तिरुपूर में सर्वश्रेष्ठ यौन उत्पीड़न वकील

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Advocate Rajasekaran M.B.A., M.L.,
तिरुपूर, भारत

2014 में स्थापित
उनकी टीम में 8 लोग
English
एडवोकेट राजसेकरन एम.बी.ए., एम.एल., तिरुपुर, तमिलनाडु में आधारित प्रतिष्ठित कानून फर्म आरजे लॉ अ‍ॅफिलिएट का नेतृत्व...
जैसा कि देखा गया

1. तिरुपूर, भारत में यौन उत्पीड़न कानून के बारे में: तिरुपूर, भारत में यौन उत्पीड़न कानून का संक्षिप्त अवलोकन

तिरुपूर के टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग में काम करने वाली महिलाओं के लिए यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून मौलिक है। यह कानून सभी क्षेत्रों पर लागू होता है और 10 से अधिक कर्मचारियों वाले संस्थानों में Internal Complaints Committee (ICC) की स्थापना अनिवार्य बनाता है। ICC शिकायतों की जाँच कर सुरक्षित, त्वरित और निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित करता है।

“Sexual harassment means such unwelcome acts of a sexual nature including physical contact and advances, or a demand or request for sexual favors, or other unwelcome sexually determined conduct.”

Source: POSH Act 2013, Section 2(n)

“Every employer with ten or more workers shall constitute, in such manner, an Internal Complaints Committee.”

Source: POSH Act 2013, Section 4

तमिलनाडु राज्य सरकार ने POSH के अनुपालन हेतु स्थानीय नियमों और मार्गदर्शिकाओं को भी अपनाया है ताकि तिरुपूर जिले में ICC और LCC मजबूत तरीके से काम करें। यदि आप तिरुपूर में कार्यरत हैं, तो अपने प्रतिष्ठान की संरचना, कर्मचारी संख्या और नीति-निर्माण के बारे में स्पष्ट दस्तावेज रखें।

2. आपको वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है: yاث उत्पीड़न कानूनी सहायता की आवश्यकता वाले 4-6 विशिष्ट परिदृश्यों की सूची बनाएं

  • परिदृश्य 1: तिरुपूर की किसी गारमेंट फैक्ट्री में लाइन सुपरवाइजर द्वारा बार-बार अनुचित टिप्पणी, स्पर्श या यौन-प्रेरित टिप्पणियां की जाती हैं। यह स्थिति आपके कामकाजी वातावरण को असुरक्षित बनाती है और आपको कानूनी सलाहकार की सहायता चाहिए ताकि ICC द्वारा उचित प्रक्रिया शुरू हो सके।

  • परिदृश्य 2: एक सहकर्मी द्वारा धमकी, अपमानजनक भाषा या कम-से-कम कपड़ों के बारे में टिप्पणी जैसी हरकतें की जाती हैं। ऐसी परिस्थितियों में आपके अधिकार संरक्षित रहते हैं, और एक वकील ICC-की जाँच एवं गुप्तता बनाए रखने में सहायता कर सकता है।

  • परिदृश्य 3: बिक्री-या कॉन्ट्रैक्टर-परामर्शदाता के साथ मीटिंग के दौरान क्लाइंट द्वारा अवांछित व्यवहार हो रहा है, जिससे पेशेवर वातावरण असुरक्षित हो रहा है। कानूनन सही शिकायत-प्रक्रिया के लिए कानूनी सलाह आवश्यक है।

  • परिदृश्य 4: पुरुष-प्रधान संदिग्ध माहौल के कारण माईग्रेंट महिला श्रमिकों के साथ जबरन दबाव, डांट-फटकार या असुरक्षित परिस्थितियाँ बनती हैं। ऐसे मामलों में ICC/स्थानीय समितियाँ बनाकर त्वरित सहायता दी जा सकती है।

  • परिदृश्य 5: किसी घरेलू सहायक के रूप में काम करने वाली महिला के साथ संस्थागत उत्पीड़न की शिकायत दर्ज कराने के लिए आपको कानूनी मार्गदर्शन चाहिए ताकि सुरक्षा और गुप्तता बनी रहे।

3. स्थानीय कानून अवलोकन: तिरुपूर, भारत में यौन उत्पीड़न को नियंत्रण करने वाले 2-3 विशिष्ट कानूनों का नाम से उल्लेख करें

  1. POSH Act 2013 (The Sexual Harassment of Women at Workplace Act, 2013): यह केंद्रीय कानून कार्यस्थलों पर महिलाओं के प्रति यौन उत्पीड़न को रोकने, रोकथाम और निवारण के लिए आधिकारिक तंत्र देता है।

  2. भारतीय दण्ड संहिता (IPC) की धाराएं विशेषकर §354A (यौन उत्पीड़न), §509 (महिलाओं की शालीनता के लिए अपमान-जनक शब्द-चिह्न), आदि-इन धाराओं के अंतर्गत अपराधी तत्व/criminal liability बनता है।

  3. राज्य-स्तर के अनुपालन दायरे - तमिल नाडु में POSH के अनुपालन हेतु राज्य-स्तरीय नियम और मार्गदर्शिकाएं लागू हैं, जिससे ICC और LCC की सुदृढ़ स्थापना संभव होती है।

4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

POSH Act क्या है?

