भोपाल में सर्वश्रेष्ठ समलैंगिक एवं एलजीबीटी वकील

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2021 में स्थापित
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लैक्सटेम्पल एलएलपी एक भारत आधारित लॉ फर्म है जिसका नेतृत्व अधिवक्ता सचिन नायक करते हैं, और यह भोपाल कार्यालय से...
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1. भोपाल, भारत में समलैंगिक एवं एलजीबीटी कानून का संक्षिप्त अवलोकन

भारत में समलैंगिक एवं एलजीबीटी अधिकार मुख्यतः केंद्रीय कानूनों से संचालित ہوتے हैं. भोपाल मध्य प्रदेश में इन्हें लागू करवाने के लिए राष्ट्रीय कानूनों की मौजूदा धारा लागू मिलती है. इस क्षेत्र में सबसे प्रमुख परिवर्तन 2018 में समलैंगिक संबंधों को निजी जीवन तक सीमित रखने की दृष्टी से मान्य किया गया था.

टेक्निकल प्रावधान के अनुसार ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार सुरक्षित हैं और 2019 में.transgender Persons Protection of Rights Act लागू हुआ. साथ ही राष्ट्रीय कानूनों के साथ संविधान के मौलिक अधिकार भी इन अधिकारों की सुरक्षा करते हैं. नीचे के उद्धरण इन अधिकारों की आधिकारिक भूमिका को स्पष्ट करते हैं.

“Transgender persons are a third gender.”
NALSA v Union of India (2014)
“No person shall be deprived of life or personal liberty except according to procedure established by law.”
Constitution of India, Article 21
“A transgender person shall have the right to determine his or her gender identity.”
Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019

भोपाल के निवासीों के लिए मुख्य बात यह है कि अभी भी समान-लैंगिक विवाह की पूर्ण वैधानिक मान्यता nationwide नहीं है. फिर भी निजी जीवन, पहचान और शिक्षा-स्वास्थ्य के अधिकार मजबूत कानूनी आधारों से संरक्षित हैं. स्थानीय अदालतों और पुलिस के साथ सतर्क, सावधान और उचित वकील की सलाह से सुरक्षित समाधान संभव है.

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

भोपाल, मध्य प्रदेश में नीचे दिए गए हालात में कानूनी सहायता उपयोगी होती है. इन मामलों में वकील एक अहम भूमिका निभाते हैं.

  1. समलैंगिक संयुक्‍त रिश्ते में असुरक्षा या उत्पीड़न की स्थिति में सुरक्षा प्राप्त करना. पלי-प्रशासनिक सुरक्षा और दखल से जुड़े कदम उठाने जरूरी हो सकते हैं.
  2. अपने पहचान पत्तों में लिंग पहचान बदलने के लिए नाम-गणना और लिंग संकेतों का फॉर्मल दर्जा प्राप्त करना. जिला-स्तर पर आवेदन, नोटरी और गार्जियंस-वार्ड्स कानूनों का पालन आवश्यक रहता है.
  3. ट्रांसजेंडर व्यक्ति के रूप में राज्य द्वारा पहचान दिलाने और लाभ उठाने के लिए कानूनी मान्यता की जरूरत. यह रोजगार, शैक्षणिक इकाई, अस्पताल आदि में मदद करता है.
  4. एक ही लिंग वाले دو बच्चों वाले दंपत्ति के लिए सामाजिक-आर्थिक संरक्षण और पालन-पोषण अधिकारों के मामले. कानूनन समाधान के लिए वकील मार्गदर्शन देता है.
  5. नियोक्ता या भर्तियों में भेदभाव के खिलाफ कानूनी कार्रवाई या मुआवजे की मांग. अनुचित व्यवहार के विरुद्ध सही प्रक्रिया अपनानी पड़ती है.
  6. अंतर्मुखी रिश्तों के मामलों में अदालत से सुरक्षित आचार संहिता बनवाना. अदालत-पत्रों, गवाही और प्रमाण चाहिए होते हैं.

नोट: भोपाल में वास्तविक केसों के लिए एक स्थानीय अधिवक्ता से मिलने पर सही मार्गदर्शन मिलेगा. पहले से तैयार दस्तावेज रखें और स्पष्ट प्रश्न बनाएं.

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 377 - सार्वजनिक विरोध या निजी समान-लैंगिक क्रियाओं पर अदालतों के निर्णय से प्रभावित हुआ है. 2018 में उच्चतम न्यायालय ने इसे निजी विवेक के आधार पर लागू करने की दृष्टि बदली. औपचारिक दस्तावेज अभी भी कानून में हैं पर लागू नहीं है.
  • Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019 - transgender व्यक्तियों के लिए पहचान, सुरक्षा, रोजगार, शिक्षा और कल्याण के अधिकार निर्धारित करता है.
    “A transgender person shall have the right to determine his or her gender identity.”
    यह आधिकारिक अधिकार कानून है.
  • संविधान के मौलिक अधिकार (आर्टिकल 14, 21 आदि) - समानता, जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता, और अभिव्यक्ति की स्वछता जैसी गारंटी देता है. ये अधिकार भोपाल-निवासियों के लिए प्राथमिक कानून हैं.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या समलैंगिक विवाह वैध है?

न nationally nationwide, समलैंगिक विवाह मान्यता प्राप्त नहीं है. कुछ मामलों में अदालतें व्यक्तिगत मामलों में निर्णय दे सकती हैं. वर्तमान स्थिति में विवाह कानून में बदलाव पर कई याचिकाएं लम्बित हैं.

