जम्मू में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील
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जम्मू, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
1. जम्मू, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून के बारे में: जम्मू, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन
Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन के लिए केंद्रीय कानून है। यह कंपनियों, साझेदारी फर्मों और व्यक्तियों के लिए एक समय-सीमित समाधान देता है। जम्मू, कश्मीर के बाद के संघीय ढांचे में भी IBC लागू है ताकि व्यावसायिक संकटों का त्वरित निवारण हो सके।
IBC का उद्देश्य है distressed assets का मूल्य अधिकतम करना और सभी हितधारकों के हितों का संतुलन बनाए रखना। प्रक्रिया में क्रेडिटर्स के साथ मिलकर एक रीकंस्ट्रक्शन प्लान बनना जरूरी है। नतीजतन, CIRP लागू होते हैं और यदि आवश्यक हो तो परिसमापन की दिशा बनती है।
जम्मू-काश्मीर को UT बनने के बाद केंद्रीय कानूनों की पहुँच बढ़ी है। UTs में IBC के अनुपालन को मजबूत किया गया है ताकि क्षेत्रीय उद्योगों को लाभ मिले। मुख्य चरणों में याचिका दायर करना नहीं, बल्कि को-सी.ओ.सी. (Creditors' Committee) और संरचना योजना का चयन शामिल है।
Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 aims to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency of corporate persons, partnership firms and individuals in a time-bound manner for maximizing the value of assets of such entities.
स्रोत: IBBI - Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) परिचय
The Code applies to all corporate persons, partnership firms and individuals located in India including those in the Union Territories.
स्रोत: IBBI - IBC का अनुपालन क्षेत्र
The Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) Act, 2021 introduced a new pre-packaged insolvency resolution process for corporate debtors.
स्रोत: IBC Amendment 2021 - Pre-pack
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: पुनर्गठन और दिवालियापन कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं। जम्मू, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें
- उद्योग-सम्पन्नण कंपनी का serious default - जम्मू-काश्मीर आधारित एक निर्माण कंपनी ने बैंक लोन पर अत्यधिक ऋण-स्तर बना लिया हो; CIRP शुरू होने के आसार बनते हैं और एक अधिवक्ता टीम के साथ रीकंस्ट्रक्शन प्लान बनाना आवश्यक होता है।
- सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (MSME) के डिफॉल्ट - JK क्षेत्र में MSME का ऋण दिवालिया प्रक्रिया के दायरे में आ सकता है; व्यक्तिगत/कंपनी सुरक्षा के सवाल, कोर्ट-समर्थित मार्गदर्शन जरूरी होता है।
- वित्तीय तनाव के कारण CoC के साथ वार्ता - जम्मू क्षेत्र के क्रेडिटर्स कॉम्प्लेक्स CoC मीटिंग में इक्विटी-रेस्क्यू प्लान पर निर्णय लेते हैं; कानून के अनुसार एक एडवाइज़र की भूमिका अहम बन जाती है।
- PRE-PACK Insolvency नोटिफिकेशन के लिए रणनीति बनानी हो - 2021 से लागू pre-pack प्रक्रियाओं की तैयारी हेतु कानूनी सलाहकार की आवश्यकता रहती है ताकि spin-off-रिकवरी जल्दी हो सके।
- Cross-border डील्स के मामले में वैधानिक जोखिम - JK आधारित कॉम्प्लैक्स इंटरनैशनल सप्लायर्स से जुड़ा मामला हो सकता है; cross-border insolvency के नियम समझना जरूरी है।
- व्यक्तिगत Insolvenz या सह-गारंटीकर्ता के मामले - साझेदारी/व्यक्ति ऋण के कारण व्यक्तिगत insolvency की प्रक्रियाओं में वकील का सहयोग चाहिए।
जम्मू-कश्मीर में व्यवसायिक मामलों के लिए स्थानीय वकील, कॉर्पोरेट लॉयर और इंडस्ट्री एक्सपर्ट की संयुक्त टीम लाभदायक होती है। इलाके के कानून-व्यवहार और न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप कदम उठाने के लिए स्थानीय अनुभव जरूरी है।
3. स्थानीय कानून अवलोकन: जम्मू, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें
- Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - भारत भर में पुनर्गठन और दिवालियापन का मूल कानून है।
- Jammu and Kashmir Reorganisation Act, 2019 - JK को दो Union Territories में विभाजित करता है; केन्द्र सरकार के तत्वावधान में IBC का अनुपालन सुगम हुआ।
- Companies Act, 2013 - कॉर्पोरेट संरचना, पुनर्गठन, आपसी सुरक्षा, और सावधानीपूर्वक पूँजी-प्रबंधन के नियम देता है; IBC के साथ परस्पर प्रभाव में कार्य करता है।
IBC के अलावा JK क्षेत्र के लिए स्थानीय प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था के अंतर्गत SARFAESI आदि कानूनों के प्रासंगिक हिस्से भी काम आते हैं, परन्तु पुनर्गठन और दिवालियापन के लिए प्राथमिक ढांचा IBC है।
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IBC क्या है?
