सुरेंद्रनगर में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील

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सुरेंद्रनगर, भारत

1950 में स्थापित
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1950 में स्थापित, Paras K. Shah Associates ने संपत्ति मामलों पर केंद्रित व्यापक कानूनी सेवाएं प्रदान करने में प्रतिष्ठा बनाई है।...
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1. सुरेंद्रनगर, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून के बारे में: [ सुरेंद्रनगर, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन ]

भारतीय कानून में पुनर्गठन और दिवालियापन एक एकीकृत ढांचा है जो आर्थिक संकट में फंसे उधारदाताओं और देनदारों के लिए त्वरित समाधान का प्रावधान करता है। यह ढांचा कॉर्पोरेट पर्सन, साझेदारी फर्म और व्यक्तियों को कवर करता है। सुरेंद्रनगर जैसे शहरों में व्यवसायिक गतिविधियाँ गुजरात के भीतर होने के कारण स्थानीय इकाइयों को राष्ट्रीय ढांचे के अनुसार राहत मिलती है।

IBC 2016 का उद्देश्य है कि दिवालिया स्थितियाँ जल्दी सुलझें, संकुचित समय में पुनर्गठन संभव हो और देनदारियों के प्रकटन के साथ creditors की भूमिका स्पष्ट हो। साथ ही यह मिश्रित समाधान, परिसमापन और पुनर्गठन के बीच एक स्पष्ट मार्ग देता है। सुरेंद्रनगर के व्यवसायी और व्यक्तियाँ भी इन प्रक्रियाओं के अधीन होते हैं।

गुजरात के लिए CIRP (Corporate Insolvency Resolution Process) अहम तत्व है, जिसमें NCLT के समक्ष दाखिला, इन्फ्ल्यूएंस व्यक्तिगत ऋणधारक नहीं हो सकते? नहीं-व्यक्तिगत Insolvency के लिए व्यक्तिगत insolvency framework भी है-पर स्थानीय अदालतों और NCLT के माध्यम से प्रक्रियाएं संचालित होती हैं।

“Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 aims to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals.”

Source: IBBI (Insolvency and Bankruptcy Board of India)

“The National Company Law Tribunal is the adjudicating authority for insolvency proceedings of corporate persons.”

Source: National Company Law Tribunal

“Insolvency professionals, information utilities and insolvency resolution processes are regulated by the Insolvency and Bankruptcy Board of India.”

Source: IBBI

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: [पुनर्गठन और दिवालियापन कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य]

सुरेंद्रनगर के व्यवसायी और निवासी के लिए नीचे दिए गए परिदृश्य बतौर मार्गदर्शक हैं। प्रत्येक स्थिति में एक अनुभवी अधिवक्ता आपकी योजना, दायित्वों और संभावित लाभ-हानि के आकलन में मदद करेगा।

  • एक सुरेंद्रनगर आधारित लघु उद्योग बैंक ऋण चुकाने में असमर्थ हो गया है और ऋण पुनर्गठन की मांग कर रहा है। CIRP या S4A जैसे तंत्र के जरिये आपके ऋण का पुनर्गठन संभव हो सकता है।
  • कंपनी के शेयरधारकों को नुकसान के बावजूद ऋणदाताओं के साथ एक पारदर्शी पुनर्गठन योजना बनानी हो। यह CoC (Creditors’ Committee) और NCLT प्रक्रिया का भाग हो सकता है।
  • व्यवसाय के लिए अचानक नकद प्रवाह समस्या आ जाए और उधार लेने वाले दलों के साथ एक संरचित रीस्ट्रक्चर प्रस्ताव बनाकर insolvency कानून के अनुसार राहत चाहिए हो।
  • किसी सुरेंद्रनगर-आधारित व्यवसाय ने बड़े क्रेडिटर्स से पुनर्भुगतान के लिए समय माँगा हो और बैंक-समर्थित पुनर्गठन योजना चाहिए हो।
  • व्यक्ति मालिकाना व्यवसाय के अंतर्गत निजी ऋण-समਾਨ योजना बनानी हो (व्यक्तिगत Insolvency का विकल्प), ताकि व्यक्तिगत संपत्ति और व्यवसायिक संपत्ति के बीच संतुलन बने।
  • डायवर्जन के कारण एक वितरक या मंडी दुकान के लिए क्रेडिटर्स के साथ कड़े नियम और परिसमापन से बचना जरूरी हो गया हो।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: [ सुरेंद्रनगर, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें ]

