मोतीहारी में सर्वश्रेष्ठ निजी इक्विटी वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
मोतीहारी, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. मोतीहारी, भारत में निजी इक्विटी कानून का संक्षिप्त अवलोकन

मोतीहारी सहित भारत के सभी हिस्सों में निजी इक्विटी कानून का आधार SEBI के नियमों से बनता है। निजी इक्विटी निधियाँ आम तौर पर Alternative Investment Funds (AIFs) के रूप में संरचित होती है। SEBI के अनुसार AIF Regulations 2012 फंड-निर्माण, पंजीकरण और निवेश-नीति को नियंत्रित करता है।

“The AIF Regulations aim to regulate and register Alternative Investment Funds in India.”

इन नियमों में फंड वर्गीकरण, न्यूनतम पूंजी, पूँजी-गृहण और निवेशक सूचना-प्रकटन जैसी बातें निर्धारित हैं। Motihari के रोजगारोन्मुख SMEs के लिए PE funding अब इन मानकों के भीतर आ सकती है। नियमन से स्थानीय निवेशक और उद्यमी सुरक्षित महसूस करते हैं।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • Motihari की एक खाद्य प्रसंस्करण कंपनी PE फंड से फंडिंग चाहती है; term sheet, investment agreement और shareholder agreement तैयार करना कठिन हो सकता है। एक कानूनी सलाहकार से स्पष्ट दस्तावेज संभव हैं।

  • फंड के साथ पंजीकरण, Category I या II के अनुरूप संरचना बनानी हो तो SEBI AIF Regulations का सही अनुपालन जरूरी है। अनुभवी अधिवक्ता चयनित ढाँचे को स्पष्ट कर सकता है।

  • डील-ड्यू डिलिजेंस के दौरान हस्ताक्षरित अनुबंधों में जोखिम,क्लॉज और दीर्घकालीन प्रतिबद्धताओं का परीक्षण जरूरी होता है। कानूनविद आपके पक्ष में तर्क-संरचना बनाते हैं।

  • विदेशी PE फंडों के मामले में FEMA और FDI नीति के अनुसार विदेशी निवेश मार्ग का चयन और अनुपालन आवश्यक है। एक योग्य वकील दोनों पक्षों को मार्गदर्शन देगा।

  • EXIT रणनीति, रेट-कारक और टैक्स-लागू परिणाम स्पष्ट करने हेतु negotiation-समझौतों की जरूरत होती है। एक अनुभवी advsiser स्पष्ट सलाह दे सकता है।

  • यदि Portfolio Company में विवाद उत्पन्न हो, तो IBC या अनुबंध-आधारित समाधान की योजना बनती है। एक वकील dispute-prevention के उपाय सुझाता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

निजी इक्विटी गतिविधियाँ बिहार के संदर्भ में SEBI, FEMA और Companies Act के दायरे में आती हैं। Motihari की कंपनियाँ इन कानूनों के अनुसार व्यवहार करें तो निवेशक सुरक्षा बढ़ती है। नीचे 2-3 प्रमुख कानून हैं जिनका स्थानीय अनुपालन ज़रूरी है।

  • SEBI (Alternative Investment Funds) Regulations, 2012 - AIF के पंजीकरण, Category I/II/III, disclosure और governance नियम निर्धारित करते हैं।

  • Companies Act, 2013 - Private companies की हक-हद, private placement, related party transactions और annual compliance को नियंत्रित करता है।

“Foreign investment in India is governed by FEMA and RBI master directions.”
  • Foreign Exchange Management Act, 1999 (FEMA) और FDI नीति - विदेशी निवेश और cross-border PE डील्स के लिए RBI के दिशानिर्देश लागू होते हैं।

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - डिफॉल्ट स्थिति में पुनर्गठन या दिवाला प्रक्रिया लागू हो सकती है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

निजी इक्विटी क्या है?

निजी इक्विटी एक पूँजी निवेश है जो निजी कंपनियों में पूँजी लगाता है। यह फंड्स पूँजी को इक्विटी या अन्य समूहित परिसम्पत्तियों में लगाते हैं।

मोतीहारी में PE funds कैसे काम करते हैं?

