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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
गया, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

1. गया, भारत में निजी इक्विटी कानून के बारे में: गया, भारत में निजी इक्विटी कानून का संक्षिप्त अवलोकन

भारत में निजी इक्विटी (PE) कानून एक जटिल मिश्रण है जिसमें कॉम्पनी कानून, शेयर बाज़ार नियम, विदेशी निवेश नियम और कर-नीति शामिल हैं। मुख्य फ्रेमवर्क में Companies Act 2013, SEBI के नियम और FEMA के विनियम आते हैं। PE फंड आमतौर पर एएसपीवी के माध्यम से भारतीय कंपनियों में निवेश करते हैं।

PE फंड आमतौर पर AIF मार्ग से धन जुटाते हैं और इस क्षेत्र में Category I, II और III AIF विनियम प्रचलित हैं। इन फंडों का लक्ष्य धीरे-धीरे मूल्य संवर्द्धन और exits है।

"Foreign direct investment in India is allowed through automatic routes in most sectors up to specified limits." Department for Promotion of Industry and Internal Trade (DPIIT)

Open offers in listed companies SEBI के Takeover Regulations द्वारा नियंत्रित होते हैं ताकि सभी शेयरधारकों को समान अवसर दिया जा सके।
SEBI - Takeover Regulations

PE के क्षेत्र में हाल के वर्षों में निवेश के ढांचे में पारदर्शिता और फंडिंग संरचना का मजबूत नियमावली विकास हुआ है। साइट-स्तर पर SEBI, MCA और RBI के मानक अनुपालनों को समझना आवश्यक है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: निजी इक्विटी कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों के उदाहरण

केस-1: इनबाउंड PE निवेश की संरचना एवं अनुबंध आप भारत में किसी कंपनी में PE निवेश कर रहे हैं या SPV बना रहे हैं। आप ड्यू-डिलिजेंस, शेयर-होल्डिंग, राइट्स और पे-इन-के-प्रोफिट सहित अनुबंध चाहते हैं।

केस-2: विदेशी निवेश नियम और RBI-आमतौर पर automatic route विदेशी निवेश नीति और FEMA के प्रावधानों के अनुसार मंजूरी-नीति स्पष्ट करनी होगी।

केस-3: स्वतंत्र Open Offer और अधिग्रहण नियन्त्रण यदि सूचीबद्ध target पर नियंत्रण या भारी हिस्सेदारी प्राप्त होती है, तो SEBI SAST के अंतर्गत open offer के नियम लागू होते हैं।

केस-4: कॉन्वर्टेबल और डेरिवेटिव संरचनाएं CCPS, compulsorily convertible preference shares आदि के साथ निवेश की संरचना पर कानूनी सलाह जरूरी होती है।

केस-5: portfólio-स्तर पर पुनर्गठन और SPV-नियमन पोर्टफोलियो कारोबार के SPV-निर्माण, cross-border तर्क और कर-चालित संरचना बनाते समय अनुभवी advicionar की जरूरत होती है।

केस-6: exit-योजनाएं और IPO/exit-रणनीति PE निवेशक अपने प्रॉफिट के लिए IPO, sale to strategic buyer, या secondary sale की तैयारी करते हैं; इसके लिए निष्पादन-खाखों और संस्थागत-मैत्रीपूर्ण दस्तावेज आवश्यक होते हैं।

केस-7: कर और न्याय-प्रयोग पूंजी लाभ कर, डिविडेंड टैक्स, और हस्तांतरण से जुड़े TIFF नियमों पर स्पष्टता चाहिए।

उच्च-स्तरीय उदाहरण के तौर पर India में Flipkart के Walmart निवेश (2018) और Nykaa/Byju’s-जैसी स्टार्टअप फेज़िंग में PE फंडों की भूमिका शामिल है।

"Private equity transactions require careful due diligence and robust contractual protections."
SEBI, MCA सहित आधिकारिक स्रोत

3. स्थानीय कानून अवलोकन: गया, भारत में निजी इक्विटी को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

Companies Act 2013 निजीPlacement, शेयर-होल्डिंग, बोर्ड-गवर्नेंस, और मौलिक कॉर्पोरेट नियमों का ढांचा देता है।

SEBI (Substantial Acquisition of Shares and Takeovers) Regulations, 2011 सूचीबद्ध कंपनियों पर नियंत्रण परिवर्तन और open offer के नियम तय करते हैं।

Foreign Exchange Management Act, 1999 (FEMA) और FDI Policy विदेशी निवेश के मार्ग, सीमा-प्रतिबंध और अनुपालन के नियम तय करते हैं।

नोट Taxation संबंधी नियमों के लिए Income Tax Act भी PE-डील्स के लिए महत्वपूर्ण है, विशेषकर capital gains पर प्रावधान।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: फायदा-प्रश्न और उत्तर

PE क्या है और भारत में यह कैसे काम करता है?