POSH Act 2013 Workplace में महिलाओं के विरुद्ध यौन उत्पीड़न रोकने के लिए कानून है। यह ICC की स्थापना और शिकायत-प्रक्रिया निर्धारित करता है।

कौन-सी इकाइयों के लिए ICC अनिवार्य है?

एक संस्था जिसमें 10 या अधिक कर्मचारी हों, उसे ICC बनाना अनिवार्य है। यह समिति महिलाओं के मामले सुनने की जिम्मेदार होती है।

ICC में किनकी नियुक्ति होनी चाहिए?

ICC में एक महिला अध्यक्ष और कम-से-कम अन्य सदस्यों की भर्ती होती है; एक कानूनी ज्ञान रखने वाला सदस्य भी सम्मिलित हो सकता है।

यौन उत्पीड़न के कौन-कौन से व्यवहार मान्य रूप से उत्पीड़न होते हैं?

फिजिकल कॉन्टैक्ट, यौन Favours की मांग, यौन-आधारित टिप्पणियाँ और अन्य अवांछित व्यवहार शामिल हो सकते हैं।

शिकायत कैसे दर्ज करें?

शिकायत ICC के समक्ष या Local Complaints Committee (LCC) के पास दर्ज की जा सकती है, यदि आपके परिसर में ICC न हो।

शिकायत की समयसीमा क्या है?

अधिकांश मामलों में घटना के तिथि से कुछ माह के भीतर शिकायत उचित रहती है; ICC आवश्यक अवसर पर समय-सीमा बढ़ाने के लिए निर्णय ले सकता है।

क्या शिकायतकर्ता की सुरक्षा संरक्षित रहती है?

POSH और भारतीय कानून के अनुसार शिकायतकर्ता को प्रतिशोध-रोधी सुरक्षा मिलती है; शिकायत के दौरान गोपनीयता का पालन अनिवार्य है।

अगर अधिकारी उत्पीड़न करे तो क्या करें?

सबसे पहले ICC/HR विभाग से शिकायत करें; यदि आवश्यक हो तो IPC धाराओं के तहत पुलिस में भी मामला दर्ज किया जा सकता है।

क्या यह दंडनीय ठहरता है?

POSH के उल्लंघन पर संस्थान पर जुर्माना और अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है; गंभीर मामलों में IPC के अपराध दर्ज हो सकते हैं।

क्या केवल कॉरपोरेट के भीतर शिकायत हो सकती है?

नही, यदि कार्यालय नहीं है, तब Local Complaints Committee के माध्यम से भी शिकायत की जा सकती है।

क्या शिकायत वापस लेने की अनुमति है?

शिकायत वापस लेने पर ICC निर्णय ले सकता है; कुछ मामलों में सार्वजनिक हित के कारण आगे-की जाँच जारी रहती है।

क्या अदालत में मामला भेजना संभव है?

ICC की प्रक्रिया पूरी होने के बाद या आपत्ति होने पर आप अदालत में भी मामला दर्ज करा सकते हैं।

क्या यौन उत्पीड़न का प्रमाण कठिन है?

साक्ष्य जैसे संदेश, ईमेल, रिकॉर्डेड वार्तालाप, साथियों के बयान आदि मददगार होते हैं; लेकिन प्रमाणिकता और गुप्तता का पूरा ध्यान रखा जाता है।

क्या अभियोजन के साथ पीड़िता को राहत मिलती है?

हाँ, शिकायत के अनुसार नौकरी सुरक्षा, बदले की कार्रवाइयों पर रोक, वित्तीय सहायता आदि राहत मिल सकती है।

5. अतिरिक्त संसाधन

  • National Commission for Women (NCW) - वेबसाइट: https://ncw.nic.in
  • National Legal Services Authority (NALSA) - वेबसाइट: https://nalsa.gov.in
  • Ministry of Women and Child Development (WCD) - POSH से संबंधित मार्गदर्शन और आधिकारिक जानकारी: https://wcd.nic.in

6. अगले कदम

  1. व्यवसायिक स्थिति का समेकित दस्तावेज बनाएं, जिसमें कर्मचारी संख्या, नीति, ICC संरचना आदि शामिल हों।
  2. POSH-विशेषज्ञ वकील या कानूनी सहायता संगठन से initial consultation लें।
  3. ICC के गठन, नीति-प्रकाशन और प्रशिक्षण कार्यक्रम की स्थिति जाँचें-यदि आवश्यक हो इच्छा दर्शायें।
  4. घटना-घटना का संक्षेप और संबंधित साक्ष्यों की सूची बनाएं; कोई भी रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
  5. शिकायत प्रक्रिया शुरू करें-ICC या स्थानीय समिति में शिकायत दर्ज कराएं।
  6. गोपनीयता और संरक्षण के लिए उचित कदम उठाएं; साथ ही सुरक्षा योजना बनाएं।
  7. यदि चाहें तो IPC धाराओं के तहत भी वैकल्पिक/criminal मार्ग पर विचार करें और सलाह लें।

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