गुवाहाटी में सर्वश्रेष्ठ समलैंगिक एवं एलजीबीटी वकील

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अधिवक्ता खुशबू वर्मा गुवाहाटी, असम की प्रतिष्ठित विधिक पेशेवर हैं, जो 2013 से गुवाहाटी उच्च न्यायालय में अभ्यास के...
Firuz Khan Law Firm
गुवाहाटी, भारत

2013 में स्थापित
English
फिरोज खान लॉ फर्म, 2013 में स्थापित, गुवाहाटी, असम में आधारित एक प्रतिष्ठित विधिक अभ्यास है जो भारत के पूर्वोत्तर...

2013 में स्थापित
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अधिवक्ता फिरोज़ खान को गुवाहाटी, भारत में आपराधिक कानून, दीवानी विवाद, वैवाहिक मुद्दे और पारिवारिक कानून सहित...
Talukdar Foxwheel Law

Talukdar Foxwheel Law

15 minutes मुफ़्त परामर्श
गुवाहाटी, भारत

1990 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Assamese
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तलुकदार फॉक्सव्हील लॉ, गुवाहाटी, असम में आधारित, क्षेत्र की विधिक इतिहास में गहरी जड़ों वाला एक प्रतिष्ठित विधिक...
M & L Legal Law Chamber (Advocate)
गुवाहाटी, भारत

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गुवाहाटी, असम में आधारित एम एंड एल लीगल लॉ चेम्बर में गुवाहाटी उच्च न्यायालय और इसके अधीनस्थ न्यायालयों में...
जैसा कि देखा गया

1. गुवाहाटी, भारत में समलैंगिक एवं एलजीबीटी कानून के बारे में: गुवाहाटी, भारत में समलैंगैगौन कानून का संक्षिप्त अवलोकन

गुवाहाटी, असम में एलजीबीटी अधिकार राष्ट्रीय कानूनों के दायरे में आते हैं। सामान्य रूप से केंद्र सरकार द्वारा संचालित कानून सभी राज्यों, including गुवाहाटी, पर लागू होते हैं। प्रमुख अधिकार संविधान के अधिकारों के साथ संरक्षित रहते हैं।

भारत के सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने समलैंगिकता के संदिग्ध दायरे में निजी जीवन के अधिकार को मान्यता दी है। कानून-निर्माण के क्षेत्र में असम-राज्य के निवासियों के लिए भी यह प्रवर्तित नियम है कि व्यक्तिगत और सामाजिक अभिव्यक्ति के अधिकारों की सुरक्षा हो।

“The State shall not deny to any person equality before the law or the equal protection of the laws within the territory of India.”
- संविधान के अनुच्छेद 14

“No person shall be deprived of life or personal liberty except according to due process of law.”
- संविधान के अनुच्छेद 21

“The Supreme Court in Navtej Singh Johar v Union of India held that consensual sexual acts between adults cannot be criminalized under Section 377 IPC.”
- Navtej Singh Johar बनाम Union of India (2018)

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: समलैंगिक एवं एलजीबीटी कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची

  • उदाहरण 1: गुवाहाटी में निजी जीवन के तहत निजी संबंधों के दौरान सुरक्षा-सम्बन्धी जोखिम या पुलिस-थराने की स्थिति आती हो। व्यक्तिगत liberty और privacy की रक्षा के लिए कानूनिक सलाह आवश्यक हो सकती है।
  • उदाहरण 2: transgender पहचान के आधार पर पहचान-प्रमाण पत्र, आधार या पासपोर्ट में marker बदलना या नाम परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू करनी हो। असम में DMV/SDM कार्यालयों के साथ संवाद जरूरी हो सकता है।
  • उदाहरण 3: कार्यस्थल पर भेदभाव, harassment या discrimination की स्थिति में निवारण के लिए रोजगार-न्याय की सहायता चाहिए। Guwahati के कार्यालयों और कंपनियों में कानूनन मार्गदर्शन महत्त्वपूर्ण है।
  • उदाहरण 4: परिवार में एलजीबीटी सदस्य की सुरक्षा, सुरक्षा-नियोजन या कानूनी सहायता की आवश्यकता हो। माता-पिता, रिश्तेदार और स्कूल/कॉलेज-समुदाय के बीच मार्गदर्शन चाहिए।
  • उदाहरण 5: असम में same-sex विवाह के कानूनी स्थिति को लेकर जानकारी चाहिए। राष्ट्रीय कानून में वर्तमान स्थिति को समझना और वैकल्पिक विकल्प (ज्यों- Special Marriage Act) के बारे में सलाह आवश्यक हो सकती है।
  • उदाहरण 6: चिकित्सीय सेवाओं, मानसिक स्वास्थ्य समर्थन या स्वास्थ्य बीमा से जुड़ा कानूनी प्रश्न हो। लिंग-स्वरूपण या उपचार से जुड़ी प्रक्रियाओं के प्रति अधिकार स्पष्ट हो सकते हैं।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: गुवाहाटी, भारत में समलैंगिक एवं एलजीबीटी को नियंत्रित करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें

  • भारतीय दण्ड संहिता धारा 377 (IBC 377) के संबंध में प्रकृति-सम्बन्धी स्थिति: 2018 के Navtej सिंह Johar निर्णय के बाद, समलैंगिकता के निजी-जीवन से जुड़े कुछ हिस्से कानून-निम्न हैं। Guideline के अनुसार संदिग्ध क्रियाओं की वैधानिकता स्पष्ट हो गई है।
  • ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार संरक्षक अधिनियम 2019: ट्रांसजेंडर नागरिकों के लिए पहचान, रोजगार-स्वतंत्रता, शिक्षा और अन्य मौलिक अधिकारों के लिए संरक्षित प्रावधान देता है; कुछ आलोचनाओं के साथ भी यह अगला कदम है।
  • अनुच्छेद 14, 21 और 19(1)(a) के संरक्षण (भारतीय संविधान के मौलिक अधिकार): Guwahati-आवासियों के लिए समानता, व्यक्तिगत liberty और स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार मजबूत आधार बनाते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या गुवाहाटी में समलैंगिक विवाह संभव है?

भारतीय कानून में अभी तक समलैंगिक विवाह का राष्ट्रीय रूप से मान्यता नहीं है। कुछ वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध हैं, जैसे स्पेशल मैरिज एक्ट से संबंध बनाने की कोशिशें, पर संयुक्त-जीवन के विवाह अभी मान्यता प्राप्त नहीं है।

क्या ट्रांसजेंडर पहचान के लिए पहचान-पत्र बदलवाना संभव है?

हाँ, ट्रांसजेंडर पहचान के आधार पर पंजीकरण, नाम और जेंडर मार्कर परिवर्तन संभव हैं। District Magistrate के माध्यम से आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है और प्रमाण-पत्र जमा करने होते हैं।

क्या भाजपा या पुलिस द्वारा एलजीबीटी व्यक्तियों पर harassment हो तो क्या करें?

समलैंगिक और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार सुरक्षित हैं; आरोपी के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। स्थानीय पुलिस-स्टेशन और महिलाओं/युवा मामलों के सेल से सहायता मिल सकती है।

क्या Section 377 अब पूरी तरह खत्म हो गया है?

कृपया ध्यान दें कि 2018 के फैसले से सहमत वयस्कों के निजी संबंधों को criminalize नहीं किया गया है। अन्य गतिविधियाँ अभी भी कानून द्वारा नियंत्रित हो सकती हैं, इसलिए कानूनी सलाह जरूरी है।

असहाय परिवार में एलजीबीटी सदस्य के मान-सम्मान के लिए क्या कदम उठें?

कानूनी सहारा के साथ सामाजिक-समर्थन और शिक्षा-समावेशन पर कार्य किया जाना चाहिए। निजता और सुरक्षा को प्राथमिकता दें, ताकि परिवारिक तनाव कम हो सके।

क्या Guwahati में एलजीबीटी व्यक्ति रोजगार-स्वतंत्रता रखते हैं?

संवैधानिक अधिकार के तहत समान अवसर की गारंटी है, पर व्यवहार में भेदभाव हो सकता है। वकील द्वारा कॉरपोरैट-रेटेड कॉन्ट्रैक्ट और अनुशासन-नीतियों की समीक्षा मदद करती है।

क्या बच्चों की गोद लेने के लिए एलजीबीटी जोड़े सक्षम हैं?

