तिरुपूर में सर्वश्रेष्ठ समलैंगिक एवं एलजीबीटी वकील

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पारिवारिक वकील नियुक्त करने की मुफ़्त गाइड

Advocate Rajasekaran M.B.A., M.L.,
तिरुपूर, भारत

2014 में स्थापित
उनकी टीम में 8 लोग
English
एडवोकेट राजसेकरन एम.बी.ए., एम.एल., तिरुपुर, तमिलनाडु में आधारित प्रतिष्ठित कानून फर्म आरजे लॉ अ‍ॅफिलिएट का नेतृत्व...
जैसा कि देखा गया

1. तिरुपूर, भारत में समलैंगिक एवं एलजीबीटी कानून का संक्षिप्त अवलोकन

तिरुपूर के निवासियों के लिए समलैंगिक एवं एलजीबीटी अधिकार राष्ट्रीय स्तर के कानून से संचालित होते हैं। 2018 के फैसले के बाद समान लिंग के वयस्कों के निजी तौर पर सहमति से यौन संबंध अपराध नहीं रहे। इसका मुख्य आधार नागरिक अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता है।

सरकारी ढांचे के अनुसार लैंगिक पहचान, समानता और गरिमा के अधिकार किसी भी नागरिक के मूल अधिकार हैं। तमिलनाडु सहित केंद्र सरकार की नीतियाँ इस क्षेत्र में समावेशन को बढ़ाने की दिशा में हैं। अधिकारों के संरक्षण के लिए स्थानीय अदालतें और प्राथमिकी शिकायत प्रणाली अहम भूमिका निभाती हैं।

“The State shall not deny to any person equality before the law or the equal protection of the laws within the territory of India.”
“No person shall be deprived of life or personal liberty except according to procedure established by law.”
“An Act to provide for protection of rights of transgender persons and their welfare.”

उपरोक्त उद्धरण संविधान के मूल अधिकारों और ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए केंद्र-राज्य कानूनों के उद्देश्य को दर्शाते हैं। आधिकारिक स्रोतों के अनुसार तिरुपूर-क्षेत्र में इन अधिकारों की सुरक्षा के लिए स्थानीय पुलिस-प्रशासन और विधिक सहायता उपलब्ध हैं।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • परिवार, पड़ोस या मकान-मालिक से संबंधित भेदभाव के मामले में कानूनी सहायता चाहिए। तिरुपूर के औद्योगिक क्षेत्र में रहने वाले एलजीबीटी लोगों को सुरक्षा और वैधानिक उपायों के लिएadvocate की जरूरत पड़ती है।

  • ट्रांसजेंडर व्यक्ति अपने पहचान-पत्र, आधार, पैन या पासपोर्ट में लिंग पहचान दर्ज कराने के लिए कानूनी मार्गदर्शन चाहता है। यह प्रक्रियात्मक शैली और दस्तावेजी प्रमाणों पर निर्भर है।

  • कार्यस्थल पर भेदभाव या उत्पीड़न के मामलों में सुरक्षा प्राप्त करने तथा शिकायत दर्ज कराने के लिए वकील की मदद जरूरी हो सकती है।

  • समलैंगिक या ट्रांसजेंडर जोड़ा यदि निजी जीवन के अधिकारों, सुरक्षा और संरक्षण के लिए अदालत-समर्थन चाहता है, तो अदालत में याचिका दायर करने के लिए advokat की आवश्यकता होगी।

  • यादगार मामलों में, जैसे पहचान-प्रमाण पत्र, विवाह-स्थिति के संदिग्ध दावों, या बच्चों के पालन-पोषण से जुड़े मुद्दे, तब भी कानूनी सलाह जरूरी होती है।

