जमतारा में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
जमतारा, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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जमतारा, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून के बारे में: जमतारा, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

जमतारा, झारखंड में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून मुख्य रूप से इनसॉल्वेंसी एंड బ్యंकअपसी कोड, 2016 (IBC) के अंतर्गत आता है। यह कानून समय-सीमित प्रक्रियाओं के जरिये दिवालिया स्थितियों का हल ढूंढने का ढांचा देता है।

IBC का उद्देश्य परिसंपत्ति मूल्य-वर्द्धन और अधिकतम पुनर्प्राप्ति के साथ पुनर्गठन को सक्षम बनाना है। यह कंपनी, साझेदारी फर्म और व्यक्तियों दोनों के लिए लागू है।

IBC के अंतर्गत अध्यक्षीय निर्णयात्र NCLT और NCLAT जैसे न्यायिक संस्थाओं के माध्यम से होते हैं। Jamtara से जुड़े मामले भी इन राष्ट्रीय निलंबित संस्थाओं द्वारा नियंत्रित होते हैं।

"Insolvency and Bankruptcy Code provides for time-bound resolution of insolvency and reorganization of corporate persons, partnership firms and individuals."
Source: Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - What is IBC
"The Code aims to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution."
Source: IBBI overview on IBC

महत्वपूर्ण तथ्य

IBC एक एकीकृत ढांचा है जो कंपनियों, साझेदारी फर्मों और व्यक्तियों के लिये समान नियम तय करता है। यह प्रक्रिया को जल्द-से-जल्द पूरा करने के लिए समय-सीमित उपाय अपनाती है।

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: पुनर्गठन और दिवालियापन कानूनी सलाह की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृयों की सूची बनाएं। जमतारा, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण दें

निम्न परिदृश्य Jamtara-सम्बन्धी स्थानीय स्थितियों के अनुसार सामान्य हैं। सार्वजनिक रिकॉर्ड में Jamtara के विशिष्ट केस तुरंत उपलब्ध नहीं होते, इसलिए नीचे दिए गए उदाहरण Jamtara-प्रासंगिक परिस्थिति को दर्शाने हेतु प्रस्तुत हैं।

  1. बैंक ऋण डिफॉल्ट के कारण पुनर्गठन की आवश्यकता - Jamtara में एक लघु उद्योग ने पर्याप्त नकदी प्रवाह नहीं मिलने पर ऋण चुवाने के बाद CIRP या ऋण-री-एसेसमेंट के विकल्प पर विचार किया। कानूनी सलाहकार से मार्गदर्शन लेकर ऋणदाता समूह के साथ पुनर्गठन योजना बनानी पड़ती है।
  2. पार्टनरशिप-फर्म या कंपनी के भीतर निर्णय-विवाद - साझेदारी में प्रबंधन-डायरेक्टर और प्रमोटरों के बीच नीति-निर्णय विवाद उठने पर IBC के माध्यम से पुनर्गठन या संरचना-परिवर्तन् के उपाय सुझाये जाते हैं।
  3. MSME MSME Pre-Pack Insolvency के अवसर - MSMEs जिनके पास लिक्विडेशन के बजाय संरचना से ऋण समाधान की जरूरत है, उनके लिए Pre-Pack मार्ग पर विचार किया जा सकता है, जो तेज़ी से प्रक्रियाँ शुरू कर सकता है।
  4. व्यक्तिगत ऋण के कारण व्यक्तिगत insolvency के प्रश्न - Jamtara में व्यक्तियों के ऊपर भारी व्यक्तिगत ऋण चूका हुआ हो, तो व्यक्तिगत insolvency resolution के उपायों से राहत मिल सकती है।
  5. बैंक-सेक्योर्ड परिसंपत्ति पर SARFAESI का विरोध-निपटान - यदि बैंक परिसंपत्ति सुरक्षित होने के कारण गम्भीर धारणा बनाता है, तो SARFAESI के अंतर्गत संरचना-निर्णय की जगह insolvency मार्ग उपयुक्त हो सकता है।
  6. क्रेडिटर-हाउसिंग के साथ विवाद और रीकन्स्ट्रक्शन की जरूरत - डिफॉल्टेड कंपनी के साथ क्रेडिटर्स की सहमति से पुनर्गठन योजना बनाकर परिसंपत्ति मूल्य विनियोजन संभव है।

