राजकोट में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील

अपनी ज़रूरतें हमारे साथ साझा करें, कानूनी फर्मों से संपर्क प्राप्त करें।

मुफ़्त। 2 मिनट लगते हैं।

rk law firm
राजकोट, भारत

उनकी टीम में 29 लोग
English
आरके लॉ फर्म प्रा. लिमिटेड राजकोट‑स्थित एक практиس है जो व्यक्तियों और व्यवसायों को रोजगार और श्रम मामलों, बौद्धिक...
जैसा कि देखा गया

1. राजकोट, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून के बारे में: राजकोट, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

भारतीय पुनर्गठन और दिवालियापन कानून ऋणदाता और देनदार के हितों का संतुलन बनाकर स्थायी समाधान प्रदान करता है. राजकोट जैसे गुजरात के कारोबारी केंद्रों में यह कानून कॉर्पोरेट दिवालिया प्रक्रियाओं को समय-सीमित बनाता है. Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) corporate persons, partnerships और individuals के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शक ढांचा देता है.

IBC के अंतर्गत CIRP, Liquidation और अन्य रीकॉनफिगरेशन उपाय स्पष्ट किए गए हैं. राजकोट में छोटे एवं मध्यम उद्योगों के लिए यह कानून बैंकिंग व वित्तीय संस्थाओं से ऋण चुकाने में मददगार है. स्थानीय व्यवसायों के लिए यह प्रक्रिया पारदर्शिता, कुशलता और त्वरित निर्णय सुनिश्चित करती है.

“The Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 aims to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons.”

Source: IBBI - What is IBC

“The Code provides for time-bound resolution of insolvency and bankruptcy and enables cross-border insolvency cooperation.”

Source: IBBI - What is IBC

नवीनतम बदलाव के अनुसार PPIRP और cross-border insolvency जैसे उपाय IBC के साथ जुड़ गए हैं, ताकि राजकोट के प्राइवेट सेक्टर के लिए त्वरित समाधान संभव हो सके. साथ ही NCLT की भूमिका समय-सीमा के भीतर निर्णय लेने की दिशा में मजबूत है.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: राजकोट, भारत से संबंधित वास्तविक उदाहरण आधारित 4-6 विशिष्ट परिदृश्य

  • राजकोट-आधारित एक लघु निर्माण व्यवसाय उच्च ऋण चुकाने में डिफ़ॉल्ट कर देता है. बैंक CIRP के माध्यम से ऋण का पुनर्गठन या ऋण-समझौते का प्रस्ताव कर सकता है. एक कानूनी सलाहकार से पूर्व-आकलन और CIRP के लिए आवश्यक दस्तावेज़ तैयार करना ज़रूरी होता है.

  • एक मध्यम उद्योग (MSME) को बैंक से पुनर्गठन योजना के लिए मंजूरी चाहिए. advokat एक संयुक्त राहत योजना, वित्तीय पुनर्गठन और प्रत्यक्ष संवाद नीति निर्धारित कर सकता है.

  • पीड़ित क्रेडिटर समूह में निजी ऋणदाता, विक्रेता और बैंक शामिल हैं. संसाधन विकेंद्रीकरण, रिज़ॉल्यूशन प्लान की समीक्षा और संविदा संरचना में कानूनी सहायता आवश्यक हो सकती है.

  • कंपनी के मालिक के निधन या दिवालिया होने की स्थिति में क्रेडिटर्स के अधिकार और व्यवसाय के संचालन से जुड़े विवाद पैदा हो सकते हैं; ऐसे मामले में कोर्ट-आधारित निर्णय और वैकल्पिक पुनर्गठन मार्ग की जरूरत पड़ती है.

  • राजकोट के किसी व्यक्ति द्वारा व्यक्तिगत दिवालियापन (Individual Insolvency) के लिए आवेदन करना हो, तो IBC के अंतर्गत प्रक्रियागत कदम और रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल की भूमिका स्पष्ट हो जाती है.

  • किसी संरचना के परिवर्तन के समय स्टेकहोल्डर के हितों की सुरक्षा करना हो तो कम्पनियाँ कानून-निर्देशों के अनुसार योजना बनाकर NCLT में प्रस्ताव दाखिल कर सकती हैं.

