गांधीनगर में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील

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Advocate Alpa A Prajapati
गांधीनगर, भारत

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ए ए प्रजापति एसोसिएट्स एक अग्रणी विधिक फर्म है जो कॉर्पोरेट व वाणिज्यिक कानून, आव्रजन, परिवार संबंधी कानून,...
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गांधीनगर, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

गांधीनगर में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून भारत के समान संचालित होते हैं। IBC 2016 सभी प्रकार के डिफॉल्टर्स को कवर करता है, चाहे वे कॉरपोरेट हों, साझेदारी हों या व्यक्तिगत हो। लक्ष्य परिसंपत्तियों के मूल्य को अधिकतम करना है और व्यवसायों को समय पर संरक्षित करना है।

IBC प्रक्रिया में Corporate Debtor के लिए CIRP, समिति क्रेडिटर्स (CoC), Insolvency Professional और NCLT की भूमिका रहती है। यह समय-सीमित प्रक्रिया है ताकि परिसंपत्ति मूल्य संरक्षित रहे। गांधीनगर में अधिकांश मामलों की सुनवाई अहमदाबाद के NCLT बेंच द्वारा होती है।

व्यक्ति, एकल-स्वामित्व व्यवसाय और छोटी कंपनियों के लिए भी पुनर्गठन के रास्ते उपलब्ध हैं। यह संरचना ऋणदाताओं के हितों के संतुलन के साथ चलती है और क्रेडिटर्स के निर्णय पर निर्भर करती है। गांधी नगर-आधारित व्यवसायों के लिए स्थानीय कानूनी सलाह अधिक उपयोगी होती है।

“An Act to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time bound manner for maximizing the value of assets of such persons.”

Source: Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 - Preamble. https://legislation.gov.in

“The primary objective of the Code is to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution.”

Source: Ministry of Corporate Affairs (MCA) - IBC Overview. https://www.mca.gov.in

“IBC provides for a time-bound framework for resolving insolvencies and maximizing value.”

Source: Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - About IBC. https://www.ibbi.gov.in

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • परिदृश्य 1: Gandhinagar-आधारित MSME-bank loan default

    घरेलू उत्पादन इकाई ने बैंक ऋण चुकाने में देरी की है। ऋणदाता ने CIRP शुरू किया है और बेंच-स्तरीय प्रक्रिया चाही जाती है। कानून सलाहकार पेचीदा दस्तावेजों की तैयारी करेगा और सुनवाई की समय-सीमा तय करेगा।

  • परिदृश्य 2: क्रेडिटर्स कॉमिटी (CoC) के साथ पुनर्गठन

    गांधीनगर-आधारित सेवा कंपनी पर ऋण भार भारी है और क्रेडिटर्स कॉमिटी पुनर्गठन योजना बनाती है। एक अधिवक्ता CoC के साथ योजना बनवाने, उचित मूल्यांकन और संशोधनों में मदद देगा।

  • परिदृश्य 3: पुनर्गठन से पहले विलय या संरचना परिवर्तन

    पार्टनरशिप या कंपनी संरचना बदली जा रही है ताकि ऋण-स्वीकृति और संक्षेपित पुनर्गठन संभव हो सके। एक कानून-एजेंट विकल्प, लागत और वैध दस्तावेजों पर मार्गदर्शन करेगा।

  • परिदृश्य 4: व्यक्तिगत दिवाला बनाम व्यवसाय दिवाला

    व्यक्ति-स्तर पर insolvency or debt settlement का निर्णय जरूरी है। व्यक्तिगत दिवाला मामले में सही प्रैक्टिस, क्रेडिटर्स के अधिकार और अर्हता की जानकारी चाहिए होती है।

  • परिदृश्य 5: secured creditor के रूप में SARFAESI के समान विकल्प

    secured-asset recovery के रास्ते खंगालने के लिए SARFAESI और IBC के बीच सही चयन जरूरी है। एक अनुभवी अधिवक्ता कानूनी विकल्पों की तुलना कराता है।

  • परिदृश्य 6: Gandhinagar में स्थानीय अदालतों से जाँच-परख

    NCLT Ahmedabad बेंच और Gujarat High Court के इतिहास को समझना जरूरी है। स्थानीय वकील यह सुनिश्चित करेगा कि दस्तावेज समय-सीमा के भीतर पूरी हों।

स्थानीय कानून अवलोकन

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC)

    IBC सभी प्रकार के दिवाला-प्रकरणों के लिए मुख्य कानून है। गांधीनगर में CIRP और liquidation के फैसले NCLT के अधीन होते हैं।

  • Companies Act, 2013 (संशोधनों सहित)

    कंपनियों के विलय, पुनर्गठन और योजनाओं के लिए Sections 230-237 लागू होते हैं। IBC के साथ संयुक्त प्रचालनों में यह अहम है।

  • Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI)

    secured creditors के लिए संपत्ति के रख-रखाव, बिक्री और पुनर्गठन के वैकल्पिक उपाय देता है।

नोट: Gandhinagar में Gandhinagar-आधारित कारोबारों के लिए NCLT Ahmedabad bench सुनवाई के लिए प्राथमिक मंच है। सरकारी-स्रोत: IBBI, MCA, NCLT वेबसाइटें देंखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IBC क्या है?

