हरियाणा में सर्वश्रेष्ठ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) वकील

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Oberoi Law Chambers
हरियाणा, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
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Hindi
फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
जैसा कि देखा गया

1. हरियाणा, भारत में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) कानून के बारे में: [ हरियाणा, भारत में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) कानून का संक्षिप्त अवलोकन ]

हरियाणा में सार्वजनिक-निजी भागीदारी एक नियमनबद्ध माध्यम है, ताकि सार्वजनिक बुनियादी सुविधाएं निजी क्षेत्र के निवेश से विकसित हो सकें। यह दीर्घकालीन अनुबंध पर आधारित मॉडल है, जिसमें निजी पार्टी डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी लेती है।

मुख्य सिद्धांत में जोखिम का उचित आवंटन, पूरी लाइफ साइकिल पर नियंत्रण, और पारदर्शी निविदा प्रकिया शामिल हैं।approval-आधारित प्रक्रियाओं के साथ, सरकार परियोजनाओं की गुणवत्ता और लागत-नियंत्रण सुनिश्चित करती है।

हरियाणा में इस क्षेत्र के लिए राज्य नीति और केंद्रीय दिशानिर्देशन से संरेखित नियम चल रहे हैं।

PPP is a long-term contract between a government authority and a private party for providing a public asset or service and for the associated performance of operations and maintenance.

Source: National PPP Guidelines, Government of India

Key principle of PPP is risk transfer to private sector and lifecycle maintenance of assets.

Source: NITI Aayog PPP Guidelines

हरियाणा के नागरिकों के लिए यह जरूरी है कि वे परियोजना-स्तर पर लागत, समय-सीमा, जोखिम और अनुदान नियमों को समझें। सरकारी विभागों के साथ संयुक्त प्रयास उन्हें बेहतर परिणाम दे सकते हैं।

आधिकारिक स्रोत देखें: NITI Aayog, National PPP Portal, HSIIDC, HERC

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: [ सार्वजानिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। हरियाणा, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें ]

नीचे 4-6 वाजिब परिदृश्य हैं, जिनमें हरियाणा के प्रशासनिक ढांचे के संदर्भ मिलते हैं। इन परिस्थितियों में एक अधिवक्ता की मदद जरूरी हो सकती है।

  • आवंटन-आधारित दस्तावेज और Concession Agreement (CA) की तैयारी और संशोधन। हरियाणा में SPP/PWD विभागों के साथ अनुबंध शैली मिलती है।
  • टेंडरिंग प्रक्रिया, RFQ और RFQ-आधारित चयन में कानूनी सलाह। पारदर्शी निविदा और बिड-चयन के नियमों की रक्षा जरूरी होती है।
  • भूमि अधिग्रहण, सरकारी अधिग्रहण कानून और भूमि-स्वामित्व विवादों की कानूनी जाँच। LAR Act 2013 के अनुरूप प्रक्रिया चाहिए।
  • पर्यावरण, मंजूरी, और आवंटन-स्वीकृति (Environment、Forest、Water) से जुड़ी बाधाओं का समाधान। हरियाणा में स्थानीय पर्यावरण नियम लागू होते हैं।
  • जोखिम आवंटन, परिवर्तन-यंत्र (change in law) और फोर्स मेजरर की घटनाओं में संरचना-सम्मत बदलाव चाहिए होते हैं।
  • विधि-सह अर्जन (Tariff/Revenue) विवाद, arbitration और dispute resolution के लिए उपयुक्त ढांचा।

उच्च-स्तरीय उदाहरण: हरियाणा में सड़क-निर्माण, जल-संरक्षण और शहरी बुनियादी सुविधाओं में PPP के कई टेंडर जारी होते हैं। कानूनी दलालों की मदद से सुसंगत डॉक्यूमेंटेशन सुनिश्चित करें।

सम्वन्धित स्रोत देखें: NITI Aayog, National PPP Portal, HSIIDC

3. स्थानीय कानून अवलोकन: [ हरियाणा, भारत में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें ]

हरियाणा में PPP से जुड़े कानून में 2-3 प्रमुख कानून और नीति-निर्देश आते हैं। नीचे प्रमुख कानूनों के नाम दिए गए हैं।

  • Public Private Partnership Policy, Haryana - राज्य स्तर पर PPP परियोजनाओं के लिए नीति-निर्देशन का आधार बनती है।
  • Arbitration and Conciliation Act, 1996 - PPP अनुबंधों में विवाद समाधान के लिए आधिकारिक ढांचा प्रदान करता है।
  • Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition Act, 2013 (LAR Act 2013) - भूमि अधिग्रहण के मामले में उचित मुआवजे और पारदर्शिता की गारंटी देता है, जब PPP परियोजनाओं में भूमि आवश्यक हो।

इन कानूनों के साथ केंद्रीय नियम और केंद्र-राज्य समन्वय भी लागू होते हैं। हरियाणा के स्थानीय विभागों के निर्देश कामकाज को प्रभावित करते हैं।

उद्धरण स्रोत देखें: National PPP Portal, Legislative Department, HERC

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: [ 10-12 प्रश्न-उत्तर जोड़े तैयार करें ]

पीपीपी क्या है?