3. स्थानीय कानून अवलोकन: राजकोट, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - कॉर्पोरेट, व्यक्तिगत और पार्टनरशिप डिफॉल्ट के लिए समय-सीमित पुनर्गठन और समाधान प्रक्रियाओं का केंद्रीय कानून.
  • Companies Act, 2013 - कंपनियों के लिए समझौते, वर्गीकरण और समायोजन (Sections 230-234 आदि) के माध्यम से पुनर्गठन के वैधानिक उपाय सुनिश्चित करता है.
  • Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI) - बैंकिंग क्षेत्र में ऋण सुरक्षा हितों के enforcement और वसूली के लिए प्रावधान देता है; पुनर्गठन से पहले क्रेडिटर-विंग के लिए मार्गप्रदर्शक स्टेप्स बनता है.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IBC क्या है?

IBC एक केंद्रीय कानून है जो कॉर्पोरेट, व्यक्तिगत और साझेदारी संस्थाओं के पुनर्गठन और insolvency resolution को समय-सीमित बनाता है. यह क्रेडिटर्स और देनदार के बीच संतुलन बनाने के लिए प्रावधान देता है. Rajkot में भी इसके तहत मुकदमे NCLT के जरिये सुना जाते हैं.

CIRP क्या है और कितने समय में पूरा होता है?

CIRP Corporate Insolvency Resolution Process है. सामान्य समय-सीमा 180 दिन है, जिसे NCLT द्वारा 90 दिनों तक बढ़ा सकता है. यह विस्तार सिर्फ असाधारण परिस्थितियों में दिया जाता है.

NCLT क्या करता है?

NCLT एक न्यायिक समिति है जो IBC के तहत CIRP, Resolution Plans और Liquidation के मुद्दों को सुनती है. Rajkot के मामलों में भी NCLT ही अंतिम निर्णय करता है.

PPIRP क्या है और कब लागू होता है?

PPIRP Pre-Packaged Insolvency Resolution Process है, जिसे विशेष Corporate Debtors के लिए लागू किया गया है ताकि पुनर्गठन तेजी से हो सके. यह योजना डिफॉल्ट के पूर्व-निर्धारण और साझेदारों के बीच समझौते पर आधारित होती है.

कौन से दस्तावेज़ नोटरी कराके जमा करने होंगे?

आमतौर पर पहचान पत्र, पते का प्रमाण, ऋण विवरण, बकाया ऋण की सूची, कंपनी के वित्तीय कथन आदि आवश्यक होते हैं. कानून के अनुसार दस्तावेज़ की सही-सही तैयारी जरूरी है.

राजकोट में Insolvency प्रोफेशनल कैसे चुनें?

स्थानीय अनुभव, IBBI से पंजीकृत Insolvency Professional की प्रतिष्ठा, फीस-फ्रेम और पूर्व-क्रेडिटर्स के साथ व्यवहार की समीक्षा करें. पहले कॉन्सल्टेशन में केस-स्टडी और संभावित परिणाम पूछें.

IBC का उद्देश्य क्या है?

IBC का उद्देश्य परिसंपत्तियों का अधिकतम मूल्य सुरक्षित करना, कुशल पुनर्गठन और समय पर समाधान प्राप्त करना है. यह सभी पक्षों के हितों को संतुलित करने का प्रयास करता है.

राजकोट में व्यक्तिगत दिवालियापन कैसे शुरू होता है?

व्यक्तिगत दिवालियापन के मामले IBC के अंतर्गत NCLT के समक्ष दायर होते हैं. प्रोफेशनल रीकॉनफिगरेशन और वित्तीय पुनर्गठन के विकल्प उपलब्ध रहते हैं.

कौन से विभाग NCLT के साथ संबंध रखते हैं?

NCLT के साथ क्रेडिटर, रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल, NCLAT और उच्च न्यायालय/सहायक न्यायालयों का चैन बनता है. प्रक्रिया में न्यायिक नियंत्रण और फॉलो-अप बने रहते हैं.

राजकोट में PPIRP किस प्रकार फिट बैठता है?

राजकोट के कॉरपोरेट डेब्टर्स के लिए PPIRP सरल, छोटा और अधिक लचीला समाधान प्रदान कर सकता है. यह तेज़ी से दस्तावेज और प्रमाणीकरण मांगता है.

IBC में क्रेडिटर के अधिकार क्या हैं?

क्रेडिटर फ्रेमवर्क के तहत अपनी दावों को प्रस्तुत करने, सुरक्षित ऋण रिकॉर्ड रखने और समाधान योजना पर प्रभाव डालने के अधिकार रखते हैं. वे कानून-निर्देशन का पालन करते हैं.

