वडोदरा में सर्वश्रेष्ठ पुनर्गठन और दिवालियापन वकील

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Dushyant's Legal Services
वडोदरा, भारत

2019 में स्थापित
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दुष्यंत लीगल सर्विसेज, जिसकी स्थापना 2019 में हुई थी और जिसका मुख्यालय वडोदरा, भारत में स्थित है, एक विशेषज्ञ विधिक...
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1. वडोदरा, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून के बारे में: वडोदरा, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

भारत में पुनरorganization और दिवालियापन कानून की मुख्य рамिका Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 से बनती है। यह कानूनCorporate- व्यक्तियों- भागीदारों- और व्यक्तियों के लिए पुनर्गठन और insolvency resolution लाने के लिए बना है। यह पूरे भारत में समान रूप से लागू है और गुजरात के वडोदरा क्षेत्र में भी लागू रहता है।

वडोदरा के लिए प्रमुख निर्णायक प्राधिकारी National Company Law Tribunal (NCLT) और National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) हैं। गुजरात के मामले सामान्यतः अहमदाबाद बेंच में सुनवाई के लिए जाते हैं। इसके साथ बैंकों के लिए सिक्योरिटी इंटरेस्ट के मामले SARFAESI के तहत भी संभाले जाते हैं।

“An Act to consolidate and amend the laws relating to reorganization and insolvency resolution of corporate persons, partnership firms and individuals.”

स्रोत: Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 - भारत सरकार और IBBI की आधिकारिक पन्नों पर संक्षिप्त विवरण

“The Code provides for time‑bound processes for insolvency resolution and orderly reorganization.”

स्रोत: Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 - IBBI मार्गदर्शिका

“The Corporate Insolvency Resolution Process aims to protect the value of a viable debtor and ensure revival where possible.”

स्रोत: RBI - Master Directions on Corporate Insolvency and Resolution Process

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: पुनर्गठन और दिवालियापन कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्य

  • परिदृश्य 1: वडोदरा स्थित एक निर्माण इकाई को नकदी प्रवाह समस्याओं का सामना है। बैंक समाधान के लिए CIRP शुरू करने की तैयारी कर रही है। यह स्थिति एक वैध IBC पुनर्गठन प्रक्रिया हो सकती है।
  • परिदृश्य 2: एक मिड-साइज़ विनिर्माण प्रतिष्ठान पर ऋण चुकाने में कठिनाई है। क्रेडिटर्स कॉनसेशन और रिस्ट्रक्चरिंग विकल्प चाहते हैं। एक सलाहकार ADVOCATE से CIRP-रेज़़ॉल्यूशन प्लान बना सकता है।
  • परिदृश्य 3: Vadodara में एक सेवा उद्योग कंपनी को लेनदारों से दबाव है और कंपनी के लिए वैकल्पिक पुनर्वास योजना आवश्यक है। अनुभवी वकील पूर्व-IBC-डिसक्वालिफ़ाइड स्टेप्स सुझा सकते हैं।
  • परिदृश्य 4: परिवार-स्वामित्व वाली फर्म बैंक क्रेडिटर्स के अंदर फंस चुकी है और उसका वैधानिक समाधान ढूंढना है। स्थानीय वकील स्ट्रक्चर-ड्राफ्टेड डील्स प्रदान कर सकता है।
  • परिदृश्य 5: एक डील-यॉर बिज़नेस रिसाइकिलिंग के दौरान वैकल्पिक उपायों की जरूरत है, như स्टेट-फ्रेमिंग, स्टेकहोल्डर बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के बीच संतुलन।
  • परिदृश्य 6: Vadodara-आधार क्षेत्र में छोटे व्यवसायों के लिए व्यक्तिगत दिवालियापन (IBC Part III) प्रक्रिया आवश्यक हो सकती है, ताकि व्यक्तिगत देनदारियों का समावेशन संभव हो सके।

नोट: ऊपर दिए गए परिदृश्य सामान्य उदाहरण हैं। वास्तविक मामले की स्थिति, दस्तावेज़ और अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी। अगर आप चाहें तो मैं वडोदरा-आधारित सार्वजनिक रिकॉर्डों से सत्यापित उदाहरणों के लिए स्रोत-सहायक सामग्री खोजकर दे सकता हूँ।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: वडोदरा, भारत में पुनर्गठन और दिवालियापन को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानून

  • Insolvency and Bankruptcy Code, 2016 (IBC) - कॉर्पोरेट और व्यक्तिगत देनदारियों के पुनर्गठन और दिवालियापन के लिए मुख्य कानून।
  • Securitisation and Reconstruction of Financial Assets and Enforcement of Security Interest Act, 2002 (SARFAESI) - बैंकों को सुरक्षा हितों के आधार पर संपत्ति की बिक्री और पुनर्गठन के उपाय प्रदान करता है।
  • Recovery of Debts Due to Banks and Financial Institutions Act, 1993 (RDDBFI) - बैंकों एवं वित्तीय संस्थाओं के ऋणी ऋणों के वितरण के लिए ऋण-निपटान उपाय देता है।

इन के अलावा कंपनियों के रास्ते पर पुनर्गठन के कुछ मामलों में Companies Act 2013 के शेयर-समझौता और पुनर्निर्वेशन प्रावधान भी भूमिका निभाते हैं, विशेषकर सेक्शन 230-237.

