भुवनेश्वर में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील

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Advocate, (Ajaya Nayak, Orissa High Court)
भुवनेश्वर, भारत

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एडवोकेट, (अजय नायक, उड़ीसा उच्च न्यायालय) ओडिशा स्थित एक सम्मानित लॉ फर्म है जिसके पास व्यापक अभ्यास क्षेत्रों में...
LexCounsel, Law Offices
भुवनेश्वर, भारत

2004 में स्थापित
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लेक्सकाउंसल, कानून कार्यालय, नई दिल्ली, भारत में मुख्यालय वाला एक प्रतिष्ठित पूर्ण-सेवा विधि फर्म है, जिसकी सहायक...
Advocate Suman Mahanta & Associates
भुवनेश्वर, भारत

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एडवोकेट सुमन महांता एंड एसोसिएट्स, जो भुवनेश्वर, ओडिशा में स्थित है, विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक कानूनी सेवाएं...
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1. भुवनेश्वर, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

भुवनेश्वर ओडिशा की राजधानी है और यहाँ विनिर्माण, आईटी सेवाएं और निर्माण जैसे क्षेत्र सक्रिय हैं. कई बार प्रतिस्पर्धी दबाव या वैश्विक घटनाओं से व्यवसाय संकट में आ जाते हैं. ऐसे समय में कानूनी मार्गदर्शन से पुनर्गठन और कानूनी बचाव संभव रहता है.

पुनर्गठन और दिवालियापन के लिए भारतीय कानून का केंद्रीय ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 है. यह समय-सीमा में पुनर्गठन, ऋण-निपटान और liquidation के चरण तय करता है. भुवनेश्वर में इन प्रक्रियाओं के केस NCLT, Cuttack Bench के अधीन सुनी जाते हैं. IBBI इस प्रणाली के अनुपालन और प्रोफेशनल्स के पंजीकरण की देखरेख करता है.

The objects of this Code are to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time-bound manner.

स्रोत: Insolvency and Bankruptcy Code, 2016, Section 3. लिंक: IBC Section 3

The Insolvency and Bankruptcy Code provides for a time-bound process for insolvency resolution, liquidation and reorganization.

स्रोत: Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI). लिंक: IBBI - About IBC

नोट: लोकतांत्रिक ढांचे के कारण भुवनेश्वर में कॉर्पोरेट मामलों के लिए Eastern bench, NCLT-Cuttack प्रमुख मंच है. व्यक्तिगत Insolvenz और समूह-स्तरीय पुनर्गठन के कदम भी इसी ढांचे के भीतर होते हैं. स्थानीय वकील आपको Odisha-विशिष्ट प्रक्रियाओं के अनुसार मार्गदर्शन देंगे.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  1. भुवनेश्वर-आधारित MSME का ऋण-default: बैंक-ऋण चुकाने में देरी होने पर CIRP या डिफॉल्ट-रिड्रेस के विकल्प की जरूरत पड़ती है. बेहतर कवर के लिए कानूनी समीक्षा और निष्पादन-योजना जरूरी हो जाती है. एक अनुभवी वकील आपके अधिकारों और काउंटर-पार्टियों के कदमों को स्पष्ट करेगा.
  2. निर्माण या रियल एस्टेट व्यवसाय का पुनर्गठन: परियोजनाएँ रुकीं हो या पूंजी-फ्लो बाधित हो तो पुनर्गठन योजना बनवाने के लिए IP और वकील की सलाह चाहिए. कॉन्ट्रैक्ट-रिपेयर और क्रेडिटर-समझौते भी वकील के बिना कठिन होते हैं.
  3. बैंक/क्रेडिटर द्वारा CIRP-आरोप: क्रेडिटर द्वारा insolvency प्रॉसेस शुरू करने पर त्वरित नियंत्रण और साथ ही बचाव-योजनाओं की आवश्यकता होती है. उचित प्रतिनिधित्व के बिना अदालत में लाभ कम होता है.
  4. व्यक्तिगत Insolvency के मामले: Sole proprietor या व्यक्तिगत debt भार के कारण व्यक्तिगत insolvency के लिए PIRP की आवश्यकता पड़ सकती है. कानूनी मार्गदर्शन से ही प्रक्रिया स्पष्ट रहती है.
  5. देशीय या cross-border debt-समस्या: यदि ऋण-समझौतों में अंतरराष्ट्रीय पार्टनरशिप या क्रेडिटर-प्रेफरेंसेज़ हैं, कानून-समन्वय जरूरी हो जाता है. एक अनुभवी वकील प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित कर सकता है.
  6. उच्च-स्तर के जोखिम-हटाने के चरण: IBC-प्रक्रिया में 2-3 स्टेजों की योजना बनाकर कानूनी प्रतिनिधित्व आवश्यक रहता है. इससे देनदार और creditors के हित संतुलित रहते हैं.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्टी कोड, 2016 (IBC) - केंद्रीय कानून जो corporate, partnership और individuals के लिए पुनर्गठन एवं insolvency resolution के समय-सीमित प्रावधान देता है. यह भुवनेश्वर सहित पूरे भारत में लागू होता है._sources: IBBI, MCA
  • इंसोल्वेंसी एंड बैंकरप्टी बोर्ड ऑफ इंडिया (IBBI) रेगुलेशनों - Insolvenz प्रोफेशनल, information utilities और प्रक्रियाओं के मानक निर्धारित करते हैं. IBBI
  • Companies Act, 2013 (संशोधनों सहित) - कॉर्पोरेट व्यक्तियों के लिए winding up, corporate insolvency के कुछ पहलुओं को संगठित करता है. IBC के साथ इसका उल्लेख-योग योगदान रहता है. MCA

