कोयम्बत्तूर में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील

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कोयम्बत्तूर, भारत

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कोयम्बटूर, भारत में मुख्यालय वाले केबी लॉ फर्म एक पूर्ण सेवा कानूनी प्रैक्टिस है जो सक्रिय दृष्टिकोण के साथ...
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1. कोयम्बत्तूर, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून के बारे में: [कोयम्बत्तूर, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन]

भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का प्रमुख ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) है। यह कॉर्पोरेट व्यक्तियों, साझेदारी फर्मों और व्यक्तियों के लिए पुनर्गठन और दिवालियापन समाधान के समयबद्ध तरीके स्थापित करता है।

कोयम्बत्तूर जैसे उद्योगिक केंद्रों में SMEs, मैनुफैक्चरिंग यूनिट और टेक्सटाइल प्लांट्स के लिए IBC एक संरचित मार्ग देता है ताकि ऋणदाताओं और डिफॉल्टर्स के हित संतुलित रहे। इसे लागू करने वाला प्रमुख संस्थान NCLT चेन्नई बेंच है, जो तमिल नाडु के मामलों की सुनवाई करता है।

उद्धरण - “The objective of the Insolvency and Bankruptcy Code is to consolidate and amend the law relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals.” स्रोत: Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) वेबसाइट

“The Insolvency and Bankruptcy Code provides for time-bound insolvency resolution processes to promote entrepreneurship and balance the interests of all stakeholders.”

- IBBI (Insolvency and Bankruptcy Board of India)

IBBI - Official और IBC की रूपरेखा से आप अधिक विवरण प्राप्त कर सकते हैं।

कोयम्बत्तूर में व्यवसायिक गतिविधियाँ जैसे टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और ऑटो-खण्ड निर्माण पर IBC का प्रभाव स्पष्ट है, क्योंकि इसमें ऋणदाताओं के साथ तेजी से समाधान की दिशा में CoC की भूमिका बढ़ती है।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: [पुनर्गठन और दिवालियापन कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। कोयम्बत्तूर, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें]

यहाँ कोयम्बत्तूर क्षेत्र के वास्तविक-परिदृश्य पर आधारित 4-6 परिस्थितियाँ दी जा रही हैं जहाँ एक अनुभवी ADR, दिवालियापन वा कॉर्पोरेट कानून के वकील की जरूरत स्पष्ट रहती है।

  • परिदृश्य 1: एक कोयम्बत्तूर-आधारित MSME textile इकाई को बैंक-फाइनेंशियल क्रेडिटर्स से चुकौती-समस्या है. ऋण दायित्व बढ़ रहे हैं और 180 दिन के CIRP समय-सीमा के भीतर समाधान ढूँढना आवश्यक हो सकता है. ऐसे मामलों में वैकल्पिक पुनर्गठन योजना (SC/CoC के साथ) या CIRP की तैयारी के लिए वकील आवश्यक होता है.
  • परिदृश्य 2: इंजीनियरिंग मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट में नकदी प्रवाह संकट है और विक्रेता-खाते दायित्व बढ़ा रहे हैं. ऐसे केस में IRP नियुक्ति, moratorium और पुनर्गठन योजना पर काउंसलिंग के लिए अनुभवी अधिवक्ता जरूरी हैं.
  • परिदृश्य 3: एक सप्लायर को कोयम्बत्तूर क्षेत्र के एक बड़े क्लस्टर से भुगतान में देरी हो रही है; ऋणदाता-गठित समिति (CoC) के साथ त्वरित समाधान के विकल्प तलाशने पड़ते हैं. वकील CIRP, PIRP या डिफॉल्ट-प्रबंधन के लिए मार्गदर्शन दे सकता है.
  • परिदृश्य 4: एक स्टार्टअप-इन-कोयम्बत्तूर जो नकदी-संकट की स्थिति में है और उसे शेयरधारकों के साथ मिलकर पुनर्गठन (Restructuring) या व्यक्तिगत-निर्भर समाधान चाहिए. IBC के दायरे में व्यक्तिगत Insolvency अथवा corporate restructuring के विकल्पों पर कानूनी सहायता आवश्यक होती है.
  • परिदृश्य 5: Tamil Nadu में रियल एस्टेट/डिप्रोविडेंट प्रोजेक्ट के समक्ष दिवालियापन से जुड़ी जटिलता है; NCLT Chennai bench के समक्ष CIRP/Resolution Plan तैयार करने के लिए वकील की भूमिका निर्णायक होती है.
  • परिदृश्य 6: व्यक्तिगत Insolvency के मामलों में भी Debt-Relief योजना, सेक्योरिटी-क्रेडिटर्स के साथ बातचीत और कोर्ट-निर्देशन के अनुरूप कानूनी सलाह चाहिए. (व्यक्ति-स्तर पर भी IBC के अंतर्गत प्रक्रिया संभव है.)

