समस्तीपुर में सर्वश्रेष्ठ समलैंगिक एवं एलजीबीटी वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

15 minutes मुफ़्त परामर्श
समस्तीपुर, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

समस्तीपुर, भारत में समलैंगिक एवं एलजीबीटी कानून का संक्षिप्त अवलोकन

समस्तीपुर जिला बिहार के पूर्वी भाग में स्थित है और यहाँ रहने वाले एलजीबीटी व्यक्तियों के अधिकार राष्ट्रीय कानूनों से संरक्षित हैं। 2018 में सर्वोच्च अदालत ने समलैंगिकता पर लगाई गई कुछ रोक हटाकर वयस्कों के बीच सहमति वाले निजी संबंधों को अपराध नहीं माना, जिससे जिले में न्याय-प्रक्रिया का दायरा स्पष्ट हुआ।

2019 में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों के लिए एक विशिष्ट कानून बना, जो शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और पहचान के अधिकार सुनिश्चित करता है। समस्तीपुर में इन अधिकारों की व्यावहारिक उपलब्धता स्थानीय सरकारी निकायों और अदालती प्रक्रियाओं के जरिए संचालित होती है।

निजी जीवन की गरिमा और स्वतंत्रता सभी नागरिकों का मौलिक अधिकार है, जिसमें एलजीबीटी व्यक्तियों के साथ समान संरक्षण मिलता है। - Navtej Singh Johar v Union of India, 2018
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए Transgender Persons Protection of Rights Act, 2019 लागू हुआ है, जो शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और पहचान के अधिकार देता है।

उच्चतम न्यायालय और संसद के आधिकारिक दिशानिर्देशन के अनुसार समलैंगिकता के संदर्भ में बिहार-समस्तीपुर में भी समान अधिकार लागू होते हैं। सरकारी स्रोत के अनुसार यह मूल अधिकार संविधान के अंतर्गत संरक्षित हैं।

आधिकारिक उद्धरण और स्रोत: - सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया का आधिकारिक साइट: www.sci.gov.in
- पब्लिक सेक्टर सूचना ब्यूरो (PIB) का निष्कर्ष: pib.gov.in
- कानूनों की पूर्ण लिस्ट और पाठ: legislation.gov.in

आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  1. समलैंगिक-सम्बन्ध से जुड़ी निजी सुरक्षा और गरिमा पर खतरा दिखे तो कानून-सम्बन्धी सलाह आवश्यक होती है। कोर्ट-वर्क में गलत दस्तावेज और गलत धाराओं से बचना मुश्किल हो सकता है।

  2. कर्मस्थल पर लैंगिक पहचान के कारण भेदभाव हो या अनुचित व्यवहार हो, तब POSH कानून के अंतर्गत सुरक्षा और सहायता मिलना जरूरी है।

  3. परिवार में स्वीकृति के लिए नाम परिवर्तन या लिंग परिवर्तन के अभिलेख आवश्यक हों, तो जिला अदालत में वकील की सहायता चाहिए।

  4. हक़ सुरक्षित रखने के लिये पुलिस-या प्रशासनिक शिकायत दर्ज करनी हो, तो तथ्य-तथ्यों के साथ दस्तावेज चाहिए।

  5. निजी या सार्वजनिक सेवाओं में समान अधिकार प्राप्त करने के लिए कानूनी नोटिस और अनुबंध-सम्पादन की आवश्यकता पड़ सकती है।

  6. समस्तीपुर जिले में नाम-गैर-गैर पहचान पत्रों में बदलाव, बच्चों की देखभाल-दारोमदार, या दत्तक-पालन के मामलों में कानूनी मार्गदर्शन चाहिए।

स्थानीय कानून अवलोकन

  • Indian Penal Code (IPC) धारा 377 - 2018 के फैसले के अनुसार वयस्कों के बीच सहमति वाले निजी समान-लैंगिक संबंध अपराध नहीं हैं। फिर भी गैर-सहमति, हिंसा या अन्य अपराध-प्रकारों के मामले में धाराएं लागू हो सकती हैं।

  • Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019 - ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए पहचान, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा के अधिकार निर्धारित करता है।

  • संविधान के अनुच्छेद 14, 21 - समानता का अधिकार और व्यक्तिगत गरिमा व जीवन की गोपनीयता की सुरक्षा। समस्तीपुर में इन मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर अदालतें मार्गदर्शन देती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

समलैंगिक संबंध अब कानूनी रूप से वैध हैं?

हाँ, 2018 के फैसले के बाद वयस्कों के बीच सहमति से किए गए निजी संबंध कानूनन अपराध नहीं माने जाते। यह बिहार-समस्तीपुर के नागरिकों पर भी लागू होता है।

क्या ट्रांसजेंडर लोगों के लिए पहचान-पत्र और नाम-परिवर्तन संभव है?