स्थानीय परिदृश्य में नीचे दिए गए कानून नज़दीकी स्तर पर प्रभावी रहते हैं। ये कानून गुजरात और सुरेंद्रनगर जिले के मौजूदा मामलों पर लागू होते हैं।

  1. इन्सोल्वेंसी और बैंकृप्टसी कोड, 2016 (IBC 2016) - कॉर्पोरेट पर्सन, साझेदारी फर्म और व्यक्तियों के पुनर्गठन व दिवालियपन की एकीकृत प्रक्रिया देता है।
  2. SARFAESI अधिनियम, 2002 - बैंकों के लिए ऋण चुकाने में असमर्थ पूंजी पर सुरक्षा परिसम्पत्तियों के प्रवर्तन और पुनर्गठन के उपाय देता है।
  3. कंपनी अधिनियम, 2013 - कॉर्पोरेट मामलों में पुनर्गठन, वर्गीकरण और निदेशक जिम्मेदारियों के ढांचे को सपोर्ट करता है; IBC के साथ मिलकर काम करता है।

आईडिया यह है कि सुरेंद्रनगर के निवासी और व्यापारिक संस्थाएं इन कानूनों के दायरे में आकर त्वरित और पारदर्शी समाधान पाते हैं। हालिया बदलावों के साथ व्यक्तिगत insolvency के अवसर और प्रक्रिया का ढांचा भी अधिक स्पष्ट हुआ है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न: [FAQ]

IBC क्या है और इसे क्यों लागू किया गया?

IBC एक एकीकृत कानून है जो पुनर्गठन और insolvency resolution को सक्षम बनाता है। इसका लक्ष्य है देनदारों और creditors के बीच संरेखण, समय पर समाधान और परिसमापन के विकल्पों को स्पष्ट करना।

क्या व्यक्तिगत ऋणधारक भी IBC के तहत पुनर्गठन करा सकता है?

हाँ, IBC में व्यक्तियों और उनके संरचित व्यवसायों के लिए insolvency resolution process का प्रावधान है, ताकि व्यक्तिगत ऋण और व्यवसाय ऋण मिलकर समाधान पा सकें।

आप किस तरह CIRP के लिए योग्य हैं?

किसी कॉर्पोरेट डेब्टर के पास पर्याप्त देय ऋण हो और उसे भुगतान में कठिनाई हो, तो वह CIRP के लिए NCLT के समक्ष आवेदन कर सकता है; प्रक्रिया में IRP/RP नामित होते हैं और moratorium लागू होता है।

CoC (Creditors’ Committee) क्या भूमिका निभाती है?

CoC ऋणदाताओं का समूह है जो प्रस्तावित समाधान योजना पर वोट करता है। वे RP के साथ मिलकर योजना के viability और feasibility का आकलन करते हैं।

Moratorium क्या है और इससे क्या फायदे हैं?

Moratorium का मतलब है कि संचित देयताओं के संबंध में नया कदम उठाने से पहले संपूर्ण देनदारों पर कानूनी रोक लग जाती है। यह संघर्ष को रोककर पुनर्गठन के लिए समय देता है।

नकद प्रवाह की समस्या किस तरह हल होती है?

बैंकों के साथ पुनर्गठन-आधारित योजनाओं, परिसंपत्ति बिक्री से बचाव, या S4A/रिफाइनेंसिंग के जरिये नकद प्रवाह सुधारा जा सकता है।

Surendranagar जैसे जिलों में अदालतों का क्या रोल होता है?

गुजरात में NCLT अहमदाबाद बेंच का क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र है; स्थानीय मामलों की फाइलिंग और सुनवाई यहाँ होती है और RP नियुक्त किया जाता है।

डायरेक्टर और प्रमोटर्स के लिए क्या जोखिम होते हैं?

