चंडीगढ़ में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील
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चंडीगढ़, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
1- चंडीगढ़, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन
पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का मुख्य ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) के अंतर्गत संचालित होता है। यह कानून कॉरपोरेट पर्सन्स, साझेदारियों, और व्यक्तियों के लिए समय-सीमा में पुनर्गठन और Insolvenz समाधान के उपाय प्रदान करता है।
चंडीगढ़ केन्द्रीय क्षेत्र के अंतर्गत एक यू-ट्री-टी है और यहाँ NCLT चंडीगढ़ बेंच के माध्यम से CIRP, वर्गीकरण और liquidation मामलों की सुनवाई होती है। यह UT चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के कुछ मामलों पर भी प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि न्यायिक दायित्व क्षेत्र निर्धारित बेंचों के माध्यम से संचालित होते हैं।
आवश्यक उद्धरण:
“An Act to consolidate and amend the laws relating to re-organization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time-bound manner.”
Source: Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (Preamble) - https://legislative.gov.in
IBC के अनुसार CIRP के दौरान परिसमापन के पक्षों के बीच समय-सीमा और moratorium जैसे प्रावधान लागू होते हैं। यह Chandigarh के NCLTbench के निर्णयों पर निर्भर करता है कि हल कब तक निकाला जाएगा।
“During the period of corporate insolvency resolution process, no suit or legal proceeding shall be continued against the corporate debtor.”
Source: Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (Section 14 moratorium) - https://legislative.gov.in
2- आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
नीचे Chandigarh-आधारित वास्तविक-प्रवर्तन परिदृश्य भारत के IBC ढांचे में वकील की भूमिका स्पष्ट करते हैं। हर स्थिति के साथ व्यावहारिक कदम भी दिए गए हैं ताकि residents सही निर्णय ले सकें।
- कंपनी द्वारा़ ऋण चुकौती में देरी के कारण CIRP दायर होता है- Chandigarh- आधारित फर्म अगर बैंक के साथ पुनर्गठन योजना पर सहमत नहीं हो पाती है, तो CIRP शुरू किया जा सकता है। वकील संरचना, IRP चयन, और अनुमोदन-प्रक्रिया में मार्गदर्शन देते हैं।
- व्यक्ति-स्तर पर व्यक्तिगत दिवालियापन (IIRP) शुरू करना- Chandigarh निवासी के ऊपर बड़े लेनदारों के ऋण होने पर IIRP के लिए कानूनी मार्ग दिखाता है। वकील एप्लिकेशन, क्रेडिट-मैनेजमेंट और क्रेडिट-स्वीकृति के प्रावधान समझाते हैं।
- सह-स्वामित्व या साझेदारी फर्म के पुनर्गठन के मामले- IBC साझेदारी फर्मों के लिए भी प्रावधान देता है; साझेदारियाँ Chandigarh के भीतर कानूनी सलाह के बिना संभावित समाधान नहीं खोज पातीं।
- बैंक ऋणों की सुरक्षा-संबंधी कार्रवाइयों के समय- SRFAESI जैसे अन्य कानूनों के साथ IBC का समन्वय आवश्यक हो सकता है; एक वकील दो-तिहाई पक्षों के हितों को संतुलित कर सकता है।
- NCLT Chandigarh Bench में メटर दाखिल करना- सुनवाई, अमानत, और समाधान योजना की प्रक्रिया में विशेषज्ञ सलाह जरूरी है; गलत प्रस्तुतियाँ देरी कर सकती हैं।
- किसी भी प्रकार के दाय-शुल्क-रूपांतरण या परिसंपत्ति-स्थापना मामलों- कानूनी प्रक्रिया, समय-सीमा और शर्तों को स्पष्ट करने के लिए अनुभवी अधिवक्ता की जरूरत होती है।
3- स्थानीय कानून अवलोकन
चंडीगढ़-निवासियों के लिए नीचे 2-3 विशिष्ट कानूनों का संक्षिप्त उल्लेख है, जो पुनर्गठन और दिवालियापन से सीधे या सार्थक रूप से जुड़े हैं।
- Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC)- कंपनी-स्तर CIRP, IIRP और liquidation प्रक्रिया का केंद्रीय ढांचा। Chandigarh में NCLT Chandigarh bench के जरिये इन प्रक्रियाओं की सुनवाई होती है।
- Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI)- secured asset पर तेजी से कार्रवाई की प्रक्रिया और ऋण-वसूली के उपाय।
- Debt Recovery Tribunal Act, 1993 (RDDBFI Act) और DRT अधिकार- बैंकों-फाइनेंसरों द्वारा ऋण-ऋण-सम्बन्धी मामलों की वसूली के लिये विशेष ट्रिब्यूनल। Chandigarh क्षेत्र में DRT के क्षेत्रीय प्राधिकारी कार्य करते हैं।
4- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IBC क्या है?
IBC एक केंद्रीय कानून है जो कॉरपोरेट, साझेदारी-फर्म और व्यक्तियों के लिए पुनर्गठन और insolvency resolution को समय-सीमा में संबधित प्रक्रियाओं के साथ संचालित करता है।
Chandigarh में CIRP कैसे शुरू होता है?
