नया दिल्ली में सर्वश्रेष्ठ समलैंगिक एवं एलजीबीटी वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड

Niyamam Law Offices

Niyamam Law Offices

15 minutes मुफ़्त परामर्श
नया दिल्ली, भारत

2020 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Niyamam Law Offices (www.niyamamlawoffices.com), जिसका स्थापना वकील अंकित कुमार और वकील अंकित भारद्वाज ने की थी, दिल्ली में आधारित एक पूर्ण-सेवा...
Siddharth Jain & Co
नया दिल्ली, भारत

2015 में स्थापित
English
सिद्धार्थ जैन एंड को, भारत स्थित एक विशिष्ट विधिक फ़र्म, व्यापक अभ्यास क्षेत्रों में समग्र विधिक सेवाएँ प्रदान...
SJG & Associates
नया दिल्ली, भारत

2015 में स्थापित
English
Established in 2015, SJG & Associates is a premier full-service law firm based in New Delhi with a PAN India footprint, delivering professional and results-driven legal services to individuals, startups and corporates. The firm is known for its expertise across family law, corporate and commercial...
KG Law Offices
नया दिल्ली, भारत

2015 में स्थापित
English
केजी लॉ ऑफ़िसेज़ (KGLO), जिसका नेतृत्व अधिवक्ता कुणाल गोसाईं करते हैं, नई दिल्ली, भारत में स्थित एक प्रतिष्ठित बुटीक...
Lawgical Associates
नया दिल्ली, भारत

2018 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
English
Hindi
Lawgical Associates एक पूर्ण-सेवा विधिक फर्म है जो “Guiding its Clients Lawfully” में विश्वास रखती है। फर्म के सभी भागीदारों के पास उनके...
Leges Juris Associates (Law Firm)
नया दिल्ली, भारत

English
Leges Juris Associates (Law Firm) भारत में एक प्रतिष्ठित विधिक अभ्यास है, जो विधि के विभिन्न क्षेत्रों में व्यापक विशेषज्ञता के लिए...
जैसा कि देखा गया

1- नया दिल्ली, भारत में समलैंगिक एवं एलजीबीटी कानून का संक्षिप्त अवलोकन

नया दिल्ली, भारत में समलैंगिक और एलजीबीटी अधिकार राष्ट्रीय कानून से नियंत्रित होते हैं। 2018 के Navtej Singh Johar बनाम Union of India निर्णय ने निजी जीवन की सुरक्षा और संबन्धों की महत्ता माननी शुरू की। दिल्ली में यह निर्णय IPC 377 के दायरे को सीमित करता है और निजी सहमति वाले वयस्क संबंधों को संरक्षा देता है।

ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार 2014 के NALSA निर्णय से मजबूत हुए और स्वयं पहचान के अधिकार को मान्यता मिली। दिल्ली में दस्तावेज, स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार-स्वरूप के अवसर इन अधिकारों से प्रभावित होते हैं।

संविधान के प्रावधान भी एलजीबीटी समुदाय को सुरक्षा देते हैं। अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत समानता, स्वतंत्रता और जीवन-गरिमा का अधिकार लागू रहता है। दिल्ली में अदालतें इन मौलिक अधिकारों को पुख्ता करती हैं।

वर्तमान में नया दिल्ली में विवाह और दत्तक अधिकार जैसे क्षेत्र कुछ हद तक स्पष्ट हैं, पर कानूनन समान-लिंग विवाह अभी मान्य नहीं है। फिर भी निजी जीवन की स्वायत्तता और गरिमा पर अधिकार कायम रहते हैं।

स्रोत उद्धरण 1: Transgender persons have the right to self-identified gender. Source: National Legal Services Authority (NALSA), 2014.
स्रोत उद्धरण 2: The State shall not deny to any person equality before the law or the equal protection of the laws. Source: Constitution of India, Article 14.
स्रोत उद्धरण 3: Love is love is a protected private life of consenting adults. Source: Navtej Singh Johar v Union of India, 2018.

आधिकारिक स्रोतों के लिंक के अनुसार आप अधिक जानकारी देख सकते हैं: संविधान के प्रावधान, NALSA, Supreme Court of India.

2- आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • दिल्ली में पुलिस-नियमन के दौरान अभिव्यक्ति या निजी जीवन की सुरक्षा- निजी सहयोगी संबंधों पर दबाव या अनुचित पहचान से जुड़ा मामला हो सकता है।
  • कार्यस्थल पर भेदभाव या उत्पीड़न- समान अधिकारों के उल्लंघन पर कानून-परामर्श और शिकायत प्रक्रिया जरूरी हो सकती है।
  • डॉक्टर और अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुँच- गलत-स्वास्थ्य उपचार या भेदभाव के विरुद्ध कानूनी सहायता जरूरी हो सकती है।
  • दस्तावेज़ पर लिंग पहचान या नाम परिवर्तन- दस्तावेज़ में पहचान-संरचना बदले बिना अधिकार सीमित हो सकते हैं।
  • घरेलू मामलों में संरक्षकता या वंश-धारणा के मुद्दे- पार्टनरशिप, बच्चे के अधिकार और संरक्षकता के विवाद सामने आ सकते हैं।
  • संयुक्त-ग्रहण रिश्तों की वैधता और विवाह-आकांक्षा- अभी भी कानूनन समलैंगिक विवाह की मान्यता स्पष्ट नहीं है, फिर भी कानूनी रास्ते समझना जरूरी है।

ऊपर बताए गए मामलों में एक अनुभवी वकील आपकी स्थिति के अनुसार उचित कानूनी रणनीति बनाकर देता है। आप दिल्ली के आरटीआई-आधारित कानून, अदालत-प्रक्रिया और प्रकिया-सम्बन्धी सहायता भी प्राप्त कर सकते हैं।

3- स्थानीय कानून अवलोकन

  • Indian Penal Code (IPC) §377- संविदात्मक वयस्क संबंधों के निजी जीवन की सुरक्षा को केंद्र बनाते हुए सीमित रूप में लागू है।
  • Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019- ट्रांसजेंडर लोगों के अधिकारों की सुरक्षा और माध्यमिक संस्थाओं की जिम्मेदारियाँ तय करता है।
  • संविधान के प्रावधान- अनुच्छेद 14, 19 और 21 के तहत समानता, स्वतंत्रता, गरिमा और व्यक्तिगत जीवन की सुरक्षा की गारंटी मिलती है।

नया दिल्ली के संदर्भ में DSLSA और दिल्ली पुलिस द्वारा समुचित दिशा-निर्देश लागू होते हैं। अधिकृत जानकारी के लिए निम्न लिंक देखें: संविधान, NALSA, Supreme Court of India.

4- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या दिल्ली में समलैंगिक रिश्ते कानूनी हैं?

हाँ, निजी और सहमति से बने रिश्ते कानूनी रूप से मान्य माने जाते हैं। 2018 के Navtej Singh Johar निर्णय ने निजी जीवन की सुरक्षा स्पष्ट की है।

क्या मैं अपने लिंग पहचान वाले दस्तावेज़ बदल सकता/सकती हूँ?

हाँ, ट्रांसजेंडर या पहचान के साथ जीवन-बदलाव के लिए दस्तावेज़ में पहचान-संरचना बदलना संभव है। NALSA निर्णय ने यह अधिकार व्याख्यायित किया है।

क्या अभी दिल्ली में समलैंगिक विवाह संभव है?

वर्तमान में समलैंगिक विवाह भारतीय कानून के अनुसार मान्य नहीं है। अदालतों ने इस विषय पर सक्रिय बहस जारी रखी है।

हमारा बच्चा होने पर संरक्षकता के अधिकार कैसे मिलेंगे?

संरक्षकता के मुद्दे कानून-उल्लेखित प्रावधानों पर निर्भर करते हैं। अविभाज्य संरक्षकता के लिए अलग से कानूनी मार्गदर्शन चाहिए होता है।

क्या LGBTQ विद्यार्थी स्कूल में सुरक्षित रहते हैं?

स्कूलों में भेदभाव-निरोध के अधिकार मौलिक हैं। दिल्ली में शिक्षा-नीति और मानव-धर्म सुरक्षा के अनुसार उचित कदम उठाने चाहिए।

हमारा डेटा कैसे सुरक्षित रहता है?

गोपनीयता और गरिमा सुरक्षा के लिए अदालतों और सरकारी संस्थाओं के निर्देश उपलब्ध रहते हैं।

कौन से अपराध या दावों के लिए वकील जरूरी हो सकता है?

पुलिस-तथ्य-आरोप, वैधानिक खामी, दस्तावेज़-समस्या, या संरक्षकता-याचिका जैसी स्थितियों में वकील जरूरी होता है।

दिल्ली में संरक्षकता सम्बन्धी प्रक्रिया कैसे शुरू करें?

