जम्मू में सर्वश्रेष्ठ यौन उत्पीड़न वकील

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ADV HARPREET SINGH AND ASSOCIATES
जम्मू, भारत

2022 में स्थापित
उनकी टीम में 19 लोग
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अधिवक्ता हरप्रीत सिंह: जटिल कराधान और कॉर्पोरेट विधि में एक भरोसेमंद कानूनी रणनीतिकारविधिक जटिलताओं की निरंतर...
जैसा कि देखा गया

1. जम्मू, भारत में यौन उत्पीड़न कानून का संक्षिप्त अवलोकन

यौन उत्पीड़न के खिलाफ रोकथाम, निषेध और निवारण के लिए केंद्र सरकार द्वारा 2013 में कानून बना गया है। यह कानून हर कार्यस्थल पर लागू माना गया है जिसमें कम से कम दस कर्मचारी हों। जम्मू और कश्मीर के क्षेत्रों में भी POSH अधिनियम का आधिकारिक दायरा समान रूप से मान्य है।

POSH अधिनियम के अनुसार कार्यालय, संस्थान और संगठनों में यौन उत्पीड़न रोकने के लिए आंतरिक समिति (Internal Committee, IC) का गठन अनिवार्य है। शिकायत आने पर 90 दिनों के भीतर जांच पूरी करने का प्रावधान है, जिसे आवश्यकता पड़ने पर और बढ़ाया जा सकता है।

“The Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013 provides for the prevention, prohibition and redressal of sexual harassment of women at workplace.”

Source: Ministry of Women and Child Development (WCD) - POSH Act overview

सार्वभौम उद्धरण: POSH Act की परिभाषा के अनुसार “unwelcome acts or behaviour of a sexual nature” महिलाओं के सामने अनुचित व्यवहार को रोकने के लिए कठोर प्रावधान बनाता है। POSH Act के आधिकारिक पाठ में इसके विस्तृत दायरे बताए गये हैं।

“Internal Committee shall be constituted by the employer at the workplace.”

Source: POSH Act guidelines - Government of India

नोट: जम्मू कश्मीर UT के अधिकारिक प्रशासनिक क्षेत्र में POSH के नियम और प्रक्रियाएं राज्य/संघ राज्य स्थापित नियमों के अंतर्गत संचालित होती हैं। यह सूचना स्थानीय इकाइयों के साथ अपडेट रहती है, अतः नवीनतम नोटिस और नियम के लिए WCD और NCW की वेबसाइट चेक करें।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

नीचे जम्मू, भारत से संबंधित वास्तविक स्थितियों के आधार पर ऐसे 4-6 प्रकार के परिदृश्य दिए गए हैं जिनमें एक वकील की मदद जरूरी हो सकती है।

  • कार्यस्थल पर अनुचित टिप्पणियाँ या शारीरिक स्पर्श हुआ है और आप निपटान का ठोस निर्णय चाहते हैं।
  • आप संस्थान में आंतरिक समिति (IC) के खिलाफ या IC के निर्णय से असंतुष्ट हैं और उच्च न्यायालयीन सलाह चाहते हैं।
  • आप निजी कंपनी, सरकारी विभाग या NGO में नौकरी करते हैं और शिकायत के दौरान उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं।
  • घटना के बाद डर, प्रतिशोध या नीतिगत संरक्षण की कमी महसूस होती है और आप कानूनी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
  • कम से कम 3-6 महीने में परिणाम न मिलने पर आप उच्च न्यायालय में वैकल्पिक उपचार की योजना बनाते हैं।
  • अगर किसी कर्मचारी ने FIR दर्ज करवाने का निर्णय किया है, तो IPC की धाराओं के साथ POSH के तर्कों को एक साथ कैसे प्रस्तुत करें, this requires expert guidance.

जम्मू, भारत में कानून विशेषज्ञ होने से आपको यह फायदे मिलते हैं: अदालत के तथ्य-निर्माण में मदद, IC के निर्णय के दायरे को स्पष्ट करना, और सरकारी साइटों के अनुसार सही समय पर न्यायिक विकल्प चुनना।

3. स्थानीय कानून अवलोकन

  • Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013 - POSH Act. सभी कार्यस्थलों के लिए यौन उत्पीड़न रोकथाम का केंद्रीय कानून। स्थल-उचित IC गठन, शिकायत प्रक्रिया और निवारण के उपाय निर्धारित।
  • भारतीय दंड संहिता (IPC) धारा 354A, 354B, 354C, 354D तथा 509 - यौन उत्पीड़न, छेडछाड़, घुसपैठ, अश्लील टिप्पणियाँ आदि के अपराधी प्रावधान।
  • धारा 354A (यौन उत्पीड़न के लिए दायित्व) और अन्य संबद्ध धाराएं - विविध प्रकार के नापसंद व्यवहार, डराने-धमकाने और उत्पीड़न के अपराधों के लिए मजबूत दंड प्रावधान।

जम्मू, भारत में POSH के नियमों के साथ IPC धाराएं भी लागू होती हैं, ताकि उसी घटना पर दंडात्मक कार्रवाई संभव हो सके। यह संयोजन महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

“POSH Act provides for prevention, prohibition and redressal of sexual harassment at the workplace.”

Source: Ministry of Women and Child Development - POSH Act overview

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यौन उत्पीड़न क्या होता है?

