जम्मू में सर्वश्रेष्ठ पेटेंट वकील

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Sushil Wattal

Sushil Wattal

30 minutes मुफ़्त परामर्श
जम्मू, भारत

2009 में स्थापित
उनकी टीम में 5 लोग
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सुशील वाट्टल एक अभ्यासरत अधिवक्ता हैं और कानून के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक अनुभव रखते हैं। वह व्यवसायों,...
Mehta Law Associates
जम्मू, भारत

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मेहा लॉ एसोसिएट्स, जम्मू, जम्मू और कश्मीर में स्थित, नागरिक मुकदमों, आपराधिक मामलों, कॉर्पोरेट और वाणिज्यिक कानून,...
जैसा कि देखा गया

1. जम्मू, भारत में पेटेंट कानून के बारे में:

जम्मू, भारत में पेटेंट कानून पूरे देश के समान लागू होता है। यह भारतीय पेटेंट अधिनियम, 1970 के अधीन संचालित होता है और केन्द्र सरकार के नियंत्रण में पेटेंट प्रक्रिया को संचालित करता है।

पेटेंट का उद्देश्य नवाचार को सुरक्षित बनाकर विकास, निवेश और रोजगार को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत आविष्कारक को एक निर्दिष्ट अवधि तक एकाधिकार दिया जाता है ताकि वह अपने निवेश की सुरक्षा कर सके।

जम्मू-कश्मीर निवासियों के लिए भी पेटेंट आवेदन भारतीय कानून के अनुसार ही दाखिल होते हैं। स्थानीय स्तर पर अलग से पेटेंट कानून नहीं है, और आवेदन भारत-भर के मानक नियमों के अनुसार ही स्वीकार होते हैं।

"The term of every patent shall be twenty years from the date of filing of the complete specification."
Source: The Patents Act, 1970, Section 53(1)

"A patent is a government grant of exclusive rights to prevent others from making, using, selling or importing the patented invention."
Source: IP India - What is a Patent

"India follows a first to file system for patent applications."
Source: The Patents Act, 1970 and Patents Rules, 2003

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है?

  • परिदृश्य 1 जम्मू में एक स्टार्टअप ने जल-शुरक्षित ड्रिप-सिस्टम पर नया फीचर विकसित किया है। वह दावा-योजना बनाकर पेटेंट फाइल करना चाहता है। विश्लेषण, दावे की रचना और पूर्व-Art खोज के लिए आपको अनुभवी अधिवक्ता की आवश्यकता होगी।

  • परिदृश्य 2 श्रीनगर में एक इंजीनियरिंग संस्थान ने एक नवीन प्रोसेस विकसित किया है। पूर्ण स्पेसिफिकेशन और जरुरी दस्तावेज तैयार करवाने के लिए कानूनी सहायता जरूरी होगी ताकि आवेदन मजबूत हो सके।

  • परिदृश्य 3 जम्मू के एक कंपनी पर अन्य कंपनियों ने पेटेंट-इन्फ्रिंगिंग के आरोप लगाए हैं। उचित जवाब भेजना, ऑब्जेक्शन-रेप्लाई बनवाना और त्वरित समाधान निकालना चाहिए।

  • परिदृश्य 4 एक शोधार्थी को अंतरराष्ट्रीय पेटेंट फैला कराना है। PCT मार्ग, राष्ट्रीय चरण प्रविष्टि, समय-सीमा और दावों की सावधानी से योजना बनानी होगी।

  • परिदृश्य 5 आपको पेटेंट-प्रोसीजर के दौरान कार्यालय से मिलने वाले नोटिसों का उत्तर देने के लिए कानूनी मार्गदर्शन चाहिए।

  • परिदृश्य 6 20 वर्ष की आयु-समाप्ति से पहले पेटेंट के रख-रखाव के लिए वार्षिक फीस अदायगी और अनुदान के बाद के दायित्वों के बारे में स्पष्ट मार्गदर्शन चाहिए।

3. स्थानीय कानून अवलोकन:

जम्मू-भारत में पेटेंट के नियंत्रण के लिए मुख्य कानूनी ढांचा नीचे दिया गया है।

The Patents Act, 1970 - आविष्कारों के लिए पेटेंट grant की मुख्य कानून-रचना है और अधिकार, दायित्व, आवेदन-आकार आदि को निर्धारित करता है।

The Patents Rules, 2003 - आवेदन, प्रॉविजनल एप्लिकेशन, पूर्ण स्पेसिफिकेशन, अभिलेखण, ट्रैकिंग आदि प्रक्रियाओं के नियमों को 정의 करता है।

Patents (Amendment) Act, 2005 और इसके अंततः संशोधित नियम - दायर करने के तरीकों, दावों की बनावट और पूर्व-Art खोज के मानदंडों में संशोधन लेकर आए थे।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेटेंट क्या है?