IBC एक केंद्रीय कानून है जो पुनर्गठन, दिवालियापन, और परिसंपत्तियों के मूल्यांकन को समय-सीमित तरीके से नियंत्रित करता है।
IBC किसके लिए है?
यह कॉर्पोरेट पक्षों, साझेदारी फर्मों और व्यक्तियों पर लागू होता है, और UTs सहित भारत के सभी क्षेत्रों में मान्य है।
CIRP क्या है?
CIRP एक संक्षिप्त पुनः-निर्माण प्रक्रिया है जिसमें एक प्रस्तावित पुनरुद्धार योजना के लिए क्रेडिटर्स मिलकर एक समिति बनाते हैं।
CoC कौन बनाता है?
क्रेडिटर्स की समिति (Committee of Creditors) CIRP के दौरान गठित की जाती है और योजना के बारे में निर्णय लेती है।
PRE-PACK Insolvency क्या है?
PRE-PACK एक नई पूरक प्रक्रिया है जो कॉर्पोरेट देनदारों के लिए त्वरित पुनर्गठन का रास्ता प्रदान करती है, बिना पूर्ण कोर्ट-प्रक्रिया के।
JK UT में IBC कैसे लागू होता है?
2019 के JK पुनर्गठन कानून से UTs के अंतर्गत IBC के अनुपालन की राह साफ हुई; केंद्र-स्थानीय नियमों के अनुसार मार्गदर्शन मिलता है।
व्यक्तिगत Insolvency कब लागू होता है?
IBC व्यक्तियों के लिए Part II के अंतर्गत व्यक्तिगत दिवालियापन प्रक्रियाओं की अनुमति देता है, खासकर बड़े ऋणों के मामले में।
किसे फाइल करना चाहिए?
किसी भी distressed corporate debtor, firm या व्यक्तिगत परिचर के लिए कानूनी सलाहकार के साथ CIRP/Pre-pack के लिए फाइलिंग की तैयारी जरूरी होती है।
IBC में समय-सीमा कितनी है?
किरपं CIRP सामान्यत: 180 दिनों में प्रारम्भिक बंद हो जाना चाहिए; आवश्यकता पर 270 दिन तक extensions मिल सकते हैं।
Cross-border insolvency क्या है?
IBC Cross-border insolvency के नियमों के तहत विदेशी देनदारों और क्रेडिटर्स के बीच व्यावहारिक समाधान प्रदान करता है।
क्या मैं JK में एक छोटे कारोबार के साथ शुरुआत कर सकता हूँ?
हाँ, छोटी इकाइयों के लिए भी IBC के तहत पुनर्गठन के विकल्प उपलब्ध हैं, पर योजना और क्रेडिटर्स की सहमति आवश्यक होती है।
कानूनी कार्रवाई शुरू करने से पहले क्या करूँ?
स्थानीय वकील से मिले, वित्तीय दस्तावेज एकत्रित करें, और IBC अनुरूप स्थिति की समीक्षा कर योजना बनाएं।
क्या सरकारी सहायता मिल सकती है?
कई प्रयोजन में ऋण पुनर्गठन के लिए बैंकों, क्रेडिट गारंटियों और नियामक निकायों से सहायता मिलती है; प्रोफेशनल सलाह जरूरी है।
5. अतिरिक्त संसाधन
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक साइट और संसाधन: https://www.ibbi.gov.in
- National Company Law Tribunal (NCLT) - कॉरपोरेट दिवालियापन मामलों की प्राथमिक अदालत: https://nclt.gov.in
- National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) - अपीलीय मंच: https://www.nclat.nic.in
इन संसाधनों के साथ जम्मू-काश्मीर से संबंधित स्थानीय बार एंड लॉ फर्म्स भी सहायता कर सकते हैं। कृपया आधिकारिक साइट्स से नवीनतम मार्गदर्शन देखें।
6. अगले कदम: पुनर्गठन और दिवालियापन वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया
- अपने दायरे के अनुरूप IBC स्थिति का आकलन करें - पुनर्गठन संभव है या नहीं।
- JK UT में लागू प्रावधानों के बारे में एक स्थानीय वकील से initial consultation लें।
- आवश्यक दस्तावेज एकत्रित करें - वित्तीय statements, debt list, contracts, और creditor details।
- एक पुनर्गठन-विशेषज्ञ अधिवक्ता/अधिवक्ता टीम चुनें - IBC अनुभवी और JK-क्षेत्र के साथ नज़दीकी संबंध।
- सीआईआरपी या प्री-पैक प्लान की तैयारी के लिए संकल्पित योजना बनाएं और कानूनी पथ तय करें।
- कॉर्डिनेशन-समिति (CoC) मीटिंग्स और क्रेडिटर-समझौता की प्रक्रिया में भाग लें।
- ड्यू-डेडलाइन और कोर्ट-फाइलिंग के हर चरण की निगरानी करें और समय-सीमा का पालन करें।
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