राजकोट में सर्वश्रेष्ठ पेटेंट वकील

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V B Sheth & Co
राजकोट, भारत

1948 में स्थापित
English
श्री. वी. बी. शेठ एंड कंपनी राजकोट, गुजरात में एक प्रमुख विधिक फर्म है, जो कराधान और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर...
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1. राजकोट, भारत में पेटेंट कानून के बारे में: राजकोट, भारत में पेटेंट कानून का संक्षिप्त अवलोकन

राजकोट गुजरात का एक बड़ा वाणिज्यिक केंद्र है जहां पेटेंट अधिकार भारत के संविधान के अनुरूप संरक्षण पाते हैं. भारत में पेटेंट कानून सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होते हैं, जिसमें राजकोट निवासियों के लिए भी वही नियम मान्य हैं. आविष्कार के लिए पेटेंट आवेदन सामान्यतः IP India के ऑनलाइन पोर्टल से किया जाता है और पश्चिम क्षेत्रीय पटेंट कार्यालय में दायर किया जा सकता है.

पेटेंट का उद्देश्य है आविष्कार पर विशिष्ट अधिकार देना ताकि प्रतिस्पर्धी दूसरे बनाने, प्रयोग करने या बेचने से रोके जा सकें. पंजीकृत पेटेंट 20 वर्ष तक सुरक्षा देता है, इसके लिए वार्षिक रखरखाव शुल्क देना होता है. राजकोट के निवासियों के लिए स्थानीय अदालतों में पेटेंट उल्लंघन के मामले भी Gujarat High Court के अधीन आते हैं.

“A patent is an exclusive right granted for an invention, which provides the patent owner the right to exclude others from making, using, selling, or importing the patented invention.”

Source: Intellectual Property India

“The term of every patent shall be 20 years from the date of filing.”

Source: Patents Act and Rules (as updated on IP India)

पब्लिक पेरामेन्जरल साक्ष्यों के अनुसार, पेटेंट अधिकार पाने पर आप अन्य लोगों के लिए रोक-टोक कर सकते हैं. राजकोट में स्थानीय उद्योगों के लिए पेटेंट सुरक्षा नवाचार को प्रोत्साहित करती है. IP India पोर्टल से आवेदन और मॉनिटरिंग से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सकती है.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: पेटेंट कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य

  • नया पेटेंट आवेदन बनाते समय सही तकनीकी विवरण और दावा कैसे तैयार करें. राजकोट में उभरते स्टार्टअप्स के लिए यह निर्णायक चरण है.
  • विदेशी देश में संरक्षण चाहते हैं तो PCT मार्ग अपनाने का उचित तरीका और समय-रेखा समझना आवश्यक है.
  • पूर्व-ग्रANT Opposition या पोस्ट-ग्रANT Opposition के समय सही तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत करना जरूरी होता है.
  • पेटेंट ग्रांट के बाद उल्लंघन हुआ तो गुजरात क्षेत्र में सुरक्षा कैसे प्राप्त करें और मुकदमा कैसे दायर करें.
  • नवीनीकरण शुल्क में देरी या भुगतान समस्या होने पर वैधानिक विकल्प समझना जरूरी है.
  • राजकोट के क्लाइंट के लिए तेज-फाइलिंग, स्टार्टअप विशेष छूट और शुल्क संरचना की जानकारी चाहिए.

राजकोट से उदाहरण: एक स्थानीय इंटेलैक्चुअल इनोवेशन स्टार्टअप ने मशीन-लर्निंग आधारित डिवाइस का पेटेंट आवेदन दाखिल किया और इसे तेज़ औपचारिकताओं के साथ प्रॉपर दायरे में रखना चाहती है. दूसरे केस में एक कॉलेज-स्टार्टअप ने अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के लिए PCT मार्ग अपनाने का निर्णय किया और स्थानीय एडवाइस की आवश्यकता महसूस की.

