गया में सर्वश्रेष्ठ प्रतिबंध और निर्यात नियंत्रण वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
गया, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
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Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
जैसा कि देखा गया

भारत में प्रतिबंध और निर्यात नियंत्रण कानून पर विस्तृत मार्गदर्शक

1. भारत में प्रतिबंध और निर्यात नियंत्रण कानून का संक्षिप्त अवलोकन

भारत में निर्यात नियंत्रण कानून मुख्य रूप से Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992 (FTDR Act) के अंतर्गत लागू होते हैं। यह सरकार को विदेशी व्यापार की नियंत्रण, विकास और प्रेरणा के लिए अधिकार देता है। संविलियन के संदर्भ में DGFT (Directorate General of Foreign Trade) यह नियंत्रण लागू करता है।

SCOMET नियम Dual-Use (डिफ़र-यूज़) वस्तुओं, रसायनों, उपकरणों तथा तकनीकों के निर्यात को विनियमित करते हैं। इन वस्तुओं के निर्यात के लिए लाइसेंस आवश्यक होता है। साथ ही defence और सुरक्षा से जुड़े आयात-निर्यात के जोखिमों पर निगरानी DGFT के साथ MEA द्वारा भी है।

MEA हर यून सैंक्शन और सुरक्षा-नीति से जुड़ी कार्रवाई में निर्णायक भूमिका निभाता है। DRI (Directorate of Revenue Intelligence) वित्तीय और सीमा-पर नियंत्रण प्रवर्तन में स्पष्ट भूमिका निभाता है। यह कानूनों के उल्लंघन पर जुर्माने और गिरफ्तारी जैसी कार्रवाई कर सकता है।

“The export of sensitive dual-use items falls under the SCOMET regime and requires licensing from DGFT.”

स्रोत: DGFT

“SCOMET rules regulate dual-use items including chemicals, organisms, materials, equipment and technologies.”

स्रोत: DGFT

“The export policy is implemented under the Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992.”

स्रोत: FTDR Act, 1992

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों में कानूनी सहायता आवश्यक हो सकती है। इन उदाहरणों में भारत-आधारित वास्तविकताएं शामिल हैं।

  • SCOMET लाइसेंस आवेदन में असमंजस- Dual-use सामग्री का वर्गीकरण गलत हो सकता है। लाइसेंस प्रक्रिया, आवेदन प्रकार और आवश्यक End-Use Undertakings समझना कठिन होता है।

  • लाइसेंस न मिलने या रद्द करने पर अपील करना- DGFT द्वारा लाइसेंस निरस्त या अस्वीकृत होने पर वैकल्पिक उपाय और पुनरार्जन की रणनीति चाहिए होती है।

  • उचित End-Use Undertaking और end-user verification- किसी क्लाइंट, वितरक या लक्षित देश के लिए सही End-User प्रमाणन बनवाना महत्त्वपूर्ण है।

  • ड्रॉप-इन या re-export मुद्दे- किसी वस्तु के पुनः निर्यात या स्थानांतरण पर नियम बदलने पर कानूनी सलाह आवश्यक होती है।

  • कम्प्लायंस ऑडिट और रिकॉर्ड-कीपिंग- DRI और CBIC के पास सही रिकॉर्ड रखने के नियम होते हैं, जिन्हें पालना कठिन हो सकता है।

  • यूजर-स्पेसिफिक-नीतियाँ और देश-विशिष्ट प्रतिबन्ध- UN-स्कैनशन और MEA प्रतिबन्धों के अनुपालन के लिए विशेषज्ञ सलाह चाहिए होती है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

भारत में निर्यात नियंत्रण के लिए 2-3 प्रमुख कानून नीचे दिये जाते हैं। कृपया उनके आधिकारिक पाठ देखें।

  • Foreign Trade (Development and Regulation) Act, 1992- निर्यात-निर्यात नियंत्रण एवं नीति-निर्माण का मूल कानून।

  • Imports and Exports (Control) Act, 1947- प्रायः संबद्ध नियंत्रण और अनुज्ञापन से जुड़ा ऐतिहासिक कानून।

  • Arms Act, 1959 एवं संबंधित Rules- रक्षा-आयात-निर्यात के लिए सुरक्षा-आधारित नियंत्रण लागू करते हैं।

इन कानूनों के आधिकारिक स्रोत देखें: FTDR Act, 1992 - INDIA CODE, Imports and Exports (Control) Act, 1947 - INDIA CODE, Arms Act, 1959 - INDIA CODE.

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SCOMET क्या है?

SCOMET एक प्रशासनिक ढांचा है जो Dual-use वस्तुओं, रसायनों और टेक्नोलॉजी के निर्यात को नियंत्रित करता है। इसके लिए लाइसेंस आवश्यक हो सकते हैं।

क्या मुझे Dual-use वस्तुओं के निर्यात के लिए लाइसेंस चाहिए?

हाँ, अधिकतर मामलों में SCOMET के अंतर्गत लाइसेंस अनिवार्य होता है, खासकर यदि वस्तुएं सुरक्षा, रक्षा या गुप्त-तकनीक से जुड़ी हों।

मैं अपने उत्पाद का वर्गीकरण कैसे सुनिश्चित करूं?