हां, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए लेबर-परामर्श के साथ पहचान पत्र और नाम-परिवर्तन की प्रक्रियाएं शुरू की जा सकती हैं। जिला अदालतों के आदेश से आधिकारिक रिकॉर्ड बदले जा सकते हैं।

अगर कोई व्यक्ति दलित, परिवार या कार्यस्थल पर भेदभाव करे तो क्या करें?

POSH कानून के अंतर्गत न्यायिक मार्गदर्शन और सुरक्षा प्रावधान उपलब्ध हैं। साथ ही संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत समान अधिकार के लिए वैधानिक उपाय संभव हैं।

कौन सी वकील-सेवा उपलबध हैं जो एलजीबीटी मामलों में अनुभव रखते हैं?

समस्तीपुर में स्थानीय जिला न्यायालय, डिप्टी कमिश्नर-डील सेवा प्राधिकरण (DLSA) और स्थानीय अधिवक्ता संघ से समलैंगिक मामलों में अनुभवी अधिवक्ता मिलते हैं।

समस्तीपुर में Same-Sex विवाह की स्थिति क्या है?

वर्तमान में भारत में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता नहीं मिली है। कुछ मामले उच्च अदालतों में लंबित हैं, पर स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं है।

स्वास्थ्य सेवाओं में एलजीबीटी अधिकार कहाँ सुरक्षित हैं?

ट्रांसजेंडर अधिकार अधिनियम और संविधानिक अधिकार स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और सुरक्षा के लिए समान अधिकार सुनिश्चित करते हैं। उपलब्ध सेवाओं के बारे में स्थानीय अस्पतालों से जानकारी लें।

कानूनी सहायता पाने के लिए कौन से अधिकारी संपर्क करें?

डिस्ट्रीक्ट लॉगल सर्विसेज अथॉरिटी (DLSA) समस्तीपुर जिले में मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करता है। उनके कार्यालय से शुरुआती कंसल्टेशन लें।

अगर मैं भेदभाव की रिपोर्ट दर्ज करवाऊँ, किन धाराओं का प्रयोग कर सकता/सकती हूँ?

आम तौर पर IPC 377 के प्रासंगिक हिस्सों के अलावा POSH अधिनियम और अनुच्छेद 14/21 के अनुसार सहारा लिया जा सकता है। स्थानीय अदालत मार्गदर्शन देगी।

कौन से दस्तावेज जरूरी होंगे?

आधिकारिक पहचान पत्र, पते का प्रमाण, केस-सम्बन्धी बयान, गवाही-पत्र आदि तैयार रखें ताकि अदालत में दलीलें सुदृढ़ हों।

अगर मुझे भाषा या जानकारी में सहायता चाहिए तो क्या करें?

डिस्ट्रिक्ट-स्तर की कानून-सेवा इकाई (DLSA) और स्थानीय एनजीओ सरल हिंदी या भोजपुरी में सहायता देते हैं।

नीज-इन-स्टेट कानून और स्थानीय पुलिस क्या भूमिका निभाते हैं?

लोक-रक्षा के लिए पुलिस मददगार हो सकती है, पर एलजीबीटी मामलों में संवेदनशीलता के साथ जवाबदेही और उचित प्रक्रिया जरूरी है।

अतिरिक्त संसाधन

  • Orinam - भारत-भर के LGBT अधिकार संसाधन और मार्गदर्शन
  • The Humsafar Trust - स्वास्थ्य, शिक्षा और कानूनी सहायता के संदर्भ में संसाधन
  • Naz Foundation India - कानूनी सहायता और वकालत-सहायता

अगले कदम

  1. अपने मुद्दे की स्पष्ट जानकारी एकत्र करें-कब, कहाँ, किससे भेदभाव हुआ और कितने लोग प्रभावित हुए।
  2. जिला समस्तीपुर के DLSA से पहला कानूनी परामर्श लें और उचित मार्गदर्शन प्राप्त करें।
  3. एलजीबीटी-फ्रेंडली वकील या संस्थान की तलाश करें और पहली मुलाकात शेड्यूल करें।
  4. जरूरत हो तो स्थानीय NGOs से सहायता के लिए संपर्क करें और सोशल-वेलफेयर प्रोग्राम समझें।
  5. कानूनी दस्तावेज़, गवाही और रिकॉर्ड तैयार रखें ताकि अदालत-प्रक्रिया सरल हो।
  6. अगर शिकायत करें, तो घटना-तथ्यों के साथ सचित्र सबूत संकलित रखें और रिकॉर्ड बनाएं।
  7. समस्तीपुर जिले के नागरिक अधिकारों के लिए सतर्क रहें और जरूरत पड़ने पर न्यायालयिक सहायता लें।

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अस्वीकरण:

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