3. स्थानीय कानून अवलोकन: राजकोट, भारत में पेटेंट को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

  • द पेटेंट एक्ट, 1970 - पेटेंट के नये आवेदन, विरोधी आवेदनों, और पेटेंट के दायरे का मुख्य कानून.
  • द पेटेंट नियम, 2003 - आवेदन प्रक्रिया, अग्रिम शुल्क, पब्लिकेशन, परीक्षा और निर्णय प्रक्रियाओं के नियम.
  • संशोधित नियम एवं मार्गदर्शक निर्देश - नवीनतम बदलावों में ई-फाइलिंग, स्टार्टअप के लिए प्राथमिकता और सीमा निर्धारण से जुड़े प्रावधान शामिल हैं. IP India की साइट पर अपडेट मिलते रहते हैं.

नोट करें कि पेटेंट दायरे के क्रियान्वयन के लिए नियंत्रक सामान्य (CGPDTM) का कार्यालय उत्तर पश्चिम क्षेत्र में ‘पPatent Office, Mumbai’ के माध्यम से अधिकृत है. राजकोट के व्यवसायी और आविष्कारक ऑनलाइन IP India पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं; दायित्व तब पूरी तरह स्थानीय उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार में आते हैं.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेटेंट क्या है?

पेटेंट एक ऐसा कानूनी अधिकार है जो आविष्कारक को एक निश्चित समय तक दूसरों को बनाने, उपयोग करने या बेचने से रोकने की अनुमति देता है. यह अधिकार भारत में 20 वर्ष तक रहते हैं, प्रारम्भिक filing से।

भारत में पेटेंट की अवधि कितनी है?

भारत में पेटेंट की अवधि 20 वर्ष होती है, filing तिथि से गिनी जाती है. इसके लिए समय-समय पर रखरखाव शुल्क देना अनिवार्य है.

राजकोट से पेटेंट कैसे दाखिल करें?

आप ऑनलाइन IP India पोर्टल (ipindia.gov.in) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं. दाखिला पश्चिम क्षेत्रीय कार्यालय मुंबई में होता है, फिर प्रक्रिया आगे बढ़ती है.

क्या मुझे स्थानीय वकील की आवश्यकता है?

हाँ, खासकर शुरुआती चरणों में तकनीकी विवरण, दावा संरचना और अनुवादों के मामलों में सुझाव हेतु एक अनुभवी पेटेंट Adv(adocate) या लीगल एडवाइजर की मदद लाभकारी रहती है.

पेटेंट के खर्च कितने होते हैं?

फाइलिंग फीस, आवेदन शुल्क, परीक्षा शुल्क और अनुवर्ती रखरखाव शुल्क मिलकर लागत बनाते हैं. राजकोट आधारित क्लाइंट के लिए स्थानीय क्लाइंट-सब्सिडीज और स्टार्टअप रियायतें भी उपलब्ध हो सकती हैं.

प्रारम्भिक और पूर्ण विवरण में क्या अंतर है?

प्रारम्भिक विवरण में केवल मुख्य विचार और तकनीकी सारांश होते हैं. पूर्ण विवरण में विस्तृत दावों और व्यावहारिक उदाहरणों के साथ पूर्ण स्पेसिफिकेशन होते हैं.

प्री-ग्रांट Oppositions क्या हैं?

प्री-ग्रांट Oppositions किसी भी व्यक्ति द्वारा पेटेंट आवेदन के प्रकाशन से पहले दायर की जा सकती है. यह अस्वीकृति का आधार बन सकती है.

पोस्ट-ग्रांट Oppositions कब وكيف दायर होते हैं?

पेटेंट grant के पश्चात भी Oppositions दायर की जा सकती हैं. यह पार्टियों को विरोध के तर्क और साक्ष्य प्रस्तुत करने का मौका देती है.

PCT मार्ग क्या है और मैं कैसे फायदा उठा सकता हूँ?