DGFT के निदेश या एक अनुभवी कानूनी सलाहकार से वस्तु के HS कोड, तकनीकी विनिर्देश और End-Use के आधार पर वर्गीकरण कराएं।

लाइसेंस के लिए आवेदन कैसे करें?

DGFT के ऑनलाइन पोर्टल पर आवेदन, आवश्यक दस्तावेज, End-Use Undertaking और सपोर्टिंग प्रमाणपत्र जमा करें।

End-Use Undertaking क्या है?

End-Use Undertaking एक कानूनी प्रतिज्ञा है कि वस्तुएं निर्दिष्ट उद्देश्य के लिए ही उपयोग होंगी और किसी तीसरे पक्ष को नहीं दी जाएंगी।

लाइसेंस लेने में कितना समय लगता है?

आमतौर पर 6 से 8 सप्ताह तक लग सकते हैं; जटिल मामलों में समय बढ़ सकता है।

गलत वर्गीकरण या उल्लंघन पर क्या दंड है?

जुर्माना, आपराधिक कार्रवाइयां और license suspension/withdrawal तक संभव है। अतः सही-स्वीकृत प्रक्रिया अपनाएं।

Deemed export क्या है?

Deemed export का मतलब है भारत से विदेश में किसी भी व्यक्ति को तकनीकी जानकारी देना, जो निर्यात के समान माना जाता है।

नीतियाँ कब बदली जाती हैं?

SCOMET सूची, लाइसेंस प्रक्रिया और end-use नियम समय-समय पर DGFT द्वारा संशोधित होते हैं।

क्या मैं sanctioned देश के लिए निर्यात कर सकता हूँ?

नहीं, MEA तथा UN-स्कास के अनुसार प्रतिबंधित देशों में निर्यात सामान्यतः मना होता है, सिवाय विशेष अनुमति के।

कौन-से दस्तावेज जरूरी होंगे?

कंपनी पंजीकरण, वस्तु की तकनीकी विशेषताएं, HS कोड, एंड-यूज प्रमाणपत्र, क्रय- विक्रय अनुबन्ध आदि आवश्यक होंगे।

अगर लाइसेंस अस्वीकृत हो जाए तो क्या करूं?

आमतौर पर आपीलीय/अपील विकल्प उपलब्ध होते हैं। अतिरिक्त जानकारी और आपत्तियाँ प्रस्तुत करनी चाहिए।

व्यावहारिक सलाह कहाँ से लें?

स्थानीय कानूनी विशेषज्ञ और DGFT के आधिकारिक मार्गदर्शन से सुनिश्चित करें कि आप अद्यतित नियमों के अनुरूप हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • DGFT - Directorate General of Foreign Trade - निर्यात नियंत्रण, लाइसेंसिंग और नीति जानकारी। https://www.dgft.gov.in
  • MEA - Ministry of External Affairs - sanctions, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबन्ध और विदेशी नीति जानकारी। https://www.mea.gov.in
  • DRI - Directorate of Revenue Intelligence - निर्यात नियंत्रण प्रवर्तन और वस्तु-नीति अनुपालन निरीक्षण। https://www.dri.gov.in

6. अगले कदम

  1. आपके उत्पाद की निर्यात-उद्देश्य और गंतव्य देश स्पष्ट करें।
  2. SCOMET सूची में आपके आइटम का वर्गीकरण जांचें- लाइसेंस आवश्यक है या नहीं।
  3. DGFT के साथ शुरूआती क्लासिफिकेशन/कंसल्टेशन लें और End-Use Undertaking समझें।
  4. एक अनुभवी कानूनी सलाहकार या एडवोकेट से मिलें, जो FTDR Act और SCOMET नियमों में विशेषज्ञ हो।
  5. आवेदन प्रक्रिया के लिए दस्तावेजों की एक चेक-लिस्ट बनाएं और तैयार रखें।
  6. DGFT पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करें और लाइसेंस की स्थिति ट्रैक करें।
  7. लाइसेंस मिलते ही कंप्लायंस-प्रोसीजर शुरू करें और रिकॉर्ड रखना सुनिश्चित करें।

नोट: यह मार्गदर्शक सामान्य सूचना के लिए है। कानूनी निर्णय लेने से पहले स्थानीय वकील से व्यक्तिगत सलाह लें। भारत में निवासी होने के नाते आपको अपने राज्य के बार काउंसिल के अनुरूप स्थानीय साक्षात्कार-परामर्श भी लेना चाहिए।

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इस पृष्ठ पर दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और कानूनी सलाह नहीं है। हम सामग्री की सटीकता और प्रासंगिकता सुनिश्चित करने का प्रयास करते हैं, लेकिन कानूनी जानकारी समय के साथ बदल सकती है, और कानून की व्याख्या भिन्न हो सकती है। आपको अपनी स्थिति के लिए विशिष्ट सलाह हेतु हमेशा एक योग्य कानूनी पेशेवर से परामर्श करना चाहिए।

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