लुधियाना में सर्वश्रेष्ठ गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ वकील

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Oberoi Law Chambers
लुधियाना, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
English
Hindi
फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
लुधियाना, भारत

1965 में स्थापित
English
B&B एसोसिएट्स एलएलपी लुधियाना, भारत में एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है, जो व्यापक कानूनी सेवाओं और पचास वर्षों से...
Yash Paul Ghai and Associates
लुधियाना, भारत

1965 में स्थापित
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लुधियाना, पंजाब में मुख्यालय स्थापित यश पॉल गाई एंड एसोसिएट्स लगभग छह दशकों से व्यापक कानूनी सेवाएं प्रदान कर रहा...
जैसा कि देखा गया

1. लुधियाना, भारत में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ कानून के बारे में: [ लुधियाना, भारत में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ कानून का संक्षिप्त अवलोकन]

लुधियाना, पंजाब में गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए कानून का संकलन केंद्र और प्रादेशिक नियमों का सम्मिलित प्रभाव है. पंजीकरण के विकल्प सामान्यतः सोसाइटी, ट्रस्ट या सेक्शन 8 कंपनी के रूप में होते हैं. विदेशी योगदान मिलने पर फोरन कॉन्ट्रिब्यूशन रि्गुलेशन एक्ट (FCRA) अनिवार्य हो सकता है.

आर्थिक व्यवहार और अनुपालन के क्षेत्रों में टैक्स एक्सेम्प्शन भी महत्त्वपूर्ण है. आयकर कानून के तहत 12A, 12AA और 80G जैसे प्रावधान संस्थाओं को टैक्स में राहत दे सकते हैं. Ludhiana निवासियों की भागीदारी और दायित्वों के लिए राज्यों के पंजीयक कार्यालयों के निर्देश भी मायने रखते हैं.

हाल के वर्षों में FCRA में संशोधनों ने अनुपालन की जकड़न बढ़ा दी है. 2020 के बाद विदेशी योगदान को लेकर निगरानी और रिपोर्टिंग प्रक्रिया अधिक सख्ती से लागू की जा रही है. इन बदलावों के कारण क्षेत्रीय वकील की भूमिका और अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है.

“Foreign contributions shall be received only in a bank account specified by FCRA rules.”
- fcraonline.nic.in

नोट: Ludhiana में NGO पंजीकरण के लिए राज्य-स्तर के पंजीयक के साथ मेल-जोल जरूरी है. साथ ही केंद्रीय नियमों के अनुरूप FCRA और आयकर से जुड़ी आवश्यकताओं की भी पूर्ति करनी होगी.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: [गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। लुधियाना, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें]

क़ानूनी सलाहकार की सहायता से पंजीकरण, अनुपालन और जोखिम कम किए जा सकते हैं. नीचे Ludhiana क्षेत्र के अनुरूप आम परिदृश्य दिए जा रहे हैं.

  • पंजीकरण प्रक्रिया की शुरुआत और चयन- एक नई संस्था को सोसाइटी, ट्रस्ट या सेक्शन 8 कंपनी में कौन सा मॉडल अपनाना चाहिए, यह निर्धारित करने के लिए अनुभवी advokat की सलाह आवश्यक हो सकती है.
  • FCRA पंजीकरण और विदेशी योगदान- अगर संस्था विदेश से धन चाहती हो, तो FCRA पंजीकरण, खाते के नियम और वार्षिक रिपोर्टिंग के लिए कानूनी मार्गदर्शन जरूरी है.
  • कर छूट के लिए आवेदन- 12A/12AA और 80G जैसी टैक्स एक्सेम्प्शन के लिए आवेदन एवं वर्गीकरण में गलतियाँ न हों, इसके लिए अनुभवी सलाह आवश्यक है.
  • वार्षिक लेखा-जोखा और ऑडिट कम्प्लायंस- Ludhiana के कॉलेज, अस्पताल या सामाजिक संस्थानों के नकद और बैंक ट्रांजेक्शन का सही रिकॉर्ड बनाना, ऑडिटर के चयन से जुड़ा काम है.
  • CSR फंडिंग और अनुपालन- अगर संस्था CSR फंडिंग प्राप्त करती है, तो फाइनेंशियल ट्रैकिंग और दायित्वों की स्पष्टता जरूरी है ताकि फंड गलत इस्तेमाल न हो.
  • कर्मचारी नियमों के अनुपालन- स्टाफ और स्वयंसेवकों के लिए श्रम कानून, पंजीकरण और सुरक्षा मानदंड ठीक रखने के लिए कानूनी सहायता चाहिए. Ludhiana की स्थानीय कानून प्रवर्तन के अनुरूप.