PE फंड इकठ्ठा किया गया पूंजी एक निजी कंपनियों या SPV में निवेश करते हैं। इन फंडों को AIF विनियमन के अंतर्गत श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है।

PE डील कैसे शुरू होती है और किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है?

डील-फ्रेमवर्क में term sheet, share subscription agreements, shareholder agreements, due diligence रिपोर्ट और disclosure-आरोप शामिल होते हैं।

FDI आने पर कौन से रास्ते उपयुक्त हैं और कब अनुमति चाहिए होती है?

FDI के लिए automatic route अधिकतर सेक्टरों में उपलब्ध है; कुछ क्षेत्रों के लिए सरकार-पूर्व अनुमति चाहिए हो सकती है।

Open offer कब अनिवार्य है?

जब कोई व्यक्ति या समूह किसी listed कंपनी के शेयरों पर नियंत्रण या प्रभावशाली हिस्सेदारी प्राप्त करता है, तब open offer आवश्यक हो सकता है।

CCPS या अन्य convertible instruments का क्या महत्व है?

एसे instruments से भविष्य में इक्विटी फॉर्म में रीडिम्प्शन संभव होता है; इनकी कीमत-निर्धारण और डिवाइस सेहत महत्वपूर्ण होते हैं।

PE exit के सामान्य रास्ते कौन से हैं?

IPO, strategic sale, या secondary sale PE-portfolio- कंपनी से exit के प्रमुख तरीके हैं।

PE फंड के साथ टैक्स की मुख्य चिंता क्या है?

capital gains, dividend distribution tax और transfer pricing से जुड़ी आयकर-प्रावधान अक्सर महत्त्वपूर्ण होते हैं।

SEBI के साथ अनुपालन कैसे सुनिश्चित करें?

SEBI-regulations के भीतर disclosure, pricing norms और open offer-सम्बंधी नियमों का पालन आवश्यक है।

कौन से प्रत्यक्ष-न्यायिक उपाय उपलब्ध हैं?

कंपनी-मैनेजमेंट, minority protections, और clause-level remedies के लिए आर्बिटरेशन या कोर्ट-रिकवरी के उपाय हो सकते हैं।

PE के लिए SPV-strategy कितनी महत्वपूर्ण है?

SPV-structure से liability segregation, tax planning और cross-border पूंजी प्रवाह सुगम होता है।

नया PE-डील शुरू करने के लिए कौन सी तैयारी आवश्यक है?

कानूनी टीम से विस्तृत due diligence, regulatory checklists, और term-sheets की तैयारी आवश्यक है।

5. अतिरिक्त संसाधन: PE से संबंधित 3 विशिष्ट संगठन

  • IVCA - Indian Private Equity & Venture Capital Association. वेबसाइट: ivca.in
  • FICCI - Federation of Indian Chambers of Commerce & Industry. वेबसाइट: ficci.in
  • CII - Confederation of Indian Industry. वेबसाइट: cii.in

अन्य उपयोगी संसाधन Invest India - Foreign investment and startup ecosystem की सहायता के लिए: investindia.gov.in

6. अगले कदम: निजी इक्विटी वकील खोजने के लिए 7 चरण

  1. अपनी जरूरतों को स्पष्ट लिखें: इनबाउंड/आउटबाउंड, स्टार्टअप-फेज़, और exit-रणनीति सुव्यवस्थित करें।
  2. PE/VC-विशेषज्ञता वाले कानून firms की सूची बनाएं: असाइनमेंट-फ्रेमवर्क और prior-PE transaction अनुभव देखें।
  3. फीस-प्रकार और engagement letter समझें: success-fee, hourly-rate, retainer आदि स्पष्ट हों।
  4. ट्रैक रिकॉर्ड जाँचें: पिछले PE डील के केस-studies और client-references मांगें।
  5. उचित लोकल-और cross-border अनुभव वाले वकील चुनें: SPV-structure और cross-border funding में दक्षता आवश्यक है।
  6. पहला परामर्श लें: समय देकर नियम-उद्देश्यों पर स्पष्ट सलाह प्राप्त करें।
  7. संलग्न दस्तावेज और अगला कदम तय करें: engagement letter पर हस्ताक्षर और क़दम-योजना बनाएं।

व्यावहारिक सुझाव भारत निवासियों के लिए स्थानीय नियम समझना ज़रूरी है; स्थानीय counsel से मिलकर हर कदम पर regulatory compliance सुनिश्चित करें।

Official sources SEBI Takeover Regulations, MCA Companies Act, DPIIT FDI Policy का पालन करें.
SEBI - https://www.sebi.gov.in
Ministry of Corporate Affairs - https://www.mca.gov.in
DPIIT - https://dpiit.gov.in/foreign-direct-investment

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