पटना में सर्वश्रेष्ठ समलैंगिक एवं एलजीबीटी वकील
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पटना, भारत में सर्वश्रेष्ठ वकीलों की सूची
पटना, भारत में समलैंगिक एवं एलजीबीटी कानून का संक्षिप्त अवलोकन
भारत में समलैंगिक अधिकारों की कानूनी स्थिति अब स्पष्ट दिशा में है। वर्ष 2018 के न्यायिक निर्णय से सहमति के आधार पर वयस्कों के बीच समान लिंग सम्बन्ध अपराध नहीं माने जाते।
इसके साथ ही ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों के लिए 2019 का कानून बना है, जो पहचान, विकलांगता और भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा के प्रावधान देता है।
पटना एवं बिहार के निवासियों के लिए यह जरूरी है कि वे आत्म-रक्षा, बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में अपने अधिकारों को समझें। सामाजिक वातावरण में परिवर्तन धीरे-धीरे आ रहा है, पर कानूनी मार्गदर्शन जरूरी है।
"Section 377 IPC to the extent it criminalizes consensual sexual conduct between adults of the same sex is unconstitutional." - Navtej Singh Johar v Union of India, (2018) 10 SCC 1
Source: Supreme Court of India official jurisprudence (Navtej Singh Johar के निर्णय का सार) - https://www.sci.gov.in
"The right to privacy is a fundamental right." - K S Puttaswamy v Union of India, (2017) 10 SCC 1
Source: सुप्रीम कोर्ट के निजता अधिकार के महत्व पर निर्णय - https://www.sci.gov.in
"Transgender Persons Act aims to protect rights including recognition of gender identity, protection from discrimination and access to education, healthcare and social welfare." - Transgender Persons Protection of Rights Act, 2019
Source: संसद भवन तथा शासन-प्रशासन की आधिकारिक जानकारी- https://legislative.gov.in
आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है
नीचे पटना, बिहार से जुड़े वास्तविक परिदृश्यों के आधार पर 4-6 स्थिति बताई जा रही है। हर स्थिति में कानूनी सलाहकार, अधिवक्ता या वकील की भूमिका अहम रहती है।
- परिदृश्य 1: समान-लिंग जोड़ी पटना में कानूनी रिश्ते की मान्यता के लिए संघर्ष कर रही है। कोई मान्यता प्राप्त दर्जा न होने पर कैसे अधिकार सुरक्षित हों, यह समझना जरूरी है।
- परिदृश्य 2: किसी transgender व्यक्ति को अस्पताल, नौकरी या शिक्षण संस्था में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है; उपचार और पहचान पत्र के मुद्दे सुलझाने के लिए कानूनी सहायता की जरूरत।
- परिदृश्य 3: पुलिस द्वारा निरीक्षण, गिरफ्तारी या दबाव के हालात में सुरक्षा और निजता के अधिकारों की रक्षा के लिए वकील की सहायता।
- परिदृश्य 4: बिहार में परिवार विरासत, संपत्ति या अभिग्रहण (inheritance/guardian) जैसे मुद्दे जिनमें समान-सेक्स जोड़ों के लिए अस्पष्ट प्रावधान हों; कानूनी मार्गदर्शन जरूरी है।
- परिदृश्य 5: बच्चा गोद लेने या वैवाहिक भागीदारी के विषय में परिवार में दबाव हो; अभी बिहार में समान-सेक्स पारिवारिक संरचना के लिए स्पष्ट कानून का अभाव है, ऐसी स्थिति में अधिवक्ता मदद लें।
- परिदृश्य 6: कार्यस्थल पर भेदभाव, रोजगार एवं शिक्षा में समान अवसर के लिए स्थानीय अदालत में उपचार या शिकायत दर्ज कराने की आवश्यकता।
स्थानीय कानून अवलोकन
पटना, बिहार में विशेष तौर पर निम्न प्रमुख कानून व न्यायिक सिद्धांत लागू होते हैं:
- भारतीय दंड संहिता धारा 377 - समान-सेक्स वयस्कों के बीच सहमति वाले यौन व्यवहार में कानूनी सुरक्षा की सीमा तय करती है; 2018 के निर्णय से सहमति वाले मामलों में बाहर रखा गया है, पर गैर-सहमति, नाबालिग के साथ यौन क्रिया आदि अभी भी अपराध हैं।
- Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019 - ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के पहचान, भेदभाव-रोध, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के प्रावधान देता है; बिहार में इसे स्थानीय संस्थाओं के साथ लागू करना आवश्यक है।
- निजता अधिकार (K S Puttaswamy बनाम यूनियन ऑफ इंडिया, 2017) - निजता एक मौलिक अधिकार है; व्यक्तिगत निजता पर सीमाएं कानून बनाती हैं। पटना में व्यक्तिगत जानकारी, पहचान और सुरक्षा महत्वपूर्ण मान्यताएं हैं।
इन प्रविधानों के अतिरिक्त संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 भी समान अधिकार और अवसर की गारंटी देते हैं। पीड़ित मामलों में पटना के जिला न्यायालय और उच्च न्यायालय के साथ कानूनी सहायता प्राप्त करना उपयोगी रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या सेक्शन 377 अब लागू नहीं है?
नहीं, पूरी तरह नहीं। सहमति के साथ वयस्कों के बीच समान लिंग यौन क्रिया अब अपराध नहीं है। गैर-समझौता, नाबालिग, दबाव या हिंसा जैसे मामलों में यह कानून अभी भी लागू रहता है।
पटना में_same-sex विवाह संभव है?