अगर योजना असफल हो या नियमों का उल्लंघन हो, तो क्रेडिटर्स के पक्ष से दायित्व बढ़ सकता है और निस्तारण में कानूनी परिणाम सामने आ सकते हैं।

कौन से दस्तावेज आवश्यक होंगे?

बैंक स्टेटमेंट, बैलेंस शीट्स, नकदी प्रवाह स्नैपशॉट, ऋण समझौते, संपत्ति इन्वेंटरी, कंपनी पंजीकरण, रिजॉल्यूशन प्लान आदि आम दस्तावेज होते हैं।

कौन सी प्रक्रियाएं सबसे जल्दी पूरी होती हैं?

छोटे MSMEs के लिए व्यक्तिगत insolvency प्रक्रियाओं और कुछ विशेष प्रावधानों के तहत तेजी से समाधान संभव हो सकता है; कॉर्पोरेट मामलों में CIRP सामान्यतः महीनों से वर्षों तक समय ले सकता है।

मैं Surendranagar से किस प्रकार एक वकील ढूंढ सकता हूँ?

IBC विशेषज्ञता वाले वकील ढूंढना चाहिए जो IBBI पंजीकृत Insolvency Professional/Advocate के साथ अनुभव رکھتے हों; स्थानीय गुजरात बार एसोसिएशन से संपर्क मददगार रहता है।

क्या ऑनलाइन फाइलिंग संभव है?

IBC से जुड़ी अधिकांश प्रक्रियाएं NCLT के समक्ष फाइलिंग और बाकी दस्तावेज़ी प्रकिया दफ्तर से होती है; कुछ केसों में ऑनलाइन फॉर्मेट और priorities उपलब्ध हो सकते हैं।

आपके केस के लिए शुरुआती कदम क्या होने चाहिए?

सबसे पहले एक अनुभवी पुनर्गठन अधिवक्ता से परामर्श लें; दस्तावेज़ एकत्र करें; फिर केस की सटीक प्रकृति के अनुसार CIRP, PIRP या SARFAESI का चयन करें।

5. अतिरिक्त संसाधन: [पुनर्गठन और दिवालियापन से संबंधित 3 विशिष्ट संगठनों की सूची]

  1. Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - नियमों, निर्देशन और पंजीकरण की आधिकारिक वेबसाइट. https://www.ibbi.gov.in
  2. National Company Law Tribunal (NCLT) - कॉर्पोरेट दिवालियापन मामलों के लिए निर्णायक अदालत. https://nclt.gov.in
  3. Reserve Bank of India (RBI) - distressed asset रिसोर्सेज, S4A और संरचना फ्रेमवर्क के बारे में मार्गदर्शन. https://www.rbi.org.in

6. अगले कदम: [पुनर्गठन और दिवालियापन वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया]

  1. अपने व्यवसाय या व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति का स्पष्ट आकलन करें और आवश्यक दस्तावेज़ बनाएं।
  2. Nearby Surendranagar जिले के IBBI पंजीकृत वकील/इनsolvency प्रोफेशनल की सूची बनाएं।
  3. कम-से-कम 2-3 विशेषज्ञों से प्रारम्भिक परामर्श बुक करें और उनके अनुभव पूछें।
  4. कौन सा कानून रास्ता उपयुक्त है (IBC CIRP, PIRP, SARFAESI आदि) यह स्पष्ट करें।
  5. प्रत्येक वकील से शुल्क संरचना और अपेक्षित समयरेखा पूछें।
  6. अपनी उपलब्ध संपत्तियों के रिकॉर्ड, ऋण समझौतों और बैंक बातचीत का रिकॉर्ड बनाएं।
  7. चयनित वकील के साथ मिलकर पुनर्गठन योजना/फाइलिंग की तैयारी शुरू करें।

नोट - सुरेंद्रनगर के निवासियों के लिए कानून प्रक्रियाएं जल-भूमि-धंधे के अनुसार भिन्न हो सकती हैं। स्थानीय अदालतों के क्षेत्राधिकार और बैंकिंग कहानी में परिवर्तन हो सकता है। कृपया किसी भी कदम से पहले एक स्थानीय अनुभवी वकील से स्पष्ट सलाह लें।

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अस्वीकरण:

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