लुधियाना में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील

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लुधियाना, भारत

1965 में स्थापित
English
B&B एसोसिएट्स एलएलपी लुधियाना, भारत में एक प्रतिष्ठित विधिक फर्म है, जो व्यापक कानूनी सेवाओं और पचास वर्षों से...
Oberoi Law Chambers
लुधियाना, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
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Hindi
फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
Yash Paul Ghai and Associates
लुधियाना, भारत

1965 में स्थापित
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लुधियाना, पंजाब में मुख्यालय स्थापित यश पॉल गाई एंड एसोसिएट्स लगभग छह दशकों से व्यापक कानूनी सेवाएं प्रदान कर रहा...
जैसा कि देखा गया

1. लुधियाना, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

पुनर्गठन और दिवालियापन कानून लुधियाना में व्यवसाय-निर्णयों के लिए स्पष्ट मार्गदर्शन देता है। यह कर्जदार, शेयरधारक और वित्तीय क्रेडिटर्स के हितों का संतुलन बनाता है।

IBC 2016 एक समय-सीमित समाधान प्रदान करता है ताकि कर्जदारों के बकायों का त्वरित निपटान हो सके। पंजाब-हरियाणा क्षेत्र में मामलों की सुनवाई NCLT Chandigarh Bench के अंतर्गत होती है।

नोट: हाल के वर्षों में MSMEs और व्यक्तिगत दिवालियापन प्रक्रियाओं के लिए संशोधन शामिल किए गए हैं। यह Ludhiana के उद्यमियों के लिए पुनर्गठन के नए अवसर खोलते हैं।

“Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 consolidates and amends the laws relating to insolvency and bankruptcy of corporate persons, partnerships and individuals.” - Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI)

IBC के प्रमुख घटक: CIRP, निदेशक-त्याग, और आयकर/ब्याज के वितरण के नियम। 180 दिन सामान्य CIRP समय-सीमा है, जिसे संस्थाओं के अनुसार 90 दिन तक बढ़ाया जा सकता है. यह Ludhiana की कम्पनियों के लिए त्वरित पुनर्गठन का आधार बनता है।

“The IBC provides a time-bound framework for insolvency resolution to ensure quick and fair treatment of all creditors.” - Government of India

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • उदाहरण 1: Ludhiana में एक टेक्सटाइल मील ने बैंक से लिए ऋण चुकाए नहीं, तो बैंक ने CIRP शुरू कर दिया है। एक अनुभवी वकील आपको प्रक्रिया के हर चरण के लिए मार्गदर्शन दे सकता है।
  • उदाहरण 2: एक लुधियाणा स्माल-उद्योग परिवार के पास अनेक बैंकों के贷款 है और वे पुनर्गठन योजना बनाना चाहते हैं। एक अधिवक्ता योजना की तैयारी और क्रेडिटर्स के साथ बातचीत में मदद करेगा।
  • उदाहरण 3: एक Ludhiana-आधारित मंडी-आधारित व्यवसाय के मालिक को व्यक्तिगत दिवालियापन की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ सकती है। व्यक्तिगत दिवालियापन में कानूनी मार्गदर्शन जरूरी है।
  • उदाहरण 4: किसी MSME के लिए प्री-पैकेजिंग insolvency प्रक्रिया की जानकारी चाहिए ताकि स्टेकहोल्डर के साथ नेगोसिएशन हो सके।
  • उदाहरण 5: कोई कॉरपोरेट देनदार संरचना-सम्पादन या अधिकारियों के चयन के मामले में कंपनी कानून के अनुरूप रीकंस्ट्रक्शन चाहती है। एक अधिवक्ता विकल्प(s) की तुलना कर सकता है।
  • उदाहरण 6: ऋण-सम्भावित डिफॉल्टर को कोर्ट-अनुमत समय-सीमा में राहत या राहत-योजना चाहिए। एक कानूनी सलाहकार आपकी स्थिति को समझकर रणनीति बनायेगा।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • इन्सॉल्वेंसी एंड बैंक्रपसी कोड, 2016 (IBC) - केंद्रीय कानून जो कॉरपोरेट, पार्टनरशिप और व्यक्तिगत दिवालियापन के लिए एक समेकित ढांचा देता है। आधिकारिक स्रोत.
  • डेब्ट रीकवरी साइट: RDDBFI Act, 1993 - बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा बकायों के लिए recovery प्रक्रिया। आधिकारिक स्रोत.
  • कम्पनी ऐक्ट, 2013 - कॉर्पोरेट रीकंस्ट्रक्शन, मालुमात-ए-शेयर और हितधारक समझौते से जुड़ा إطار। आधिकारिक स्रोत.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IBC क्या है?