भारत में गोद लेने के नियम स्वतंत्र-व्यक्ति के अधिकार पर निर्भर हैं। संयुक्त-जोड़े द्वारा गोद लेना अभी सामान्य नहीं है; व्यक्तिगत मामलों में CARA के दिशानिर्देश देखे जाते हैं।

क्या शिक्षा संस्थानों में एलजीबीटी छात्रों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित है?

हां, मौलिक अधिकारों के अनुसार समान सुरक्षा मिलनी चाहिए। स्थानीय स्कूल-प्रशासन और कॉलेज-समिति से व्यवहार सुधार के लिए विधिक मार्गदर्शन उपलब्ध हो सकता है।

क्या पासपोर्ट, आधार आदि में लिंग संकेत बदलना संभव है?

आमतौर पर संभव है, पर प्रक्रिया में दस्तावेजी सत्यापन और मेडिकल प्रमाणों जैसी आवश्यकताएं हो सकती हैं।

क्या स्वास्थ्य सेवाओं में एलजीबीटी व्यक्तियों के लिए विशेष अधिकार हैं?

स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच का अधिकार है; इलाज और मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए कानूनी मार्गदर्शन सहायक हो सकता है।

क्या असामाजिक गतिविधियों के कारण एलजीबीटी व्यक्ति अपराधी ठहर सकते हैं?

कानून-निर्माण के अनुसार हर स्थिति का आकलन किया जाएगा। निजी जीवन के अधिकारों की सुरक्षा के लिए अदालत में तर्क देना पड़ सकता है।

क्या एलजीबीटी समुदाय के लिए कानूनी नोटिस देना या शिकायत दर्ज कराना संभव है?

हाँ, अधिकारों के संरक्षण और भेदभाव-प्रतिबन्ध की शिकायत के लिए कानूनी नोटिसें और अदालत-याचिका दायर की जा सकती है।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Humsafar Trust - राष्ट्रीय एलजीबीटी अधिकार और कानूनी सहायता समूह
  • Sangama - लिंग-समावेशी अधिकार और कानूनी सहायता
  • National Legal Services Authority (NALSA) - वैधानिक सहायता और मार्गदर्शन

6. अगले कदम: समलैंगिक एवं एलजीबीटी वकील खोजने के लिए 5-7 चरणीय प्रक्रिया

  1. अपने उद्देश्य स्पष्ट करें: निजी जीवन सुरक्षा, पहचान-प्रमाण पत्र, शिक्षा या रोजगार से जुड़ा मामला?
  2. गुवाहाटी में एलजीबीटी-फ्रेंडली कानून-वकील खोजें: LGBT-फ्रेंडली लॉ फर्म या नागरिक अधिकार संगठन से संपर्क करें.
  3. कानूनी प्राथमिकताएं पूछें: किस अदालत-न्यायिक प्रक्रिया की जरूरत होगी, क्या छूट/पहल संभव है?
  4. प्राथमिक परामर्श नियुक्त करें: समस्या-विवरण, उपलब्ध दस्तावेज और तारीखें स्पष्ट रखें.
  5. दस्तावेज़ तैयार रखें: पहचान पत्र, मेडिकल/सरकारी प्रमाण, अन्य आवश्यक कागजात संलग्न करें.
  6. द्वि-धर्मी-योजनाएं बनाएं: मानसिक-स्वास्थ्य और सुरक्षा-नक़्शे के साथ एक कानूनी-रणनीति बनाएं.
  7. समुदाय-सहायता और सरकारी योजनाओं पर विचार करें: स्थानीय एनजीओ और नालसा की सहायता लें.

उद्धृत आधिकारिक स्रोतों के बारे में कुछ संदर्भ नीचे दिए गए हैं:

“The State shall not deny to any person equality before the law or the equal protection of the laws within the territory of India.”

यह अनुच्छेद 14 का मूल संदेश है - संविधान (legislative.gov.in) से

“No person shall be deprived of life or personal liberty except according to due process of law.”

यह अनुच्छेद 21 का सार है - संविधान (legislative.gov.in) से

“The Supreme Court in Navtej Singh Johar v Union of India held that consensual sexual acts between adults cannot be criminalized under Section 377 IPC.”

Navtej Singh Johar v Union of India (2018) - सुप्रीम कोर्ट के निर्णय

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