बिहार शरीफ़ में सर्वश्रेष्ठ नवीनीकृत एवं वैकल्पिक ऊर्जा वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
बिहार शरीफ़, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. बिहार शरीफ़, भारत में नवीनीकृत एवं वैकल्पिक ऊर्जा कानून का संक्षिप्त अवलोकन

भारत में नवीनीकृत ऊर्जा के कानूनी ढांचे का संचालन केंद्रीय कानूनों और राज्य-स्तर के नियमों के मिश्रण से होता है। केंद्र सरकार के महत्त्वपूर्ण ढांचे में विद्युत कानून, प्रौद्योगिकी और सब्सिडी नीतियाँ शामिल हैं। बिहार में BREDA और BERC जैसे संस्थागत तंत्र इसे स्थानीय स्तर पर लागू करते हैं.

केंद्रीय स्तर पर ऊर्जा क्षेत्र के प्रमुख कानून हैं जिनका बिहार में पालन होता है, जैसे इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003 के प्रावधान और राष्ट्रीय नीतियाँ। बिहार के निवासी rooftop, कृषि पंप और डे‑लागत ऊर्जा संयोजनों के लिए राज्य-स्तर की नीतियाँ और नियम भी देखते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य- केंद्र सरकार ने पुनः निर्मित ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं।

“The Government of India has set a target of achieving 175 GW of renewable energy capacity by 2022.”

स्रोत: Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) - https://mnre.gov.in

“Open access enables consumers to purchase electricity from generators outside the licensee's network.”

स्रोत: Central Electricity Regulatory Commission (CERC) - https://cercind.gov.in

“PM‑KUSUM scheme aims to promote solar energy in agriculture and provide farmers with irrigation pumps that run on solar power.”

स्रोत: MNRE - https://mnre.gov.in

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • PPA और Tariff विवाद- बिहार में PPA की वैधता, शुल्क और भुगतान की गारंटी पर विवाद हो सकते हैं, जिन्हें वकील चोटी‑सी झटपट समझ दे सकता है।
  • Net metering और Wheeling से जुड़ी समस्याएं- rooftop solar परियोजनाओं पर मीटरिंग, बिलिंग और ग्रिड‑कनेक्शन से जुड़ी कानूनी स्प्ष्टताओं के लिए वकील आवश्यक होता है।
  • भूमि अनुबंध और संपत्ति‑स्वामित्व- कृषि या औद्योगिक भूमि पर solar क्षेत्र लगाने के लिए भूमि अनुबंध, आरक्षित क्षेत्र, जल‑स्रोत अधिकार आदि की जाँच जरूरी है।
  • केंद्र‑राज्य नियमों का अनुपालन- बिहार के BREDA/BERC नियमों के अनुसार अनुबंधित प्रोजेक्ट को स्थानीय नियमों के अनुरूप बनाए रखना जरूरी है।
  • नेटवर्क पहुँच और ओपन एक्सेस आवेदन- औद्योगिक उपभोक्ता या कृषि उपयोगकर्ता के लिए ओपन एक्सेस और wheeling अनुमतियाँ क्लियर करना आवश्यक है।
  • नीति परिवर्तन और अनुपालन अद्यतन- PM‑KUSUM, REC‑पद्धति, TARIFF‑Regulations आदि में परिवर्तन होते रहते हैं, जिन्हें अद्यतन रखना पड़ता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • इलेक्ट्रिसिटी ऐक्ट 2003- भारत के केंद्रीय कानून के रूप में खुले access, tariff regulation और विद्युत‑खपाने की निगरानी के ढांचे देता है।
  • बिहार Renewable Energy Policy- बिहार में एक विशिष्ट नीतिगत ढांचा प्रदान करता है ताकि solar, wind, biomass आदि परियोजनाओं के लिए समर्थन और स्पष्टता बनी रहे।
  • BERC Tariff Regulations (बिहार विद्युत विनियामक आयोग के नियम)- बिहार में रेटिंग, शुल्क निर्धारण और नवीनीकृत ऊर्जा के लिए विशेष प्रावधानों को नियंत्रित करते हैं।

स्थानीय कानूनों के अनुसार, लाइसेंसिंग, ग्रिड इंटरकनेक्शन, ओपन एक्सेस, नेट मीटरिंग और REC से संबन्धित नियम राज्यों के नियामक आयोगों द्वारा तय होते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नेट मीटरिंग किसके लिए है?

नेट मीटरिंग rooftop या अन्य छोटे‑स्तर के ऊर्जा स्रोतों से बनती बिजली को ग्रिड में भेजकर उपभोक्ता के बिल को घटाती है और ग्रिड के साथ पूरक उपयोग सुनिश्चित करती है.

बिहार में net‑metering के लिए किससे संपर्क करें?

