दुमका में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
दुमका, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. दुमका, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

दुमका में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का मौलिक ढाँचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) पर आधारित है. यह कानून कॉर्पोरेट व्यक्तियों, साझेदारी और व्यक्तिगत देनदारों के लिए पुनर्गठन और दिवालिया समाधान प्रक्रियाओं को केंद्रीकृत करता है. दुमका निवासी कारोबारी क्लास के लिए IBC का उद्देश्य समयबद्ध समाधान और मूल्य संरक्षण देना है. दुमका में अदालतें NCLT/NCLAT के क्षेत्राधिकार से जुड़ी रहती हैं, पर क्षेत्र के निकटस्थ बेंच कोलकाता, मुंबई या दिल्ली हो सकती हैं.

"Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 aims to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals." - आधिकारिक सार (IBBI)
"During the moratorium under section 14, no legal action can be initiated or continued against the corporate debtor." - IBBI गाइडेंस और FAQ

IBC के अनुसार पुनर्गठन और दिवालियापन प्रक्रियाओं की समय-सीमा, नियुक्त समितियों और क्रेडिटर्स की भूमिका स्पष्ट है. दुमका के छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए यह मार्गदर्शन देता है कि ऋण के हल के लिए कौन से कदम उठाने चाहिए. क्षेत्रीय जानकारी के लिए स्थानीय बार एसोसिएशन और कानूनी सलाहकारों से भी मार्गदर्शन संभव है.

हाल के वर्षों में IBC के अंतर्गत विविध प्रकार के पुनर्गठन कार्यक्रम और प्रक्रियाएं प्रस्तुत की गई हैं. इस क्षेत्र में Dumka निवासियों को सलाह दी जाती है कि वे विशेषकर सतर्क रहें और क्षेत्रीय बेंच के अदालती निर्णयों के अनुसार ही कदम उठाएं.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • स्थानीय Dumka इकाइयों के लिए नकदी प्रवाह संकट पैदा हो गया हो और ऋण-समझौते के पथ पर पुनर्गठन की जरूरत हो. एक अनुभवी अधिवक्ता आपके लिए CIRP या pre-packaged उपाय शुरू कर सकता है. साथ ही वह CoC के साथ मिलकर व्यवहार का मार्गदर्शन दे सकता है.

  • गैर-निष्पादन या ऋण-दायित्व में महत्त्वपूर्ण गड़बड़ी के वक्त पारदर्शी योजना बनाए बिना समाधान कठिन हो सकता है. पेशेवर कानूनी सलाहकार योजना की वैधता, लागत और क्रियान्वयन की संभावनाओं को स्पष्ट करेगा.

  • यदि आप एक उद्यमी, निवेशक या क्रेडिटर हैं और दुमका क्षेत्र में Insolvency Proceedings की सूचना प्राप्त करते हैं, तो वकील प्रक्रियाओं के वरिष्ठ ज्ञान के साथ सही कदम बताएंगे. गैर-उचित शिकायतों से बचने के लिए यह आवश्यक है.

  • एक व्यवसाय-हस्तांतरण, शेयर योजना या डिफॉल्ट-री-कॉन्फ़िगरेशन के लिए NCLT की अनुमति चाहिए हो तो अनुभवी advicer मार्गदर्शन देता है. इससे योजना के मूल्यांकन और क्रेडिटर्स के साथ बातचीत आसान होती है.

  • अगर आप एक व्यक्तिगत गारंटर हैं या किसी निजी इकाई के संभावित दिवालिया होने से प्रभावित हैं, तो IBC के तहत कौन से विकल्प उपलब्ध हैं और कैसे संस्थागत राहत मिल सकती है, यह जानना जरूरी है.

  • कानूनी सलाहकार Dumka क्षेत्र में क्रॉस-सीमा लेनदेन, क्रॉस-बॉर्डर insolvency या MSME- आधारित प्रावधानों के बारे में सही दिशा दिखा सकता है. यह समय बचाने में मदद करेगा.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - यह मुख्य कानून है जो पुनर्गठन, दिवालियापन और ऋण पुनर्गठन के नियम तय करता है. IBC का उद्देश्य समय-सीमा के भीतर समाधान निकालना है. दुमका के उद्योगों के लिए यह पहला मार्ग है.

  • Companies Act, 2013 - कॉर्पोरेट पुनर्गठन के लिए schemes of arrangement और mergers/compromises के प्रावधान इस कानून के अंतर्गत आते हैं. IBC के साथ मिलकर यह सेक्टर-विशिष्ट पुनर्गठन को संभव बनाता है.

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) Regulations - IBC के अंतर्गत Corporate Insolvency Resolution Process (CIRP) Regulations और Cross-Border Insolvency Regulations जैसे प्रावधान लागू होते हैं. ये प्रक्रियाओं के मानक सेट करते हैं.

  • Ministry of Corporate Affairs (MCA) और NCLT/NCLAT Rules - NCLT और NCLAT के नियम, प्रक्रियाओं के अनुकूलन और मामले के फाइलिंग-आदेशों के लिए मानक निर्धारित करते हैं. Dumka से जुड़े मामलों के लिए इनका प्रभाव है.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IBC क्या है?

