गोरखपुर में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील

अपनी ज़रूरतें हमारे साथ साझा करें, कानूनी फर्मों से संपर्क प्राप्त करें।

मुफ़्त। 2 मिनट लगते हैं।

HR Law Associates
गोरखपुर, भारत

English
एचआर लॉ एसोसिएट्स, श्री हिफ्ज़ुर रहमान अजमल द्वारा स्थापित, गोरखपुर, भारत में मुख्यालय वाला एक पूर्ण-साक्षरीक...
जैसा कि देखा गया

गोरखपुर, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून के बारे में: गोरखपुर, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

गोरखपुर उत्तर प्रदेश का एक बड़ा व्यापार केंद्र है। स्थानीय व्यापारी फ्रैक्शनल ऋणों से जूझते हैं और बैंक ऋण चुकाने में कठिनाई महसूस करते हैं। ऐसे समय में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून दो प्रमुख रास्ते प्रदान करता है।

IBC का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर कॉर्पोरेट संस्थाओं, व्यक्तिगत व्यक्तियों और साझेदारी फर्मों के लिए पुनर्गठन और दिवालियापन समाधान को एकीकृत बनाना है।

“An Act to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, individuals and partnership firms.”

- Insolvency and Bankruptcy Code, 2016

IBC यह सुनिश्चित करता है कि insolvency resolution एक समय-सीमित प्रक्रिया के अंतर्गत पूर्ण हो सके।

- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI)

गोरखपुर में मामलों को NCLT और NCLAT के जरिए सुलझाने की प्रक्रिया प्रभावी है। नियुक्त रि-सॉल्यूशन प्रोफेशनल और समिति ऋणकर्ताओं की भूमिका अहम रहती है।

“Time-bound insolvency resolution framework” के जरिये समाधान तेज किया जाता है।

- IBBI आधिकारिक सार

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: पुनर्गठन और दिवालियापन कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। गोरखपुर, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें

नीचे 4-6 सामान्य लेकिन प्रासंगिक परिदृश्य दिए गए हैं, जिनमें एक स्थानीय वकील आपकी बेहतर मदद कर सकता है।

  • गोरखपुर में एक सूक्षम उद्योग (एमएसएमई) बैंक ऋण डिफॉल्ट में फंस गया है और ऋण पुनर्गठन या Insolvenz प्रक्रिया शुरू करनी है।
  • एक परिवार-स्वामित्व वाली व्यवसायिक इकाई दिवालिया होने की स्थिति में है और ऋणदाताओं के साथ पुनर्गठन प्लान रखना चाहता है।
  • एक निर्माण कंपनी पर स्पष्टीकरण नहीं मिल रहा है कि उसे कौन से कानून के तहत संरचना में लाया जाये; पुनर्गठन या परिसमापन निर्णय लेना है।
  • एक व्यापारी ने कई बैंकों से ऋण लिए हैं और Recovery of Debts के बजाय IBC के तहत ऋण समाधान की स्कीम चुनना चाहता है।
  • एक व्यापारी के पास आपसी साझेदारों के विवाद के कारण कंपनी-स्तर पर वित्तीय संकट है और कानूनन सही निर्णय चाहिए।
  • राज्य-स्तर पर राजस्व के साथ कर-चूक या litigation-समझौतों के साथ insolvency से जुड़ी जटिलताएँ सामने आ रही हैं-रेडर स्ट्रक्चर बनाना महत्वपूर्ण है।

इन स्थितियों में एक अनुभवी advokat आपकी भूमिका को स्पष्ट कर सकता है, पार्टियों के बीच समझौता, रिकॉर्डिंग, और उचित प्रक्रिया तय कर सकता है।

स्थानीय कानून अवलोकन: गोरखपुर, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें

  1. Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - कॉर्पोरेट संस्थाओं, व्यक्तियों और साझेदारियों के पुनर्गठन और दिवालियापन निराकरण का आधार.
  2. Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI Act) - सिक्योरिटी इंटरेस्ट के आधार पर संपत्ति वसूली के लिए सक्षम ढांचा देता है।
  3. Recovery of Debts Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993 (RDDBFI) - बैंकों व वित्त संस्थाओं के ऋणों की वसूली के लिए RDC ट्रिब्यूनल के माध्यम से गति देता है।

गोरखपुर और उत्तर प्रदेश के लिए ये कानून स्थानीय अदालतों (NCLT Allahabad Bench) और खासकर ऋण-सम्बन्धी मामलों में लागू होते हैं। दिवालियापन प्रक्रिया के लिए नोटिस, प्रोफेशनल की नियुक्ति और निर्णय-समय-सीमाएं इन कानूनों द्वारा निर्धारित हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: 10-12 प्रश्न-उत्तर जोड़े

IBC क्या है?

IBC एक केंद्रीय कानून है जो पुनर्गठन और दिवालियापन के नियम तय करता है। यह कॉर्पोरेट व्यक्तियों, व्यक्तिगत इकाइयों और साझेदारी फर्मों पर लागू होता है।

क्या IBC Gorakhpur में लागू होता है?

हाँ, यह पूरे भारत में लागू है और Uttar Pradesh के Gorakhpur जिले में भी NCLT Allahabad Bench के अधीन लागू होता है।

IBC के तहत कंपनी को कितने दिनों में रिजॉल्यूशन प्लान चाहिए?

आमतौर पर 180 दिनों का समय-सीमा है, जिसे कुछ परिस्थितियों में बढ़ाया जा सकता है।

क्या व्यक्तिगत Insolvency भी IBC के अधीन है?

हाँ, individuals and sole proprietors के लिए भी IBC के तहत पुनर्गठन और insolvency के उपाय हैं।

NCLT क्या करता है?

NCLT insolvency cases की सुनवाई करता है और समाधान योजनाओं को मंजूरी देता है या परिसमापन का आदेश देता है।

गोरखपुर में कंसीलियेशन प्लान कैसे शुरू होता है?

पहला कदम debt restructuring application या insolvency filing है, जिसके बाद resolution professional बनकर समिति ऋणकर्ताओं के साथ योजना बनाता है।

आरडीडीबीएफआई एक्ट का क्या उद्देश्य है?

यह बैंकों और वित्त संस्थानों के ऋणों की वसूली के लिए RDC ट्रिब्यूनलों के माध्यम से प्रक्रिया निर्धारित करता है।

SARFAESI एक्ट कब लागू होता है?

जब बैंक या वित्त संस्थान संपत्ति पर सिक्योरिटी इंटरेस्ट रखें, तब यह संपत्ति के त्वरित नियंत्रण और बिक्री की सुविधा देता है।

कौन न्यायिक प्राधिकार Gorakhpur में मामलों की सुनवाई करता है?

IBC से जुड़े प्रमुख मामले NCLT Allahabad Bench में जाते हैं; अपील NCLAT पर होती है।

क्या दिवालिया होने की स्थिति में कर्मचारियों के अधिकार सुरक्षित रहते हैं?

हां, कानून सभी पक्षों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रावधान देता है, और संयुक्त पुनर्गठन योजना कर्मचारियों के हित की रक्षा करती है।

क्या मैं Gorakhpur के स्थानीय वकील से परामर्श ले सकता हूँ?