स्थानीय वितरण कंपनी (BSPHCL / BSEB) और बिहार विद्युत नियामक आयोग (BERC) से प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए।

PM‑KUSUM क्या है और Bihar में इसका लाभ कैसे मिल सकता है?

PM‑KUSUM किसानों के लिए कृषि‑पंप के लिए solar पंक्तियाँ स्थापित करने और फार्म पैनलों के माध्यम से आय बढ़ाने का केंद्र‑स्तर का कार्यक्रम है। Bihar में किसान आवेदन कर सकते हैं और प्रोत्साहन प्राप्त कर सकते हैं।

एक solar परियोजना के लिए भूमि चयन किन बातों पर निर्भर है?

भूमि का स्वामित्व, भू-स्तर, जल की उपलब्धता, अनुमति/लेज़, और स्थानीय निर्वाचन क्षेत्र के नियम प्रकिया के साथ समझौते आवश्यक होते हैं।

नेट मीटरिंग के लिए कौन‑से दस्तावेज चाहिए?

खरीद‑फरोख्त पंजीकरण, भूमि रिकॉर्ड, परियोजना का डिजाइन/वास्तुकला प्रमाणपत्र, बिलिंग ढाँचा और ग्रिड‑पहुंच आवेदन आवश्यक होते हैं।

बिहार में PPA क्यों जरूरी है?

PPA से ऑफ़टेक्टर और ऑफ़टेकिंग के बीच कानूनी बाध्यताएँ स्पष्ट रहती हैं और भुगतान प्राप्ति सुनिश्चित होती है।

गुणवत्ता और प्रोजेक्ट डिलीवरी के मानक क्या हैं?

सोलर पैनल, इन्वर्टर, और दूसरे उपकरण ISI/IEC मानकों के अनुरूप होने चाहिए; BERD/BERC प्रमाणन से जाँच होती है।

ओपन एक्सेस के माध्यम से बिजली कैसे खरीदी जा सकती है?

ग्रिड‑लाइन के अनुसार उपभोक्ता किसी अन्य जनरेटर से बिजली ले सकता है; इसके लिए अनुज्ञप्तियाँ और लाइन‑कनेक्शन मंजूरी जरूरी होती है।

कौन सा दस्तावेज आवेदन के समय चाहिए होंगे?

प्रोजेक्ट विवरण, भूमि‑दस्तावेज, PPA प्रोफाइल, ग्रिड‑कनेक्शन योजना और वित्तीय मॉडल आवश्यक हो सकते हैं।

राज्य स्तर पर कौन‑सी सहायता योजनाएं हैं?

BREDA/बिहार ऊर्जा विभाग के अंतर्गत भूमिहीन/कृषि उपभोक्ताओं के लिए सब्सिडी, ऋण सहायता और प्रशिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध होते हैं।

कानूनी निर्णय लेने से पहले किन बिंदुओं पर सलाह लें?

लिगेटेड टेबल, अनुबंध‑शर्तें, ग्रिड‑कनेक्शन मूल्यांकन, औरऋण/अनुदान के फायदे-नुकसान का विश्लेषण करें।

क्या ηλεκट्रीसिटी एक्ट 2003 बिहार पर लागू होता है?

हाँ, यह केंद्रीय कानून बिहार में भी लागू होता है; बिहार के नियम और tariff Regulations इसे लागू करते हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Ministry of New and Renewable Energy (MNRE) - आधिकारिक वेबसाइट: https://mnre.gov.in
  • Indian Renewable Energy Development Agency Limited (IREDA) - आधिकारिक वेबसाइट: https://www.ireda.in
  • Department of Energy, Government of Bihar (BREDA सम्बद्ध पथ) - आधिकारिक जानकारी: https://energy.bihar.gov.in

6. अगले कदम

  1. अपनी ऊर्जा परियोजना के प्रकार और आकार स्पष्ट करें- rooftop, agricultural pumps, या औद्योगिक प्लांट।
  2. कानूनी विशेषज्ञ या ऊर्जा वकील से संपर्क स्थापित करें जो बिहार‑विशेष कानूनों में अनुभवी हो।
  3. पूर्व‑अनुमतियों और जमीन के दस्तावेजों की समीक्षा कराएं; title और land‑use स्पष्ट हो।
  4. प्रोजेक्ट के लिए PPA, tariff, net metering, open access आदि के draft‑documents माँगे और समीक्षा कराएं।
  5. REGULATOR और DISCOM के साथ प्रारम्भिक बातचीत के लिए नियुक्ति निर्धारित करें।
  6. आवश्यक दस्तावेजों के साथ retainer agreement और fee‑structure तय करें।
  7. पहला कानूनी‑व्यवस्था बैठक में सभी जोखिम और timeline पर स्पष्ट योजना बनाएं।

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