जोधपुर में सर्वश्रेष्ठ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) वकील

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Lawyers in Jodhpur - Mehta Chambers
जोधपुर, भारत

1945 में स्थापित
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मंहता चैंबर्स की उत्पत्ति 1945 में जोधपुर में एक पारिवारिक पारंपरिक विधिक कार्यालय के रूप में हुई थी और यह व्यापक...
Kothari & Associates
जोधपुर, भारत

1984 में स्थापित
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कोठारी एंड एसोसिएट्स एक प्रगतिशील, पूर्ण-सेवा विधिक फर्म है जिसकी स्थापना 1984 में हुई थी और इसका मुख्यालय राजस्थान...
जैसा कि देखा गया

1- जोधपुर, भारत में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) कानून का संक्षिप्त अवलोकन

पीपीपी एक दीर्घकालिक अनुबंध ढांचा है जिसमें सार्वजनिक व्यवस्था के लिए वित्त-समर्थन निजी पक्ष से लिया जाता है और संचालन-रखरखाव का दायित्व तय अवधि के लिए निजी भाग को सौंप दिया जाता है।

जोधपुर में लागू ढांचा केन्द्र-राज्य नीति के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन की निर्णय-शक्ति पर निर्भर है। नगरपालिका स्तर पर यह विशेषकर जल-प्रदाय, ठोस कचरा प्रबंधन और सड़क-निर्माण जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों में प्रयुक्त होता है।

“PPP एक संरचित दीर्घकालिक साझेदारी है जिसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्र मिलकर बुनियादी ढांचा और सेवाएं देते हैं”

स्रोत: NITI Aayog के PPP-इनफ्रास्ट्रक्चर मार्गदर्शन से यह परिभाषा संदर्भित है; अधिक जानकारी के लिए देखें NITI Aayog और Department of Economic Affairs के PPP-सम्बन्धित दस्तावेज

“PPP प्रोजेक्ट्स के लिए स्पष्ट पॉलिसी फ्रेमवर्क, जोखिम-वितरण और मजबूत गवर्नेंस आवश्यक है”

स्रोत: Department of Economic Affairs, Government of India; संदर्भ हेतु देखें DEA और PPP Centre

2- आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं जिनमें जोधपुर के निवासी, व्यवसायी या संस्थान कानूनिक सहायता लेते हैं। प्रत्येक परिदृश्य में एक कानूनी विशेषज्ञ की भूमिका स्पष्ट है।

  • टेंडरिंग और निविदा जाँच - जल-प्रदाय या सड़क परियोजनाओं में निविदा दस्तावेज, मूल्यांकन मापदंड और अनुबंध-शर्तें स्पष्ट होनी चाहिए। अनुचित शर्तों की चुनौती में वकील की मदद आवश्यक रहती है ताकि चयन-प्रक्रिया पारदर्शी रहे और अनुचित लाभ रोका जा सके।
  • अनुबंध-लेखन और जोखिम वितरण - कंसेशन एग्रीमेंट, एसवीपी संरचना, गारंटी-टर्म और जोखिम-बाँटाव स्पष्ट लिखना जरूरी है। वास्तविक उदाहरण में जोधपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड द्वारा होने वाले प्रोजेक्ट्स पर ऐसी जटिलताएं आम हैं।
  • विवाद समाधान और त्वरित राहत - परियोजना-समाप्ति, मापदंड-अपेक्षा, बोनस-छूट आदि पर विवाद उठ सकते हैं। एग्रीमेंट में आर्बिट्रेशन-समाधान पद्धति और स्थान स्पष्ट होनी चाहिए।
  • स्थानीय नियमन और पर्यावरण-अनुमति - राजस्थान के स्थानीय नियम और पर्यावरणीय मंजूरी से जुड़ी बाधाओं को समझना आवश्यक है ताकि विलंब से बचा जा सके।
  • भूमि-आवंटन और भूमि-अधिग्रहण - जमीन की स्थिति, लीज-एग्रीमेंट और उभय पक्षीय अधिकारों का सत्यापन करें ताकि दूसरे दावों से परियोजना रोड़ा न बने।
  • संरचना-डिज़ाइन और प्रदर्शन-USP - प्रोजेक्ट-डिज़ाइन, प्रदर्शन-मानक और अनुबंधानुसार निगरानी कैसे होगी, इसकी स्पष्टता जरूरी है।