हाँ, स्थानीय बार असोसिएशन के रजिस्ट्रेशन वाले advokat से परामर्श लें ताकि क्षेत्रीय प्रक्रियाओं की जानकारी हो।

अतिरिक्त संसाधन: पुनर्गठन और दिवालियापन से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - कानून-व्यवस्था का प्रमुख नियामक; रजिस्ट्रेशन, मानक और दिशा-निर्देश उपलब्ध कराता है।
  • National Company Law Tribunal (NCLT) - insolvency-सम्बन्धी मामले सुनवाई और निर्णय के लिए सक्षम मंच।
  • Reserve Bank of India (RBI) - ऋण-रेस्ट्रक्चरिंग, बैंक-नीतियाँ और प्रक्रियात्मक मार्गदर्शकियाँ।

अगले कदम: पुनर्गठन और दिवालियापन वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपने उद्देश्य स्पष्ट करें: पुनर्गठन, ऋण-सुलह, या परिसमापन चाहिये।
  2. गोरखपुर के बार-एसोसिएशन या राज्य बार काउंसिल से लाइसensed advokat खोजें।
  3. IBC-विशेषज्ञता वाले वकीलों की योग्यता और अनुभव जाँचें; केस-हिस्ट्री देखें।
  4. पहला Consultation शेड्यूल करें; फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स साथ रखें।
  5. क्रेडिटर्स, फाइनेंसर और RP के साथ मिलकर रणनीति बनाएं; engagement letter लें।
  6. फीस संरचना और समय-सीमा स्पष्ट कर लें; अनुमानित खर्च पूछें।
  7. कानूनी विकल्पों पर अंतिम निर्णय लेने से पहले एक वैकल्पिक योजना तैयार रखें।

स्थानीय निवासियों के लिए व्यावहारिक सलाह: Gorakhpur में भागीदारों के साथ स्पष्ट लिखित समझौते रखें, और बैंक-ऋण के समय ऋण-सम्बन्धी दस्तावेज़ अच्छी तरह रखें। IBC प्रक्रियाओं के दौरान समय-सीमा की पालना बहुत अहम है।

Lawzana आपको योग्य कानूनी पेशेवरों की चयनित और पूर्व-जाँच की गई सूची के माध्यम से गोरखपुर में में सर्वश्रेष्ठ वकील और कानूनी फर्म खोजने में मदद करता है। हमारा प्लेटफ़ॉर्म अभ्यास क्षेत्रों, पुनर्गठन और दिवालियापन सहित, अनुभव और ग्राहक प्रतिक्रिया के आधार पर तुलना करने की अनुमति देने वाली रैंकिंग और वकीलों व कानूनी फर्मों की विस्तृत प्रोफ़ाइल प्रदान करता है।

प्रत्येक प्रोफ़ाइल में फर्म के अभ्यास क्षेत्रों, ग्राहक समीक्षाओं, टीम सदस्यों और भागीदारों, स्थापना वर्ष, बोली जाने वाली भाषाओं, कार्यालय स्थानों, संपर्क जानकारी, सोशल मीडिया उपस्थिति, और प्रकाशित लेखों या संसाधनों का विवरण शामिल है। हमारे प्लेटफ़ॉर्म पर अधिकांश फर्म अंग्रेजी बोलती हैं और स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों कानूनी मामलों में अनुभवी हैं।

गोरखपुर, भारत में में शीर्ष-रेटेड कानूनी फर्मों से उद्धरण प्राप्त करें — तेज़ी से, सुरक्षित रूप से, और बिना अनावश्यक परेशानी के।

अस्वीकरण:

इस पृष्ठ पर दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। हम सामग्री की सटीकता और प्रासंगिकता सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं, लेकिन कानूनी जानकारी समय के साथ बदल सकती है, और कानून की व्याख्या भिन्न हो सकती है। आपको अपनी स्थिति के लिए विशिष्ट सलाह हेतु हमेशा एक योग्य कानूनी पेशेवर से परामर्श करना चाहिए।

हम इस पृष्ठ की सामग्री के आधार पर की गई या न की गई कार्रवाइयों के लिए सभी दायित्व को अस्वीकार करते हैं। यदि आपको लगता है कि कोई जानकारी गलत या पुरानी है, तो कृपया contact us, और हम उसकी समीक्षा करेंगे और जहाँ उचित हो अपडेट करेंगे।