नोएडा में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील

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Corp Legex Advocates & Solicitors

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नोएडा, भारत

2022 में स्थापित
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नोएडा, भारत

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नोएडा, भारत

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1. नोएडा, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

नोएडा में व्यवसायों के लिये पुनर्गठन और दिवालियापन के विषय केंद्रीय कानून Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 के अंतर्गत नियंत्रित होते हैं। यह कानून समय-सीमा में समाधान पाने की प्रक्रिया प्रदान करता है ताकि viable संस्थाएँ बच सकें और non-viable परिसमापन के लिये सुरक्षित हो सकें।

“An Act to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time-bound manner.”

IBC के अंतर्गत CIRP, पुनर्गठन योजनाओं, परिसंपत्ति बिक्री और ऋणदाताओं के वितरण जैसे प्रावधान आते हैं। नोएडा जैसे NCR क्षेत्र के व्यवसाय इन प्रक्रियाओं का लाभ उठाकर भुगतान-संतुलन बना सकते हैं।

“IBBI shall regulate the affairs of insolvency professionals, information utilities and IPAs.”

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अंतर्गत नोएडा की कंपनियाँ NCLT और NCLAT के माध्यम से कानूनी प्रक्रिया शुरू करती हैं। नवीनतम परिवर्तन में समय-सीमा और प्रक्रिया-रोडमैप स्पष्ट हुआ है ताकि देनदार और creditors के बीच संतुलन बना रहे।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे नोएडा से जुड़े वास्तविक-परिदृश्यों के आधार पर 4-6 केस प्रकार दिए हैं। हर स्थिति में एक अनुभवी वकील आपकी सहायता कर सकता है।

  • सीआईआरपी के लिये आवेदन की तैयारी नोएडा-आधारित मैन्युफैक्चरिंग इकाई ने ऋणदाताओं के समूह के बीच एक संरचना बनाने के लिये CIRP आवेदन किया है। वकील आपके लिये आवेदन-फाइलिंग और क्रेडिटर-मैप बना सकता है।
  • विक्रेताओं के बकाये के विवाद का निपटारा नोएडा की सेवा क्षेत्र व्यवसायों में समय-सीमा से पूर्व भुगतान-समझौते की मांग बढ़ी है; कानूनी मार्गदर्शक योजना बनाकर पुनर्गठन संभव बनता है।
  • पुनर्गठन योजना बनाम परिसमापन विकल्प एक नोएडा तकनीकी स्टार्टअप ने ऋणदाताओं के साथ पुनर्गठन योजना पर विचार किया है नहीं तो परिसमापन के विकल्प आते हैं; सलाहकार वकील निर्णय में मदद कर सकते हैं।
  • कंपनी अधिग्रहण या विलय के दौरान रीकंस्ट्रक्शन नोएडा स्थित उद्योग-क्षेत्र में हिस्सेदारी बदलने या debt-equity संरचना调整 के लिये कानूनी मार्गदर्शन अपेक्षित होता है।
  • व्यक्तिगत दिवालियापन के पूर्व-योजना कदम यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी या भागीदार की व्यक्तिगत दिवालियापन की स्थिति बन रही है, तो कानूनी सलाह आवश्यक होती है ताकि व्यक्तिगत ऋण और व्यवसायिक दायित्व समन्वय हो सके।
  • नेगोशिएशन और क्रेडिट-रिफिनेंस के लिये पथ-निर्देशन नोएडा क्षेत्र के बैंकों के साथ debt-restructuring की वार्ता के दौरान अनुभवी अधिवक्ता प्रक्रिया को सरल बनाते हैं।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

निम्न राज्यों के कानूनों का संयोजन नोएडा के केसों में लागू होता है, खासकर केंद्रीय कानून के साथ।

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016-केंद्रीय कानून जो पुनर्गठन और insolvency resolution को समय-सीमित बनाता है।
  • Companies Act, 2013-संभावित समझौते और intervening arrangements के लिये Sections 230-232 जैसी धाराओं के तहत संरचना बनती है।
  • SARFAESI Act, 2002-कर्जदाता के लिये सिक्योरिटी इन्फ्रास्टрак्चर का त्वरित पुनर्गठन एवं.Asset recovery के उपाय स्थापित करता है।

स्थानीय अदालतें और संस्थान नोएडा-गण provincial boundaries के बाहर भी निर्णय लेते हैं, अतः NCLT दिल्ली-सीमा या Allahabad Bench से निपटान संभव है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IBC क्या है?

IBC एक केंद्रीय कानून है जो पुनर्गठन, insolvency resolution और परिसमापन को एक समय-सीमित ढाँचे में लाता है।

NCLT क्या है और नोएडा में इसका दायरा कैसे है?

NCLT एक adjudicating authority है जो IBC के मामलों को सुनती है। नोएडा से संबन्धित मामलों के लियेDelhi या Allahabad Bench देख सकते हैं।

कृपया CIRP कैसे शुरू होता है?