POSH Act के अनुसार यौन उत्पीड़न वे अनचाहे व्यवहार हैं जो किसी महिला के विरुद्ध यौन nature के हों। इसमें शारीरिक स्पर्श, यौन मांग, तेज-तर्रार टिप्पणी, अश्लील चित्र या किसी अन्य अनचाहे व्यवहार शामिल हो सकते हैं।

क्या हर जगह POSH अधिनियम लागू है?

POSH अधिनियम तब लागू माना जाता है जब कार्यस्थल में कम से कम दस कर्मचारी होते हैं। इससे सरकारी कार्यालय, निजी कंपनियाँ और गैर-सरकारी संस्थान भी प्रभावित होते हैं।

Internal Committee (IC) कैसे बनता है?

कर्मदाता को अपनी संस्था में IC गठित करना आवश्यक होता है। यह समिति शिकायत आने पर अधिकारिक तरीके से जांच और समाधान करती है।

शिकायत कितने समय के भीतर करनी चाहिए?

अधिनियम के अनुसार शिकायत मिलने के बाद IC को 90 दिनों के भीतर जांच पूरी करनी चाहिए, जिसे संभव हो तो बढ़ाया भी जा सकता है।

अगर मैं Jammu & Kashmir से हूँ तो मुझे क्या करना चाहिए?

पहले अपनी संस्था के IC से संपर्क करें, फिर आवश्यकता पड़ने पर जिला स्तर के सिविल कोर्ट या केंद्रीय संस्थाओं से मार्गदर्शन लें।

क्या सरकार मेरे लिए कानूनी सहायता दे सकती है?

हां, NALSA जैसी कानूनी सहायता सुविधाएँ और NCW/JK SLSA जैसे संरचनात्मक निकाय सहायता करते हैं, खासकर आर्थिक रूप से कमजोर पक्ष के लिए।

क्या शिकायत के दौरान प्रतिशोध से सुरक्षा मिलेगी?

यूनिट शासन के अनुसार शिकायतकर्ता की सुरक्षा और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित होते हैं ताकि प्रतिशोध रोका जा सके।

क्या यौन उत्पीड़न केवल कार्यालय में होता है?

POSH कानून सीमित-कार्यस्थलों तक ही सीमित नहीं है; यह सीख देता है कि संस्थागत गतिविधियों, ठेकेदारों के साथ वास्तविक गतिविधियों और अन्य संबद्ध वातावरण में भी निवारण हो।

क्या मैं शिकायत के बाद नौकरी नहीं छोड़ सकता?

कानून किसी भी प्रकार का प्रतिशोध रोकता है। हालांकि यदि स्थिति असहनीय हो तो वैकल्पिक रोजगार ढूंढ़ना संभव है।

क्या अदालत में पैसा खर्च होगा?

कानूनी सहायता और नि:शुल्क कानूनी सेवाओं के विकल्प उपलब्ध हैं, खासकर NALSA के तहत।

क्या मुझे पुलिस में FIR दर्ज करानी चाहिए?

यदि मामला IPC के अपराध के दायरे में आता है, तो FIR दर्ज कराना संभव है। POSH शिकायत के साथ IPC धाराओं का संयोजन संभव है।

क्या शिक्षा संस्थानों में भी POSH लागू होता है?

हाँ, यदि संस्थान में 10 से अधिक कर्मचारी हैं, तो POSH नियम लागू होंगे और IC की व्यवस्था बनानी होगी।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Commission for Women (NCW) - महिला बंधनों के विरुद्ध संरक्षण, सहायता और मार्गदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करता है। https://ncw.nic.in
  • National Legal Services Authority (NALSA) - नि:शुल्क कानूनी सहायता और क्लेम प्रक्रियाओं के लिए राष्ट्रीय संस्था। https://nalsa.nic.in
  • Jammu & Kashmir State Legal Services Authority (JK SLSA) - जम्मू-कश्मीर में कानूनी सहायता और सुलहकारी सेवाओं के लिए राज्य स्तरीय प्रावधान।
  • Women Helpline 181 - आपात स्थिति में महिलाओं के लिए राष्ट्रीय हेल्पलाइन सेवा।

6. अगले कदम

  1. स्थिति की स्पष्ट लिखित रिकॉर्ड बनाएं: तिथि, स्थान, अपराध का प्रकार और गवाहों के नाम।
  2. करे हुए घटनाक्रम के प्रमाण संग्रहीत करें: संदेश, ईमेल, फोटो, रिकॉर्डेड वार्ता यदि उपलब्ध हो।
  3. जागरूकता बढ़ाने के लिए स्थानीय बार एसोसिएशन या SLSA से संपर्क करें और POSH-विशेषज्ञ वकील तलाशें।
  4. IC के साथ संपर्क करें और शिकायत दर्ज करें; यदि आवश्यक हो तो उच्च अदालत मार्ग दिखाने के लिए सलाह लें।
  5. IPC धाराओं के अनुरूप कानूनी विकल्प पर विचार करें: FIR, शिकायत, या दायित्वपूर्ण समाधान।
  6. NALSA और NCW जैसी आधिकारिक संस्थाओं से कानूनी सहायता के लिए आवेदन करें।
  7. स्थानीय अदालतों के समय-सारिणी और प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी एकत्र करें।

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