सहरसा में सर्वश्रेष्ठ गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
सहरसा, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. सहरसा, भारत में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ कानून के बारे में: [सहरसा, भारत में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ कानून का संक्षिप्त अवलोकन]

सहरसा, बिहार में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ सामान्यतः ट्रस्ट, सोसाइटी या Section 8 कंपनी के रूप में पंजीकृत होती हैं. इन संस्थाओं का मुख्य उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और सामाजिक कल्याण होता है. पंजीकरण के साथ इन्हें आयकर-छूट और दान स्वीकार करने की सुविधाएँ मिलती हैं.

स्थानीय जिले में संचालन के लिए इन संस्थाओं को राजस्व, कर निर्धारण और दान-निगम के नियमों का पालन करना होता है. बिहार के कानून के अनुरूप पंजीकरण, वार्षिक आय-घोषणा और ऑडिट आवश्यक हो सकता है. साथ ही विदेशी योगदान के लिए FCRA नियमों की भी अनिवार्य पालना बनती है.

बिहार में गैर-लाभकारी संस्था संचालित करने के लिए राज्य-स्तरीय संस्थागत ढाँचे का पालन आवश्यक है. 12A/12AA और 80G के माध्यम से आयकर-छूट के लिए आवेदन महत्त्वपूर्ण होते हैं. 2020-21 से डिजिटल फॉर्मिंग और ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के अनुपालन पर जोर बढ़ा है.

“Tax exemptions are available to charitable trusts and not-for-profit organizations registered under Section 12A/12AA and approved under Section 80G.”

उच्चारण स्रोत: Income Tax Department - Tax Exemption for Charitable Organizations. Income Tax Department

“No foreign contribution shall be accepted by any person unless registered or granted prior permission under the Foreign Contribution Regulation Act, 2010.”

उद्धरण स्रोत: Foreign Contribution Regulation Act, 2010 (FCRA). FCRA Portal

“Section 8 of the Companies Act, 2013 provides for registration of companies with charitable objects.”

उद्धरण स्रोत: Ministry of Corporate Affairs (MCA) - Section 8 Companies. MCA

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: [गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। सहरसा, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें]

  1. किसी नए ट्रस्ट, सोसाइटी या Section 8 कंपनी के पंजीकरण के समय आपको कानूनी सलाह की जरूरत पड़ती है. Saharsa के गांव-गांव के प्रयासों में पंजीकरण सरल नहीं होता और सही फॉर्म-निर्देशन आवश्यक है.

  2. 12A/12AA और 80G के लिए प्रमाणन पाने के लिए आवेदन-प्रक्रिया और पालन-निर्देश समझना जरूरी है. गलतियों से दानकर्ता-छूट छुट सकती है और आयकर दायित्व बढ़ सकता है.

  3. FCRA के अंतर्गत विदेश से दान स्वीकार करने का निर्णय लेने पर prior permission या पंजीकरण आवश्यक होता है. Saharsa के राहत-कार्य में विदेशी दान के लिए कानूनी मार्गदर्शन जरूरी है.

  4. स्थानीय स्तर पर दान-समर्थन हासिल करने के लिए donors के साथ समझौते और कॉन्ट्रैक्ट तैयार करने होते हैं. इसके लिए वकील से अनुबंध-ड्राफ्टिंग करानी पड़ती है.

  5. कानूनी-प्रशासनिक ऑडिट और आय-घोषणा के समय सही रिकॉर्ड रखने के लिए विशेषज्ञ की सलाह आवश्यक होती है. इससे नियमानुसार नोटिस से बचा जा सकता है.

  6. यदि Saharsa में एक संगठन कानूनी कारण से पंजीकरण रद्द या निलंबित हो रहा हो, तो अपील और उचित प्रक्रियाओं के लिए वकील चाहिए. यह प्रक्रिया जटिल हो सकती है.

3. स्थानीय कानून अवलोकन: [सहरसा, भारत में गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें]

  • आयकर अधिनियम, 1961 - Section 11, 12A, 12AA और 80G से कर-छूट मिलती है. charitables के लिए मुख्य कानून यह है.
  • Companies Act, 2013 - Section 8 के अंतर्गत Section 8 Company पंजीकरण के लिए आवश्यक प्रावधान देता है. Not-for-profit objects के साथ कंपनियाँ बनती हैं.
  • Foreign Contribution Regulation Act, 2010 (FCRA) - विदेशी योगदान प्राप्त करने के नियम निर्धारित करता है; बिना पंजीकरण या पूर्व अनुमति के विदेशी दान स्वीकारना वर्जित है.

गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए इन कानूनों के साथ स्थानीय बिहार-स्तरीय पंजीकरण और वार्षिक रजिस्ट्रेशन-फॉर्म, ऑडिट और रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य हो सकता है. Saharsa के लिए स्थानीय RoS (Registrar of Societies) और आयकर अधिकारी आवश्यक मार्गदर्शन देते हैं. साथ ही राज्य के समाज- पंजीकरण अधिनियम भी प्रभावी हो सकता है.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: [10-12 प्रश्न-उत्तर जोड़े तैयार करें]

क्या Saharsa में गैर-लाभकारी संस्था को पंजीकरण कराना अनिवार्य है?

