गुवाहाटी में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील
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गुवाहाटी, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
1. गुवाहाटी, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन
IBC, 2016 भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन केन्द्रीय ढांचे का प्रमुख कानून है। यह कंपनियों के लिए समय-सीमा के भीतर समाधान खोजने पर केंद्रित है। गुवाहाटी समेत पूरे देश में यह प्रक्रिया लागू होती है और मुख्यतः कंपनी क्रेडिटर्स के हित सुरक्षित करने पर जोर देती है।
समय-सीमा और प्रक्रिया CIRP की सामान्य समय-सीमा 180 दिन है, जिसे जरूरत पर 90 दिनों तक बढ़ाने की अनुमति है। CoC निर्णय लेता है और एक निष्पोषक Resolution Professional नियुक्त होता है। यदि पुनः प्राप्ति असंभव हो तो परिसमापन (liquidation) चल सकता है।
गुवाहाटी-आधारित व्यवहारिक पहलू असम के व्यवसायों के लिए IBC से संरचना में सुधार आया है, खासकर ऋणदाता-केन्द्रित नेतृत्व, त्वरित निष्पादन और क्रेडिट कॉम्पैक्टनेस के लिए। IBC के साथ स्थानीय न्यायालयिक प्रणालियाँ (NCLT/NCLAT) मामलों को सुनती हैं।
हाल के परिवर्तन IBC में 2020-21 के अंत में निवेशित संशोधन प्री-पॅकेज्ड Insolvency Resolution Process (P-PIRP) जैसी व्यवस्था लेकर आया, ताकि सफल क्रेडिटोर-समर्थन वाले डेब्टर्स के लिए तेज समाधान संभव हो सके। यह छोटे और मझोले उद्यमों के लिए उपयोगी बनता है।
“The Insolvency and Bankruptcy Code provides for a time bound resolution process for resolving insolvency and maximizing the value of assets.”
Source: Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - ibbi.gov.in
“Pre-Packaged Insolvency Resolution Process is designed to facilitate early resolution for viable corporate debtors.”
Source: IBBI - ibbi.gov.in
“The National Company Law Tribunal is the adjudicating authority for corporate insolvency and liquidation under the IBC.”
Source: National Company Law Tribunal (NCLT) - nclt.gov.in
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
गुवाहाटी, असम में पुनर्गठन और दिवालियापन मामलों में एक सक्षम अधिवक्ता आवश्यक है ताकि सही अधिकार-क्षेत्र चुनकर प्रक्रियागत कदम उठाए जा सकें। नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं जिनमें कानूनी सहायता फायदेमंद होती है।
- बैंक से डिफॉल्ट के बाद पुनर्गठन चाहना - गुवाहाटी में एक MSME एकाधिक बैंकों से ऋण लेकर डिफॉल्ट कर गया हो; इसे IBC के अंतर्गत CIRP से संरचना किया जा सकता है।
- ऑपरेशनल क्रेडिटर के तौर पर देनदार के विरुद्ध ऋण-समर्थन समाधान - एक कारोबारी डेबिटर के खिलाफὰ ऑपरेशनल क्रेडिटर केस चल रहा हो और पुनर्गठन योजना चाहिए।
- प्रारंभिक फंसन के बाद प्री-पॅकेज्ड समाधान पर विचार - नीति-परिवर्तन के कारण छोटे उद्यमों के लिए P-PIRP उपयुक्त हो सकता है; इसके लिए विशेषज्ञ सहायता जरूरी है।
- गुवाहाटी-आधारित MSME का पुनर्निर्माण योजना बनाना - स्थानीय बाजार, सप्लाई चेन और ऋणदाताओं के बीच संतुलन बनाना वकील की मदद से अधिक सरल होता है।
- व्यक्तिगत Insolvency के लिए मार्गदर्शन - यदि व्यक्ति या साझेदारी संस्था पर कई ऋण हैं, तो IBC के अंतर्गत व्यक्तिगत दिवालियापन के प्रावधान देखना जरूरी है।
- कंपनी-चंद समाधान के लिए अदालत-आधारित समाधान - NCLT/NCLAT में दाखिल करने से पहले सही रणनीति बनानी होती है; अनुभवी अधिवक्ता मार्गदर्शन देते हैं।
गुवाहाटी के लिए कानूनी सलाहकार से पहले इन सवालों के क्लियर जवाब बनाएं: किस प्रकार का डिफॉल्ट है, कौन सी क्रेडिटर समितियाँ प्रभावी हैं, और किस कानून के तहत सबसे अच्छा मार्ग है।
3. स्थानीय कानून अवलोकन
गुवाहाटी, असम के संदर्भ में नीचे के कानून पुनर्गठन और दिवालियापन से संबंधित प्रमुख हैं।
- इंसॉल्वेंसी एन्ड बैंक्रप्टी कोड, 2016 (IBC) - कॉर्पोरेट डेब्टर्स के लिए CIRP से लेकर परिसमापन तक की एक समय-सीमित प्रक्रिया देता है।
- SARFAESI अधिनियम, 2002 - बैंकों और वित्तीय संस्थानों के लिए संपत्ति-प्रबंधन और सुरक्षा-संपार्क के प्रतिकार्य उपाय प्रदान करता है।
- RDDBFI अधिनियम, 1993 - बैंकों के ऋणों के लिए ऋण-वसूली न्यायाधिकरण के माध्यम से समाधान की राह बनाता है।
नोट करें कि ये कानून पूरे भारत में समान रूप से लागू होते हैं, पर गुवाहाटी में मामलों की सुनवाई NCLT/NCLAT के क्षेत्राधिकार के अनुसार होती है। साथ ही IBC की पंक्तियाँ और पूर्व-समझौते भी स्थानीय अदालतों में प्रभावी रहते हैं।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IBC क्या है और यह क्या करवाता है?