IBC 2016 एक समय-सीमा आधारित कानून है जो पुनर्गठन और insolvency resolution को सक्षम करता है। यह Corporate, Partnership और Individual debtors पर लागू है।

गांधीनगर में CIRP कैसे शुरू होता है?

økonomी में सबसे पहले insolvency petition NCLT की मंजूरी से दाखिल होती है। फिर Insolvency Professional नियुक्त होता है और CoC बनता है।

CoC कौन बनाता है और उसका क्या काम है?

CoC creditors का संयुक्त प्रतिनिधित्व है। यह पुनर्गठन योजना की मंजूरी देता है और यूपी-नीति-निर्णय लेता है।

क्या व्यक्तिगत दिवाला संभव है?

हाँ, IBC के अंतर्गत व्यक्तिगत दिवाला के लिए आवेदन संभव है। यह व्यक्तिगत ऋण और वित्तीय स्थितियों पर निर्भर है।

Liquidation क्या है और कब होती है?

Liquidation वह प्रक्रिया है जिसमें परिसंपत्तियाँ बेची जाती हैं और ऋण चुकाने के लिए पैसे इकट्ठे होते हैं। यह CIRP के बाद संभव है अगर पुनर्गठन फेल होता है।

IBC के तहत समय-सीमा कितनी है?

सीआईआरपी आम तौर पर 180 दिनों में समाप्त करनी होती है। कुछ परिस्थितियों में 90 दिनों तक विस्तार संभव है, बशर्ते NCLT सहमति हो।

गांधीनगर में कानूनजगत लेखक-प्रतिनिधि क्या कर सकता है?

कानूनी सलाहकार दस्तावेज़ तैयारी, दलीलें बनाना, को-क्रेडिटर्स समिति के साथ वार्ता करना और सुनवाई की रणनीति बनाता है।

CoC का निर्णय कैसे प्रभावित होता है?

CoC के निर्णय से पुनर्गठन योजना, ऋण-राहत और दिवाला प्रक्रिया की दिशा तय होती है।

कौनसी राशि लागत आएगी?

वकील-फीस, अदालत शुल्क और प्रोफेशनल फीस मिलाकर लागत बढ़ सकती है। अंतर संभावित फॉर्म-फीस और समय-सीमा पर निर्भर है।

क्या unsecured creditors के पास दावा होता है?

हाँ, unsecured creditors भी दावे कर सकते हैं पर उनकी वापसी को CoC और परिसंपत्तियों के मूल्य पर निर्भर किया जाएगा।

क्या IBC के तहत पुनर्गठन केवल बड़ी कंपनियों के लिए है?

नहीं, छोटे- mideume और एकल-स्वामित्व व्यवसाय भी पुनर्गठन के विकल्प चुन सकते हैं।

SARFAESI बनाम IBC-कौन सा विकल्प बेहतर है?

यह निर्भर करता है संपत्ति के प्रकार, ऋण की स्थिति और पक्षकारों के हित पर। एक कानूनी सलाहकार आपको चयन में मार्गदर्शन देगा।

NCLT के बाहर settlement संभव है?

हाँ, कई मामलों में ऋणदाताओं के साथ समझौते से पुनर्गठन या डॉपी-डिस्प्यूट हल हो सकता है, पर यह अवश्य लागू कानूनों के अनुरूप होना चाहिए।

गांधीनगर में किस प्रकार के दस्तावेज चाहिए?

डायरेक्टर-प्रोफाइल, वित्तीय स्टेटमेंट, डिफॉल्ट ज्ञापना, क्रेडिटर्स चेयरमैन-रिपोर्ट, सम्झौते और अन्य दस्तावेज अनिवार्य होते हैं।

मैं कैसे शुरू कर सकता हूँ?

सबसे पहले एक अनुभवी वकील से मिलें, अपनी वित्तीय स्थिति का संपूर्ण दस्तावेजीकरण करें और स्थानीय NCLT बेंच की प्रक्रियाओं के अनुसार कदम उठाएं।

अतिरिक्त संसाधन

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - अधिकारिक वेबसाइट पर IBC के अनुपालन और प्रोफेशनल्स की सूची मिलती है। https://www.ibbi.gov.in
  • National Company Law Tribunal (NCLT) - भारत में CIRP-निर्णय और सुनवाई की मुख्य न्यायिक इकाई। https://nclt.gov.in
  • Ministry of Corporate Affairs (MCA) - IBC के आधिकारिक संकल्पना और अनुपालन मार्गदर्शिका। https://www.mca.gov.in

अगले कदम

  1. अपनी स्थिति स्पष्ट करें और लक्ष्य तय करें - पुनर्गठन या liquidation।
  2. सभी वित्तीय दस्तावेज इकट्ठा करें - बैंक स्टेटमेंट, ऋण विवरण, कर-रिकॉर्ड आदि।
  3. Gandhinagar-में अनुभवी फर्म या अधिवक्ता चुनें जो IBC-एरिया में अनुभव रखते हों।
  4. पहली परामर्श में मार्गदर्शन-फीस, समय-सीमा और संभावित परिणाम पर सपष्ट चर्चा करें।
  5. कानूनी विकल्पों की तुलना करें - CIRP, compromise, restructuring, या liquidation।
  6. दस्तावेजों की समीक्षा और इलेक्ट्रॉनिक फॉर्म-फाइलिंग की तैयारी करें।
  7. स्थानीय NCLT बेंच के साथ सुनवाई-योजना बनाएं और क्रेडिटर्स को सूचना दें।

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