बिहार शरीफ़ में सर्वश्रेष्ठ यौन उत्पीड़न वकील

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LAW CHAMBER OF ADVOCATE RAJVEER SINGH

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15 minutes मुफ़्त परामर्श
बिहार शरीफ़, भारत

2016 में स्थापित
उनकी टीम में 10 लोग
English
Hindi
Welcome to the Law Chamber of Advocate Rajveer Singh, Advocate Rajveer Singh is an Advocate and Registered Trademark Attorney with over 8 years of experience in Supreme Court of India, High Courts and District Courts. With a robust practice spanning multiple domains, we offer comprehensive...
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1. बिहार शरीफ़, भारत में यौन उत्पीड़न कानून का संक्षिप्त अवलोकन

बिहार सहित पूरे भारत में यौन उत्पीड़न के विरुद्ध सुरक्षा के लिए प्रमुख कानून है यौन उत्पीड़न के विरुद्ध कार्यस्थल पर रोकथाम, prohibition एवं राहत (POSH) अधिनियम, 2013. यह कानून सभी प्रकार के कार्यस्थलों पर लागू होता है जिसमें सरकारी, निजी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थान भी सम्मिलित हैं।

No woman shall be subjected to sexual harassment at workplace - POSH अधिनियम 2013 के सेक्शन 3 के अनुसार यही मूल अधिकार है।

No woman shall be subjected to sexual harassment at workplace.

यह अधिनियम स्पष्ट करता है कि शिकायत प्राप्त होने पर आंतरिक शिकायत समिति (ICC) और स्थानीय शिकायत समिति (LCC) की स्थापना अनिवार्य है। बिहार के जिलों में भी यह ढांचा जिला प्रशासन और महिला-विकास विभाग के सहयोग से संचालित होता है।

“The Act provides for the constitution of an Internal Complaints Committee at every workplace and Local Complaints Committees at the district level.”

POSH अधिनियम के अनुसार शिकायतों की जाँच सामान्यत: 90 दिनों के भीतर पूरी करनी होती है, और आवश्यक हो तो इस अवधि को ICC के माध्यम से बढ़ाया जा सकता है।

“The inquiry shall be completed within 90 days of receipt of a complaint, with possible extensions by the ICC.”

बिहार शरीफ के निवासियों के लिए व्यावहारिक तथ्य: यदि आप किसी कार्यस्थल में यौन उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं, तो ICC/ LCC से संपर्क करें और आवश्यक दस्तावेज क्लियर रखें जैसे ईमेल, संदेश, रिकॉर्डेड वार्तालाप, और साक्ष्य।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

यौन उत्पीड़न मामलों में कानूनी सलाहकार की जरूरत कई परिस्थितियों में बढ़ जाती है। नीचे बिहार-शरीफ़ के संदर्भ में 4-6 विशिष्ट परिदृश्य दिए गए हैं।

  • कामकाज स्थल पर आपके वरिष्ठ या सहकर्मी द्वारा अनुचित स्पर्श, अश्लील टिप्पणियाँ या दबाव डालना जारी है। एक कानूनी सलाहकार निर्णय लेने में मदद करेगा कि ICC में कैसे शिकायत दर्ज करें और किन-किन सबूतों की जरूरत होगी।
  • शैक्षणिक संस्थान में प्रोफेसर या सहायक स्टाफ द्वारा उत्पीड़न हो रहा है। एडमिनिस्ट्रेशन के भीतर ICC बन चुका है या नहीं, इसकी स्थिति स्पष्ट न हो तो वकील आपको सही मार्गदर्शन देंगे।
  • डिजिटल मेरी से उत्पीड़न जैसे अश्लील संदेश, सोशल मीडिया पर बदतमीजी, फोटोज या वीडियो शेयर करना आदि है। यह स्थिति POSH के साथ IPC के प्रावधानों से भी जुड़ती है, इसलिए सही धाराएं चुनना जरूरी है।
  • कार्यस्थल में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो और नियुक्त अधिकारी आपके मामले को त्वरित निपटाने से इनकार करें। इस स्थिति में कानूनी योजना बनानी पड़ेगी ताकि ICC के आदेश का अनुपालन सुनिश्चित हो।
  • घरेलू स्थिति में यदि आप निजी अनुबंध, इंटर्नशिप या ठेकेदार के रूप में काम कर रहीं हैं और उत्पीड़न हो रहा है, तो भी POSH के प्रावधान प्रायः लागू होते हैं।
  • यदि आपका आरोप गलत होने का संदेह है और आप अदालत में बचाव चाहते हैं, तो एक अनुभवी अधिवक्ता सही बचाव-रणनीति बना सकता है और मुद्दों को स्पष्ट कर सकता है।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