IBC एक केंद्रीय कानून है जो दिवालिया कंपनियों के लिए समय-सीमा के भीतर समाधान सुनिश्चित करता है। लक्ष्य है क्रेडिटर्स का मूल्य बचाना और व्यवसाय के समुचित पुनर्गठन को बढ़ावा देना।
कौन CIRP शुरू कर सकता है और कैसे?
कर्जदार का क्रेडिटर्स, फॉर्मल या इनफॉर्मल, डिफॉल्ट होने पर CIRP शुरू कर सकता है। आवेदन NCLT में किया जाता है, और एक रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल नियुक्त होता है।
CoC क्या है और इसका क्या रोल है?
CoC वह समित है जिसमें सभी क्रेडिटर्स के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। यह पुनर्गठन योजना पर मतदान करता है और RP की कार्ययोजना को मंजूरी देता है।
रीस्क्यू-प्रोसेस में कितना समय लगता है?
कुल 180 दिन CIRP के लिए सामान्य समय है, जिसे जरूरत पर बढ़ाया जा सकता है। यह अवधि निष्पादन की स्पष्टता देता है।
प्रीम-पॅकेज्ड insolvency process क्या है?
यह एक तेज मार्ग है जो किन्हीं निर्दिष्ट परिस्थितियों में viable डेब्टर्स के लिए जल्द समाधान देता है। इसका उद्देश्य समय बचाना है।
Resolution Professional क्या करता है?
RP केस का संचालन करता है, दस्तावेजीकरण करता है, और CoC की निगरानी में पुनर्गठन योजना बनवाता है।
विधिक लागत क्या रहती है?
वकील-फीस और RP/CoC-संबद्ध शुल्क मामले के आकार, आख्या और कठिनाई के आधार पर तय होते हैं।
क्या व्यक्तिगत दिवालियापन संभव है?
हाँ, IBC व्यक्तियों और साझेदार संस्थाओं के लिए दिवालियापन के प्रावधान भी देता है। स्टेप्स, सूचानाएँ और आय-व्यय की ग़ैर-बराबरी पर निर्भर होते हैं।
गुवाहाटी में फाइलिंग कहाँ होती है?
IBC के अंतर्गत फाइलिंग NCLT के क्षेत्राधिकार क्षेत्र में होती है। असम के लिए निकटतम उपयुक्त न्यायाधिकरण चयनित होता है।
क्या मैं मौजूदा ऋणदाता के साथ बातचीत कर सकता हूँ?
हाँ, कई बार ऋणदाता समूहों के साथ प्री-प्रॉसेस या संरचना-उन्मुख वार्ताएं सफल हो सकती हैं।
क्या मैं एक वकील के साथ बिना-खर्च के प्रारम्भिक सलाह ले सकता हूँ?
आमतौर पर हाँ, कई पेशेवर पहले मिलन-परामर्श में आवश्यकताओं का आकलन कर लेते हैं, फिर शुल्क-पूर्व योजना बताते हैं।
कैसे शुरू करें ताकि Guwahati में सही वकील मिले?
कानूनी सहायता के लिए स्थानीय कानून-प्रोफेशनल्स और IBBI के IP डायरेक्टरी से मिलान करें, फिर पहली बैठक करें।
5. अतिरिक्त संसाधन
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक नियामक पोर्टल और पंजीकरण जानकारी प्राप्त करें। ibbi.gov.in
- National Company Law Tribunal (NCLT) - कॉर्पोर्ड इन्सॉल्वेंसी मामले सुनवाई का आधिकारिक मंच। nclt.gov.in
- Reserve Bank of India (RBI) - बैंकों और वित्तीय संस्थानों के निर्णय-निर्देश व ताजा अपडेट्स। rbi.org.in
6. अगले कदम
- अपना मामला मानचित्रण करें: डिफॉल्ट राशि, ऋणदाता प्रकार, क्रेडिट-स्तर आदि लिखें।
- IBBI के Directory of Insolvency Professionals में Guwahati क्षेत्र के IP खोजें।
- स्थानीय वकीलों से पहले स्क्रीनिंग कॉल करें और अनुभव, हालिया CIRP केस, फीस संरचना पूछें।
- पहली बैठक में दस्तावेज, मात्रा-आकड़े और समय-सीमा पर स्पष्ट सलाह पाएं।
- कानूनी रणनीति बनाकर एक प्रारम्भिक Engagement Letter लें और फाइलिंग-योजना तय करें।
- राज्य बार काउंसिल और IBBI के अनुरोध-फॉर्म भी अपडेट रखें।
- प्रत्येक चरण के बाद लिखित समन्वय और रिपोर्टिंग के लिए स्पष्ट अनुबंध बनवाएं।
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