सबसे पहले स्थानीय परिवार अदालत से सलाह लें। उचित दस्तावेज़ और साक्ष्यों के साथ याचिका दायर की जा सकती है।

क्या ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए आरक्षण या विशेष अवसर मिलते हैं?

TPRA के तहत सुरक्षा और सुविधाएँ मिलती हैं, पर आरक्षण के बारे में केंद्र सरकार की नीति स्पष्ट रूप से निर्धारित करती है।

हम किस प्रकार शिकायत दर्ज कर सकते हैं?

सबसे पहले स्थानीय डीएसएलएसए, जिला कोर्ट या दिल्ली स्तरीय मानव अधिकार संगठन से मार्गदर्शन लें।

कानून मदद लेने के लिए प्री-बैठक कैसे करें?

पहले अपनी स्थिति, दस्तावेज़ और आवश्यक प्रश्न लिखकर सूची बनाएं। फिर कानूनी सलाहकार से मिलें और पूर्व-प्रश्न पूछें।

अगर हमने किसी संस्था से सहायता मांगी, तो क्या सुरक्षा मिलेगी?

हाँ, कई संगठनों और सरकारी संस्थाओं के निर्देशों के अनुसार सुरक्षा उपाय उपलब्ध होते हैं।

क्या जिले में Same-sex विवाह के लिए अदालत से राहत मिल सकती है?

संयुक्त-मार्ग पर बहस चल रही है; अदालतें सुनवाई के दौरान अधिकारों के विस्तार पर विचार कर सकती हैं।

सरकारी रिकॉर्ड पर लिंग पहचान कैसे दर्ज कराएं?

डॉक्यूमेंट-प्रक्रिया में पहचान-परिवर्तन के अनुरोध के साथ आवेदन दें। सत्यापन और प्रक्रिया शर्तें पूरी करनी होती हैं।

कौन से दस्तावेज़ साथ लेकर जाएँ?

आधार, राशन कार्ड, पासपोर्ट, पैन-ककार्ड तथा मेडिकल प्रमाण-पत्र आदि की प्रतियाँ रखें।

दिल्ली में कानूनी सहायता कैसे मिलती है?

दिल्ली लीगल एड सोसायटी और DSLSA से मुफ्त कानूनी सहायता मिलती है; उनकी वेबसाइट देखें और अपॉइंटमेंट लें।

कानून बदलने की कोशिश कब तक चलती है?

कानून संशोधन संसद में होता है और समय ले सकता है। एक बार संशोधन पारित होने पर प्रभावी होता है।

5- अतिरिक्त संसाधन

  • Naz Foundation India - एक पुरानी दिल्ली-आधारित एलजीबीटी अधिकार संगठन। वेबसाइट: nazindia.org
  • Humsafar Trust - राष्ट्रीय स्तर पर एलजीबीटी समर्थन और कानूनी मार्गदर्शन देता है। वेबसाइट: humsafar.org
  • Centre for Law and Policy Research (CLPR) - दिल्ली-आधारित नीति-निरिक्षण और कानूनी अध्ययन समूह। वेबसाइट: clpr.org.in

6- अगले कदम

  1. अपनी स्थिति और अधिकारों को स्पष्ट करें- निजी जीवन, पहचान, दस्तावेज़, शिक्षा और रोजगार के बारे में बिंदु बनाएं।
  2. दिल्ली-आधारित कानूनी सहायता संस्थाओं से संपर्क करें- DSLSA, जिला न्यायालय, या लोकल एलजीबीटी संगठन।
  3. कानूनी सलाहकार या अनुभवी अधिवक्ता खोजें- एलजीबीटी-समर्थक अनुभव वाले वकील प्राथमिकता दें।
  4. जरूरी दस्तावेज़ एकत्र करें- पहचान-पत्र, नागरिक प्रमाण-पत्र, मेडिकल प्रमाण आदि तैयार रखें।
  5. पहली मुलाकात में प्रश्न-सूची साझा करें- अपने अधिकार और अपेक्षाओं को स्पष्ट करें।
  6. अगर अदालत जाना पड़े तो त्वरित और सचेत योजना बनाएं- वकील के साथ स्टेप-बाई-स्टेप रणनीति तय करें।

नया दिल्ली, भारत के निवासी होने के नाते आप इन संसाधनों से लाभ उठा सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय अदालतों और अधिकारिक संस्थाओं से मार्गदर्शन लें।

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