3- स्थानीय कानून अवलोकन

जोधपुर, राजस्थान में PPP परियोजनाओं के लिए निम्न कानून और प्रशासनिक उप-निर्देश प्रचलित रहते हैं। नीचे तीन प्रमुख क्षेत्र-स्तर के कानून-स्तम्भ दिए गए हैं।

  • भारतीय संविदा कानून 1872 - अनुबंध निर्माण, प्रदर्शन-शर्तें, अनुबंध-तोड़-फोड़ और क्रियान्वयन के सामान्य नियम यहां आते हैं। यह PPP के रिश्तों की नींव है।
  • अर्बिट्रेशन एवं समन्वय अधिनियम 1996 (संशोधित 2019) - PPP परियोजनाओं में विवाद के त्वरित समाधान के लिए आर्बिट्रेशन-सह-विवाद-निपटान मानक स्थापित करता है।
  • कंपनी एक्ट 2013 - SPV (Special Purpose Vehicle) के गठन, निदेशक-उत्तरदायित्व, लेखापरीक्षा और कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियम इस एक्ट के अंतर्गत आते हैं।

स्थानीय प्रावधानों के लिए राज्य-स्तर पर राजस्थान सरकार और जोधपुर नगर निगम (JMC) द्वारा जारी दिशानिर्देशों को भी ध्यान में रखना चाहिए।

सूत्र-उद्धरण:

“PPP के लिए स्पष्टता, जिम्मेदारी-आर्केस्ट्रेशन और अनुबंध-पालन आवश्यक हैं”

- स्रोत: Department of Economic Affairs, Government of India

“PPP-डायनेमिक्स में संस्थागत-गवर्नेंस और कानूनी clarity सबसे महत्वपूर्ण है”

- स्रोत: NITI Aayog, Government of India

उद्धरणों के संदर्भ हेतु देखें: PPP Centre

4- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PPP क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?

PPP एक दीर्घकालिक साझेदारी है जिसमें निजी क्षेत्र से पूंजी और प्रबंधन लाते हैं जबकी सार्वजनिक क्षेत्र सेवाएं और फायदेमंद परिणाम सुनिश्चित करता है. यह ढांचा शहरों के लिए सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के साथ लागत-प्रभावशीलता भी प्रस्तुत करता है.

जोधपुर में PPP परियोजनाओं के लिए कौन से कदम आवश्यक होते हैं?

सबसे पहले परियोजना की आवश्यकताएं स्पष्ट करें, फिर निविदा-डाक्यूमेंट और अनुबंध-शर्तों को अंतिम रूप दें. इसके बाद SPV-गठन, वित्त-पहचान, जोखिम-वितरण और समाधान-नियम तय करें.

कौन से प्रमुख जोखिम PPP अनुबंधों में बंटे जाते हैं?

प्रारम्भिक वित्त, निर्माण-जोखिम, संचालन-रखरखाव, मांग-जोखिम और राजस्व-जोखिम प्रमुख हैं. इन्हें स्पष्ट रूप से अनुबंध में निर्धारित किया जाना चाहिए.

क्या स्थानीय परियोजनाओं के लिए environmental clearances ज़रूरी हैं?

हाँ, राजस्थान में जल-प्रदाय, सड़क और जलवायु-प्रभाव से जुड़ी परियोजनाओं के लिए पर्यावरण-आयोजन (EIA) और स्थानीय अनुमतियाँ आवश्यक हो सकती हैं. निर्माण-पूर्व आकलन जरूरी है.

यदि अनुबंध-विवाद हो जाए तो क्या करना चाहिए?

