सूरत में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील

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Advocate om sharma
सूरत, भारत

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एडवोकेट ओम शर्मा सूरत, गुजरात आधारित वकील हैं जिनके पास 13+ वर्षों का कोर्टरूम अनुभव है, जो आपराधिक मामलों और...
CONSULTA JURIS (LAW FIRM)
सूरत, भारत

2020 में स्थापित
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CONSULTA JURIS (LAW FIRM) एक प्रतिष्ठित कानूनी अभ्यास है जो सूरत, भारत में आधारित है और विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक कानूनी...
ASHVA Legal Advisory LLP
सूरत, भारत

2017 में स्थापित
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एशवा लीगल एडवाइजरी एलएलपी भारत में एक प्रतिष्ठित लॉ फर्म है, जो कॉर्पोरेट कानून, कराधान (प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष...
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1. सूरत, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून के बारे में

सूरत गुजरात का प्रमुख व्यापार केन्द्र है, खासकर डाइमेंड, टेक्सटाइल और सूक्ष्म, मध्य और लघु उद्योगों (MSME) के क्षेत्र में. यहाँ पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का लक्ष्य समय-सीमा के भीतर समाधान खोजना और व्यवसाय मूल्य को सुरक्षित रखना है.

केंद्रीय कानून Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) ही मुख्य ढांचा है. सूरत में मामलों की सुनवाई गुजरात स्थित NCLT के अहमदाबाद बेंच द्वारा होती है. CIRP की सामान्य समय-सीमा लगभग 180 दिन है, और नियमों के अनुसार आवश्यकता पड़ने पर समय सीमाओं में वृद्धि संभव है.

“The Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 provides for a time-bound framework for reorganization and insolvency resolution.”

आधिकारिक स्रोत: IBBI

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे सूरत-आधारित परिदृश्यों पर केंद्रित 4-6 परिस्थितियाँ दी जा रही हैं जिनमें एक अनुभवी अधिवक्ता या कानूनी सलाहकार मदद कर सकता है.

  1. डायमेंड व्यापार समूह का ऋण-भुगतान में डिफॉल्ट; बैंक लिंक्ड लोन धारकों के साथ CIRP शुरू करने से पहले पुनर्गठन योजना बनानी होगी. एक सक्षम वकील आपकी स्थिति के अनुसार CPRP/PPIRP विकल्प दिखा सकता है.

  2. MSME निर्माता की संधारणीयता संकट; विक्रेता, फाइनेंसर और सप्लाई चेन के क्रेडिटर्स के साथ सामंजस्य बिठाने के लिये कानूनी मार्ग आवश्यक होता है.

  3. पब्लिक यूनिट या निजी इकाई का वित्तीय क्राइसिस; ऋण पुनर्गठन, सुरक्षा ऋणों के नियम, और नियंत्रण-हस्तांतरण के लिए NCLT के पास आवेदन से पहले नियोजन जरूरी है.

  4. एकीकृत संरचना योजना या समझौते के लिए कंपनी अधिनियम के उपाय; कुछ मामलों में IBC के बजाय 230-232 धाराओं के अंतर्गत समझौते का प्रस्ताव उचित हो सकता है.

  5. PPIRP के जरिये शीघ्र पुनर्गठन की आवश्यकता; अगर कंपनी तेजी से सुधार चाहती है और स्टेकहोल्डर के साथ सामान्य निर्णय लेनी है तो PPIRP एक विकल्प हो सकता है.

  6. गिरफ्तारी, क्रेडिटर्स कॉन्सॉलिडेशन और प्रक्रिया के दौरान कॉर्पोरेट इंटीग्रेशन; यह सब स्पष्ट कानूनी मार्गदर्शन माँगता है ताकि क्लेम सही रूप से प्रस्तुत हों और मूल्य बनाए रखा जा सके.

उच्च-स्तरीय सलाह के लिए एक अनुभवी अधिवक्ता से मिलने से पहले आप अपने दस्तावेज़ एकत्र रखें: ऋण विवरण, क्रेडिटर सूची, अनुबंधों की प्रतियाँ और वित्तीय विवरण।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - यह केंद्रीय कानून है जो कॉरपोरेट, व्यक्तिगत और भागीदारी संस्थाओं के लिए पुनर्गठन, ऋण-समाधान और liquidation के समय-सीमाबद्ध प्रावधान निर्धारित करता है. गुजरात के मामलों की सुनवाई NCLT अहमदाबाद बेंच करता है.
  • Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI Act) - बैंकों और वित्तीय संस्थाओं के लिए सुरक्षित ऋणों के प्रबंधन, रिकवरी और पुनर्गठन के वैकल्पिक तंत्र प्रदान करता है.
  • Companies Act, 2013 - किसी कॉर्पोरेट डेब्टर के लिए समझौता या संरचना योजनाओं के लिए Sections 230-232 के अंतर्गत Scheme of Arrangement बनाने की व्यवस्था देता है; कुछ मामलों में IBC से पहले या साथ-साथ इन मार्गों का विकल्प हो सकता है.
  • IBC Amendment Acts (2021, 2023 आदि) - PPIRP (Pre-Packaged Insolvency Resolution Process) जैसे आधुनिक उपायों को सम्मिलित करते हैं; यह तेज़ और अधिक लचीला पुनर्गठन प्रस्ताव देता है.

“Pre-Packaged Insolvency Resolution Process has been introduced to enable faster resolution for corporate debtors.”

आधिकारिक स्रोत: IBBI

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

IBC क्या है?

