हरियाणा में सर्वश्रेष्ठ यौन अपराध वकील

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Oberoi Law Chambers
हरियाणा, भारत

2008 में स्थापित
उनकी टीम में 15 लोग
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Hindi
फर्म की स्थापना वर्ष 2008 में “JUSTICE FOR ALL” के संकल्प के साथ की गई थी। ओबेरॉय लॉ चैंबर ट्रस्टेड एडवोकेट गगन ओबेरॉय द्वारा...
जैसा कि देखा गया

1. हरियाणा, भारत में यौन अपराध कानून का संक्षिप्त अवलोकन

हरियाणा में यौन अपराध कानून भारतीय कानून-व्यवस्था के अंतर्गत आते हैं, जिनमें IPC के प्रावधान और POCSO अधिनियम 2012 प्रमुख हैं।

यौन अपराधों की जांच-निपटान हरियाणा में पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत होती है।

“POCSO Act 2012 provides for the protection of children from offences of sexual assault, sexual harassment and pornography.”

उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार विशेष न्यायालयों और फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के माध्यम से द्रुत न्याय की कोशिश रहती है।

“Punjab and Haryana High Court has jurisdiction over the states of Punjab and Haryana and the Union Territory of Chandigarh.”

हाल के परिवर्तन में यौन अपराध से जुड़े दंड-विधानों में 2018 के अपराध-विधि संशोधन से कठोर दंड और प्रक्रियागत सुधार शामिल हैं।

“NALSA provides free legal services to eligible persons.”

यौन अपराध कानून की जानकारी हरियाणा निवासियों के लिए एकन्द्रीय स्तर पर उपलब्ध है, ताकि पीड़ित या पीड़ित-स्थिति के लोग उचित कानूनी सहायता प्राप्त कर सकें।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

हरियाणा में यौन अपराध के मामलों में कानूनी सहायता लेने से कई लाभ होते हैं, जैसे त्वरित पंजीकरण, साक्ष्यों की सुरक्षा और उचित जजमेंट की गारंटी।

  • परिदृश्य 1: घरेलू वातावरण में यौन उत्पीड़न के आरोप सामने आएं और आप शिकायत दर्ज कराते हैं। वकील आपके अधिकारों की रक्षा करके FIR की भाषा, धारा-चयन और आवश्यक सावधानियाँ स्पष्ट कर सकता है।

  • परिदृश्य 2: POCSO अधिनियम के अंतर्गत एक नाबालिग पर यौन अपराध का मामला दर्ज है। एक अधिवक्ता विशेष अदालत के क्रमानुसार प्रक्रिया, गवाह-नियोजन और बच्चों के संरक्षण के नियम समझाने में मदद करेगा।

  • परिदृश्य 3: एक कर्मचारी के रूप में POSH अधिनियम के अंतर्गत यौन उत्पीड़न की शिकायत उठी है। प्रमाण-संग्रह, वारंट-निर्वहन और redressal-mechanism के बारे में सलाह चाहिए होगी।

  • परिदृश्य 4: परिवार के सदस्य की ओर से IPC 376 या अन्य धाराओं के तहत अपराध की रिपोर्ट आयी है। बचाव-रणनीति, मजिस्ट्रेट-स्तर पर पूछताछ और न्यायिक प्रक्रिया की समझ आवश्यक होती है।

  • परिदृश्य 5: ऑनलाइन यौन उत्पीड़न या हैजिंग के मामले में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का संग्रह और IT अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप कदम लेने होते हैं।

इन परिदृश्यों में एक अनुभवी advokat/वकील के साथ चर्चा से आपको सही धाराओं का चयन, पिछले मामलों के प्रभावी उदाहरण और अदालत की रणनीति मिलती है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

हरियाणा में यौन अपराधों के नियंत्रण हेतु प्रमुख कानून और उनकी भूमिका नीचे दी गयी है:

  • भारतीय दंड संहिता, 1860 (IPC) - Sections 354, 354A-354D, 376 ( बलात्कार ) और अन्य धाराएं: यह धाराएं महिलाओं के साथ आभूषण-उल्लंघन से लेकर गंभीर यौन अपराध तक को क़ानूनी दायरे में लाती हैं।
  • Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012 (POCSO Act): बच्चों की सुरक्षा के लिए यौन अपराधों के लिए विशेष कानून है; स्पेशल कोर्ट और त्वरित सुनवाई की व्यवस्था देता है।
  • Sexual Harassment of Women at Workplace Act, 2013 (POSH Act): कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए दायित्व, समिति गठन और redressal प्रक्रिया निर्धारित करता है।

हरियाणा में मामलों की सुनवाई पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के अधीन और जिला-स्तर पर स्पेशल कोर्ट के माध्यम से होती है।

आधिकारिक पूरक स्रोत:

“POCSO Act 2012 provides for the protection of children from offences of sexual assault, sexual harassment and pornography.”

स्रोत: Ministry of Women and Child Development (MWCD) - POCSO अधिनियम की आधिकारिक जानकारी

“Punjab and Haryana High Court has jurisdiction over the states of Punjab and Haryana and the Union Territory of Chandigarh.”

स्रोत: Punjab and Haryana High Court - अधिकारिक पन्ना

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यौन अपराध कौनसे कानूनों के अंतर्गत आते हैं?