स्थानीय कानून अवलोकन: जमतारा, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

जमतारा में पुनर्गठन और दिवालियापन के प्रमुख कानून निम्न हैं:

  • इनसॉल्वेंसी एंड बैंकअपसी कोड, 2016 (IBC) - मुख्य कानून जो कॉर्पोरेट पर्सन्स, पार्टनरशिप फर्म और व्यक्तियों के लिए समय-सीमित पुनर्गठन और दिवालियापन प्रक्रियाओं की रूपरेखा देता है।
  • रेसर्स ऑफ डेब्ट ड्यू टू बैंक्स एंड फाइनैंशियल इंस्टीट्यूशंस एक्ट, 1993 (RDDBFI) - बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के बकायों के लिए भुगतान-उधार और सुरक्षा-प्रणालियों का वैधानिक ढांचा प्रदान करता है।
  • सेक्यूरीस्टेशन एंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनैंशियल एसेट्स एंड एन्फोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी इंटरेस्ट एक्ट, 2002 (SARFAESI) - सुरक्षित ऋणदाता परिसंपत्तियों पर कब्जा और उनके नियंत्रण के अधिकार देता है, बैंकिंग सेक्टर में सुरक्षा-उद्धार के लिए प्रयोग होता है।

इनके अलावा 2021 के संशोधनों के जरिये MSME Pre-Pack Insolvency जैसी सुविधाएं जो MSMEs के लिए तेज़ पुनर्गठन प्रक्रियाओं को सक्षम बनाती हैं, उनकी प्रावधान भी लागू हैं।

आम प्रश्न-उत्तर (FAQs): 10-12 प्रश्न-उत्तर जोड़े

IBC क्या है?

IBC एक समय-सीमित कानून है जो कॉर्पोरेट पर्सन, साझेदारी फर्म और व्यक्तियों के लिए पुनर्गठन और दिवालियापन के रास्ते स्पष्ट करता है। इसका लक्ष्य परिसंपत्ति मूल्य-वर्धन है।

जमतारा में CIRP कैसे शुरू होता है?

कॉर्पोरेट ड debtor या वित्तीय ऋणदाता NCLT को आवेदन देकर CIRP शुरू कर सकता है। दाखिले के साथ मौजूदा रोक-टोक भी लागू होता है।

MSME Pre-Pack Insolvency क्या है?

MSME के लिए Pre-Pack एक faster, non-court-pressurized मार्ग है जो IBC संशोधनों के अंतर्गत आया है। यह पुनर्गठन-योजना को जल्दी लागू करता है।

डिफॉल्ट कब insolvency trigger माना जाता है?

IBC के अनुसार डिफॉल्ट तब माना जाता है जब ऋणी से उसका कर्ज चुकाने के लिए भुगतान नीति विफल हो जाती है और ऋणदाता insolvency-प्रक्रिया के लिए आवेदन करता है।

क्या IBC व्यक्तिगत ऋण के लिए भी लागू होता है?

हाँ, IBC व्यक्तिगत insolvency resolution के लिए भी प्रावधान देता है। यह घरेलू देनदारियों और व्यक्तिगत परिसंपत्तियों को संरक्षित करने का मार्ग है।

Liquidation ठीक-ठाक क्या है?

यदि पुनर्गठन संभव नहीं होता, तो परिसंपत्तियों की बिक्री से बकाया-ऋण चुकाने की प्रक्रिया liquidation कहलाती है और अंततः ऋणदाता को भुगतान किया जाता है।

IBC से कौन-सी अदालतें जुड़ी होती हैं?

मुख्यत: नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) जिम्मेदार हैं;Jam tara-जनपद के मामलों में भी ये अधिकृत अदालतें निर्णय देती हैं।

क्या CIRP के दौरान moratorium लागू होता है?

