गया में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
गया, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. गया, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून के बारे में: पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का मुख्य ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 है। यह कॉरपोरेट व्यक्तियों, साझेदारी फर्मों और व्यक्तिगत देनदारों के लिए दिवालियापन समाधान के तरीके निर्धारित करता है। इस कोड का उद्देश्य समय-निष्ठ, पारदर्शी और इक्विटी-आधारित समाधान प्रदान करना है।

मुख्य तथ्य: IBC एक समय-सीमा आधारित प्रक्रिया बनाता है और एक Insolvency Professional के नेतृत्व में CIRP चलाया जाता है।

The object of this Code is to consolidate and amend the law relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals.
IBC shall be administered by the Insolvency and Bankruptcy Board of India for regulating insolvency professionals and insolvency processes.

IBC के अलावा कॉरपोरेट रीस्ट्रक्चरिंग के लिए Companies Act की उप-व्यवस्थाओं का भी उपयोग किया जाता है। साथ ही secured क्रेडिटर्स के अधिकार SARFAESI अधिनियम के तहत संरक्षित रहते हैं।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: पुनर्गठन और दिवालियापन कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य

पुनर्गठन और दिवालियापन के मामलों में कानूनी सलाह न सिर्फ कानूनी प्रक्रिया समझने के लिए जरूरी है, बल्कि सही रणनीति बनाने में भी मदद करती है। नीचे भारत से जुड़ी वास्तविक परिदृश्य दिए गए हैं।

  • उदाहरण 1 - कॉरपोरेट देनदार का CIRP शुरू हुआ: एक बड़ी फैक्ट्री या इकाई दिवालिया होने की स्थिति में बैंक क्रेडिटर्स ने CIRP दायर किया। Essar Steel India Ltd जैसे मामलों में NCLT ने CIRP मान्य किया और प्रस्तावित पुनर्गठन योजना पर निर्णय लिया गया। एक अनुभवी वकील या कानूनी सलाहकार CIRP की प्रक्रिया, क्रेडिटर्स के अधिकारों और समाधान योजना के परीक्षण में मार्गदर्शन देता है।

  • उदाहरण 2 - परिचालक क्रेडिटर द्वारा दायर CIRP: किरायेदान या सप्लायर्स ने बकाया का दावा किया और NCLT ने मामले को CIRP के लिए स्वीकार किया। ऐसे मामलों में क्रेडिटर्स के दावे, प्राथमिकता और भुगतान-क्रम पर स्पष्ट सलाह जरूरी होती है।

  • उदाहरण 3 - MSME के चयनित PPIRP मार्ग की संभावना: छोटे व्यवसायों के लिए PPIRP जैसे विकल्प पर विचार किया जा सकता है। एक वकील PPIRP की शर्तों, प्रक्रिया और टाइम-लाइन का सही आकलन कर सकता है ताकि कंपनी पुनर्जीवित हो सके या उचित समाधान मिले।

  • उदाहरण 4 - क्रॉस-बॉर्डर Insolvency के मुद्दे: अगर किसी समूह के भीतर भारत के साथ विदेशी परिसंपत्तियाँ हों, तो क्रॉस-बॉर्डर insolvency नियमों की जाँच जरूरी है। एक कानूनी सलाहकार अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं के प्रभाव का आकलन कर सकता है।

  • उदाहरण 5 - व्यक्तिगत/भागीदारी दिवालियापन: व्यक्तिगत देनदारों या साझेदारी फर्म्स के लिए IBC के अंतर्गत दिवालियापन नियम लागू होते हैं। उचित परामर्श से देय-सम्पत्ति, आय आदि का सही विभाजन संभव है।

  • उदाहरण 6 - ऋण-उत्पन्न विवादों में प्राथमिकता: न्यायालयिक निर्णयों, क्रेडिटर्स के अधिकारों और लेनदारी की क्रमबद्धता पर स्पष्ट मार्गदर्शन आवश्यक होता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: गया, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) यह केंद्र-स्तरीय प्रमुख कानून है और दिवालिया/पुनर्गठन प्रक्रियाओं की रूपरेखा बनाता है।

Companies Act, 2013 इस अधिनियम के अंतर्गत समायोजन, समझौता और व्यवस्था के माध्यम से कॉरपोरेट पुनर्गठन संभव है, जैसे Sections 230-232.

Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI) ऋणकर्त्ताओं के लिए सिक्योरिटी-इन-लीडिंग और संपत्ति की पुनःप्राप्ति के प्रावधान देता है।

इन कानूनों के साथ समय-समय पर नये नियम व संशोधन लागू होते रहते हैं, जैसे cross-border insolvency प्रावधानों के लिए हालिया amendements भी देखे जाते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IBC क्या है?

IBC एक केंद्रीय कानून है जो कॉरपोरेट व्यक्तियों, साझेदारी फर्मों और व्यक्तियों के लिए पुनर्गठन और दिवालियापन समाधान देता है। इसका उद्देश्य समय-सीमा के भीतर उचित समाधान प्राप्त करना है।

CIRP कैसे शुरू होता है?