Cross-border insolvency क्या है?

Cross-border insolvency वहां लागू होता है जब विदेशी परिसंपत्तियाँ और देनदार भी विवाद में हों. IBC इन मामलों के लिए सहयोगात्मक नीतियाँ प्रदान करता है.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - नियामक संस्था; विस्तार से IBC के अनुप्रयोग और प्रोफेशनल्स के पंजीकरण के बारे में जानकारी देता है. https://www.ibbi.gov.in/
  • National Company Law Tribunal (NCLT) - कॉर्पोरट केसों का न्यायिक मंच; देखें: https://nclt.gov.in/
  • National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) - NCLT के आदेशों पर अपीलीय मंच; देखें: https://nclat.nic.in/

6. अगले कदम: पुनर्गठन और दिवालियापन वकील खोजने के लिये 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपनी स्थिति स्पष्ट करें: कौन सा कानून लागू होता है और क्या आप व्यक्तिगत है या कॉर्पोरेट Debtor हैं.
  2. राजकोट के IBC-प्रैक्टिशनर के साथ initial consultation लें; प्राथमिक दायरे और अपेक्षित समय पर चर्चा करें.
  3. पात्रता, अनुभव और फीस-फ्रेम के बारे में पक्के सवाल पूछें; केस-वर्कसीरियता देखें.
  4. पिछले मामलों के परिणाम और क्लाइंट फीडबैक जाँचें; संभव हो तो स्थानीय व्यवसायों के सुझाव लें.
  5. कानूनी सहायता के लिए पंजीकृत Insolvency Professional Agencies (IPAs) से संपर्क करें और प्रमाण-पत्र सत्यापित करें.
  6. दस्तावेज़ एकत्र करें: वित्तीय स्टेटमेंट,貸-आधार, ऋण समायोजन के प्रस्ताव आदि तैयार रखें.
  7. पहली मीटिंग के बाद एक स्पष्ट कदम-चयन योजना बनाएं और लिखित प्रस्ताव पर निर्णय लें.

Lawzana आपको योग्य कानूनी पेशेवरों की चयनित और पूर्व-जाँच की गई सूची के माध्यम से राजकोट में में सर्वश्रेष्ठ वकील और कानूनी फर्म खोजने में मदद करता है। हमारा प्लेटफ़ॉर्म अभ्यास क्षेत्रों, पुनर्गठन और दिवालियापन सहित, अनुभव और ग्राहक प्रतिक्रिया के आधार पर तुलना करने की अनुमति देने वाली रैंकिंग और वकीलों व कानूनी फर्मों की विस्तृत प्रोफ़ाइल प्रदान करता है।

प्रत्येक प्रोफ़ाइल में फर्म के अभ्यास क्षेत्रों, ग्राहक समीक्षाओं, टीम सदस्यों और भागीदारों, स्थापना वर्ष, बोली जाने वाली भाषाओं, कार्यालय स्थानों, संपर्क जानकारी, सोशल मीडिया उपस्थिति, और प्रकाशित लेखों या संसाधनों का विवरण शामिल है। हमारे प्लेटफ़ॉर्म पर अधिकांश फर्म अंग्रेजी बोलती हैं और स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों कानूनी मामलों में अनुभवी हैं।

राजकोट, भारत में में शीर्ष-रेटेड कानूनी फर्मों से उद्धरण प्राप्त करें — तेज़ी से, सुरक्षित रूप से, और बिना अनावश्यक परेशानी के।

अस्वीकरण:

इस पृष्ठ पर दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। हम सामग्री की सटीकता और प्रासंगिकता सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं, लेकिन कानूनी जानकारी समय के साथ बदल सकती है, और कानून की व्याख्या भिन्न हो सकती है। आपको अपनी स्थिति के लिए विशिष्ट सलाह हेतु हमेशा एक योग्य कानूनी पेशेवर से परामर्श करना चाहिए।

हम इस पृष्ठ की सामग्री के आधार पर की गई या न की गई कार्रवाइयों के लिए सभी दायित्व को अस्वीकार करते हैं। यदि आपको लगता है कि कोई जानकारी गलत या पुरानी है, तो कृपया contact us, और हम उसकी समीक्षा करेंगे और जहाँ उचित हो अपडेट करेंगे।