कोलकाता में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील
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कोलकाता, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
1. कोलकाता, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून के बारे में: कोलकाता में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन
भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का प्रमुख ढांचा Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) है। इसे एक ही कानून-संहिता में कॉर्पोरट पर्संस, साझेदारी फर्म और व्यक्तिगत उधारदाताओं के insolvency-सम्बन्धी मामलों को संकेंद्रित करने के लिए बनाया गया है।
कोलकाता में IBC के तहत प्रमुख प्रक्रियाएं CIRP (Corporate Insolvency Resolution Process) और दिवालियापन-निवारण के अन्य मार्ग हैं। नीति-निर्माताओं ने समय-सीमा और उत्तरदायित्व संतुलन सुनिश्चित किया है ताकि ऋणदाता, कर्जदार और कर्मचारी सभी के अधिकार संरक्षित रहें।
स्थानीय व्यवहार के लिए Calcutta High Court और NCLT, Kolkata bench कानून-निर्णय में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। नागरिक-दीवालिया मामलों से लेकर कॉर्पोरेट रीसॉल्यूशन तक, कोलकाता में मामलों की फाइलिंग और सुनवाई राज्य-विशिष्ट प्रक्रियाओं के अनुरूप होती है।
“An Act to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals.”
“The Code provides for a time-bound resolution process for insolvency and a single framework to resolve insolvency of corporate persons, partnership firms and individuals.”
स्रोत: Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 - पेम्बल और आधिकारिक सार प्रस्तुतियाँ
क्यों यह Kolkata निवासियों के लिए खास है- स्थानीय उद्योग-परिदृश्य, छोटे-और मध्यम आकार के व्यवसाय (MSME) और रियल एस्टेट परियोजनाओं से जुड़े मामले अक्सर West Bengal और आस-पास के क्षेत्रों में जन्म लेते हैं; ऐसे मामलों में स्थानीय बेंचों, NCLT के Kolkata-आधारित प्रक्रियाओं और Calcutta High Court के winding up से जुड़े प्रावधानों का सीधा प्रभाव होता है।
2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
पुनर्गठन और दिवालियापन मामलों में एक विशेषज्ञ वकील या कानूनी सलाहकार आवश्यक होता है ताकि प्रक्रियाओं को क्रम से और समय-सीमा के भीतर पूरा किया जा सके। नीचे ko Kolkata-के संदर्भ में 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं।
- कोलकाता-आधारित कंपनी खराब ऋणों के कारण CIRP चरण में प्रवेश करने की स्थिति में है और उसे त्वरित रीसॉल्यूशन की जरूरत है।
- एक बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का ग्राउंड पर डिफॉल्ट है और home buyers के हितों की प्राथमिकता सुरक्षित करनी है।
- MSME उद्योग ध्वस्त हो रहा है और ऋणदाता अपने बकाये के त्वरित समाधान के लिए IBC-आधारित योजना देखना चाहते हैं।
- पूर्व-घोषित अनुबंध-उल्लंघन के कारण एक प्रमुख सप्लायर को CIRP-या PPIRP जैसे रास्तों से निपटने की आवश्यकता है।
- कई-वर्षीय वेतन बकाया के साथ कर्मचारी-लेखों के समाधान के लिए IBC के अंतर्गत संरचना बनानी है।
- कोलकाता के cross-border ऋण-सम्बन्धी मुद्दे हैं जिसमें Cross-Border Insolvency के प्रावधानों की जरूरत है।
इन परिस्थितियों में एक अनुभवी advokat, advocate या insolvency professional (IP) के साथ मिलकर कदम उठाने से प्रक्रिया सही दिशा और समय-सीमा में पूरी होती है।
3. स्थानीय कानून अवलोकन
कोलकाता-आधारित insolvency मामलों में नीचे उल्लेखित प्रमुख कानूनों का संयुक्त उपयोग होता है।
- Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - कॉर्पोरेट, व्यक्तिगत और साझेदारी फर्मों के लिए पुनर्गठन और insolvency-प्रक्रिया का केंद्रीय ढांचा।
- Companies Act, 2013 - winding up, corporate governance और अन्य प्रशासनिक विषयों के अंतर्गत विवादों के निपटारे के लिए प्रावधान देता है; IBC के साथ यदि कोई मामला प्रकाशित होता है तो उसे NCLT/NCLAT के समक्ष लाया जाता है।
- Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 (RERA) - रियल एस्टेट परियोजनाओं में खरीदार-हित के संरक्षण के लिए प्रावधान; IBC के साथ home buyers के दावों की सुरक्षा के उपायों से जुड़ा है।
स्थानीय दिशा-निर्देशों के लिए Kolkata High Court और NCLT, Kolkata Bench की प्रक्रियाएं पालन में अहम होती हैं। IBBI के आधिकारिक मार्गदर्शक दस्तावेज और नोटिसेज भी स्थानीय अदालतों के फैसलों को प्रभावित करते हैं।
“IBC के अंतर्गत समय-बद्ध रीसॉल्यूशन प्रोसेसCorporate Insolvency Resolution Process (CIRP) को प्राथमिकता देती है ताकि सभी पक्षों को न्यूनतम अस्थिरता का सामना करना पड़े।”
“Home buyers की सुरक्षा के लिए IBC-2019 संशोधनों ने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में दायित्वों के वितरण में प्राथमिकता निर्धारित की है।”
स्रोत- आधिकारिक घोषणाएँ और मार्गदर्शक दस्तावेज
4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
IBC kya hai?