यौन अपराध IPC के धाराओं के साथ POCSO Act के अंतर्गत आते हैं। POCSO बच्चों के लिए विशेष सुरक्षा प्रदान करता है।

POCSO Act क्या है और यह किन मामलों पर लागू होता है?

POCSO Act बच्चों के खिलाफ यौन अपराध, यौन उत्पीड़न और अश्लील सामग्री से सुरक्षा देता है। यह स्पेशल कोर्ट और तेज़ सुनवाई की व्यवस्था देता है।

POSH Act क्या है और किस प्रकार लागू होता है?

POSH Act कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए दायित्व, शिकायत-प्रक्रिया और redressal-स्थापना देता है।

यदि मुझे कोर्ट में पेश होना पड़े तो मुझे क्या करना चाहिए?

सबसे पहले एक अनुभवी वकील से संपर्क करें, FIR की मूल प्रति और सभी साक्ष्यों की सूची बनाएं, और अदालत के समक्ष अपने अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करें।

बैल कब मिल सकता है और उसकी प्रक्रिया क्या है?

यौन अपराध में बेल मिलने की संभावना केस-स्थिति, साक्ष्यों और धाराओं पर निर्भर करती है। चार्जशीट से पहले या बाद में भी bail मिल सकता है; वकील आपको उपयुक्त रणनीति बताएगा।

सबूत कैसे सुरक्षित रखें और क्या करना चाहिए?

हर साक्ष्य का सुरक्षित रूप से रिकॉर्ड बनाएं, डिजिटल साक्ष्यों का authenticity सुनिश्चित करें, और किसी भी दबाव के बिना अदालत के निर्देशों का पालन करें।

क्या पुरुष पर भी यौन अपराध के मामले हो सकते हैं?

हाँ, IPC एवं POCSO के अंतर्गत सभी को बराबर कानून के अनुसार दंडित किया जा सकता है, जिसमें महिलाएं, पुरुष और अन्य भी शामिल हो सकते हैं।

एविडेंस कैसे जुटाएँ और विद्वेष से कैसे बचें?

प्रारम्भिक जांच में पुलिस के साथ सहयोग करें, अपने वकील की सलाहानुसार साक्ष्य प्रस्तुत करें, और किसी प्रकार के धमकी-भरे दबाव से बचें।

क्या कानूनी सहायता मुफ्त मिल सकती है?

हाँ, NALSA के माध्यम से पात्र व्यक्तियों को मुफ्त कानूनी सहायता मिल सकती है।

FIR कैसे दर्ज कराएं Haryana में?

सबसे पहले निकटतम थाने में घटना का विवरण दें और एक लिखित प्राथना-पत्र (FIR) दर्ज कराएं, जिसमें स्थान, तिथि, समय, घटना का क्रम और गवाह शामिल हों।

POCSO कोर्ट Haryana में कहाँ मिलते हैं?

हरियाणा में POCSO मामलों के लिए स्पेशल कोर्ट अलग-सी जगहों पर स्थापित होते हैं, ताकि पीड़ित児 को त्वरित न्याय मिले।

यौन अपराध के केस की सुनवाई कितनी समय लेती है?

न्यायिक प्रक्रिया की गति केस के जटिलता, साक्ष्यों और अदालत के समय-निर्धारण पर निर्भर करती है। आम तौर पर स्पेशल कोर्ट में hearings निर्धारित होते हैं।

क्या मैं सरकारी निःशुल्क कानूनी सहायता के लिए आवेदन कर सकता/सकती हूँ?

हाँ, NALSA की प्रणाली के अंतर्गत पात्रता पर मुफ्त या कम शुल्क पर advokat उपलब्ध होते हैं।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Legal Services Authority (NALSA) - https://nalsa.gov.in
  • Ministry of Women and Child Development (MWCD) - POCSO अधिनियम और बच्चों के अधिकारों पर जानकारी - https://wcd.nic.in
  • Punjab and Haryana High Court - अधिकारिक कानूनी सहायता और न्यायिक प्रक्रियाओं के निर्देश - https://highcourtchd.gov.in

ऊपर दिए गये संसाधन पंजाब-हरियाणा क्षेत्र के लिए विशेष रूप से उपयोगी हैं। इच्छित हो तो आप अपने क्षेत्र के लोक अदालत/कानूनी सहायता कार्यालय का भी संचालन देख सकते हैं।

6. अगले कदम

  1. अपनी स्थिति के अनुसार एक अनुभव-युक्त Advokat/कानूनी सलाहकार ढूंढें।
  2. स्थानीय कानून-कार्यपालिका और हाई कोर्ट के स्रोतों से अधिकारों की सही जानकारी प्राप्त करें।
  3. POCSO या IPC की संबंधित धाराओं के अनुसार आवश्यक दस्तावेज एकत्र करें (FIR, मेडिकल, गवाह आदि).
  4. NALSA या राज्य-स्तरीय कानूनी सहायता के लिए आवेदन करें यदि आप पात्र हैं।
  5. पहला क्लायंट-मीटिंग में अपने अधिकार, उम्मीद और रणनीति पर स्पष्ट समझ बनाएं।
  6. पुलिस-स्टेशन में पूछताछ के समय अपने वकील को साथ रखें।
  7. स्पेशल कोर्ट या फास्ट ट्रैक सुनवाई के बारे में जानकारी लेकर समय-रेखा बनाएं।

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