नया दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ पेटेंट वकील
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नया दिल्ली, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
1. नया दिल्ली, भारत में पेटेंट कानून के बारे में: नया दिल्ली, भारत में पेटेंट कानून का संक्षिप्त अवलोकन
नई दिल्ली में पेटेंट कानून नवाचार की सुरक्षा के लिए एक सुव्यवस्थित ढांचे का प्रतिनिधित्व करता है. यह ढांचा Patents Act, 1970 और Patents Rules, 2003 के अधीन चलता है. दिल्ली के पेटेंट कार्यालय से आवेदन दाखिल होते ही परीक्षा, संशोधन, प्रकाशन और अंततः पेटेंट मिलना संभव होता है. यह प्रक्रिया संस्थापित औपचारिकताएं और पूर्व-घोषणा के अवसर भी प्रदान करती है.
Invention means a new product or process involving an inventive step and capable of industrial application.
स्रोत: Patents Act, 1970 - Patents Act Text
Section 3(d) के अनुसार
यह Section 3(d) दुष्प्रयोग रोकता है; इसका उद्देश्य ऐसी निगरानी है जिसमें मौजूदा पदार्थ की नई संरचना से सफलता मिलना आविष्कीय हो. अधिकतम स्पष्टता के लिए आधिकारिक पाठ देखें: Patents Rules, 2003.
स्रोत: Patents Act, 1970 - Section 3(d)
Patents Act 1970 में पेटेंट का अधिकृत अस्तित्व 20 वर्ष की अवधि के साथ माना गया है, जो संभावित लाभ और बाजार प्राधिकार देता है. यह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय नीतियों के साथ समन्वयित है ताकि दिल्ली में आविष्कारक और उद्यमी सही मार्ग तय कर सकें. नवीनतम बदलावों के साथ यह ढांचा लगातार अपडेट होता है ताकि आधुनिक तकनीकों की सुरक्षा संभव हो सके.
दिल्ली निवासियों के लिए व्यावहारिक संकेत: अपना इन्वेंशन स्पष्ट रूप से परिभाषित करें, आवश्यक दस्तावेज एकत्रित रखें और स्थानीय पेटेंट अधिकारी से प्रारम्भिक मार्गदर्शन लें. साथ ही, नयी दिल्ली के वकील-उद्योग संगठनों से संपर्क बना कर स्थानीय प्रक्रिया समझना लाभदायक रहता है. आधिकारिक दस्तावेज़ और मार्गदर्शक पेज नीचे उद्धृत हैं: IP India, WIPO India.
Patents Act, 1970 provides the framework for grant of patents and lays down conditions for patentability.
स्रोत: IP India - Patents Act
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: पेटेंट कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य
दिल्ली-स्थित आविष्कारक या स्टार्ट-अप के लिए विशेष परिस्थितियाँ पैदा होती हैं जहाँ कानूनी सहायता आवश्यक होती है. नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं जो स्थानीय धाराओं के अनुसार प्रासंगिक रहते हैं.
- परिदृश्य 1: दिल्ली-स्थित स्टार्ट-अप ने नया स्मार्ट डिवाइस टेक्नोलॉजी विकसित किया है. वे prior art खोज, दावे की रचना और आवेदन-तैयारी के लिए पेटेंट वकील की मदद लेते हैं ताकि दायर करने से पहले अर्हता की पुष्टि हो सके.
- परिदृश्य 2: किसी उत्पाद या प्रक्रिया के लिए भारतीय पेटेंट आवेदन दाखिल करना है. फाइलिंग, औद्योगिक अनुप्रयोग, और परीक्षक के साथ संवाद में अनुभवी advokat की जरूरत होती है.
- परिदृश्य 3: Section 3(d) के संदिग्ध मामलों में दिल्ली में इन्वेंशन की नवाचार-स्कीम स्पष्ट करनी हो और जवाबी दस्तावेज़ तैयार करने हों. ऐसे मामलों में अनुभवी अधिवक्ता का मार्गदर्शन जरूरी रहता है.