इन स्थितियों में एक अनुभवी अधिवक्ता, कॉर्पोरेट लॉ और IBC के विशेषज्ञ के रूप में, दस्तावेज़ीकरण, अंतरिम उपाय, NPC/IRP चयन, CoC-निर्णय और आउट-ऑफ-कोर्ट-समझौते से लेकर अदालत-आदेश तक सभी चरणों में मार्गदर्शन दे सकता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: [कोयम्बत्तूर, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें]

कोयम्बत्तूर के लिए नज़दीकी न्यायिक-खण्ड और केंद्रिय कानूनों का पालन आवश्यक है।

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - कॉर्पोरेट व्यक्तियों और व्यक्तियों के लिए पुनर्गठन तथा दिवालियापन-निवारण का मुख्य कानून।
  • Insolvency and Bankruptcy Board of India Act, 2016 (IBBI Act) और इसके नियम - IBC के कार्यान्वयन और Regulation के लिए regulatory framework देता है।
  • Companies Act, 2013 (क्लेम और CIRP प्रक्रियाओं में दायरे) और NCLT के नियम - कॉर्पोरेट Insolvency proceedings से संबंधित अदालत-संरचना और प्रक्रियाओं का आधार।

स्थानीय नज़रिए से Tamil Nadu में NCLT चेन्नई बेंच प्रमुख अदालत है जो Tamil Nadu के मामलों की सुनवाई करता है. Coimbatore से लंबित दायित्वों के लिए केस-फाइलिंग और सुनवाई चेन्नई बेंच के माध्यम से होती है. NCLT - Official

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: [प्रश्न-उत्तर]

IBC क्या है?

IBC भारत का कानून है जो पुनर्गठन और दिवालियापन निवारण के लिए समय-सीमित प्रक्रियाओं का सेट देता है. यह कॉर्पोरेट, साझेदारी-फर्म और व्यक्तिगत डिफॉल्टर के लिए लागू होता है.

कौन petition फाइल कर सकता है?

Financial creditors, operational creditors, debtors या किसी तीसरे पक्ष के लिए NCLT में insolvency petition संभव है, बशर्ते वे सही वर्ग में आते हों.

CIRP क्या है और कितना समय लगता है?

CIRP एक समय-सीमित प्रक्रिया है जिसमें IRP नियुक्त होता है और 180 दिन की समय-सीमा आमतौर पर पर्याप्त मानी जाती है. आवश्यक होने पर 90 दिनों तक विस्तार संभव है.

CoC क्या भूमिका निभाता है?

Committee of Creditors CoC में वित्तीय क्रेडिटर्स शामिल रहते हैं. वे पुनर्गठन-योजना पर निर्णय लेते हैं और विनियमन के अनुसार योजना को मंजूरी देते हैं.

PIRP क्या है?

Pre-Packaged Insolvency Resolution Process को IBC में 2021 के संशोधनों के साथ प्रस्तुत किया गया था. इसका उद्देश्य CIRP से अधिक तेज और आउट-ऑफ-कोर्ट तरीके से पुनर्गठन देना है.

एमएसएमई के लिए PIRP कैसे मदद करता है?

छोटे उद्यम PIRP के जरिये कानूनी जटिलताओं के बिना त्वरित पुनर्गठन कर सकते हैं, ताकि व्यवसाय चालू रहे और क्रेडिटर्स के हक सुरक्षित रहेंगे.

कौन सा कोर्ट कोयम्बत्तूर-आधारित मामलों के लिए है?