IBC एक समय-सीमित समाधान प्रक्रियाओं का ढांचा है जो कॉरपोरेट, पार्टनरशिप और व्यक्तिगत दिवालियापन को एक ही कानून से संबोधित करता है।

मैं Ludhiana में CIRP कैसे फाइल कर सकता हूँ?

IBC के अनुसार CIRP अदालत, NCLT Chandigarh Bench के समक्ष शुरू होती है। आपके वकील चरणबद्ध फॉर्म-फाइलिंग में सहायता करेंगे।

कौन सी प्रक्रियाएं Ludhiana में लागू होती हैं?

कंपनी केस के लिए CIRP; व्यक्तिगत मामलों के लिए व्यक्तिगत दिवालियापन उपाय; MSMEs के लिए प्री-पैक insolvency प्रक्रिया भी संभव है।

Moratorium की अवधी क्या होती है?

किरपा करके CIRP के दौरान 180 दिन की रोक-थाम सामान्य है; अस्थायी वृद्धि 90 दिन तक संभव है, यदि NCLT अनुमति दे।

क्या मैं एक छोटे उद्योग के मालिक के रूप में सलाह ले सकता हूँ?

हाँ, Ludhiana के MSMEs के लिए प्री-पैक प्रस्ताव फायदेमंद हो सकता है; एक कानूनी सलाहकार आपकी स्थितियां नाप-तौल कर योजना बनायेगा।

मैं 개인 दिवालिया कैसे दाखिल कर सकता हूँ?

व्यक्ति ऋणदाताओं के विरुद्ध DRप Process के द्वारा CIRP नहीं, बल्कि व्यक्तिगत दिवालियापन के प्रावधान के अंतर्गत कार्रवाई होती है; वकील फॉर्म-फाइलिंग और क्रेडिटर्स के साथ समन्वय करेगा।

डिफॉल्टर को नीलामी से कैसे बचाया जा सकता है?

कुछ मामलों में पुनर्गठन योजना के जरिए देनदारियों का पुनर्वितरण हो सकता है; जरूरी है कि एक अनुभवी वकील सभी विकल्पों को समझाये।

MSME के लिए कौन सी नवीन सुविधाएं उपलब्ध हैं?

PSUs और छोटे उद्यमों के लिए प्री-पैक insolvency प्रावधान छोटे समय में समाधान देता है; Ludhiana के व्यवसायी इसे अपने फायदे के लिए देख सकते हैं।

क्या NI/जगह-विशिष्ट नियम Ludhiana पर प्रभाव डालते हैं?

हां; NCLT Chandigarh Bench Ludhiana के मामलों को देखता है और स्थानीय न्यायालय के निर्देशों का पालन होता है।

IBC के संशोधन कब से प्रभावी होते हैं?

IBC के संशोधन समय-समय पर लागू होते हैं; हाल के चरणों में प्रक्रिया समय-सीमा और प्री-पैक के प्रावधान स्पष्ट हुए हैं।

कौन से दस्तावेज जरूरी होंगे?

बैंक statements, debt schedule, asset register, और कंपनी/व्यक्ति के वित्तीय दस्तावेज सबसे जरूरी होते हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - IBC के अनुपालन और मार्गदर्शन के लिए आधिकारिक पोर्टल. https://www.ibbi.gov.in
  • National Company Law Tribunal (NCLT) Chandigarh Bench - पंजाब-हरियाणा क्षेत्र के मामले. https://nclt.gov.in
  • Punjab State Legal Services Authority (PSLSA) - नि:शुल्क कानूनी सहायता और सलाह के लिए. https://www.punjablegalservices.org

6. अगले कदम

  1. अपनी परिस्थिति का स्पष्ट सार बनाएं: ऋण, देनदारियाँ, और संपत्ति-कर्ज-समूह।
  2. Ludhiana में IBC अनुभवी अधिवक्ता/कानूनी सलाहकार ढूंढें।
  3. पहले विचार-विमर्श के लिए 3-5 वकीलों से नियुक्ति करें-पूर्व केस-रिकॉर्ड देखें।
  4. कानूनी खर्च, फीज-स्ट्रक्चर और संभावित परिणाम स्पष्ट रूप से समझें।
  5. आवश्यक दस्तावेज एकत्र करें: बैंक स्टेटमेंट, debt schedules, asset registry आदि।
  6. फाइलिंग-तैयारियाँ करें: आवश्यक फॉर्म्स और एमएलए/को-क्रेडिटर्स के साथ समन्वय।
  7. समझौते/सहमति-योजना की तैयारी के समय, क्रेडिटर्स कमिटी के साथ सलाह लें और बहस करें।

Sources: Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - https://www.ibbi.gov.in

Ministry of Corporate Affairs - https://www.mca.gov.in

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