  • खासकर तिरुपूर के स्थानीय कानूनों के अनुसार आपूर्ति-चयन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सहायता के लिए एक अनुभवी वकील आपकी मदद कर सकता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • IPC धारा 377 - 2018 में सुप्रीम कोर्ट के Navtej Singh Johar निर्णय के माध्यम से समान-लिंग वयस्कों के निजी स्वामित्व वाले यौन संबंधों को अपराध नहीं माना गया। फिर भी गैर-समझौतापूर्वक कराये गए अपराध या नाबालिगों के मामलों में यह धारा अभी भी लागू रहती है।

  • The Transgender Persons (Protection of Rights) Act, 2019 - ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों और सामाजिक-कल्याण के लिए केंद्रीय कानून है। पहचान-स्वीकृति, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य आदि अधिकार स्थापित करता है।

  • Puttaswamy बनाम Union of India (2017) के निर्णय से सुरक्षित निजी जीवन का अधिकार - व्यक्तिगत जीवन की सुरक्षा एक मौलिक अधिकार है, जो एलजीबीटी व्यक्तियों के लिए सामान्य संरक्षण देता है।

नोट - तिरुपूर के निवासी इन और अन्य संगठित अधिकारों का पालन स्थानीय पुलिस-स्टेशन और जिला प्रशासन के साथ सत्यापित कर सकते हैं। उपर्युक्त अधिकारों के प्रयोग में किसी भी कदम से पहले प्रमाणित कानूनी सलाह आवश्यक है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या समलैंगिक विवाह मान्य है?

नहीं, वर्तमान में भारत में समलैंगिक विवाह को पूर्ण वैधानिक मान्यता नहीं मिली है। कुछ कोर्ट-स्तर के निर्णय और सामाजिक-आर्थिक विकास के बावजूद विवाह कानून में स्पष्ट संशोधन नहीं हुआ है।

क्या मैं अपने पहचान-प्रमाण पत्र में लिंग-आधार पर बदलाव करा सकता/सकती हूँ?

हाँ, ट्रांसजेंडर पहचान के मान्यता के लिए कानून-प्रक्रिया निर्धारित है। उचित दस्तावेजी प्रमाण के साथ आवेदन दें और स्थानीय नागरिक अधिकार या तहसील कार्यालय से मार्गदर्शन लें।

क्या LGBT लोगों के साथ नौकरी में भेदभाव रोकना संभव है?

हाँ, नागरिक समानता के अधिकार और 2019 के ट्रांसजेंडर एक्ट के प्रावधान भेदभाव-रोक में सहायता करते हैं। परेशानी की स्थिति में वकील से संरक्षण-उच्चारण करवाएं।

मैं अपने दस्तावेज़ कैसे अपडेट करूं-आधार, पैन, पासपोर्ट आदि?

आधार, पैन और पासपोर्ट के लिए योग्य authorities के साथ आवेदन दें। पहचान, नाम-प्रमाण और लिंग-प्रमाण में परिवर्तन के लिए निर्धारित फॉर्म और प्रमाण-पत्र जमा करें।

अगर पुलिस से उत्पीड़न हो तो क्या करूं?

सबसे पहले एक written complaint दर्ज कराएं। संभव हो तो स्थानीय पत्रकारिता, NGO या कानूनी सहायता समूह से मदद लें और आवश्यक हो तो उच्च अदालत के समक्ष उपचार मांगें।

ट्रांसजेंडर के रूप में शिक्षा के अधिकार कैसे सुरक्षित हैं?

केंद्र और राज्य स्तर के कानूनों के अनुसार शिक्षा-स्वरक्षा, प्रवेश और सह-शिक्षण में समान अवसर मिलना चाहिए। शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव-रोक के नियम लागू होते हैं।

क्या मैं बच्चों के संदर्भ में सुरक्षित-पालन-पोषण के अधिकार के बारे में पा सकता/सकती हूँ?

एक समान-लिंग परिवार के अधिकारों में चुनौतियाँ रहती हैं, जबकि अदालतें कभी-कभी संरक्षकता-सम्बन्धित मामलों में मार्गदर्शन देती हैं। स्पष्ट कानूनी मार्गदर्शन आवश्यक है।

कैसे मैं एक भरोसेमंद एलजीबीटी वकील ढूंढूँ?