- परिदृश्य 4: पेटेंट के लिए प्री-ग्रांट विरोध या पोस्ट-ग्रांट विरोध के अवसर Delhi Patent Office या High Court Delhi में उठते हैं. वकील से उचित तर्क-तैयारी व अदालत-आधारित प्रक्रिया समझना आवश्यक है.
- परिदृश्य 5: अंतरराष्ट्रीय चरण के लिए PCT मार्ग अपनाने का निर्णय. Delhi-आवासीय आवेदक को भारत के साथ-साथ अन्य देशों में आवेदनों के समन्वय के लिए कानूनी सलाह चाहिए.
- परिदृश्य 6: क्लेम-ड्राफ्टिंग, दावा-रेखाओं के दुरुस्तीकरण और आवेदन के समय लागत नियंत्रण के लिए विशेषज्ञ सलाह आवश्यक हो.
3. स्थानीय कानून अवलोकन: दिल्ली-आधारित पेटेंट नियंत्रण के 2-3 विशिष्ट कानून
दिल्ली में पेटेंट व्यवस्था के प्रमुख कानून व नियम निम्नलिखित हैं. इनका ज्ञान स्थानीय आवेदकों के लिए अत्यंत उपयोगी है.
- Patents Act, 1970 - भारत के पेटेंट कानून का मूल कानून. यह बताता है कि क्या कोई आविष्कार पेटेंट के लिए योग्य है, प्रदर्शन-शर्तें क्या हैं, और किस तरह आवेदन किया जाए.
- Patents Rules, 2003 - आवेदन दाखिल करने, दस्तावेज़ प्रस्तुत करने, फीस आदि की नियमावली. इन नियमों में 2016 और उसके बाद के संशोधन भी लागू होते हैं.
- Patents (Amendment) Act, 2005 - उत्पाद पेटेंट के विषयक बदलाव और 3(d) जैसे पेटेंट-मानदंडों को प्रभावी बनाया गया.
Section 2(1)(j) defines “invention” as a new product or process involving an inventive step and capable of industrial application.
स्रोत: Patents Act - Section 2(1)(j)
Section 3(d) prohibits certain inventions based on new forms of known substances unless efficacy is enhanced.
स्रोत: Patents Act - Section 3(d)
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: 10-12 प्रश्न-उत्तर
पेटेंट क्या है?
पेटेंट एक कानूनी अधिकार है जो एक आविष्कारक या कम्पनी को एक निश्चित समय के लिए अपने उत्पाद या प्रक्रिया परexclusive बनाता है. यह अधिकार नया, अद्वितीय और औद्योगिक अनुप्रयोग योग्य होना चाहिए.
भारत में पेटेंट के लिए आवेदन कैसे करें?
आवेदन ऑनलाइन IP इंडिया के माध्यम से दाखिल किया जाता है. पहले एक प्राथमिक आवेदन दें, फिर पूर्ण विवरण, ड्राफ्टेड दावे और औपचारिक दस्तावेज़ प्रस्तुत करें. परीक्षा के बाद चयनित निर्णय मिलता है.
कौन सा आविष्कार पेटेंट-लायक माना जाता है?
आवेदनकर्ता को novelty, inventive step और industrial applicability दिखाना होता है. साथ ही, दावा-रेखाओं की स्पष्टता भी आवश्यक है.
Section 3(d) क्या दर्शाता है?
यह दायरा यह बताता है कि ज्ञात पदार्थ के नए रूप से केवल नयी संरचना मिलनाPatent-योग्यता नहीं बना सकता जब तक efficacy बढ़ी नहीं हो. यह evergreening रोकने के लिए महत्वपूर्ण है.
दिल्ली में पेटेंट के लिए आवेदन कितने समय में मंजूर होता है?
यह संदर्भ पर निर्भर है. प्रारम्भिक प्रशासनिक चरणों के बाद परीक्षा और पत्र-व्यवहार पर निर्भर करता है. सामान्यतः कई वर्षों तक प्रक्रिया चल सकती है.
क्या मैं हिंदी में आवेदन कर सकता हूँ?
हाँ, भारत में आवेदनकर्ता मांगे तो असल दस्तावेज़ अंग्रेजी या हिंदी में दाखिल कर सकते हैं. बाद में समीक्षा और अनुवाद की जरूरत पड़ सकती है.
