चेन्नई में सर्वश्रेष्ठ परियोजना वित्त वकील

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A K Mylsamy Associates LLP
चेन्नई, भारत

1964 में स्थापित
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ए के मायल्सामी एसोसिएट्स एलएलपी भारत में एक प्रतिष्ठित वकील फर्म है, जो विभिन्न अभ्यास क्षेत्रों में व्यापक...
Chennai Law Associates
चेन्नई, भारत

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Chennai Law Associates (CLA) is a distinguished law firm based in Chennai, India, offering comprehensive legal solutions across banking, corporate, dispute resolution, employment, intellectual property, and real estate matters. Guided by over 30 years of collective experience, the firm provides...
Samvad Partners
चेन्नई, भारत

2013 में स्थापित
उनकी टीम में 150 लोग
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Samvād: Partners एक पूर्ण-सेवा भारतीय कानून फर्म है जिसकी बैंगलोर, चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई और नई दिल्ली में कार्यालय हैं। हम...
चेन्नई, भारत

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Absolute Legal भारत में एक प्रतिष्ठित बहु-विशेषज्ञता वाला लॉ फर्म है, जिसे विभिन्न प्रकार के कानूनी मामलों को संभालने का 25...
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1. चेन्नई, भारत में परियोजना वित्त कानून का संक्षिप्त अवलोकन

परियोजना वित्त एक नकदी प्रवाह-आधारित ऋण संरचना है जो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए प्रयुक्त होती है।

एक स्पेशल पर्पज वैल्यू SPV बनाकर सभी अनुबंध, EPC, O&M और PPA आदि एक ही इकाई के भीतर सीमित जोखिम के साथ रखे जाते हैं।

lenders को परियोजना के नकदी प्रवाह और अनुबंध-आधारित सुरक्षा पर निर्भर रहना होता है ताकि ऋण चुकाय जा सके।

चेन्नई क्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और सरकारी इकाइयों के साथ यह ढांचा खास तौर पर उपयोगी रहता है।

नियामक दायित्वों के अनुरूप RBI, IBBI आदि संस्थान परियोजना-वित्त के ढांचे और दिवाला-निवारण में दिशा-निर्देश देते हैं।

- उद्धरण: “परियोजना वित्त मॉडल सामान्यतः SPV के जरिये जोखिमों और नकदी प्रवाह को पृथक कर के लंबी अवधि के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स हेतु वित्त पोषण को सक्षम बनाता है।”

Source: IBBI

- उद्धरण: “Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 provides for a time-bound resolution process for corporate insolvency.”

Source: IBBI

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे चेन्नई-आधारित वास्तविक परिस्थितियाँ बताती हैं कि परियोजना वित्त में कानूनी सहायता क्यों जरूरी होती है।

  • चयनित PPA और बैंक ऋण दस्तावेज - चेन्नई-आधारित एक सौर डेवलपर को TANGEDCO के साथ PPA मिलते समय ऋण-समझौते और EPC अनुबंध की सख्त जाँच की जरूरत होती है।
  • PPP अनुबंध और concession agreements - चेन्नई पोर्ट ट्रस्ट या TNPR समूह के साथ किसी PPP प्रोजेक्ट के लिए SPV, concession agreement, सुरक्षा-घोषणाएँ और निर्माण-समझौते चाहिए होते हैं।
  • विदेशी ऋण और ECB अनुपालन - विदेश से ऋण लेने पर FEMA अनुपालनों, वैकल्पिक मुद्रा विनियमों और पुनर्गठन-योजनाओं का कानूनी विश्लेषण आवश्यक रहता है।
  • IBS या दिवाला रीकंसीलेशन से जुड़ी स्थितियाँ - यदि ऋण चुकाने में देरी हो रही है, तो IBC के अंतर्गत निष्कर्षण और समाधान-योजनाओं की तैयारी में वकील की भूमिका आवश्यक होती है।
  • रेगुलेटरी अनुमतियाँ और भूमि-प्राप्ति - TNERC, TNPCB आदि के साथ प्रोजेक्ट-स्केल अनुमतियाँ और भूमि-स्वामित्व के दस्तावेजों की वैधता की जाँच के लिए कानूनी सलाह चाहिए।
  • अनुबंध-आधारित सुरक्षा - SARFAESI के तहत सिक्योरिटी इंटरेस्ट के प्रवर्तन और सिक्योरिटी एसेट्स के निर्गमन-प्रक्रिया के लिए वक़ील की सहायता आवश्यक होती है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

चेन्नई, भारत में परियोजना वित्त को प्रभावित करने वाले प्रमुख कानून नीचे दिए गये हैं।

  • कंपनी अधिनियम 2013 - SPV बनाकर परियोजना-संबंधी सभी अनुबंधों और कॉरपोरेट गवर्नेंस को संरचित करता है।
  • इन्सॉल्वेंसी ऐंड बैंक्रप्सी कोड 2016 (IBC) - कॉरपोरेट Insolvency-प्रक्रिया को एक समय-सीमित ढांचे में लाने के उद्देश्य से कानून है।
  • SARFAESI अधिनियम 2002 - सुरक्षा-हितधारकों के ऋण-चुकौती के लिए सिक्योरिटी राइट्स के प्रवर्तन की प्रक्रिया सरल करता है।
- उद्धरण: “The Code provides for a time-bound resolution process for corporate insolvency.”