तिरुपूर के मुख्य शहरों में एलजीबीटी-लेगल कम्युनिटी से जुड़े अधिवक्ताओं की सूची देखें, पथ-प्रदर्शक संस्थाओं से मिलें, और पहले-पहले एक संक्षिप्त परामर्श लें।

केस कब अदालत में जाना उचित होगा?

जब आपकी सुरक्षा, अधिकार या कमजोर वर्ग के अधिकारों पर हमला हो, तब फौरन अदालत-या पुलिस-मार्ग से शिकायत दर्ज कराना उचित रहता है।

क्या निजी जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समीक्षा जरूरी है?

हाँ, व्यक्तिगत सुरक्षा, पहचान-प्रमाण और स्थान-गोपनीयता के लिए कानूनी उपायों की योजना बनाएं और जरूरी होने पर धारणीय सुरक्षा-आदेश लेकर चलें।

ट्रांसजेंडर-आयु-निर्धारण संबंधी प्रक्रियाएं क्या होती हैं?

ट्रांसजेंडर अधिकार अधिनियम के अंतर्गत पहचान-संबंधी बदलाव के लिए पंजीकरण और प्रमाण-पत्र के साथ प्रक्रिया पूरी करनी होती है। अधिक जानकारी स्थानीय काउंसिल से लें।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • Humsafar Trust - राष्ट्रीय स्तर पर एलजीबीटी अधिकारों के लिए कार्यरत संगठन। वेबसाइट: https://humsafar.org
  • Naz Foundation India - भारत-व्यापी समर्थन और कानूनी सहायता प्रदान करने वाला संगठन। वेबसाइट: https://nazindia.org
  • Srishti Madurai - तमिलनाडु-आधारित संगठन जो ट्रांस-जनित अधिकारों और समुदाय-आधारित समर्थन पर केंद्रित है। वेबसाइट: https://www.srishtimadurai.org

6. अगले कदम

  1. अपनी स्थिति और लक्ष्यों को स्पष्ट लिखें-तिथि, घटना, दस्तावेज आदि संकलित रखें।
  2. उचित कानून-परामर्श चाहिये यह तय करें और Tiruppur-जनित कानून-कार्यरत अधिवक्ता की खोज शुरू करें।
  3. स्थानीय LGBT-समुदाय समूहों से संपर्क करें ताकि वे भरोसेमंद वकील की सिफारिश दे सकें।
  4. पहला कॉन्सल्टेशन तय करें और सवाल सूची बनाएं ताकि आप सही मार्गदर्शन पा सकें।
  5. अनुरोधित दस्तावेजों की एक कॉपी-कैटलॉग बना कर रखें ताकि आवेदन प्रक्रिया सरल हो।
  6. यदि आवश्यक हो तो सुरक्षा-केस और शिकायत दर्जी के लिए पुलिस-मैनेजमेंट के साथ आगे बढ़ें।
  7. गोपनीयता बनाए रखें और जरूरत पड़ने पर राहत-आदेश या संरक्षण-केस पर विचार करें।

आधिकारिक स्रोतों के उद्धरण यहाँ शामिल हैं ताकि आप स्वयं से सत्यापित कर सकें: संविधान की धारा 14 और धारा 21 समानता और Personal Liberty के मूल अधिकार बताती है; ट्रांसजेंडर Persons Protection Act 2019 उनके अधिकार सुनिश्चित करता है।

संविधान के मूल अधिकार और ट्रांसजेंडर अधिकार के बारे में विस्तृत जानकारी के लिए देखें:

“The State shall not deny to any person equality before the law or the equal protection of the laws within the territory of India.”
“No person shall be deprived of life or personal liberty except according to procedure established by law.”
“An Act to provide for protection of rights of transgender persons and their welfare.”

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