पेटेंट आवेदन के लिए कितनी लागत लगती है?
यह आवेदन-धारणा, दावे की लंबाई और कार्यालय शुल्क पर निर्भर है. दिल्ली स्थित आवेदक के लिए फीस संरचना ipindia.gov.in पर स्पष्ट है.
क्या दिल्ली में पेटेंट कार्यालय से पहले पूर्व-शोध करवाना संभव है?
हाँ, पूर्व-शोध या फर्स्ट-टेप वैल्यूएशन सामान्यतः क्लेम-चिंतन के साथ किया जाता है. यह निर्णय लेने से पहले लाभदायक होता है.
पेटेंट क्यों रद्द हो सकता है?
इनोवेशन में novelty या inventive step का अभाव, आवेदन-शर्तों का अनुपालन न होना, या किसी अदालत/पेटेंट ऑफिस के आदेश से रद्दीकरण संभव है.
PCT मार्ग क्या है और दिल्ली कैसे जुड़ता है?
PCT एक अंतरराष्ट्रीय मार्ग है जो भारत के साथ अन्य देशों में भी आवेदन-गुणवत्ता बढ़ाता है. India के लिए PCT राज्यों के साथ समन्वय जरूरी है.
पेटेंट के लिए क्या-क्या दस्तावेज़ चाहिए?
बायोडेटा, पूर्ण विवरण, दावा-रेखा, प्रेरित-कथन, पुरातन कला साक्ष्य, आवेदन-फार्म, और शुल्क रसीद आवश्यक होते हैं. यह विवरण IP इंडिया के गाइड से मिलते हैं.
क्या मैं पेटेंट एजेंट या वैध वकील के बिना आवेदन कर सकता हूँ?
व्यावहारिक रूप से कई आवेदक अकेले भी आवेदन कर लेते हैं, परन्तु दावे की संरचना, अष्ट्रक्चरल-उचित दस्तावेज़, और ऑफिस-रसीद के कारण एक अनुभवी adjvant की मदद अधिक सुरक्षित होती है.
5. अतिरिक्त संसाधन: पेटेंट से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों
- IP India - भारत का आधिकारिक पेटेंट कार्यालय; आवेदन, परीक्षा, और आडिट सूचना।
- WIPO इंडिया - विश्व स्तर पर पेटेंट ज्ञान और मार्गदर्शन।
- DPIIT - IPR नीति और प्रवर्तनों का प्रबंधन; नीति दस्तावेज़ और ऑनलाइन सहायता।
6. अगले कदम: पेटेंट वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया
- अपने आविष्कार का संक्षिप्त विवरण बनाएं; मुख्य दावे कौन से हैं साफ करें.
- दिल्ली-आफिस के अनुसार एक प्रारम्भिक पूर्व-शोध करवाएं; संभावित अड़चनें समझें.
- कथन-पत्र और ड्राफ्ट-नक़ल के लिए एक वकील/पेटेंट अटॉर्नी चुनें.
- कौन-सी फॉर्मिंग ऑर्गेनिक स्टेप्स आवश्यक हैं, यह स्पष्ट करें और शुल्क संरचना पूछें.
- ई-Filing और IP India पोर्टल पर आवेदन तैयार करें और जमा करें.
- ऑफिसर-रिप्लाई और objections के लिए समय-सीमा समझें; तर्क-प्रस्तुति की तैयारी करें.
- अगले कदमों की मार्गदर्शिका के साथ अंतरराष्ट्रीय मार्ग (PCT) को भी विचार करें यदि आप अन्य देशों में भी protection चाहते हैं.
“Invention means a new product or process involving an inventive step and capable of industrial application.”
स्रोत: Patents Act, 1970 - Section 2(1)(j) - IP India
“The mere discovery of a new form of a known substance which does not result in the enhancement of the known efficacy of that substance shall not be considered an invention.”
स्रोत: Patents Act, 1970 - Section 3(d) - IP India
“A patent for invention shall be granted for a term of twenty years from the date of filing of the complete specification.”
स्रोत: Patents Act, 1970 - Section 53(1) - IP India
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