PCT मार्ग एक अंतरराष्ट्रीय आवेदन प्रक्रिया है जो एक ही फाइलिंग से कई देशों में चरणबद्ध संरक्षण की सुविधा देता है. Rajkot के आविष्कारक अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए PCT के माध्यम से फाइलिंग कर सकते हैं.

पेटेंट प्राप्त होने के बाद क्या करना चाहिए?

पेटेंट मिलते ही अधिकार संरचना को लागू करें, उल्लंघन के लिए निगरानी रखें और आवश्यकतानुसार राजकोट के भीतर अदालत या कोर्ट-ऑफ-इन्फ़्रिनजमेंट में कदम उठाएं.

क्या स्टार्टअप्स के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध हैं?

हाँ, कई योजनाएं और अविलंब आवेदन प्रक्रियाएं स्टार्टअप के लिए उपलब्ध हैं. DPIIT और IP India ऐसी सुविधाओं के साथ मार्गदर्शन देते हैं.

फाइलिंग के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट चाहिए?

योग्य पंक्ति में ड्राफ्टेड एप्लीकेशन, प्रवेश-सम्बन्धित पंक्तियां, डाटा शीट, डेस्क्रिप्शन और दावे शामिल रहते हैं. जरूरी भाषा में अनुवाद व प्रमाण पत्र भी चाहिए होते हैं.

क्या पेटेंट आवेदन में अनुवाद अनिवार्य है?

हाँ, यदि आवेदक का मूल दस्तावेज अंग्रेजी के अलावा किसी अन्य भाषा में है, तो उसेEnglish में अनुवाद करना अनिवार्य हो सकता है, ताकि मापदंड पूरे हों.

महत्वपूर्ण प्रश्न: क्या मुझे तुरंत मुकदमों की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए?

नहीं, पहले पेटेंट आवेदन की संरचना, दावे और व्यावहारिक विश्लेषण पर फोकस करें. फिर आवश्यक हो तो स्थानीय वकील की सहायता लें.

5. अतिरिक्त संसाधन

  1. Intellectual Property India (IP India) - पेटेंट, ट्रेडमार्क और डिज़ाइन के लिए आधिकारिक पोर्टल. https://ipindia.gov.in
  2. World Intellectual Property Organization (WIPO) - India Office - अंतरराष्ट्रीय पथ पर मार्गदर्शन और सहायता. https://www.wipo.int/portal/en/index.html
  3. Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT) - स्टार्टअप पेटेंट सुविधा और नीति जानकारी. https://dpiit.gov.in

6. अगले कदम: पेटेंट वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपने आविष्कार के क्षेत्र के अनुसार उपयुक्त विशेषज्ञता वाले वकील/Adv(adocate) की सूची बनाएं.
  2. राजकोट और पश्चिम गुजरात क्षेत्र में पेटेंट कानून में अनुभव देखने हेतु संपर्क करें.
  3. उनके पिछले केस रिकॉर्ड और क्लाइंट फीडबैक की पुष्टि करें.
  4. पहला परामर्श लें, लागत संरचना और फाइलिंग योजना स्पष्ट करें.
  5. IP इंडिया पोर्टल पर फाइलिंग-सम्बन्धी प्रश्नोत्तरी और उपलब्ध सेवाओं के बारे में पूछें.
  6. उचित दामों पर दायरे के अनुसार समयरेखा तय करें और ड्राफ्टिंग-स्तर पर सहायता लें.
  7. यदि संभव हो तो प्रो Bono या स्टार्टअप-विशिष्ट शुल्क विकल्पों पर विचार करें.

नोट: राजकोट निवासियों के लिए पेटेंट प्रक्रिया के दौरान स्थानीय उपलब्धताओं का लाभ उठाएं. आधिकारिक स्रोत देखें: IP India की साइट, WIPO इंडिया कार्यालय और DPIIT. (IP India: https://ipindia.gov.in, WIPO इंडिया: https://www.wipo.int/portal/en/index.html, DPIIT: https://dpiit.gov.in)

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