CIRP एक आवेदन के साथ शुरू होता है जो NCLT Chandigarh bench में प्रस्तुत किया जाता है। इसके बाद IRP नियुक्त होता है और पुनर्गठन योजना-निर्माण शुरू होता है।
कौन आवेदन कर सकता है?
कंपनी-डिब्टर, उसका क्रेडिटर, या किसी अधिकृत व्यक्ति को CIRP या IIRP के लिए आवेदन करने का अधिकार होता है। Chandigarh के मामलों में NCLT की अनुमति आवश्यक होती है।
समय-सीमा कितनी होती है?
IBC CIRP के लिए आम तौर पर समय-सीमा 180 दिन निर्धारित है; आवश्यकता पड़ने पर NCLT 270 दिन तक बढ़ोतरी दे सकता है। Chandigarh में यह दायरे NCLT के निर्णय पर निर्भर है।
IRP, RP और वैकल्पिक समाधान क्या हैं?
IRP (Interim Resolution Professional) CIRP के प्रारम्भिक चरण में नियुक्त होता है, फिर RP (Resolution Professional) का चयन होता है। वे प्रतिनिधियों की टीम के साथ पुनर्गठन योजना बनाते हैं।
क्या व्यक्तिगत दिवालियापन संभव है?
हाँ, IBC के अंतर्गत Individuals and HUF के लिए IIRP के माध्यम से व्यक्तिगत insolvency समाधान संभव है। Chandigarh के नागरिकों के लिए यह एक वैकल्पिक मार्ग है, यदि वे उपयुक्त दस्तावेज दे पाते हैं।
liquidation कब और कैसे होता है?
यदि पुनर्गठन योजना पारित नहीं होती है या अनुमोदन नहीं मिलता, तो मुद्दा liquidation की ओर जा सकता है; liquidation के दौरान परिसंपत्तियाँ बिक्री से ऋण चुकता की जाती हैं।
Chandigarh में वास्तव में कौन-सी अदालतें या बेंचें हैं?
चंडीगढ़ में NCLT Chandigarh bench CIRP और liquidation मामलों की सुनवाई करता है, और National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) appeals पर निर्णय प्रदान करता है।
कानूनी शुल्क कितना लगता है?
वकील-फीस मामला-परिस्थिति पर निर्भर करता है; कम-से-कम कंसल्टेशन और केस-आधारित लागतें संभावित हैं।
किस तरह के दस्तावेज चाहिए होते हैं?
आमतौर पर कंपनी के लेखा-जोखा, बैलेंस शीट, ऋण प्रपत्र, बैंक-स्टेटमेंट, और ऋणदाता-सम्बन्धी दस्तावेज आवश्यक होते हैं।
क्या मैं Chandigarh से किसी विशेष वकील को चुन सकता हूँ?
हाँ; Chandigarh-आधारित अधिवक्ता जो IBC, CIRP, DRT जैसे मामलों में विशेषज्ञ हों, उनसे सलाह लें।
आगे कैसे बढ़ें?
IBC और Chandigarh के कोर्ट-प्रक्रिया के अनुसार चरणबद्ध कदम उठाएँ और एक विश्वसनीय कानूनी सलाहकार चुने।
5- अतिरिक्त संसाधन
नीचे Chandigarh-आधारित पुनर्गठन और दिवालियापन से जुड़ी 3 आधिकारिक संस्थाओं के संसाधन दिए गए हैं।
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - संस्थागत नियमन और Insolvency Professionals, Information Utilities आदि के लिए आधिकारिक स्रोत। https://www.ibbi.gov.in
- National Company Law Tribunal (NCLT) - Chandigarh Bench - CIRP, liquidation-इनशोधित मामलों की सुनवाई के लिए आधिकारिक मंच। https://ncltindia.gov.in
- Debt Recovery Tribunal (DRT) - Chandigarh - बैंकों और वित्त संस्थाओं से ऋण-ऋण-वसूली के लिए विशेष न्याय-प्रणाली। https://www.drt.gov.in
6- अगले कदम
- अपना उद्देश्य स्पष्ट करें: CIRP के अंतर्गत पुनर्गठन या liquidation, या IIRP की राह चुनना है।
- संरचना तैयार करें: Chandigarh-आधारित संस्थागत दस्तावेजों की सूची बनाएं-बैलेंस शीट, ऋण-प्रपत्र, बैंक स्टेटमेंट आदि।
- स्थानीय कानून विशेषज्ञ खोजें: IBC में अनुभवी वकील या कानूनी सलाहकार से 2-3 परामर्श लें।
- पहल के लिए पूछ-ताछ तैयार करें: टाइमलाइन, लागत, प्रक्रियाओं, और success-rate के बारे में स्पष्ट प्रश्न पूछें।
- आधिकारिक पंजीकरण जाँचें: IBBI तथा NCLT Chandigarh bench के पंजीकृत स्रोतों से प्रोफाइल验证 करें।
- योग्यता और अनुभव जाँचें: IBBI-registered insolvency professionals, BAR Council of Punjab and Haryana की मान्यता देखें।
- Engagement letter पर हस्ताक्षर करें: शुल्क, सेवाओं का दायरा, और गोपनीयता स्पष्ट हों।
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