IBC Insolvency and Bankruptcy Code है जो कॉर्पोरट पर्सन, साझेदारी फर्म और व्यक्तियों के पुनर्गठन और insolvency मामलों को एक संरचित ढांचे में लाता है।
CIRP क्या होता है और Kolkata में यह कैसे शुरू होता है?
CIRP Corporate Insolvency Resolution Process है जिसमें एक interim resolution professional नियुक्त होता है और 180 दिन का समय-सीमा दी जाती है; Kolkata bench के NCLT द्वारा समय-सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर निर्णय लिया जाता है।
कौन petition फाइल कर सकता है?
कर्जदार, विपणन кредитदाता या वित्तीय संस्थान CIRP के लिए NCLT में petition दायर कर सकते हैं; कुछ स्थितियों में प्रोफेशनल IP भी शामिल हो सकते हैं।
IP यानी Insolvency Professional कौन होते हैं और वे कैसे चुने जाते हैं?
IP ऐसे व्यक्ति होते हैं जिन्हें IBBI-मान्य IPA के द्वारा पंजीकृत किया गया होता है; वे CIRP के दौरान सग्रहण, निर्णय-निर्माण और परिसंपत्तियों के वितरण की निगरानी करते हैं।
क्या IBC केवल कॉर्पोरेट केस के लिए है?
नहीं, IBC व्यक्तियों और साझेदारी फर्मों के लिए भी insolvency-समस्याओं के समाधान के प्रावधान देता है; Kolkata में व्यक्तिगत insolvency के लिए भी उपाय हैं।
कुल टाइमलाइन कितनी होती है?
प्रारंभ में CIRP 180 दिनों के भीतर पूरा करने की कोशिश होती है; आवश्यक हो तो NCLT 90 दिनों तक extensions दे सकता है; कुल समय 270 दिनों तक हो सकता है।
Home buyers के दावे कैसे संरक्षित रहते हैं?
IBC संशोधनों के अंतर्गत home buyers को परियोजना-निर्माता के assets के वितरण में उच्च प्राथमिकता दी जाती है ताकि खरीदारों के पैसे सुरक्षित रहें।
ব্যক্তिगत दिवालियापन छोटे व्यवसायों के लिए कैसे प्रभावी है?
IBC व्यक्तियों के लिए व्यक्तिगत insolvency मार्ग भी देता है; Kolkata में छोटे व्यवसायों के लिए debt restructuring और पुनर्गठन के वर्तमान विकल्प उपलब्ध हैं।
Kolkata में केस कैसे शुरू करें?
सबसे पहले एक qualified IP से मिलें, फिर आवश्यक दस्तावेज एकत्र करें और NCLT के साथ petition दाखिल करने के लिए वकील द्वारा मार्गदर्शन लें।
क्या अदालत में केस लड़ने के लिए विशेष कानून-ज्ञान चाहिए?
हाँ, IBC, Companies Act और RERA जैसे कानूनों का गहरा ज्ञान आवश्यक है ताकि सही BFS (bench marks) और प्रक्रिया-निर्णय हो सके।
Cross-border insolvency को Kolkata में कैसे हैंडल किया जाता है?
Cross-border insolvency के मामले IBC और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नियमों के अनुसार हल होते हैं; IP और स्थानीय वकील इंटरनैशनल प्रावधानों का लाभ उठाते हैं।
कैसे पता करें कि कौन सा वकील Kolkata में उपयुक्त है?
IBC-विशेषज्ञता, NCLT-प्रयोजन ज्ञान और Kolkata-उन्मुख केस-निपटान का अनुभव देखें; पहले परामर्श पर फीस संरचना स्पष्ट होनी चाहिए।
5. अतिरिक्त संसाधन
- Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - ძირ IBC के क्रियान्वयन और IP-आग्रहों के लिए आधिकारिक स्रोत: https://www.ibbi.gov.in
- National Company Law Tribunal (NCLT) - पंजीकृत मामलों के लिए आधिकारिक पोर्टल: https://nclt.gov.in
- National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) - अपील और उच्च-स्तरीय निर्णय: https://nclat.nic.in
6. अगले कदम
- अपने केस के प्रकार को पहचानें कि क्या IBC के अंतर्गत पड़ता है या नहीं।
- Ko Kolkata में एक अनुभवी insolvency lawyer, advocate या IP से initial consultation लें।
- आवश्यक दस्तावेजों की एक सूची बनाएं-व्यय-पत्र, ऋण-टिप्पणियाँ, शेयरहोल्डर/कर्जदार विवरण आदि।
- NCLT, Kolkata bench के लिए petition-फाइलिंग मार्गदर्शन प्राप्त करें।
- IP के साथ एक रीसॉल्यूशन-रणनीति (CIRP/PPIRP/आर्थिक पुनर्गठन) तय करें।
- घर खरीददारों और कर्मचारियों के दावों के लिए उपयुक्त प्रावधान और प्राथमिकता समझें।
- कानूनी फीस, सुनवाई-शेड्यूल और संभावित लागतों पर स्पष्ट agreement बनाएं।
अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोत देखें:
- Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 - पेम्बल और उद्देश्य: Ministry of Corporate Affairs - IBC Page
- IBC का केंद्रीय उद्देश्य: IBBI - Official Website
- NCLT - Kolkata Bench और अन्य क्षेत्रीय बेंच का परिचय: NCLT Official
- NCLAT - उच्च-स्तरीय अपील: NCLAT Official
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