PE funds स्थानीय SME-उद्यमों में equity investment करते हैं। वे SPV के माध्यम से निवेश करते हैं और exit के रास्ते तय करते हैं।

PE fund में निवेश के फायदे और जोखिम क्या हैं?

फायदे में त्वरित पूँजी एक्सेस और पेशेवर प्रबंधन शामिल हैं। जोखिम में मूल्य अस्थिरता, exit timing और regulatory changes शामिल हैं।

निवेश के लिए पात्रता मापदंड क्या हैं?

आमतौर पर sophisticated investors और fund-institutional criteria की मांग होती है। Category I/II AIF में minimum investment thresholds होते हैं।

AIF बनाम VC fund में अंतर क्या है?

AIF एक broad umbrella है, जिसमें PE funds भी आते हैं। VC funds आम तौर पर early-stage ventures में निवेश करते हैं।

ड्यू-डिलिजेंस में किन चीजों की जाँच होती है?

कंपनी पब्लिक रिकॉर्ड, वित्तीय स्टेटमेंट, साथ ही कॉन्ट्रैक्ट- और कॉम्प्लायंस-टीकियाँ देखी जाती हैं।

आवश्यक दस्तावेज कौन-से होते हैं?

कंपनी के ज्ञापनों, financials, board resolutions, shareholding pattern और regulatory approvals जरूरी होते हैं।

Term sheet और agreement में क्या शामिल होना चाहिए?

Investment amount, stake, governance rights, liquidation preference और exit terms स्पष्ट हों।

EXIT विकल्प क्या होते हैं?

प्रमुख विकल्प में sale to strategic buyer, secondary sale और IPO शामिल हैं। exit timing पर निर्भर होता है।

PE फंड और portfolio company पर टैक्स कैसे लगता है?

PE फंड की टैक्स-स्टेटस AIF Category के आधार पर Investors के लिए pass-through हो सकता है; portfolio company पर corporate tax लगता है।

अगर विदेशी PE फंड हो तो क्या सावधानियाँ चाहिए?

FDI policy के अनुसार automatic route या government approval आवश्यक हो सकता है। FEMA दिशानिर्देशों का पालन अनिवार्य है।

कानूनी सलाहकार चुनते समय कौन-कौन से मानदंड देखें?

PE कानून में अनुभव, स्थानीय Bihar-प्रशासन की समझ, transparency और फीस-structure देखें।

Motihari में PE कानून के स्थानीय चैलेंज क्या हैं?

न्यायिक प्रक्रियाओं तक पहुँच, स्थानीय व्यवसाय-परंपराओं और वित्तीय रिकॉर्ड-मानक पर ध्यान दें। एक स्थानीय advsiser मार्गदर्शक होगा।

कानूनी सहायता कब और कैसे लें?

डील-चरण शुरू होने से पहले कॉन्सेप्ट-मीटिंग करें, फिर engagement letter पर हस्ताक्षर करें ताकि समय-सीमा नियंत्रित रहे।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • IVCA - Indian Private Equity & Venture Capital Association - उद्योग-समूह जो PE/VC समुदाय को संपर्क-स्तर पर जोड़ता है। वेबसाइट: ivca.in

  • SEBI - भारतीय प्रतिभूति बाजार और AIF नियमों के नियामक। वेबसाइट: sebi.gov.in

  • Ministry of Corporate Affairs (MCA) - कंपनी कानून और compliance से सम्बंधित official पोर्टल। वेबसाइट: mca.gov.in

6. अगले कदम

  1. अपने व्यवसाय के उद्देश्य और पूँजी-आवश्यकता स्पष्ट करें।
  2. Motihari-आधारित PE वकील/कानूनी फर्म के साथ initial consultation लें।
  3. कानूनी फेम-सेक्शन और regulatory requirements की एक चेक-लिस्ट बनाएं।
  4. डील-ड्यू डिलिजेंस के लिए आवश्यक दस्तावेज एकत्र करें (financials, governance आदि)।
  5. Term sheet और investment agreement का ड्राफ्टिंग/संवाद शुरू करें।
  6. SEBI-फॉर्म और FEMA-FDI आवश्यकताओं के अनुसार पंजीकरण/अनुमतियाँ सुनिश्चित करें।
  7. Engagement letter पर हस्ताक्षर कर fees, timelines और deliverables स्पष्ट करें।

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