3. स्थानीय कानून अवलोकन: [ लुधियाना, भारत में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें]

Societies Registration Act, 1860- पंजाब में सोसाइटी पंजीकरण के लिए यह आधार कानून है. पंजीकरण के बाद संगठन के अधिकार-कर्तव्य तय होते हैं.Registrar of Societies से पंजीयन की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है.

Indian Trusts Act, 1882- ट्रस्ट संरचना के लिए सामान्य कानून. ट्रस्ट की शर्तें, धारक का अधिकार और Trustees के दायित्व स्पष्ट होते हैं. Ludhiana में ट्रस्ट के लिए यह वैधानिक ढांचा मान्य है.

Foreign Contribution Regulation Act, 2010- विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले हर संगठन के लिए केंद्रीय नियंत्रण. FCRA के अंतर्गत पंजीकरण, बैंक खाते संशोधन, वार्षिक रपटिंग आवश्यक है. 2020 के बाद अनुपालन और निगरानी बढ़ी है.

The Companies Act, 2013 (Section 8 Companies)- सामाजिक, शिक्षा और परोपकारी उद्देश्यों के लिए सेक्शन 8 कंपनियाँ बनाई जा सकती हैं. MCA के माध्यम से रजिस्ट्रेशन और नियमन होता है. Ludhiana में सेक्शन 8 कंपनियों के लिए स्थानीय निदेशक-समिति की जरूरत पड़ती है.

Income Tax Act, 1961- 12A/12AA और 80G जैसे टैक्स एक्सेम्शन प्रावधान, लाभार्थियों के लिए राहत देता है. आडिट, टैक्‍स रिटर्न और आय-खर्च विवरण की बाध्यता होती है. यह कानून केंद्र स्तर पर लागू है.

अधिकारिक स्रोत उद्धरण

“Tax exemptions are available to charitable trusts and institutions under sections 11, 12A and 80G of the Income Tax Act.”
- incometaxindia.gov.in

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: [10-12 प्रश्न-उत्तर जोड़े]

  1. लुधियाना में NGO कैसे पंजीकृत करें?

    पंजीकरण के लिए तीन विकल्प होते हैं: सोसाइटी, ट्रस्ट या सेक्शन 8 कंपनी. प्रत्येक के लिए अलग आवेदन और दस्तावेज चाहिए. Registrar of Societies, Punjab या संबंधित प्राधिकारी से साक्षात्कार आवश्यक हो सकता है.

  2. क्या फॉरेन कंट्रीब्यूशन ले सकते हैं? FCRA के बारे में क्या ध्यान रखें?

    यदि संस्था विदेशी सहयोग लेना चाहती है तो FCRA पंजीकरण अनिवार्य है. सभी ट्रांजैक्शन बैंक अकाउंट के माध्यम से हों और वार्षिक रपट देनी होती है.

  3. टैक्स एक्सेम्शन के लिए आवेदन कैसे करें?

    12A/12AA और 80G के लिए आवेदन आयकर विभाग के पोर्टल पर किया जाता है. प्रमाणपत्र मिलते ही टैक्स-छूट का लाभ मिलता है. अनुपालनों की समय-सीमा याद रखें.

  4. कौन से ऑडिट और रिपोर्टिंग अनिवार्य हैं?

    इनकम-टैक्स रिटर्न, ट्रस्ट अकाउंट्स, और FCRA प्रावधानों के तहत वार्षिक रिपोर्टिंग जरूरी है. Ludhiana के भीतर सभी शाखाओं के लिए स्पष्ट रिकॉर्ड रखना होता है.