मुख्यकर के अनुसार तमिल नाडु में NCLT चेन्नई बेंच है. Coimbatore के मामले यहाँ लंबित हो सकते हैं और स्थानीय उपायों के अनुसार प्रथमिकता तय होती है.

डिफॉल्ट कब से माना जाता है?

IBC के तहत डिफॉल्ट तब माना जाता है जब एक निश्चित समय में भुगतान नहीं किया गया हो. यह समय-सीमा ड creditors के साथ निर्णय-निर्माण पर निर्भर करती है.

क्या व्यक्तिगत Insolvency संभव है?

हाँ, IBC के अंतर्गत व्यक्तिगत insolvency भी संभव है यदि व्यक्ति स्वयं के ऋण-स्तर पर आवेदन करे और प्रक्रिया पूरी हो।

क्या कोर्ट moratorium जारी रखता है?

IRP नियुक्त होने के समय से moratorium लागू हो सकता है, ताकि डिफॉल्टर के खिलाफ नई कारीवाहियाँ रुकें और प्रक्रिया निष्पक्ष चले.

कौन से दस्तावेज आवश्यक होते हैं?

आमतौर पर वित्तीय विवरण, बैंक स्टेटमेंट्स, क्रेडिटर्स-डायरेक्टेड Liabilities, देय-खातों की सूची और कंपनी के प्रमाणीकरण-पत्र जैसे दस्तावेज चाहिए होते हैं.

क्या मैं Coimbatore में वकील चुन सकता हूँ?

हाँ, Coimbatore में IBC, CIRP, PIRP आदि में विशेषज्ञता रखने वाले वकील उपलब्ध हैं. स्थानीय कोर्ट-प्रक्रिया और Tamil Nadu judicial-प्रथाओं से परिचित होना लाभकारी है.

5. अतिरिक्त संसाधन: [पुनर्गठन और दिवालियापण से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों की सूची]

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - IBC के अनुपालन और Regulation के लिए केंद्रीय नियामक प्राधिकरण। official
  • National Company Law Tribunal (NCLT), Chennai Bench - तमिल नाडु के मामलों की सुनवाई करने वाला प्रमुख न्यायिक-फोरम. official
  • Ministry of Corporate Affairs (MCA) - कॉर्पोरेट कानूनों, e-filing और कॉर्पोरेट मामलों के नियमन का केंद्रीय पोर्टल. official

6. अगले कदम: [पुनर्गठन और दिवालियापन वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया]

  1. अपने केस प्रकार को स्पष्ट करें - CIRP, PIRP, या व्यक्तिगत insolvency. Coimbatore-स्थानीय कानूनी आवश्यकताओं को समझें।
  2. स्थानीय वकीलों की सूची बनाएं जो IBC तथा CIRP/PIRP में अनुभव रखते हैं. प्रारम्भिक परामर्श निर्धारित करें.
  3. अपना संपूर्ण वित्तीय दस्तावेज इकट्ठा करें - बैलेंस शीट, बैंक स्टेटमेंट, क्रेडिटर-लिस्ट और डिफॉल्ट-नोटिस.
  4. कौन सा न्यायालय अथवा मंच उपयुक्त है, इसका मूल्यांकन करें - तमिल नाडु में NCLT चेन्नई बेंच प्रमुख हैं.
  5. कानूनी रणनीति तय करें - पुनर्गठन योजना, क्रेडिटर्स के साथ बातचीत, और समय-सीमा पर निर्णय।
  6. IRP/Resolution Professional के चयन हेतु विस्तृत चर्चा करें और उनकी क्षमताओं की जाँच करें.
  7. समझौते, घोषणाएँ और हर कदम पर रिकॉर्ड रखें ताकि अदालत में स्पष्टता बनी रहे.

नोट- ऊपर दी गई जानकारी सामान्य मार्गदर्शन के रूप में है. किसी भी दावे या केस-स्थिति के लिए कृपया अपने क्षेत्र के अनुभवी वकील से व्यक्तिगत परामर्श लें. आधिकारिक साइट्स से ताजा बदलावों की पुष्टि करें: IBBI, NCLT, MCA.

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