सबसे पहले एक आवेदन creditors, debtors या insolvency professional के माध्यम से दाखिल होता है। फिर NCLT इंटरिम मॉनिटरिंग और मोड-ऑफ-टाइमर चक्र तय करता है।

क्या व्यक्तिगत दिवालियापन भी IBC से जुड़ा है?

हाँ, IBC 개인 व्यक्तियों के लिये भी insolvency resolution की व्यवस्था देता है, परंतु प्रक्रियाcorporate से अलग होती है।

मुझे किस प्रकार की सहायता कही जाएगी?

वकील संरचना-निर्माण, पंजीकरण, क्रेडिटर-समिति के साथ बातचीत और पुनर्गठन योजनाओं के ड्राफ्ट बनाते हैं।

Noida में कौन से दस्तावेज जरूरी होंगे?

कंपनी के पंजीकरण प्रमाण पत्र, वित्तीय वक्तव्य, बैलेंस शीट, ऋण सौदों, creditors के बिल आदि आवश्यक होंगे।

CIDP और CIRP में समय-सीमा कितनी है?

आमतौर पर CIRP 180 दिनों के भीतर समाधान के लिये प्रयास strives, पर कुछ स्थितियों में विस्तार संभव है।

कौन से अधिकारी CIRP में भाग लेते हैं?

NCLT का निर्णय-कर्त्ता समूह, insolvency professional, information utility और creditors-committees CIRP में भाग लेते हैं।

क्या पुनर्गठन योजना निष्पक्ष होती है?

हाँ, योजना creditor के हित, viability और likely recovery पर आधारित होती है, और NCLT द्वारा मंजूर होनी जरुरी है।

क्या मैं Noida से किसी स्थानीय वकील को चुनूं?

हाँ, स्थानीय वकील Noida क्षेत्र की अदालतों, बैंकों और उद्योग-समुदायों से परिचित होते हैं, जो समय बचाते हैं।

क्या मुझें पहले कोई शुल्क देना होगा?

आमतौर पर शुरुआती समीक्षा के लिये kecil-फीस संभव है, परन्तु पूरी प्रक्रिया के समय-समय पर फीस संरचना स्पष्ट होनी चाहिए।

IBC के बारे में ताजा बदलाव क्या हैं?

IBC में समय-सीमा, क्रेडिटर्स-सीटी और आईपीए-रूल्स में हालिया संशोधन हुए हैं ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और गति-पूर्ण रहे।

किस प्रकार की सलाह नोएडा निवासियों के लिये व्यावहारिक है?

स्थानीय कानून-परिसर, बैंक-सम्बन्धी निर्णय और NCLT-प्रक्रिया के लिये एक अनुभवी वकील से शुरुआत करें।

5. अतिरिक्त संसाधन

नीचे नोएडा और भारत-भर के लिये पुनर्गठन एवं दिवालियापन से संबंधित तीन आधिकारिक संसाधन दिए गए हैं।

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI)-IBC के अनुपालन और IPAs आदि पर नियंत्रण. https://www.ibbi.gov.in
  • National Company Law Tribunal (NCLT)-IBC केसों का प्राथमिक adjudicating body. http://nclt.gov.in
  • Ministry of Corporate Affairs (MCA)-Companies Act और सम्वन्धित नियम. https://www.mca.gov.in

6. अगले कदम

  1. अपने व्यवसाय की स्थिति का संक्षिप्त आकलन करें और किस प्रकार के समाधान की जरूरत है यह तय करें।
  2. नोएडा क्षेत्र में अनुभव रखने वाले 2-3 वकीलों से initial consult लें।
  3. अपनी वित्तीय स्थिति, ऋण-संबंधी दस्तावेज और debt-structure तैयार रखें।
  4. कौन सा रास्ता व्यवहारिक है, CIRP या पुनर्गठन, इसका निर्णय करें।
  5. कानूनी प्रतिनिधि के साथ एक ठोस रणनीतिक प्लान बनाएं और लागत-आकलन पर सहमति बनाएं।
  6. RTI या जरुरी सूचना-utilities से आवश्यक जानकारी एकत्र करें ताकि केस-पॉजिशन स्पष्ट हो।
  7. घरेलू कानून, बैंकों और NCLT के समय-रेखा के अनुरूप कदम उठाएं और संपर्क बनाए रखें।

उद्धरण स्रोत

“An Act to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals in a time-bound manner.”

यह IBC का प्रमुख उद्देश्य दर्शाने वाला आधिकारिक कथन है। स्रोत: Insolvency and Bankruptcy Code, 2016. https://legislative.gov.in

“IBBI shall regulate the affairs of insolvency professionals, information utilities and IPAs.”

IBC के अंतर्गत IP प्रोफेशनल और सूचना-यूटिलियों का नियंत्रण IBBI के पास है। स्रोत: IBBI वेबसाइट. https://www.ibbi.gov.in

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