पहले बातचीत और निकट-वितरित समाधान, फिर arbitration या lok-adalat जैसे चयनित तरीकों का चयन करें. अनुबंध में arbitration-venue स्पष्ट होनी चाहिए.

SPV कैसे बनता है और किस कानून के अंतर्गत आता है?

SPV आमतौर पर Companies Act 2013 के अंतर्गत एक कानूनी इकाई के रूप में पंजीकृत होता है. इसके निदेशक, पूंजी-रचना और कॉरपोरेट गवर्नेंस के नियम यहाँ लागू होते हैं.

जोधपुर में PPP हेतु किन बुनियादी दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है?

आमतौर पर feasibility study, detailed project report, tender documents, draft concession agreement और SPV-structuring दस्तावेज आवश्यक होते हैं.

क्या PPP परियोजनाओं के लिए निजी भाग के लिए आय-कर लाभ मिलते हैं?

PPP परियोजनाओं के राजस्व, ऋण-व्यवस्था और देय-कर व्यवस्था परियोजना-विशिष्ट होती है. आय-कर और GST की सही दरें लागू दस्तावेजों में स्पष्ट रहती हैं.

Jodhpur Smart City Limited (JSCL) से PPP संबंधित क्या उम्मीदें हो सकती हैं?

JSCL जोधपुर में स्मार्ट-शहर परियोजनाओं के लिए PPP-समर्थ मॉडल प्रायः अपनाता है. परियोजना-वार ठोस अनुबंध और प्रदर्शन-आधारित भुगतान शामिल हो सकते हैं.

क्या स्थानीय अदालत इस प्रकार के PPP मामलों का निर्णय कर सकती है?

हां, यदि अनुबंध-निहीत विवाद अदालत के दायरे में आता है तो राजस्थान उच्च न्यायालय या क्षेत्रीय अदालत में चुनौती दी जा सकती है. arbitration-clauses से विवाद-निपटान का मार्ग भी संभव है.

PPP प्रोजेक्ट के लिए एक कानूनी सलाहकार कैसे चुनें?

अनुभव, infrastructure-प्रोजेक्टों के साथ domain-विशेषज्ञता, Rajasthan-राज्य-नियमों का ज्ञान, और पूर्व-समझौते-निपटान के प्रमाण देखें. स्थानीय संदर्भ में उपलब्धता महत्त्वपूर्ण है.

5- अतिरिक्त संसाधन

  • PPP Centre - PPP केन्द्र सरकार, केंद्रीय स्तर पर PPP परियोजनाओं के लिए मार्गदर्शन और संसाधन देता है। लिंक: ppp.gov.in
  • Department of Economic Affairs (DEA) - PPP नीति-निर्देश और मॉडल-एग्रीमेंट संबंधी दस्तावेज उपलब्ध। लिंक: dea.gov.in
  • NITI Aayog - कुल मिलाकर नीति-निर्माण और PPP-सम्बन्धी निर्देश। लिंक: niti.gov.in

6- अगले कदम

  1. अपना परियोजना उद्देश्य और स्कोप स्पष्ट करें ताकि उचित वैधानिक मार्ग निर्धारित किया जा सके.
  2. जोधपुर के क्षेत्रीय नियमों और प्रशासनिक-आवश्यकताओं की सूची बनाएं.
  3. PPP विशेषज्ञ, अनुभवी वकील या कानूनी सलाहकार के साथ प्रारम्भिक बैठक करें.
  4. निविदा दस्तावेज, draft concession agreement और SPV-घटक के बारे में विशेषज्ञ से समीक्षा कराएं.
  5. कानूनी due diligence: भूमि, पर्यावरण, भूमि-हक और permits सत्यापित करें.
  6. बजट, वित्तपोषण और राजस्व-योजनाओं के लिए वित्तीय सलाहकार से चर्चा करें.
  7. सब कुछ मिलकर एक solid action plan बनाएं और स्थानीय प्रशासन के सामने प्रस्तुति दें.

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