पेटेंट एक कानूनी अधिकार है जो आविष्कारक को एक समय-सीमा के लिए उसके आविष्कार को बनाना, उपयोग करना या बेचने से अन्य लोगों को रोकने की अनुमति देता है।

कौन-से आविष्कार पेटेंट के लिए योग्य होते हैं?

आविष्कार ऐसा होना चाहिए जो नया हो, नयापन (inventive step) दिखता हो और औद्योगिक उपयोग के योग्य हो। सिद्धान्ततः विचार, समीक्षक प्रक्रियाएं, प्राकृतिक प्रकार के ज्ञान पेटेंट योग्य नहीं माने जाते।

क्या जम्मू-कश्मीर निवासी भी भारत में पेटेंट फाइल कर सकता है?

हाँ, जम्मू-कश्मीर निवासी भारत-भर के समान ऑनलाइन IP India पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। कोई क्षेत्रीय- JK-specific कानून नहीं है।

Provisional बनाम Complete आवेदन में अंतर क्या है?

Provisional आवेदन एक तिथि-उद्धरण देता है ताकि आप बाद में पूर्ण स्पेसिफिकेशन दे सकें। Complete specification दावे की पूर्ण संरचना और अभिलेख के साथ जरूरी होता है।

PCT मार्ग से अंतर्राष्ट्रीय पेटेंट कैसे मिलता है?

भारत PCT सदस्य देश है; आप PCT के जरिये अंतरराष्ट्रीय आवेदन कर सकते हैं और फिर राष्ट्रीय चरण में भारत में प्रवेश कर सकते हैं।

पेटेंट के लिए कितने वर्ष मिलते हैं?

एक पेटेंट की वैधता सामान्यतः 20 वर्षों की होती है, जो filing की तारीख से गिनी जाती है।

फाइलिंग के लिए आवश्यक दस्तावेज क्या होते हैं?

आवेदक की पहचान, आविष्कार का विवरण, कृपया प्राथमिकी/पूर्व-आवेदन, आवेदन-फॉर्म,azzi एवं ड्रा-फाइलिंग आदि दस्तावेज आवश्यक होते हैं।

नामित प्रतिस्पर्धी मामले में मुझे क्या करना चाहिए?

कानूनी सलाहकार की मदद से संदेह-पूर्ण दावों की समीक्षा, विरोध-याचिका और आवश्यक प्रतिक्रियाएं तैयार करना उपयोगी रहता है।

पेटेंट मिल जाने के बाद शुल्क कैसे चलते हैं?

ग्रांट के बाद वार्षिक रख-रखाव शुल्क अदा करना आवश्यक है, ताकि पेटेंट वैध बना रहे।

जम्मू में पेटेंट कार्यालय कैसे काम करता है?

भारत के राज्य/UT-वितरित कार्यालय IP India के अंतर्गत आते हैं; जम्मू में विशिष्ट स्थानीय कार्यालय के बजाय ऑनलाइन फाइलिंग और रजिस्ट्रेशन पर आधारित प्रक्रिया होती है।

आवेदन की स्थिति कैसे जाँचें?

IP India पोर्टल पर अपने आवेदन का स्थिति-स्थिति-अपडेट चेक किया जा सकता है; नोटिस एवं अनुदान आदि की जानकारी वहीं मिलती है।

अगर मेरा आवेदन इनकार हो जाए तो क्या करूँ?

ऑफिस-आधारित Objections के विरुद्ध रेस्पोंस देकर दावे मजबूत किये जा सकते हैं। आपको एक अनुभवी कानूनी सलाहकार की मदद लेनी चाहिए।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Office of the Controller General of Patents, Designs and Trade Marks (CGPDTM) - IP India: https://ipindia.gov.in/
  • WIPO India - भारत में पेटेंट और IPR मार्गदर्शन: https://www.wipo.int/india/en/
  • DPIIT - Department for Promotion of Industry and Internal Trade - Intellectual Property Rights (IPR) नीति पृष्ठ: https://dpiit.gov.in/about-ipr

6. अगले कदम

  1. आविष्कार की स्पष्ट पहचान करें और उसका संक्षिप्त सार तैयार करें।
  2. एक प्रारम्भिक पेटेंट खोज (non‑binding) करें ताकि मौजूदा पूर्व-आविष्कारों की जानकारी मिले।
  3. स्थानीय पेटेंट वकील या कानूनी सलाहकार से कंसल्ट करें ताकि दावे और स्पेसिफिकेशन बनेंगे।
  4. JK में रहते हुए ऑनलाइन IP India पोर्टल का उपयोग कर provisional या पूर्ण आवेदन का चयन करें।
  5. Draft स्पेसिफिकेशन, दावे और ड्रॉ को फाइलिंग से पहले पुष्टि करें।
  6. ऑफिस ऑब्जेक्शन आने पर उत्तर तैयार कर दें और दावों को मजबूत बनाएं।
  7. पेटेंट के रख-रखाव शुल्क समय-समय पर जमा करें और निगरानी रखें।

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