भारतीय कानून में अब तक समान-सेक्स विवाह को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता नहीं मिली है। विवाह के लिए मूलतः पारंपरिक विवाह संस्था ही मान्य है।
ट्रांसजेंडर पहचान के लिए मुझे क्या करना चाहिए?
2019 कानून के अनुसार पहचान के लिए प्रमाण-पत्र और पहचान दर्ज करने के प्रावधान हैं। स्थानीय स्तर पर जिला सामाजिक संरक्षण कार्यालय से मार्गदर्शन लें और एक कानूनी सलाहकार से मिलें।
क्या LGBTQ व्यक्तियों के लिए गोद लेने की राह खुली है?
सरकार ने इस क्षेत्र में स्पष्ट मानक अभी तक नहीं बनाए हैं। बिहार में गोद लेने के मामलों में अदालत की गाइडलाइन और माता-पिता के रूप में वैधानिक पहचान आवश्यक होगी।
कार्यस्थल पर भेदभाव होने पर मुझे क्या करना चाहिए?
सबसे पहले कार्यालय के मानव संसाधन विभाग से लिखित शिकायत करें। अगर समाधान नहीं हो, तो स्थानीय परिसर के कानूनी सलाहकार से संपर्क करें और कर्मचारी से जुड़ी उचित सुरक्षा संरचनाओं को समझें।
क्या पुलिस से मुकदमा या शिकायत कर सकते हैं?
हाँ, अगर भेदभाव, प्रताड़ना या अनाचार हुआ हो तो आप IPC धारा 354 के अंतर्गत संरक्षण तथा अन्य मौजूदा प्रावधानों के तहत शिकायत कर सकते हैं, साथ ही निजता और अन्य मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए अदालत भी जा सकते हैं।
क्या निजता और पहचान से जुड़ी सुरक्षा बिहार में मजबूत है?
जी हाँ, 2017 के निजता निर्णय के अनुसार निजता एक मौलिक अधिकार है, और राज्य को यह अधिकार संरक्षित करने के लिए कानून बनानी चाहिए। पटना में भी व्यक्तिगत डेटा सुरक्षा पर यही सिद्धांत लागू होते हैं।
क्या LGBTQ मामलों में मुफ्त कानूनी सहायता मिल सकती है?
हाँ, राष्ट्रीय कानूनी सेवाओं प्राधिकरण (Nalsa) तथा जिला स्तर के वकीलों के सहयोग से मुफ्त कानूनी सहायता मिल सकती है। आप अपने जिले के जिला कानूनी सेवाओं प्राधिकरण से संपर्क करें।
कानून बनाने वाले प्रावधानों में बिहार का क्या खास है?
बिहार में केंद्र के कानून प्रभावी होते हैं। स्थानीय अदालतों और पुलिस के व्यवहार में कानून के अनुरोधों के अनुसार व्यवहार कराना जरूरी है।
क्या कन्वर्जन थेरपी पर कानूनन प्रतिबंध है?
वर्तमान में भारत में राष्ट्रीय स्तर पर पूर्ण प्रतिबंध का कानून नहीं बना है; कई चिकित्सा संस्थान और पेशेवर आलोचनात्मक दृष्टिकोण अपनाते हैं। पर सामाजिक-मानसिक स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सतर्क और सम्मानजनक पथ अपनाना उचित है।
कानूनी प्रक्रिया के लिए मुझे किन दस्तावेजों की जरूरत होगी?
आमतौर पर पहचान के प्रमाण, निवास प्रमाण, विवाह/अपनों के संबंध की स्थिति के प्रमाण, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी कागजात, व्यावसायिक או सामाजिक पहचान पत्र आदि आवश्यक हो सकते हैं। प्रयोग और स्थिति के अनुसार कानूनी सलाहकार मार्गदर्शन देगा।
मैं बिहार के बाहर रहते हुए भी सहायता ले सकता हूँ?
हाँ, आप ऑनलाइनाइल वैकल्पिक मार्ग से भी स्थानीय अधिवक्ता से समन्वय कर सकते हैं। कई गैर-सरकारी संस्थान भी दूरस्थ परामर्श प्रदान करते हैं।
अतिरिक्त संसाधन
नीचे तीन प्रमुख LGBTQ सहायता संगठन और संसाधनों की सूची है, जो राष्ट्रीय स्तर पर संचालित होते हैं और पटना से भी उपयोगी मार्गदर्शन दे सकते हैं।
- Naz Foundation India - https://nazindia.org/
- Humsafar Trust - https://www.humsafar.org.in/
- Orinam - https://www.orinam.net/
अगले कदम
- अपने मुद्दे को समझें और स्पष्ट लक्ष्य तय करें कि आप क्या चाहते हैं - संरक्षण, भेदभाव-रोधी अधिकार या अन्य कानूनी उपाय।
- पटना के किसी अनुभवी कानूनी सलाहकार, अधिवक्ता या वकील से मिलने का नियोजन करें।
- निकट के जिला न्यायालय या डिस्टिक लॉ सर्भिसेज अथॉरिटी (DLSA) की free legal aid के विकल्प जाँचें।
- अपने पास सभी पहचान पत्र और संबंधित प्रमाण एकत्रित करें ताकि आवश्यक हो तो पेश किये जा सकें।
- कौन सा कानून लागू होता है, यह जानकर सही अदालत या पेनल्टी-प्रक्रिया के बारे में सलाह लें।
- पहला कानूनी परामर्श लेने के समय प्रश्न तैयार रखें- अधिकार, प्रक्रिया, लागत, समय-रेखा आदि।
- यदि आवश्यक हो, तो प्राथमिकी दर्ज कराने या अदालत में याचिका दायर करने की योजना बनाएं-तय समय पर कदम उठाएं।
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