बिहार शरीफ़ में यौन उत्पीड़न के नियन्त्रण हेतु मुख्य क्षेत्राधिकार और कानून निम्न हैं:

  1. यौन उत्पीड़न के विरुद्ध कार्यस्थल पर रोकथाम, prohibition एवं राहत (POSH) अधिनियम, 2013 - यह कानून सभी कार्यस्थलों पर ICC की स्थापना, शिकायतों की त्वरित जाँच और सुरक्षित कार्यस्थल सुनिश्चित करने का框 प्रदान करता है।
  2. भारतीय दंड संहिता (IPC) सेक्शन 354A - महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न के रूप में अश्लील टिप्पणियाँ, अनचाहे स्पर्श, मांगें और अन्य यौनकृत व्यवहार को अपराध मानता है।
  3. IPC सेक्शन 354D - स्टalking जैसे क्रमिक उत्पीड़न धारा, जिसमें लगातार पीछा करना या भय पैदा करना शामिल है।

नोट करें कि POSH अधिनियम विशेषकर कार्यस्थल से जुड़ी शिकायतों पर केंद्रित है, जबकि IPC सामान्य सामाजिक सुरक्षा और अपराध के दायरे में आता है। बिहार में ICC/ LCC के माध्यम से शिकायतें निपटती हैं और आवश्यकतानुसार IPC धाराओं के तहत भी अपराध दर्ज कराए जा सकते हैं।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न?

POSH अधिनियम कौन लागू होता है और किसके लिए है?

उत्तर: POSH अधिनियम सभी कार्यस्थलों पर लागू होता है जहां 10 या अधिक कर्मचारी हों या कम हो पर सरकार द्वारा ICC/ LCC की व्यवस्था हो। यह महिलाओं के विरुद्ध यौन उत्पीड़न को रोकने, रोकथाम, और राहत प्रदान करने के लिए है।

प्रश्न?

कौन शिकायत कर सकता है और कहाँ दर्ज करानी चाहिए?

उत्तर: शिकायतकर्ता वह महिला हो सकती है जो कार्यस्थल पर उत्पीड़न का सामना कर रही हो। सामान्यतः ICC के समक्ष शिकायत दर्ज कराई जाती है; अगर संस्थान में ICC न हो तो district level LCC से संपर्क करें।

प्रश्न?

शिकायत कितने समय में निपटानी चाहिए?

उत्तर: POSH के अनुसार जाँच 90 दिनों के भीतर पूरी करनी होती है, कुछ परिस्थितियों में ICC की अनुमति से अवधि बढ़ सकती है।

प्रश्न?

अगर आरोपी वरिष्ठ अधिकारी हो तो क्या कदम उठाने चाहिए?

उत्तर: शिकायत ICC/ LCC के पास ही दर्ज करें; यदि आवश्यक हो तो आप न्यायिक सहायता ले सकते हैं। अदालत में सुरक्षा-गर्भित सुरक्षा भी माँगी जा सकती है।

प्रश्न?

कौन सा सबूत आवश्यक होगा?

उत्तर: संदेश, ईमेल, स्क्रीनशॉट, रिकॉर्डेड वार्ता, मौखिक गवाहियाँ आदि सभी साक्ष्यों को संरक्षित रखें।

प्रश्न?

क्या शिकायत के बाद प्रतिशोध का डर है?

उत्तर: POSH अधिनियम में शिकायतकर्ता को प्रतिशोध से सुरक्षा दी गई है; शिकायत के बाद भी कोई प्रतिशोध न हो, इसका प्रावधान है।

प्रश्न?