पीपीपी एक दीर्घकालीन अनुबंध है जिसमें सरकार और निजी भागीदारी मिलकर सार्वजनिकAsset या सेवा देती है।

हरियाणा में PPP परियोजनाओं के लिए क्या आवश्यक दस्तावेज होते हैं?

आरएफपी, कॉनसेशन-अग्रीमेंट, लाइसेंस, environmental clearance, land acquisition दस्तावेज और tariffication से जुड़े प्रमाण-पत्र आवश्यक हो सकते हैं।

क्या मुझे हरियाणा में PPP के लिए वकील चाहिए?

हाँ, क्योंकि यह अनुबंध, निविदा और dispute resolution से जुड़ा होता है। विशिष्ट PPP-विशेषज्ञ अधिवक्ता बेहतर भूमिका निभाते हैं।

टेंडरिंग प्रोसेस कैसे काम करती है?

सरकारी विभाग RFQ और RFP जारी करता है। उम्मीदवार कंपनियाँ जवाब भेजती हैं और चयनित bid को कॉन्ट्रैक्ट के लिए बुलाया जाता है।

क्या भूमि अधिग्रहण PPP में आम होता है?

हाँ, कई PPP परियोजनाओं में भूमि अवश्य चाहिए होती है। LAR Act 2013 के अनुरूप मुआवजा और compensation होता है।

जोखिम किसे जाता है?

डिज़ाइन-फाइनांस-निर्माण से संचालन तक का जोखिम अनुबंध-आधारित होता है। सामान्यतः निर्माण-रिलायंस, राजस्व-रिस्क और कानून-परिवर्तन जोखिम विभाजित होते हैं।

फोर्स मेजरर और परिवर्तन- कानून पर क्या प्रभाव पड़ता है?

इन स्थितियों में योजना-समय और लागत परिवर्तन संभव होते हैं। अनुबंध में संबंधित क्लॉज़ लिखित होनी चाहिए।

टैरिफ तय करने की प्रक्रिया कैसी है?

टैरिफ सामान्यतः रेगुलेटर द्वारा तय होता है या CPI/इनफ्लेशन-ड्रिवन टैरिफ मॉडल के अनुसार संशोधित होता है।

विवाद कैसे सुलझते हैं?

कानून अवसर देता है कि पहले नीचे-स्तरीय समन्वय हो और समस्या हल न हो तो arbitration या court के माध्यम से निर्णयन हो।

कौन से क्षेत्र PPP के लिए सबसे उपयुक्त हैं?

हरियाणा में सड़क, जल-प्रदाय, सीवरेज, शहरी बुनियादी ढांचा, ऊर्जा वितरण आदि प्रमुख क्षेत्र हैं।

क्या सामान्य कर-सेवा नियम PPP पर लागू होते हैं?

हां, जीएसटी, सेवाकर आदि कर-नियम अनुबंध के बावजूद लागू रहते हैं और कर-आचार संहिता के अनुसार होते हैं।

कानूनी सलाह लेने पर कितना खर्च हो सकता है?

परियोजना के आकार और जटिलता के अनुसार फीस भिन्न होती है। प्रारम्भिक अध्ययन के लिए कंसल्टेशन सामान्यतः कम लागत होता है।

5. अतिरिक्त संसाधन: [ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों की सूची बनाएं ]

  • National PPP Portal - PPP से जुड़ी मार्गदर्शिका और सूचीबद्ध परियोजनाएं. ppp.gov.in
  • NITI Aayog - PPP नीति-निर्देशन और दिशानिर्देश. niti.gov.in
  • HSIIDC - हरियाणा के औद्योगिक और बुनियादी ढांचा PPP के लिए राज्य स्तरीय निगम. hsiidc.org.in

उपरोक्त स्रोत हरियाणा निवासियों के लिए स्थानीय संदर्भ प्रदान करते हैं।

6. अगले कदम: [ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया ]

  1. अपनी परियोजना का सार-संक्षेप बनाएं- क्षेत्र, अनुमानित बजट और टाइमलाइन स्पष्ट करें।
  2. हरियाणा-पीपीपी विशेषज्ञों के लिए ऑनलाइन लिस्टिंग और संपर्क देखें।
  3. कानूनी अनुभव, क्षेत्र विशेषज्ञता और पूर्व PPP अनुबंध देखें।
  4. शुरुआती परामर्श के लिए कम-से-कम 3 अधिवक्ताओं से चर्चा करें।
  5. समझौता-ड्राफ्टिंग, due-diligence और risk-allocation पर स्पष्ट पूछताछ करें।
  6. पूर्व-टेंडर स्टेज के दौरान प्राथमिकता-ऑडिट और compliance चेक करें।
  7. अनुबंध-समझौते के बाद, dispute-resolution योजना और arbitration-provisions को अंतिम रूप दें।

व्यावहारिक सलाह: हरियाणा के वास्तविक-समय कानून-परिवर्तन के अनुसार, स्थानीय कानून-फर्मों से वार्ता करें। पहले से clear communication रखिए ताकि project risk कम हो।

नोट: उपर्युक्त जानकारी सार्वजनिक-निजी भागीदारी के व्यवहारिक नियमों के अनुरूप है। उचित कदम उठाने के लिए स्थानीय अधिवक्ता से परामर्श आवश्यक है।

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