सिकंदराबाद में सर्वश्रेष्ठ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) वकील

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Vakils Associated
सिकंदराबाद, भारत

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वकील्स एसोसिएटेड भारत में एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है, जो विभिन्न अभ्यास क्षेत्रों में व्यापक कानूनी सेवाओं के लिए...
DMR Law Chambers
सिकंदराबाद, भारत

1984 में स्थापित
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डीएमआर लॉ चैंबर्स, जिसका स्थापना 1984 में श्री डी. माधव राव द्वारा की गई थी, जो आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट बार के वरिष्ठ...
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1. सिकंदराबाद, भारत में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) कानून का संक्षिप्त अवलोकन

सिकंदराबाद तेलंगाना राज्य के अंतर्गत आता है और यहाँ पीपीपी परियोजनाएं मुख्य रूप से नगर-निगम तंत्र, जल-निगम, सड़कों एवं शहरी बुनियादी ढांचे में उपयोग की जाती हैं। राज्य सरकार की नीति-योजनाओं और केंद्र के मार्गदर्शक सिद्धांतों से PPP प्रक्रियाएं संचालित होती हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य- सिकंदराबाद के सेक्टर में निजी भागीदारी के लिए जिन्हें ठोस अनुबंध, प्रदर्शन-आधारित भुगतान और दीर्घकालीन अनुबंध-संबंध की आवश्यकता है, वे सामान्य तौर पर मॉडल कॉनसेशन एग्रीमेंट (MCA) और नीति-मार्गदर्शन के अधीन होते हैं।

पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप कानून का एक ठोस कानून एकीकृत रूप से नहीं है; बल्कि यह नीति-नीतियाँ, मानक अनुबंध और क्षेत्र-विशिष्ट अधिनियमों का मिश्रण है।

ऊपर बताये गये ढांचे के अंतर्गत सिकंदराबाद में विकास परियोजनाओं के लिए निम्नलिखित स्रोत प्रयोग में आते हैं: केन्द्र-स्तरीय दिशानिर्देश, तेलंगाना राज्य PPP नीति, और स्थानीय निकायों के निर्णय।

“A PPP is a long-term contract between a private party and a government entity for providing a public service or project.”

स्रोत: NITI Aayog, PPP Knowledge Portal

NITI Aayog - Official
“Public-private partnerships are long-term arrangements in which the private sector provides a public service or project and assumes substantial risks.”

स्रोत: World Bank - PPP Knowledge Lab

World Bank PPP Knowledge Lab

स्थानीय निवासियों के लिए व्यावहारिक सलाह: किसी भी PPP योजना में आपना ग़लत-फहमी दूर करें, परियोजना की आरम्भिक जानकारी, बजट, टिकाऊता-उद्देश्य और ग्रेवींस/शिकायत-तंत्र की पहचान करें।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे सिकंदराबाद से जुड़े वास्तविक परिदृश्य दिए जा रहे हैं, जिनमें सार्वजनिक-निजी भागीदारी के क्षेत्र में कानूनी सहायता आवश्यक हो सकती है।

  • परियोजना संरचना और डील-डिज़ाइन- सड़क, जल-निर्माण या शहरी बुनियादी ढांचे के लिए उपयुक्त संरचना तय करने, वित्तपोषण-रिस्क-हस्तांतरण, और कॉनसेशन-एग्रीमेंट तैयार करने में adviसe की आवश्यकता हो सकती है।
  • नीति-तैयारी और निविदा-प्रकिया- RFP, RFQ, bidding criteria, और वित्तीय मॉडल पर स्पष्ट सलाह चाहिए ताकि वैध और पारदर्शी चुनाव हो सके।
  • कॉनसेशन एग्रीमेंट (MCA) का मसौदा और negotiations- प्रदर्शन-मानक, भुगतान-शर्तें, और termination-conditions स्पष्ट करने हेतु कानूनी सलाह आवश्यक है।
  • भूमि-अधिग्रहण और पुनर्वास- RFCTLARR Act 2013 के अनुपालन, मुआवजा, और पुनर्वास-योजनाओं पर सलाह दें।
  • एग्रीमेंट-विवाद और आर्बिट्रेशन- अनुबंध-विवाद के त्वरित समाधान हेतु Arbitration/Conciliation Act के अनुरूप उपाय चाहिए।
  • पर्यावरणीय, भूमि-परिचालन और स्थानीय नियमन- पर्यावरण क्लियरेंस और नगरपालिका-नियमन के अनुपालन की जाँच करें।

व्यावहारिक सलाह: सिकंदराबाद के नागरिकों के लिए किसी PPP प्रोजेक्ट पर कानूनी सलाह लेकर अपने हितों की सुरक्षा करें, विशेषकर रिट्रो-फायनांस, Tariff-प्रयोग और ग्रेवींस-नियमन के माध्यम से नुकसान से बचना महत्वपूर्ण है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

यहाँ सेक्टर-विशिष्ट कानूनों और नीति-निर्देशों का सार प्रस्तुत है, जो सिकंदराबाद में PPP परियोजनाओं को प्रभावित करते हैं।

  • - राज्य स्तर की नीति जो निजी निवेश, डिज़ाइन-डिलिवरी-फाइनांस मॉडल और परियोजनाओं के लिए स्थिरता सुनिश्चित करती है।
  • - PPP कॉन्ट्रैक्ट्स के वैधानिक तत्व, अनुबंध की बकायदा पूर्ति और हस्ताक्षर-प्रक्रिया।
  • - PPP-विवादों के त्वरित समाधान हेतु आर्बिट्रेशन-प्रावधान।

नोट: सिकंदराबाद में PPP काम अक्सर GHMC/ HMDA और अन्य स्थानीय संस्थाओं के साथ जुड़े होते हैं, अतः स्थानीय-स्तर पर भी नगरपालिका-नीति और भूमि-उद्धार से जुड़ी प्रक्रियाओं की जानकारी ज़रूरी है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

PPP क्या है?