हाँ, अगर आप कर-छूट पाना चाहते हैं या दान स्वीकार करना चाहते हैं, तो पंजीकरण जरूरी होता है. ट्रस्ट-समितियाँ, सोसाइटी और Section 8 कंपनियाँ इस नियम से आती हैं.

12A/12AA के लिए आवेदन कैसे करें?

सबसे पहले संस्था के उद्देश्य, गतिविधियाँ और रिकॉर्ड-प्रणाली पर्याप्त हों. फिर Returns के साथ Form 10A/12A दाखिल करें. एक बार मान्यता मिल जाने पर आयकर-छूट मिलती है.

80G प्रमाणन किसके लिए है और कैसे मिलता है?

80G दाताओं के लिए आयकर कटौती के लिए है. दानकर्ता 80G प्रमाणित संस्थाओं को दान कर सकते हैं और अपने आयकर के दायित्व से कटौती पा सकते हैं.

FCRA क्यों जरूरी है और कब लेना चाहिए?

यदि आप विदेशी दान स्वीकारना चाहते हैं तो FCRA के अंतर्गत पंजीकरण या पूर्व अनुमति आवश्यक है. बिना यह हो तो दान-विनियमन का उल्लंघन होता है.

क्या हर NGO को वार्षिक ऑडिट कराना चाहिए?

कई संस्थाओं के लिए ऑडिट अनिवार्य है, खासकर अगर वे आयकर-छूट के लिए पंजीकृत हैं. ऑडिट से पारदर्शिता बढ़ती है और दाताओं का भरोसा रहता है.

क्या NGO सहरसा में स्थानीय दाताओं से दान ले सकता है?

हाँ, स्थानिक दान वैध हैं. परन्तु 12A/12AA या 80G जैसे प्रावधान के अनुसार नियमानुसार रिकॉर्ड-कीपिंग जरूरी है.

अगर पंजीकरण रद्द हो जाए तो क्या करें?

पुनः पंजीकरण या अंतरिम उपाय के लिए कॉन्टैक्ट-टू-न्यायिक सलाहकार की जरूरत होगी. नियमानुसार अपील और वैकल्पिक ढांचे का विकल्प होता है.

क्या Section 8 Company बनना Saharsa में संभव है?

हाँ, Section 8 कंपनी बनना संभव है. इसके लिए MCA के निर्देश अनुसार आवेदन, MOA, AOA और नाम-संदेश सत्यापित करना होता है.

कौन-कौन से दस्तावेज सामान्यतः आवश्यक होते हैं?

समिति-चयन, पंजीकरण प्रमाण-पत्र, स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल्स, आय-कर विवरणी और दान-आय विवरण प्रमुख होते हैं. सभी रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म में रखना होता है.

कानूनी सलाह किस प्रकार प्राप्त करें?

स्थानीय बार-एजेंसी, जन-निधी संगठन या अनुभवी वकील से प्रारम्भिक परामर्श लें. Saharsa के स्थानीय वकील आपकी संस्थान-आवश्यकताओं के अनुसार मार्गदर्शन देंगे.

क्या विदेशी योगदान मिलने पर दायित्व बढ़ते हैं?

हाँ, FCRA के अंतर्गत दायित्व बढ़ते हैं. अकाउंटिंग-रिकॉर्डिंग, ऑडिट और वार्षिक रिटर्न जरूरी होते हैं.

NGO के लिए क्या-क्या जोखिम होते हैं?

धन-निगम के नियमों का उल्लंघन, पंजीकरण-रद्दगी, दान-प्राप्ति में बाधाएँ और फाइन-शासन प्रमुख जोखिम हैं. नियमित अनुपालन से जोखिम घटते हैं.

5. अतिरिक्त संसाधन: [गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों की सूची बनाएं]

  • NGO Darpan - राष्ट्रीय पोर्टल, जिसमें NGO पंजीकरण और मानदंड-जानकारी मिलती है. NGO Darpan
  • Voluntary Health Association of India (VHAI) - स्वास्थ्य-सेवा और नीति को मजबूत करने वाले प्रमुख नेटवर्क. VHAI
  • Centre for Civil Society (CCS) - नीति-विश्लेषण और नागरिक-सेवा सुधार में सक्रिय शोध संस्थान. CCS

6. अगले कदम: [गैर-लाभकारी और परोपकारी संस्थाएँ वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया]

  1. अपने क्षेत्र में अनुभवी अधिवक्ताओं की सूची बनाएं; Saharsa के बार-एजेंसी से Referral लें.

  2. लोकल NGOs और सामाजिक संस्थाओं से सुझाव माँगें और केस-स्टडी देखें.

  3. कॉनसंप्शन-फ्री initial consultation बुक करें ताकि पहले-पहल लागत और फॉर्म-विकल्प समझ सकें.

  4. कानूनी विशेषज्ञता, आयकर, FCRA और कंपनिया-नन-लाभ पर अनुभव पूछें. स्पष्ट ব্রিফ दें.

  5. शुल्क-राशि, घंटे-रेट और प्रत्यक्ष-समझौतों की पुष्टि करें; ठोस शुल्क-समझौता बनाएं.

  6. समझौते पर दस्तखत से पहले पेज-थंब्स और शिकायत-प्रोफाइल चेक करें. प्रमाण-पत्र माँगें.

  7. समय-सीमा और मिसालें निर्धारित करें; सब-कागजात एक साथ तैयार रखें.

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अस्वीकरण:

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