Source: IBBI

- उद्धरण: “The SARFAESI Act enables securitization of standard assets and enforcement of security interest.”

Source: Ministry of Finance

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

परियोजना वित्त क्या है?

परियोजना वित्त एक संरचना है जिसमें मुख्य ऋण चुकौती परियोजना के नकदी प्रवाह से होती है। SPV बनाकर जोखिम अलग किया जाता है।

SPV क्या होता है और क्यों जरूरी है?

SPV एक अलग कानूनी इकाई है जो परियोजना के लिए ऋण और अनुबंधों को अलग रखती है। यह ऋण-जोखिम को सीमित करने में मदद करता है।

चेन्नई में कौन से अनुबंध वित्त को प्रभावित करते हैं?

PPA, EPC, O&M और concessional agreements परियोजना वित्त के प्रमुख अनुबंध हैं। इनकी पुष्टि व सुरक्षा उपाय अनिवार्य हैं।

IBC कैसे काम करता है और मुझे कब चाहिए?

IBC एक समय-सीमित दिवाला-प्रक्रिया है जो दिवालिया इकाइयों के लिए समाधान ढूंढती है। अगर ऋण चुकौती में देरी हो, यह जरूरी हो सकता है।

FEMA के अंतर्गत cross-border ऋण कैसे संभालें?

ECB और अन्य विदेशी ऋणों के लिए FEMA अनुपालन आवश्यक होता है, जिसमें तरजीह-स्तर, डेब्ट-रिपैमेंट और currency risk का प्रबंधन शामिल है।

टैक्स के प्रश्न: परियोजना वित्त पर प्रभाव?

कई मामलों में ट्रांसफर-प्राइसिंग, डिपॉज़िट-टैक्स और GST-प्रावधान लागू होते हैं। कर-योजना सामान्यतः SPV-स्तर पर होती है।

कौन-से दस्तावेज़ जरूरी होंगे?

Due-diligence के लिए title deed, land ownership, permits, licenses, PPA, EPC, and O&M contracts, financial model और bank covenants आवश्यक होंगे।

क्या स्थान-विशेष नियम हैं?

चेन्नई में TNERC, TNPCB और अन्य स्थानीय निकायों के नियम प्रभावी होते हैं, खासकर ऊर्जा, जल-औषधि और परिवहन परियोजनाओं में।

कानूनी सलाह कैसे शुरू करें?

स्थानीय किरदारों के साथ लक्ष्य पूर्व-ड्यू-डिलिजेंस और एक स्पष्ट term sheet बनाकर एक अनुभवी परियोजना-वित्त वकील से मिलना सबसे पहले कदम है।

डिफॉल्ट के समय क्या होता है?

डिफॉल्ट की स्थिति में सेक्रोरिटीकर्ताओं के हित सुरक्षित होते हैं। IBC और SARFAESI के प्रावधान समाधान-योजना प्रदान करते हैं।

विदेशी निवेश कितनी सुरक्षित है?

विदेशी निवेश के लिए RBI और FEMA के दिशानिर्देश होते हैं, ताकि विदेशी निधि के प्रवाह और सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

प्रोजेक्ट-फाइनेंस डिस्प्यूट का उपचार?

डिस्प्यूट रेज़ॉल्यूशन के लिए arbitration और courts दोनों रास्ते उपलब्ध होते हैं, परन्तु contract-आधारित dispute resolution सबसे आम है।

5. अतिरिक्त संसाधन

6. अगले कदम

  1. परियोजना-विवरण और SPV संरचना का स्पष्ट निर्धारण करें।
  2. लाभान्वित lenders और regulatory approvals की पहचान करें।
  3. चेन्नई-आधारित परियोजना-वित्त वकील से प्रारम्भिक परामर्श लें।
  4. ड्यू-डिलिजेंस और कॉन्ट्रैक्ट-ड्राफ्टिंग के लिए टीम बनाएं।
  5. Term sheet और loan agreements का मसौदा तैयार करें।
  6. स्थानीय अनुमतियाँ और conforming documents पूर्ण करें।
  7. क्लोजिंग के बाद पोर्टफोलियो मॉनिटरिंग और कॉवनेंट-ट्रैकिंग करें।
Official source: Ministry of Corporate Affairs

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