IBC 2016 को अधिनियमित किया गया ताकि कॉरपोरेट, व्यक्तिगत और भागीदारी संस्थाओं के लिए पुनर्गठन, दिवालिया समाधान और liquidation को समय-सीमा के भीतर किया जा सके. यह संचालक, क्रेडिटर्स और पक्षकारों के लिए एक स्पष्ट ढांचा देता है.

CIRP कैसे शुरू होता है?

आधिकारिक आवेदन वित्तीय क्रेडिटर या कॉर्पोरेट ड debtor द्वारा NCLT के समक्ष दायर किया जाता है. अदालत सदस्यता के साथ प्रक्रिया शुरू करती है और एक इन्सॉल्वेंसी प्रोफेशनल नियुक्त होती है.

कौन आवेदन कर सकता है?

चार प्रमुख प्रकार के आवेदक होते हैं: वित्तीय क्रेडिटर, संचालन क्रेडिटर, कॉर्पोरेट ड debtor, और व्यक्तिगत ऋणी. हर आवेदन का दायरा और प्रभाव अलग होता है.

PPIRP क्या है?

PPIRP एक पूर्व-घोषित insolvency प्रक्रिया है जो कॉर्पोरेट ड debtor के लिए तेज़ पुनर्गठन की अनुमति देती है. यह आम तौर पर अदालत के समक्ष शून्य-आवधि में शुरू होती है.

नCLT की भूमिका क्या है?

NCLT अदालत-आधारित संस्थान है जो CIRP, liquidation और समांतर योजनाओं के निर्णयों के लिए प्रधान adjudicating authority है. गुजरात के लिए अहमदाबाद बेंच केंद्र है.

कौन से दस्तावेज लगेंगे?

आवेदक के फाइनेंशियल स्टेटमेंट, लोन/क्रेडिटर्स सूची, सप्लाई चेन अनुबंध, भुगतान इतिहास, और अन्य पूंजीकृत दस्तावेज आवश्यक होंगे. एक वकील दस्तावेज़ तैयारी में मार्गदर्शन करेगा.

किशोर-क्रेडिटर क्या कर सकते हैं?

क्रेडिटर्स कमेटी (CoC) बनती है जो CIRP के दौरान निर्णय लेती है. वे योजना की स्वीकृति, समय-सीमा और मूल्य-निर्णयन में निर्णायक भूमिका निभाते हैं.

क्या डिफॉल्ट के बाद भी पुनर्गठन संभव है?

हाँ, बिना liquidation भी पुनर्गठन संभव है जब तक कि सभी क्रेडिटर्स मिलकर पुनर्गठन योजना को मंजूरी दें और अदालत उसे मान्य करे.

क्या व्यक्तिगत दिवालिया स्थिति पर IBC लागू होता है?

हाँ, IBC व्यक्तियों के लिए भी समय-सीमा के भीतर insolvency resolution प्रदान करता है, पर इसकी प्रक्रिया और क्रेडिटर्स के दायित्व अलग होते हैं.

डिजिटल रिकॉर्ड्स की भूमिका?

आवेदनों, प्रस्तुतियों और निर्णयों के लिए डिजिटल फाइलिंग और ई-ऑफिस सिस्टम का उपयोग बढ़ रहा है; यह प्रक्रिया को तेज़ बनाता है और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है.

मैं Surat में वकील कैसे चुनूं?

स्थानीय अनुभव, IBC संबंधी प्रमाणपत्र, कोर्ट-फिसाइल ऑफ़िसियल रिकॉर्ड की समझ और पूर्व केस्स के परिणाम देखें. क्लिनिकल मीटिंग में शुल्क संरचना स्पष्ट बताएं.

स्थानीय प्रक्रियागत समय-सीमा कितनी होती है?

IBC के अनुसार CIRP के लिए सामान्यतः 180 दिन की पहली समय-सीमा है; जरूरत पड़ने पर CoC से अनुमति मिलकर समय सीमा बढ़ाई जा सकती है.

कानूनी सहायता कितनी महत्त्वपूर्ण है?

कानूनी सलाहकार, अधिवक्ता और इन्सॉल्वेंसी प्रोफेशनल का संयोजन केस के सफल निष्कर्ष के लिए आवश्यक हो सकता है ताकि सभी पक्ष सही दस्तावेज और समय-सीमा के भीतर कदम उठा सकें.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - आधिकारिक साइट: https://www.ibbi.gov.in
  • National Company Law Tribunal (NCLT) - Ahmedabad bench और अन्य बेंचों के लिए साइट: https://nclt.gov.in
  • Minsitry of Corporate Affairs (MCA) - Companies Act एवं Schemes: https://www.mca.gov.in

6. अगले कदम

  1. अपनी स्थिति का आकलन करें: किस प्रकार का दावा है और कौन से कानून लागू होते हैं.
  2. कॉन्टैक्ट करें: एक अनुभवी पुनर्गठन और दिवालियापन वकील से प्राथमिक Consultation बुक करें.
  3. दस्तावेज इकट्ठा करें: वित्तीय विवरण, ऋण विवरण, अनुबंध और क्रेडिटर्स की सूची एकत्रित रखें.
  4. कानूनी रणनीति बनाएं: CI RP या PPIRP या अन्य विकल्पों पर निर्णय लें.
  5. क्रेडिटर्स कमेटी के साथ समन्वय: योजना पर क्रेडिटर्स से सहमति कैसे मिलेगी, यह स्पष्ट करें.
  6. आवश्यक फाइलिंग तैयार करें: NCLT के लिए आवेदन और सभी आवश्यक annexures तैयार रखें.
  7. फीस और शर्तें स्पष्ट करें: संरचना, समयरेखा और सफलता-मानदंडों पर समझौता करें.

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