हाँ, CIRP के दौरान ऋणी पर नया दिवालिया-स्थिति रोक-टोक लागू हो सकता है ताकि भागीदारों के हित सुरक्षित रहें।

कौन लागू कर सकता है IBC प्रक्रिया?

मुख्य तौर पर वित्तीय क्रेडिटर्स, कॉर्पोरेट ड debtor और कभी- कभी व्यक्तिगत देनदार IBC-प्रक्रिया कम्पनी और व्यक्तिगत दोनों के लिए अनुरोध कर सकते हैं।

जमतारा-झारखंड में कौन-से अदालतें हिसाब-किताब संभालती हैं?

NCLT/NCLAT के अलॉटमेंट और समर्थित न्यायिक प्रक्रियाओं के अनुसार झारखंड क्षेत्र के matters का प्रारम्भिक निर्णय संभवतः राज्य-स्तरीय बैंक्स के साथ जुड़ा होता है; क्षेत्रीय मामलों के लिए सर्वोच्च कानून प्रवर्तन शामिल होता है।

क्या IBC के बारे में निर्णय उच्च अदालत में चुनौती दी जा सकती है?

हाँ, CIRP के निर्णयों के विरुद्ध अपीलीय विकल्प NCLAT और उसके बाद उच्च न्यायालय में जाते हैं।

क्या बैंक SARFAESI के जरिये कब्जा कर सकता है?

हाँ, SARFAESI के तहत सुरक्षित ऋण-धारक परिसंपत्तियों पर नियंत्रण और कब्जे के लिए अदालत की मंजूरी के बिना कदम उठा सकता है।

IBC के तहत प्रक्रिया कितनी तेज होती है?

IBC का उद्देश्य समय-सीमित प्रक्रिया बनाना है। CIRP आम तौर पर लगभग 180 दिन के भीतर समाप्त करने की कोशिश करता है, आवश्यकतानुसार बढ़ोतरी संभव है।

जमतारा में कानूनी सहायता कब सबसे पहले लेनी चाहिए?

ऋण-समझौता, आवेदन दाखिला या सुरक्षा-हिस्सेदारी के शुरू होते ही एक अनुभवी वकील से तुरंत सलाह लेना लाभकारी है।

अतिरिक्त संसाधन: पुनर्गठन और दिवालियापन से संबंधित 3 विशिष्ट संस्थाओं की सूची

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - https://www.ibbi.gov.in/
  • National Company Law Tribunal (NCLT) - https://nclt.gov.in/
  • Reserve Bank of India (RBI) - https://www.rbi.org.in/

अगले कदम: पुनर्गठन और दिवालियापन वकील खोजने के लिए 5-7 चरण-ीय प्रक्रिया

  1. स्थिति का संपूर्ण आकलन करें और ऋण विवरण तैयार करें।
  2. जisment: Jamtara क्षेत्र के अनुभवी उप-विशेषज्ञ वकील/अधिवक्ता से पहली परामर्श लें।
  3. IBC, SARFAESI या RDDBFI के अनुसार मार्ग चुनें और आवश्यक दस्तावेज संकलित करें।
  4. कानूनी योजना बनायेें और क्रेडिटर्स के साथ संरेखित पुनर्गठन-योजना विकसित करें।
  5. NCLT/NCLAT या संबंधित न्याय-प्राधिकरण के साथ फाइलिंग/अपील के कदम उठाएं।
  6. मोराटोरियम-आदेश आदि के प्रावधानों को समझें और लागू करें।
  7. प्रक्रिया पूरी होने पर पुनर्गठन-समझौते या liquidation के परिणामों पर निर्णय लें।

आधिकारिक उद्धरण और अधिनियमिक संदर्भ के लिए नीचे दिए गए स्रोत देखें:

"The Code provides for time-bound resolution of insolvency and reorganization of corporate persons, partnership firms and individuals."
Source: IBBI - What is IBC
"Recovery of Debts Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993"
Source: IndiaCode - RDDBFI Act
"SARFAESI Act enables secured creditors to take possession of the secured assets of the borrower without court intervention."
Source: RBI - SARFAESI overview

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