने वाले प्रमुख कानूनों की एक संक्षिप्त सूची नीचे है।
- Companies Act 2013 (Section 8) - गैर-लाभकारी उद्देश्य के लिए बनाई जाने वाली कंपनियों की स्थिति और पंजीकरण नियम विस्तार से बताते हैं।
- Income Tax Act 1961 - 12A, 12AA और 80G के अंतर्गत टैक्स-छूट के नियम और अनुपालनों को स्पष्ट करता है।
- Foreign Contribution Regulation Act 2010 (FCRA) - विदेशी योगदानों का पंजीकरण, अनुमति और उपयोग नियम तय करता है।
- Indian Trusts Act 1882 - ट्रस्टों के गठन, प्रबंधन और वितरण से जुड़ी मुख्य धारा मानक व्यवस्था प्रदान करता है।
- Societies Registration Act 1860 - सोसायटी पंजीकरण के लिए राज्य-स्तरीय नियमों की बुनियाद देता है।
इन कानूनों के भीतर हाल के परिवर्तन भी प्रभाव डालते हैं। कोविड-19 के दौर के बाद FCRA नियमों में पंजीयन, बैंक-खाता और वार्षिक रिटर्न से जुड़ी प्रक्रियां मजबूत हुईं हैं। राज्य स्तर पर ट्रस्ट एवं सोसाइटी पंजीकरण की आवश्यकताएं भी हर राज्य में थोड़ा-बहुत भिन्न हो सकती हैं।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
NGO क्या होती है और इसके प्रकार कौन-कौन से हैं?
NGO एक गैर-लाभकारी संस्था है जो सामाजिक उद्देश्यों को आगे बढ़ाती है। भारत में सामान्य प्रकार Section 8 कंपनियाँ, ट्रस्ट, और सोसाइटी होते हैं।
NGO को पंजीकरण कैसे मिल सकता है?
पंजीकरण संरचना के अनुसार Section 8 कंपनी, Indian Trusts Act 1882 के अंतर्गत ट्रस्ट, या Societies Registration Act 1860 के अंतर्गत सोसाइटी की formalities पूरी करनी पड़ती हैं।
FCRA लाइसेंस कितने समय के लिए होता है और कैसे मिलता है?
FCRA लाइसेंस आम तौर पर पाँच वर्ष के लिए जारी किया जाता है और हर पांच वर्ष पर नवीनीकरण आवश्यक हो सकता है। आवेदन में आवेदन-प्रक्रिया, बैंक खाता और रीकॉर्ड अद्यतन शामिल रहते हैं।
टैक्स छूट के लिए कौन से पंजीकरण आवश्यक होते हैं?
टैक्स छूट के लिए 12A/12AA और 80G जैसे पंजीकरण आवश्यक होते हैं। ये नि: शुल्क आय-कर आय के लिए लाभदेय बनाते हैं, यदि नियमानुसार आवश्यकता पूरी हो।
CSR क्या है और किसे यह लागू होता है?
CSR नियम उन कंपनियों के लिए हैं जिनकी न्युनतम समेकित नफे 500 करोड़ रुपये से ऊपर है। ऐसी कंपनियाँ अपने लाभ का एक हिस्सा सामाजिक-उन्नयन पर खर्च करती हैं और इसे CSR आवश्यकताओं के अनुसार रिपोर्ट करती हैं।
NGO वार्षिक रिटर्न किसे भरनी चाहिए?
Section 8 कंपनियों के लिए MCA द्वारा निर्धारित फॉर्म, ट्रस्ट के लिए आयकर विभाग में आय-कर रिटर्न, और FCRA के अनुसार विदेशी फंडिंग के रिटर्न दाखिल करना होता है।
कौन साNGO संरचना बेहतर है: Section 8 बनाम Trust बनाम Society?
यह संगठन के उद्देश्य, फंडिंग स्रोत और प्रशासनिक संरचना पर निर्भर करता है। Section 8 अधिक पारदर्शिता और फंडिंग-आवधिक के लिए उपयुक्त माना जाता है, पर ट्रस्ट बनाम सोसाइटी के नियम स्थानीय शासन पर निर्भर कर सकते हैं।
NGO के लिए डोनर-पावती कितनी जरूरी है?
दानदाता के रिकॉर्ड-कीपण और देय-कर स्थिति के लिए दान पावती और आय-कर नोटिस जरूरी हो सकते हैं। 80G आदि से दान-प्रत्याशी दाताओं को कर छूट मिलती है।
NGO खराब प्रदर्शन या नुकसान पर होने वाले कानूनी जोखिम क्या होते हैं?
घोटाला, गलत-धन-प्रबंधन या अनुदान के दुरुपयोग पर सीधी कानूनी कार्रवाई हो सकती है। यह पंजीकरण रद्दीकरण, दायित्व-निर्वहण या जेल-केस तक जा सकता है।
FDI और विदेशी फंडिंग किस प्रकार लागू होती है?
विदेशी योगदान प्राप्त करने के लिए FCRA के अनुसार लाइसेंस, अनुमति और वार्षिक रिटर्न दाखिल करना होता है। अनुपालन के बिना फंडिंग अवैध मानी जाएगी।
NGO बंद कैसे होती है और इसके बाद क्या होता है?
NGO को dissolution या winding up के लिए निर्धारित अदालत या संस्था के नियमों के अनुसार प्रक्रिया करनी होती है। संपत्ति और दायित्वों का सही वितरण जरूरी है।
गया के निवासी के लिए कानूनी सलाह क्यों जरूरी है?
स्थानीय राज्य कानून, पंजीकरण-शर्तें और बैंक-नोटिस जैसे चीजें अलग हो सकती हैं। नये नियमों के अनुसार FCRA और CSR के नियम भी समय-समय पर बदले जाते हैं।
कानूनी सलाह देने वाले वकील कैसे चुनें?
कानूनी विशेषज्ञ जो NGO कानून, FCRA, 12A-12AA और CSR नियमों में अनुभव रखते हैं, उनके साथ retainer-आकृति की बातचीत करें और पहले से निश्चित शुल्क-योजना लें।
5. अतिरिक्त संसाधन
- Akshaya Patra Foundation - एक प्रमुख भोजन कार्यक्रम संचालित NGO. वेबसाइट: https://www.akshayapatra.org
- GiveIndia - ऑनलाइन दान प्लेटफॉर्म और गाइडेंस. वेबसाइट: https://www.giveindia.org
- NASSCOM Foundation - क्षेत्रीय डिजिटल साक्षरता और सामुदायिक सहायता कार्यक्रम. वेबसाइट: https://nasscomfoundation.org
6. अगले कदम
- अपनी संस्था के उद्देश्य और फंडिंग-स्थिति स्पष्ट करें।
- संरचना चुनें: Section 8 कंपनी बनें, Trust बनें या Society पंजीकृत करें।
- डॉक्यूमेंट्स-लिस्ट बनाएँ: पहचान पत्र, पंजीकरण-आवेदन, बोर्ड-मैम्बरों के विवरण आदि।
- एक अनुभवी NGO कानून-विशेषज्ञ खोजें जो Section 8, FCRA, 12A-12AA और CSR में अनुभवी हो।
- बजट-पूर्व योजना बनाएं और Retainer Agreement पर चर्चा करें।
- FCRA, अगर विदेशी योगदान की योजना है, तो लाइसेंस/अनुमति और बैंक खाते के दस्तावेज़ तैयार करें।
- आगे के कदमों के लिए दस्तावेजों को समय-सीमा के साथ जमा करें और नियमित ऑडिट-रिपोर्टिंग की प्रक्रिया बनाए रखें।
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