नोट: भुवनेश्वर में मामलों की सुनवाई NCLT, Cuttack bench के क्षेत्राधिकार में होती है. Odisha-आधारित क्रेडिटर्स, debtors और प्रोफेशनल्स के लिए स्थानीय अदालत-आधार पर सहयोग जरूरी है. NCLT के पक्ष-परिचय से संबंधित आधिकारिक जानकारी देखें.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IBC क्या है?

IBC एक केंद्रीय कानून है जो पुनर्गठन, insolvency resolution और liquidation के लिए समय-सीमा-आधारित प्रक्रियाएं देता है. यह debtors और creditors के हितों के संतुलन पर केंद्रित है.

कौन CIRP फाइल कर सकता है?

कंपनी, partnership या individuals जिनके ऊपर default है, वे CIRP या personal insolvency के लिए आवेदन कर सकते हैं. भुवनेश्वर के केस NCLT-Cuttack bench के पास जाते हैं.

IP (Insolvency Professional) की क्या भूमिका है?

IP CIRP या PIRP के दौरान प्रबंधन संभालने, जानकारी इकठ्ठा करने और प्रक्रिया की निगरानी करने के लिए नियुक्त होते हैं. वे IBBI द्वारा पंजीकृत होते हैं.

कितना समय लगता है CIRP पूरा होने में?

IBC के अनुसार यह समय-सीमा समय-समय पर संशोधित होती है. सामान्यतः प्रारम्भिक अवधि कुछ महीनों से शुरू होती है, फिर गतिविधियों के अनुसार बढ़ती है. भुवनेश्वर-स्थित मामलों में NCLT के निर्देश लागू होते हैं.

12A और 60(5) जैसी धाराओं का क्या अर्थ है?

12A से दिवालिया Debtor-creditor-समझौते पर court की मंजूरी मिलकर प्रक्रिया रोक सकते हैं. 60(5) से Insolvency Resolution Plan के लिए प्रमाणीकरण और व्यवस्था तय होती है.

क्या व्यक्तियों के लिए व्यक्तिगत insolvency संभव है?

हाँ, Part III के अंतर्गत व्यक्तियों के लिए PIRP उपलब्ध है. यह debt-relief और discharge के प्रावधान देता है. प्रक्रियाएं NCLT के अंतर्गत चलती हैं.