  5. CSR फंडिंग पर कौन से नियम लागू होते हैं?

    CSR से प्राप्त फंड का उपयोग केवल घोषित उद्देश्य के लिए हो. फंड-मैनेजमेंट और आडिटरेव्यू का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है.

  6. कर्मचारियों के लिए कौन से कानून लागू होते हैं?

    श्रम कानून, पब्लिक सपोर्टिंग वर्कफोर्स और स्टाफ से जुड़ी सुविधाओं के लिए Ludhiana के स्थानीय नियमों के अनुसार पंजीकरण और अनुपालन करें.

  7. NGO के बैंक खाता खोलने के लिए क्या चाहिए?

    NGO के पंजीकरण प्रमाणपत्र, PAN, और FCRA/टैक्स-एक्सेम्प्शन प्रबंधित बैंक खाते के लिए आवश्यक दस्तावेज पर्याप्त होंगे.

  8. लोक-उत्पादन या जन-सेवा गतिविधियों के लिए कौन से नियम जरूरी हैं?

    सोसाइटी/ट्रस्ट/कंपनी के उद्देश्य के अनुसार स्थानीय अनुदान और लाइसेंस की पात्रता जाँचें. हर गतिविधि की स्पष्ट रिपोर्टिंग करें.

  9. अगर FCRA पंजीकरण रद्द हो जाए तो क्या करें?

    स्टेप-बाय-स्टेप न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार अपील और पुनर्निर्माण की कोशिश करें. कानूनी सलाह लेकर प्रभावित दायित्वों को सुरक्षित करें.

  10. क्या Ludhiana में डेटा सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है?

    हाँ, NGO डेटा प्रोटेक्शन और IT एक्ट से जुड़े नियमों का पालन जरूरी होता है, खासकर स्वयंसेवकों और लाभार्थियों की सूचनाओं के साथ.

  11. कौन सा रास्ता सबसे सरल है-सोसाइटी या ट्रस्ट?

    यह आपकी उद्देश्य, ट्रस्ट-निर्भर व्यक्ति-गठन और फंडिंग-स्रोत पर निर्भर है. सेक्शन 8 कंपनी भी एक विकल्प है यदि आप व्यापक फंडिंग चाहते हैं.

5. अतिरिक्त संसाधन: [गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों की सूची]

  • CRY - Child Rights and You- बच्चों के अधिकारों पर केंद्रित राष्ट्रीय NGO
  • Smile Foundation- शिक्षा और बच्चों के विकास पर काम करने वाला राष्ट्रीय संगठन
  • Pratham- शिक्षा संवर्द्धन के लिए व्यापक शिक्षा-कार्यक्रम संचालित करने वाला प्रतिष्ठित NGO

इन संगठनों के आधिकारिक साइट लिंक:

गैर-लाभकारी के क्षेत्र में FCRA, 12A/12AA और सेक्शन 8 कंपनी से जुड़ी जानकारियों के लिए निम्न आधिकारिक स्रोत उपयोगी हैं:

6. अगले कदम: [गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया]

  1. अपने संगठन के पंजीकरण मॉडल (सोसाइटी, ट्रस्ट, सेक्शन 8) का चयन करें और आवश्यक दस्तावेज जमा करें.
  2. FCRA आवश्यकता हैं या नहीं, यह तय करने के लिए स्थानीय वकील से मिलें और जरूरी पंजीकरण शुरू करें.
  3. टैक्स एक्सेम्प्शन के लिए 12A/12AA और 80G आवेदन की तैयारी करें.
  4. कानूनी सलाहकार के साथ एक लघु प्रश्न-पत्र बनाएं ताकि आप अपने NGO के लिए सही विशेषज्ञ खोज सकें.
  5. दो या तीन अनुभवी Advocates से Ludhiana-आधारित फर्मों के बारे में साक्षात्कार करें.
  6. पब्लिक-फंडिंग, FCRA और स्थानीय नियमों पर पूछे जाने वाले प्रश्न के उत्तर तैयार करें.
  7. उचित शुल्क संरचना, समय-सीमा और पूर्व-समझौते (MOU) को स्पष्ट कर दें.

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