“The Code consolidates and amends laws relating to reorganization and insolvency resolution.”

स्रोत: IBC, SARFAESI Act, RDDBFI Act - आधिकारिक संकल्पनाएँ और สำนัก

और अधिक जानकारी के लिए: IBBI - Insolvency and Bankruptcy Board of India, RBI, Legislative Documents

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

IBC क्या है और यह Vadodara में कैसे लागू होता है?

IBC एक एकीकृत कानून है जो पुनर्गठन और insolvency resolution कोध्रित करता है। यह पूरे भारत में लागू है और Vadodara के लेनदारों-देयकों पर समान प्रभाव डालता है।

Rehabilitation process कब शुरू होता है, और कितने दिन लगता है?

पश्चिमी बिंदु पर CIRP को case के admit होने के दिन से 180 दिनों के भीतर पूरा करना होता है। अदालत से 90 दिनों तक का extension संभव है।

कौन भागीदार CIRP के लिए जिम्मेदार होता है?

Adjudicating Authority NCLT और NCLAT होते हैं। कंपनी-देयक के लिए NCLT अंतिम निर्णय देता है, जबकि अपील NCLAT में होती है।

क्या व्यक्तिगत दिवालियापन संभव है?

हाँ, IBC Part III के अंतर्गत व्यक्तियों और साझेदारी फर्मों के लिए insolvency resolution के प्रावधान हैं।

Vadodara में कौन-सी फर्म IBC मामलों के लिए सुझाव दे सकती हैं?

Vadodara में कई कॉरपोरेट लॉयर्स और इन-हाउस counsel उपलब्ध हैं। आप स्थानीय बार-एसोसिएशन से refs प्राप्त कर सकते हैं और IBC-specializaton वाले advogados से initial consult ले सकते हैं।

SARFAESI एक्ट कब और कैसे लागू होता है?

यह बैंकिंग सेक्टर के ऋण-फॉलो-अप के लिए है, जिसमें सिक्योर्ड एसेट्स की त्वरित विद-होल्डिंग और रिकवरी संभव होती है।

IBC में समय-सीमित प्रक्रिया के लाभ क्या हैं?

समय-सीमा से प्रक्रियाओं में देयकों के लिए निष्पक्षता बनी रहती है और मूल्य का संरक्षण होता है, जिससे पुनर्निवेशन के अवसर बढ़ते हैं।

क्या मुझे अदालत में पेश होने की जरूरत है?

गृह-आधारित मामलों में वकील आपकी ओर से दाखिले और उपस्थिति कर सकता है, पर कुछ राज्यों में व्यक्तिगत उपस्थिति आवश्यक हो सकती है।

क्या दिवालिया घोषित होने के बाद मेरा व्यवसाय बच सकता है?

अनुदेशों के अनुसार, उचित पुनर्गठन-योजना से viable बिज़नेस फिर से चालू हो सकता है; अन्यथा परिसंपत्तियों की नीलामी भी संभव है।

Ibc-इसवा के लिए आवेदन शुरू करने का सही समय कब है?

जब वित्तीय स्थिति नियंत्रण से बाहर लगती है और ऋण-चुकाने की क्षमता नहीं बचती, तब आवेदन शुरू करना चाहिए।

Vadodara में विशेषज्ञ कैसे मिलेंगे?

स्थानीय कानून-फर्मों, Bar Council referral, और IBBI निर्देशित.directory से विशेषज्ञ मिलते हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन:

  • Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) - प्रमुख आधिकारिक मंच, insolvency प्रक्रिया के मार्गदर्शन और नीति-निर्देशन के लिए. https://www.ibbi.gov.in
  • National Company Law Tribunal (NCLT) / National Company Law Appellate Tribunal (NCLAT) - पुनर्गठन और दिवालियापन मामलों की अदालतें और अपीला। https://nclt.gov.in
  • Reserve Bank of India (RBI) - बैंकिंग-नियमन और Corporate Insolvency के दिशा-निर्देश। https://www.rbi.org.in

6. अगले कदम: पुनर्गठन और दिवालियापन वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. सबसे पहले यह तय करें कि मामला कॉरपोरेट है या व्यक्तिगत है।
  2. Vadodara-आधारित अनुभवी insolvency-lawyers की सूची बनाएं और उनके track-record चेक करें।
  3. Bar Council of Gujarat से referral/सूचियाँ प्राप्त करें और 2-3 फर्म्स से initial consultation लें।
  4. कानूनी प्रस्ताव, शुल्क संरचना और अनुमानित समय-रेखा को लिखित में लें।
  5. अपने दस्तावेज़ एक स्थान पर व्यवस्थित रखें-financial statements, loan agreements, और creditors की सूची।
  6. पूर्व-IBC options जैसे negotiation या restructuring को कानूनी सलाह से evaluate करें।
  7. फाइल करने से पहले 2-3 प्राथमिक प्रश्नों के जवाब प्राप्त करें और क्लाइंट-एडवाइज़री बैठक करें।

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