बांकुरा में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील
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बांकुरा, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
1. बांकुरा, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून के बारे में: बांकुरा, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन
बांकुरा जिले में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून पूरे भारत में लागू Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 के अधीन होते हैं. यह कानून कॉर्पोरेट व्यक्तियों, साझेदारी फर्मों और व्यक्तियों के लिए एक समयबद्ध समाधान ढांचा प्रदान करता है. नागरिक-उन्मुख प्रक्रियाओं के जरिये ऋण चुकाने में कठिनाई से जूझ रहे व्यवसायों को पुनः जीवन देने का लक्ष्य है.
यह प्रक्रिया अदालत-आधारित है और मुख्य रूप से NCLT (National Company Law Tribunal) के अंतर्गत संचालित होती है. Bankura जैसे जिलों से केस सामान्यतः Kolkata शाखा के NCLT पैनल तक जाते हैं. दायरे में दिक्कत आने पर बैंक, फाइनैंस संस्थान और ऋणी के बीच समन्वय होता है. सार्वजनिक नीतिगत लक्ष्य में देय ऋणों का त्वरित समाधान और इक्विटी-उत्पन्न मूल्यांकन शामिल है.
“The primary objective of the Code is to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals.”
- Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 - आधिकारिक प्राक्कथन
आम तौर पर Bankura में CIRP के तहत क्रेडिटर्स के हितों की सुरक्षा के साथ ऋणी के व्यवसाय पर रोकथामात्मक उपाय और संरचनात्मक पुनर्गठन के विकल्प प्रस्तुति होते हैं. नीचे प्रमुख कदमों का संक्षेप है:
- NCLT में आवेदन दायर करना और रोका हुआ समाधान-प्रक्रिया शुरू करना
- क्रेडिटर्स कमिटी (CoC) द्वारा पुनर्गठन प्रस्ताव को मानना या अस्वीकार करना
- सम्भावित योजना के अनुसार ऋण-चुकौती और परिसंपत्ति-व्यवस्था की योजना बनना
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: पुनर्गठन और दिवालियापन कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं
Bankura क्षेत्र के व्यवसायिक परिदृश्य में नीचे के प्रकार के केस सामान्य रूप से होते हैं जिन्हें एक अनुभवी अधिवक्ता के मार्गदर्शन की जरूरत होती है.
परिदृशय 1 - एक लघु-उद्योग (MSME) Bankura में ऋण-नॉन-परफॉर्मिंग अकाउंट (NPA) में है. बैंक CIRP-या पुनर्गठन के लिए आवेदन कर सकता है. अधिवक्ता CIRP के नियमों और क्रेडिटर्क के चयन-आधार पर सलाह देंगे.
परिदृश्य 2 - Partnership फर्म Bankura जिले में ऋण चुकाने में असमर्थ है. IBC के अंतर्गत पुनर्गठन या व्यक्तिगत उत्तरदायित्व निपटान कैसे करें, यह निर्णय जरूरी है.
परिदृश्य 3 - एक रियल एस्टेट प्रोजेक्ट Bankura में लेट-लंबित है और खरीदारों के रजिस्ट्रेशन-घोषणाओं पर प्रभाव है. ENFORCEMENT एवं समधी-उद्देश्य के लिए IBC के साथ RERA के संयोजन पर कानूनी मार्गदर्शन चाहिए.
परिदृश्य 4 - एक छोटे दुकानदार/स्व-उद्योग संचालक है जिसने व्यक्तिगत-guarantee दे रखा है. व्यक्तिगत Insolvency या व्यक्तिगत-गैर-समझौते पर निर्णय लेना जरूरी है.
परिदृश्य 5 - बैंक के साथ ऋण-समझौते में कठिनाई होने पर, ऋणी को CIRP-प्रक्रिया के दौरान संरक्षित रहने के लिए कानूनी सुरक्षा चाहिए.
परिदृश्य 6 - Bankura के एक स्टार्ट-अप के लिए प्रावधानित पुनर्गठन योजना बनानी हो और उसे क्रेडिटर्स-समिति के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करना हो.
3. स्थानीय कानून अवलोकन: बांकुरा, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें
मुख्य कानून जो Bankura में लागू होते हैं:
- Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC)
- Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest (SARFAESI) Act, 2002
- Companies Act, 2013 (कॉर्पोरेट पुनर्गठन के लिए प्रासंगिक प्रावधान)
कानूनों से जुड़ी व्यावहारिक धारणा Bankura के फाइनेंसर-परिदृश्यों के लिये महत्व रखती है. IBC से CIRP, moratorium और क्रेडिटर्स कमिटी के संचालन स्पष्ट होते हैं. SARFAESI से सिक्योरिटीज-आधारित वसूली में त्वरित कदम संभव होते हैं.
“IBB IBBI is the regulator for insolvency professionals, information utilities and insolvency professional agencies.”
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक घोषणापत्र
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: 10-12 प्रश्न-उत्तर जोड़े
IBC क्या है और इसे Bankura जिले में कैसे लागू किया जाता है?