जब किसी देनदार की अधिकतम देनदारी लंबित हो, तो वित्तीय क्रेडिटर्स या परिचालन क्रेडिटर्स NCLT के पास CIRP आवेदन कर सकते हैं।

मोराटोरियम क्या है और तब लागू होता है?

मोराटोरियम देनदार पर ऋण-निवेश रोक देता है और नया ऋण लेने या संपत्ति बिक्री पर रोक लगता है। यह प्रक्रिया IRP के द्वारा संचालित होती है।

Insolvency Professional क्या करता है?

IP CIRP के दौरान संचालन और प्रक्रिया की निगरानी करता है, संरचना बनाता है, और resolution plan के लिए अनुमति-पत्र देता है।

लिक्विडेशन और पुनर्गठन के निर्णय कैसे लिए जाते हैं?

NCLT/ NCLAT के समक्ष प्रस्तुतीकरण के बाद एक योजना 'रेजोल्यूशन प्लान' को मंजूरी मिलती है या देनदार को लिक्विडेट किया जा सकता है।

क्या क्रेडिटर्स की प्राथमिकता तय है?

हाँ, IBC के अंतर्गत दावों की प्राथमिकता क्रेडिटर्स के प्रकार पर आधारित है, जिसमें कर्मचारियों वेतन और कर-दायित्व उच्च प्राथमिकता पाते हैं।

क्या cross-border insolvency संभव है?

IBC में cross-border insolvency के लिए प्रावधान मौजूद हैं ताकि वैश्विक देनदारियों का समुचित समाधान हो सके।

कौन सा वकील मेरी सहायता कर सकता है?

IBC, CIRP और RBI के नियमों में विशेषज्ञता रखने वाला कानूनी सलाहकार या अधिवक्ता जो IBBI द्वारा पंजीकृत Insolvency Professional के साथ काम कर सके।

Congress/कायदे में सरकार ने हाल में क्या बदला?

IBC के संशोधनात्मक अधिनियमों से PPIRP, cross-border insolvency जैसे प्रावधान जोड़े गये हैं, ताकि अधिक लचीला और समय-समय पर अपडेट किया जा सके।

आईबीबीआई का क्या रोल है?

IBBI रजिस्ट्रेशन, प्रोफेशनल्स और एजेंसियों की निगरानी करता है और प्रक्रिया के मानक तय करता है।

अगर मैं देयक हूँ और मेरा केस चल रहा है, मुझे क्या करना चाहिए?

सबसे पहले एक अनुभवी वकील या कानूनी सलाहकार से संपर्क करें, दस्तावेज़ एकत्र करें और IP के साथ मिलकर स्ट्रैटेजी तय करें।

व्यक्तिगत दिवालियापन में क्या होता है?

IBC व्यक्तिगत देनदारों के लिये भी व्यवस्था बनाता है, ताकि व्यक्तिगत ऋणों का व्यवस्थित समाधान हो सके।

Restructuring vs Liquidation - फर्क क्या है?

Restructuring में कंपनी पुनः व्यवस्थित होकर चलती रहती है, जबकि liquidation में संपत्ति विक्रय कर देनदारियों का भुगतान किया जाता है।

5. अतिरिक्त संसाधन

6. अगले कदम: पुनर्गठन और दिवालियापन वकील खोजने के लिए 5-7 चरणों की प्रक्रिया

  1. अपना उद्देश्य स्पष्ट करें - पुनर्गठन, समाधान योजना, या liquidation।
  2. अधिकारिक दस्तावेज़ एकत्र करें - कंपनी के लेखा-जोखा, वित्तीय समीप, कर्ज विवरण।
  3. IBBI रजिस्ट्रेशन चेक करें - IP और IPA के बारे में सत्यापन करें।
  4. कम-से-कम् 3 वकीलों से initial consultation लें - अनुभव, फीस-structure और सफलता दर पूछें।
  5. फीस-डायनिंग और क्लाइंट-शर्तें लिखित में लें - engagement letter जरूरी है।
  6. कानूनी जोखिम, टाइमलाइन और संभावित रिज़ॉल्यूशन प्लान की उम्मीदें स्पष्ट करें।
  7. गया, बिहार निवासी होने के नाते स्थानीय बार-एजेंसी से referrals लें और ऑनलाइन रेटिंग चेक करें।

संदर्भ और आधिकारिक उद्धरण इस क्षेत्र के प्रमुख स्रोत IBC के पृष्ट-आधार और IBBI के आधिकारिक संदेशो से लिए जाते हैं।

उद्धरण संकेत:

The object of this Code is to consolidate and amend the law relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals.
IBC shall be administered by the Insolvency and Bankruptcy Board of India for regulating insolvency professionals and insolvency processes.

नोट: यह मार्गदर्शिका समय-समय पर बदलते कानून और नये दिशानिर्देश पर आधारित है। गया, बिहार Residents के लिए स्थानीय प्रथाओं पर व्यावहारिक सलाह जरूरी है।

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