क्रेडिटर को क्या कदम उठाने चाहिए?

क्रेडिटर को claims फाइल करनी होती हैं, उनकी validity जांचती है, और CIRP के दौरान उनको अपने हिस्से के अनुसार वोटिंग और रेवाइवल-रेड्रील योजना में भागीदारी मिलती है.

आउटसोर्सिंग या शुल्क-कटौती कैसे होती है?

हां, अलग-अलग कानून-प्राधिकारों के अनुसार फीस और लागत तय होती है. आमतौर पर IP के लिए retainer और success-fee मॉडल संवाद-पूर्व तय होते हैं.

कानूनी सलाह कब लें?

जैसे ही आप default notice पाते हैं या ऋण-समझौते में समस्या दिखती है, तुरंत एक अनुभवी वकील से मिलें ताकि उचित रणनीति बनाई जा सके.

MSME के लिए विशेष प्रावधान क्या हैं?

MSME के लिए pre-packaged और अन्य राहत उपायों के बारे में IBC में प्रावधान विकसित होते रहते हैं. विशिष्ट नीति-परिवर्तनों के अनुसार मार्गदर्शन चाहिए.

मैं भुवनेश्वर में किस तरह के वकील से संपर्क करूँ?

IBC, IBBI और NCLT-निष्ठ IP-फर्मों के साथ एक्सपर्ट-इन-IBC, कॉर्पोरेट-विधि, और व्यक्तिगत insolvency में अनुभव रखने वाले अधिवक्ता उपयुक्त रहते हैं. स्थानीय कोर्ट-फार्म्स में पहले केस-फाइलिंग चेक करें.

क्या कोई पूर्व-कार्य योजना बन सकती है?

हाँ, आप अपने केस के लिए एक प्री-ड्यू-फॉर्मेशन प्लान बनाएं. दस्तावेज, क्रेडिटर-फीडबैक, और संभावित क्रेडिट-रेजोल्यूशन विकल्प तैयार रखें.

मैं किन दस्तावेजों के साथ शुरुआत करूँ?

कंपनी पंजीकरण, financial statements, loan agreements, creditor notices, और debtors-asset list जैसी कॉपीज संकलित रखें. यह वकील को तुरंत केस-स्टेट तैयार करने में मदद करेगा.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - मुख्य नियामक साइट और संसाधन. लिंक: IBBI
  • National Company Law Tribunal (NCLT) - Eastern Bench (Cuttack) - insolvency मामलों की आधिकारिक साझा मंच. लिंक: NCLT
  • Ministry of Corporate Affairs (MCA) - IBC के अंतर्गत कानूनी प्रावधान और पंजीकरण-सम्बन्धी जानकारी. लिंक: MCA

6. अगले कदम

  1. अपने व्यवसाय या मामलों की प्रकृति स्पष्ट करें - कॉरपोरेट, पार्टनरशिप या व्यक्तिगत insolvency. भुवनेश्वर में सही फोरम का निर्धारण आसान होगा.
  2. किसी अनुभवी पुनर्गठन/दिवालियापन अधिवक्ता को खोजें - IBC विशेषज्ञ और Odisha-क्षेत्र में NCLT-प्रक्रिया का अनुभव देखें.
  3. आवश्यक दस्तावेज एकत्र करें - वित्तीय विवरण, ऋण अनुबंध, क्रेडिटर नोटिस आदि पहले से तैयार रखें.
  4. पायलट-मीटिंग और प्रारम्भिक consult करके प्रत्याशित लागत और समय-रेखा समझें.
  5. IP-फर्म के साथ रिटेनर समझौता करें और केस-स्टेटमेंट साझा करें.
  6. प्रक्रिया के किसी भी चरण में कानूनी सलाह अहम समझें; नयी नियमन-परिवर्तनों के अनुसार कदम उठाएं.
  7. सम्भावित विकल्पों का तुलनात्मक विश्लेषण करें और क्रेडिटर-समस्या के अनुसार रणनीति चुनें.

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