क्या समलैंगिक व्यक्ति निजी जीवन में सुरक्षा पाते हैं?

हाँ. संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और निजी स्वतंत्रता का अधिकार है. Navtej Johar निर्णय के बाद निजी जीवन में समानता की बहाल स्थिति बनी है.

क्या ट्रांसजेंडर पहचान के आधार पर सरकारी दस्तावेज बदले जा सकते हैं?

हाँ. Transgender Persons Act 2019 के अनुसार self-identified gender को मान्यता मिल सकती है. दस्तावेज जैसे आधार-पट्ट, पैन कार्ड, पासपोर्ट आदि में परिवर्तन संभव है.

कार्यस्थल पर LGBTQ लोगों के साथ भेदभाव कैसे रोका जा सकता है?

कानून भेदभाव पर रोक लगाते हैं. कंपनियां समान अवसर नीति लागू करें और विवाद होने पर डॉक्यूमेंटेड शिकायत दर्ज करें. आवश्यक हो तो कानूनी कदम उठाएं.

क्या एक ही लैंगिक दंपत्ति बच्चों को गोद ले सकते हैं?

गोद लेने के मामले में स्पष्ट राष्ट्रीय कानून अभी तक समकक्ष अधिकार नहीं देता. चयनित अदालतों के निर्णय और Guardians and Wards Act जैसी प्रक्रियाएं लागू हो सकती हैं. स्थिति न्यायालय के निर्णय पर निर्भर है.

कैसे मैं नाम और लिंग परिवर्तन के लिए आवेदन कर सकता हूँ?

सबसे पहले स्थानीय अदालत में नाम अधिकार-अधिबोध पेश करें. पहचान पत्र, स्कूल/कॉलेज, राशन-योजना आदि के लिए आवश्यक सहयोगी दस्तावेज बनवाएं. वकील मार्गदर्शन से चरणबद्ध करें.

अगर किसी ने LGBTQ व्यक्ति के विरुद्ध अपराध किया तो क्या करना चाहिए?

सबूत सुरक्षित रखें और नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं. यदि आवश्यक हो तो मानवाधिकार आयोग या उच्च न्यायालय से कानूनी संरक्षण लें. मेडिकल और משפטी सहायता लें.

मेडिकल के बारे में क्या स्थिति है?

किसी भी नीतिगत बाध्यता के बिना आवश्यक उपचार उपलब्ध होना चाहिए. ट्रांसजेंडर रोगियों के लिए क्लिनिकल गाइडेंस और पर्सन-केयर विकल्प उपलब्ध होते हैं.

क्या लोग NGOs से कानूनी सहायता प्राप्त कर सकते हैं?

हाँ, कई NGOs मुफ्त या कम खर्च पर कानूनी सहायता प्रदान करते हैं. स्थानीय LGBTQ कम्युनिटी समूह भी सही वकील मिलाने में मदद करते हैं.

भोपाल में कानूनी सहायता कहां मिल सकती है?

भोपाल कोर्ट-रूचि, जिला विधिक सहायता प्राधिकरण और सामाजिक-कल्याण कार्यक्रमों के जरिए सहायता मिलती है. पहले से अपॉइंटमेंट लेकर मिलना बेहतर है.

समलैंगिक बच्चों के सुरक्षा-कवरेज के बारे में क्या कहा गया है?

कानून में निजता, सुरक्षा और शिक्षा के अधिकार दिए गए हैं. बच्चों की सुरक्षा के लिए स्कूल, अस्पताल और अदालतों में संवैधानिक अधिकार लागू होते हैं.

क्या मैं अपने दस्तावेजों में बदलाव के लिए Aadhaar या पासपोर्ट में परिवर्तन कर सकता हूँ?

हाँ, पात्र दस्तावेजों के अनुसार पहचान बदलने की प्रक्रिया संभव है.uaa Aadhaar और पासपोर्ट कार्यालय के निर्देशों का पालन करें.

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Humsafar Trust - राष्ट्रीय LGBTQ अधिकार संगठन. वेबसाइट: www.humsafar.org
  • Naz Foundation - दिल्ली-आधारित राष्ट्रिय LGBT संगठन. वेबसाइट: www.nazindia.org
  • Sangama - कर्नाटक-आधारित LGBT अधिकार संगठन, सेवाएं और मार्गदर्शन. वेबसाइट: www.sangama.org

6. अगले कदम

  1. अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से सोचें; आवश्यक दस्तावेज़ इकट्ठा करें.
  2. बीच-में उपलब्ध राष्ट्रीय कानूनों की जानकारी लें.
  3. भोपाल में अनुभवी एलजीबीटी वकीل या कानूनी एडोवेट ढूंढें.
  4. पहला नि:शुल्क परामर्श लें और प्रश्न सूची बनाएं.
  5. अगर कठिनाई हो तो NALSA मार्गदर्शक निर्देशों के अनुसार सहायता लें.
  6. दस्तावेज़ीकरण के साथ कानूनी कदम उठाने की योजना बनाएं.
  7. गोपनीयता और सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दें, खासकर निजी जीवन मामलों में.

महत्वपूर्ण नोट्स

  • भरोसे के साथ स्थानीय advokat चुनें और सभी फीस समझौते पहले लिखित में लें.
  • कानून-सम्बन्धी कोई भी कदम उठाने से पहले नवीनतम आधिकारिक कानूनी सामग्री जाँचें.
  • यदि संभव हो तो स्थानीय LGBT समुदाय समूहों से संपर्क करें; वे मार्गदर्शन और समर्थ दे सकते हैं.

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