ICC और LCC में क्या अंतर है?

उत्तर: ICC संस्थागत कार्यस्थल पर है और 10+ कर्मचारियों के साथ होता है, जबकि LCC जिला स्तर पर होती है और राज्य सरकार द्वारा गठन किया जाता है।

प्रश्न?

क्या शिकायत में बहिस्कार या कानूनी लागत लगती है?

उत्तर: कुछ मामलों में फे-फीस, या कानूनी फीस लग सकती है; लेकिन कई संस्थाओं में मुफ्त कानूनी सहायता के विकल्प उपलब्ध होते हैं।

प्रश्न?

डिजिटल उत्पीड़न (ईमेल/सोशल मीडिया) POSH के अंतर्गत आता है?

उत्तर: हाँ, POSH में यौन-उत्तेजक या अश्लील संवाद, फोटो और वीडियो के साझा करना आदि शामिल हो सकता है, विशेषकर अगर यह कार्यस्थल के संदर्भ में हो।

प्रश्न?

क्या शिकायत locally Bihar के अलावा अन्य राज्यों में भी दर्ज कराई जा सकती है?

उत्तर: यदि आप बिहार के भीतर हैं तो स्थानीय ICC/ LCC के अंतर्गत शिकायत प्राथमिकता पाती है; लेकिन आवश्यक हो तो केंद्र/राज्य कानून के अनुसार दूसरे राज्यों में भी सहायता मिल सकती है।

प्रश्न?

यदि आरोपी कर्मचारी न हो कर ठेका-वर्कर हो, तब?

उत्तर: POSH के दायरे में ठेका-वर्कर भी आ सकते हैं; ICC के दायरे में शिकायत दर्ज हो सकती है और प्रबंधन के स्तर पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रश्न?

शिकायत के बाद क्या ਕਾਰवाह की जा सकती है?

उत्तर: हाँ, ICC/ LCC के आदेश के क्रियान्वयन पर निगरानी होती है; अगर आवश्यक हो तो अदालत में राहत-याचिका दायर की जा सकती है।

5. अतिरिक्त संसाधन

नीचे यौन उत्पीड़न से जुड़ी प्रमुख सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के संसाधन दिए गए हैं:

6. अगले कदम

  1. अपने कार्यस्थल का प्रकार पहचानें और ICC/ LCC की उपलब्धता जाँचें - Bihar के भीतर district के कार्यप्रणाली की जानकारी लें।
  2. संभावित प्रमाण-उपकरण जुटाएं जैसे संदेश, ईमेल, स्क्रीनशॉट आदि, और यथाशीघ्र सुरक्षित रखें।
  3. कानूनी सलाहकार या अधिवक्ता से मिलें ताकि आप सही धाराओं और प्रक्रिया को समझ सकें।
  4. ICC या LCC में शिकायत दर्ज करें; यदि संभव हो तो पहले लिखित शिकायत दें और कॉपी सुरक्षित रखें।
  5. अपने केस के लिए एक स्पष्ट और युक्तिगत स्टेटमेंट तैयार करें, जिसमें तिथियाँ और घटनाओं का क्रम हो।
  6. कानूनी विकल्पों पर चर्चा करें-जांच-समयसीमा, राहत, प्राथमिकी आदि पर सलाह लें।
  7. अगर सुरक्षा की जरूरत हो तो पुलिस सहायता या अदालत के समन्वय से सुरक्षा-व्यवस्था माँगें।

आधिकारिक उद्धरण और स्रोतों के लिए कुछ प्रमुख पन्ने:

“No woman shall be subjected to sexual harassment at workplace.” - POSH Act, 2013, Section 3
“The Act provides for the constitution of an Internal Complaints Committee at every workplace and Local Complaints Committees at the district level.”
“The inquiry shall be completed within 90 days of receipt of a complaint, with possible extensions by the ICC.”

महत्वपूर्ण ध्यान दें: बिहार शरीफ़ के लिए कानून की भाषा एक राष्ट्रीय कानून पर आधारित है; राज्य सरकारें POSH नियमों के अनुकूल स्थानीय नियम बनाती हैं।

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