IBC एक केंद्रीय कानून है जो पुनर्गठन और दिवालियापन resolution के लिए समयबद्ध ढांचा देता है. Bankura में केस NCLT Kolkata बेंच के सामने जाते हैं और CIRP शुरू होता है.
IBC में moratorium क्या है और कितने दिन चलता है?
Moratorium एक प्रारंभिक रोक है. यह अवधि CIRP के दौरान लागू रहती है और आम तौर पर 180 दिनों तक होती है, आगे क्रेडिटर्स के निर्णय से बढ़ सकती है.
NCLT Kolkata bench Bankura से केस कैसे लेता है?
NCLT Kolkata bench को आवेदन के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज चाहिए. अदालत समय-समय पर क्रेडिटर्स कमिटी (CoC) की सिफारिशें देखती है.
कौन से लोग CIRP में पार्टिसिपेट कर सकते हैं?
कॉन्ट्रैक्टेड क्रेडिटर्स, लेंडर्स और ऋणी के प्रतिनिधि CIRP प्रक्रियाओं में भाग लेते हैं. IBC में क्रेडिटर्स कमिटी का गठन होता है.
क्या व्यक्तिगत Insolvency भी IBC के अंतर्गत आता है?
हाँ, individuals और sole proprietors भी IBC के अंतर्गत insolvency मार्ग अपना सकते हैं, जिसके लिए व्यक्तिगत योजना और ऋण-निपटान पे निर्णय होते हैं.
उच्च जोखिम वाले Real Estate प्रोजेक्ट पर IBC कैसे मदद करता है?
IBC के जरिये प्रोजेक्ट के पुनर्गठन के बजाय दायित्व-प्रबंधन, भुगतान के पुनर्संयोजन और कुछ मामलों में खरीददारों के हित-संरक्षण के उपाय संभव होते हैं.
क्या IBC और SARFAESI के बीच अंतर है?
IBC में व्यापक पुनर्गठन प्रक्रिया है और अदालत-आधारित है, जबकि SARFAESI मुख्यतः सिक्योरिड बैंक-क्रेडिटर्स द्वारा परिसंपत्तियों की शुरुआत से जुड़ा है.
Bankura जिले में किस प्रकार की कानूनी सहायता मिलती है?
स्थानीय वकील, कानूनी सलाहकार और Insolvency Professionals Bankura में केस-विश्लेषण, दस्तावेज़ तैयारी और अदालत-समन्वय में मदद करते हैं.
कौन सी प्रक्रियाएँ तेज हो सकती हैं?
Smaller MSMEs के लिए Pre-Pack या FAST-TRACK प्रक्रियाओं की नीति पर विचार किया जा रहा है, पर लागू नियम समय-समय पर बदले जाते हैं.
Kolkata bench के बाहर Bankura के लिए क्या विकल्प हैं?
आवेदन और अपील के कुछ हिस्से Kolkata bench के बजाय अन्य regional benches में भी फाइल हो सकते हैं, पर मुख्य अधिकार क्षेत्र Kolkata है.
IBC के अंदर IBBI की भूमिका क्या है?
IBBI Insolvency Professionals, Information Utilities और Agencies को पंजीकृत और नियमन करता है.
क्या Real Estate मामलों में RERA भी लागू होता है?
हाँ, Real Estate Regulation Act, 2016 को IBC के साथ जोड़ा जा सकता है ताकि खरीदारों और डेवलपर के अधिकार सुरक्षित रहें.
5. अतिरिक्त संसाधन: पुनर्गठन और दिवालियापन से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों की सूची बनाएं
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - https://www.ibbi.gov.in/
- National Company Law Tribunal (NCLT) - Kolkata Bench - https://ncltkol.nic.in/
- Reserve Bank of India (RBI) - Insolvency मार्गदर्शक और बैंकिंग स्टैंडर्ड्स - https://www.rbi.org.in/
6. अगले कदम: पुनर्गठन और दिवालियापन वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया
अपने व्यवसाय या व्यक्तिगत कर्ज-स्थिति का प्रारम्भिक आकलन करें. किस कानून के अंतर्गत आप आएंगे, यह स्पष्ट करें.
Bankura में IBBI पंजीकृत Insolvency Professional या वरिष्ठ अभिभाषक से संपर्क करें. अनुभव-क्षेत्र स्पष्ट करें.
डॉक्यूमेंट सूची बनाएं: ऋण समझौते, बैलेंस शीट, खरीद-फरोख्त अनुबंध आदि. स्पष्ट संकल्पना दें.
पहली कपंनी/काउंसलिंग नियत करें. शुल्क संरचना और अनुमानित समय-रेखा पूछें.
कृष्ण-सम्बन्धित दस्तावेजों के साथ NCLT Kolkata bench के लिए आवेदन तैयार करें.
CoC और क्रेडिटर्स के साथ संवाद बनाए रखें. निर्णय और पुनर्गठन योजना पर समान समझ सुनिश्चित करें.
आवश्यकतानुसार RERA, SARFAESI आदि कानूनों के साथ समन्वय करें. क्षेत्रीय स्थितियों के अनुसार कदम उठाएं.
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