IBC घटनाओं को एक जगह पर समाहित करता है. यह पुनर्गठन, दिवालिया समाधान और क्रेडिटर्स के अधिकारों को स्पष्ट करता है. यह दुमका सहित पूरे भारत में मान्य है.

Moratorium क्या है और इसका प्रभाव क्या है?

Moratorium में देनदार के खिलाफ नए दावे रोक दिए जाते हैं. इसका उद्देश्य परिसंपत्तियों के मूल्य को बनाए रखना है. यह CIRP के शुरू होने पर लागू होता है.

CIRP क्या है?

Corporate Insolvency Resolution Process एक समय-सीमा वाला प्रोसेस है. इसमें रिज़ॉल्यूशन प्लान बनता है और मंजूर होता है. चूँकि यह प्रक्रियात्मक है, क्षेत्रीय कानूनी सलाह जरूरी है.

कौन-से उद्योग IBC के दायरे में आते हैं?

IBC कॉर्पोरेट डेब्टर्स, व्यक्तिगत देनदार और साझेदारी के लिए लागू होता है. Dumka के MSMEs भी इसके तहत संभव रीकॉन्सिलेशन के लिए पात्र हो सकते हैं.

NCLT और NCLAT क्या काम करते हैं?

NCLT संपादन-आवেদন और CIRP का न्यायिक निर्णय करता है. NCLAT इसके विरुद्ध अपील सुनता है. अदालतों के निर्णय अंतिम होते हैं जब तक कि कोई अपील नहीं रहती.

रिसॉल्यूशन प्लान किसे मंजूरी देता है?

रिसॉल्यूशन प्लान CoC और फिर NCLT द्वारा अनुमोदित होता है. योजना सभी क्रेडिटर्स के लिए बाध्य होती है.

दुमका में प्रक्रियाएं शुरू कैसे की जा सकती हैं?

सबसे पहले एक कानूनी सलाहकार से मिलें जो IBC अनुभव रखता हो. वे दस्तावेज एकत्र कर शुल्क-निर्धारण और दाखिले की प्रक्रिया बताएंगे.

कौन से दस्तावेज आवश्यक होंगे?

कंपनी पंजीकरण प्रमाण पत्र, वार्षिक रिपोर्ट, वित्तीय पन्ने, क्रेडिटर्स सूची और लेन-देन के रिकॉर्ड आवश्यक होंगे. व्यक्तिगत देनदारों के लिए पहचान-प्रमाण और आय-कर रिकॉर्ड भी जरूरी हो सकता है.

क्या IBC छोटे व्यवसायों के लिए है?

हाँ, MSMEs भी IBC के जरिए पुनर्गठन के अवसर प्राप्त कर सकते हैं. हालांकि प्रक्रिया लागत और समय-सीमा को ध्यान में रखना चाहिए.

यदि प्लान असफल हो जाये तो क्या होगा?

फिर परिसंपत्तियों का विक्रय, दिवालिया प्रक्रिया की समाप्ति और liquidation शुरू हो सकता है. यह निर्णय NCLT द्वारा लिया जाता है.

क्रॉस-बॉर्डर insolvency क्या है?

क्रॉस-बॉर्डर insolvency से बाहर के लोकेशन वाले हितधारक भी प्रभावी हो सकते हैं. IBC Regulations ऐसे मामलों के लिए प्रावधान बनाते हैं.

क्या NCLT की सुनवाई Dumka से संभव है?

स्थानीय Dumka से सीधा NCLT सुनवाई संभव नहीं हो सकता. नजदीकी बेंच के साथ वकील के माध्यम से दाखिला और भागीदारी संभव है.

क्या अदालत के बाहर समझौते संभव हैं?

कई मामलों में क्रेडिटर्स के साथ बाहरी समझौते संभव होते हैं. पर यह सभी स्थिति में लागू नहीं होता; कानूनी सलाह जरूरी है.

5. अतिरिक्त संसाधन

6. अगले कदम

  1. अपना दस्तावेज़ संकलित करें - वित्तीय स्टेटमेंट, देनदारों की सूची, ऋण-समझौते आदि.
  2. यह तय करें कि कौन सा मार्ग उपयुक्त है - CIRP, MSMe Pre-Pack, या व्यक्तिगत insolvency?
  3. दुमका क्षेत्र में IBC विशेषज्ञ वकील खोजें - अनुभव और केस-स्केल देखें.
  4. नजदीकी NCLT/NCLAT कार्यालय और CoC से संपर्क करें - आवेदन और दाखिला प्रक्रियाओं को समझें.
  5. एक स्पष्ट पुनर्गठन प्लान बनवाएं - लागत, समय-सीमा, क्रेडिटर्स के हितों का संतुलन रखें.
  6. कानूनी स्टेप्स को सावधानी से फाइल करें - सही फॉर्म, प्रलेखन और समय-सीमा का पालन करें.
  7. विकल्पों पर पुनः मूल्यांकन करें - यदि प्रोसेस धीमा हो या लागत अधिक हो, तो वैकल्पिक मार्ग पर विचार करें.

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