PPP एक दीर्घकालीन अनुबंध है जिसमें निजी पार्टनर सार्वजनिक सेवा या परियोजना प्रदान करता है और जोखिम साझा करता है।

सिकंदराबाद में PPP परियोजनाएं कौन चलाते हैं?

स्थानीय नगरपालिका संस्थाएं, HMDA और अन्य राज्य एजेंसियाँ PPP प्रोजेक्ट्स को लागू करती हैं, साथ ही केंद्र के दिशानिर्देशों का पालन भी आवश्यक है।

PPP में किन-किन सेक्टरों में प्रोजेक्ट मिलते हैं?

सड़क-निर्माण, जल-संरक्षण, जल- आपूर्ति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, और शहरी बुनियादी ढांचे जैसे सेक्टर सामान्य हैं।

कौन सा कानूनी ढांचा लागू होता है?

Indian Contract Act, Arbitration Act और RFCTLARR Act जैसे कानूनों के साथ Telangana State PPP Policy और MCA-guidelines लागू होते हैं।

बोली-प्रक्रिया कैसे सुरक्षित होती है?

RFP/RFQ, transparent bid-criteria, techno-financial evaluation और domain-ड्यू ड्यू ड्यू करते हैं, ताकि रिकॉर्ड-keeping और विविध पक्षों का संतुलन बना रहे।

कॉनसेशन एग्रीमेंट में क्या-क्या शामिल होना चाहिए?

योजना-डिलिवरी, प्रदर्शन-मानदंड, भुगतान-योजनाएं, जोखिम-हस्तांतरण, termination, dispute-resolution, और maintenance-प्रावधान।

भू-सम्पदा-सम्बन्धी मुद्दे कैसे हल होते हैं?

RFCTLARR Act 2013 के अनुसार मुआवजा, पुनर्वास और वित्तीय राहतें निर्धारित हैं; परियोजना-स्थल पर उपयुक्त कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है।

ग्रेवींस और नागरिक शिकायतें कैसे दर्ज करें?

स्थानीय PPP-cell/ग्रेवेन्स-समिति के मंच पर शिकायत दर्ज करें; समाधान के लिए समय-सीमा और प्रक्रियाएं स्पष्ट होती हैं।

टैक्स और शुल्क कैसे प्रभावित होते हैं?

GST, सेवाओं-कर और अनुबंध-आय-प्रेरित शुल्कों के स्पष्ट नियम ADR द्वारा तय होते हैं; व्यापार-शुल्कों का अनुरोध करें।

डायवर्जन-रिस्क कैसे नियंत्रित किया जाता है?

रिस्क-असाइनमेंट और life-cycle-costing मॉडल से दीर्घकालीन चालन-खर्च कम करने के उपाय निर्धारित होते हैं।

स्थानीय निवासियों के लिए कैसे लाभ सुनिश्चित होते हैं?

कानूनी योजना में रोजगार-निर्माण, स्थानीय सामग्री का उपयोग और पारदर्शी-वित्त पोषण की प्रतिबद्धता शामिल होती है।

एक सफल PPP परियोजना के संकेतक क्या होते हैं?

स्पष्ट-नीति, स्थिर-निवेश, समय-पर-डिलिवरी, और गुणवत्ता-मानकों के अनुपालन को सफलता के संकेतक माना जाता है।

कौन सा कानूनी सलाहकार चुनना उचित रहेगा?

PPPs में अनुभवी अधिवक्ता, कॉन्ट्रैक्ट-ड्राफ्टिंग, आर्बिट्रेशन और भूमि-कार्य में विशेषज्ञता रखें तो बेहतर रहता है।

5. अतिरिक्त संसाधन

6. अगले कदम

  1. अपना PPP विचार-विमर्श लिखित में स्पष्ट करें- परियोजना का प्रकार, क्षेत्र, अनुमानित लागत, और समाज-सेवा का प्रभाव।
  2. स्थानीय-सरकार और नगरपालिका-एजेंसियों के साथ 초기 फ़ील्ड-चेक करें कि परियोजना PPP के लिए उपयुक्त है या नहीं।
  3. एक अनुभवी PPP-वकील/कानूनी सलाहकार के साथ प्रारम्भिक परामर्श लें।
  4. RFP/RFQ दस्तावेज़ की मसौदेदारी और कानूनी-रिस्क-मैप बनाएं।
  5. कॉनसेशन एग्रीमेंट के लिए वार्ता-टीम गठित करें और दायरे-शर्तें स्पष्ट करें।
  6. सम्भावित विरोधी पक्षों के साथ विवाद-निर्णय का स्पष्ट तंत्र तय करें (Arbitration/Conciliation)।
  7. स्थानीय नीति, भूमि-उद्धार और पर्यावरण-शर्तों के अनुपालन का पूर्ण आकलन करें।

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