गुवाहाटी में सर्वश्रेष्ठ यौन उत्पीड़न वकील

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M & L Legal Law Chamber (Advocate)
गुवाहाटी, भारत

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गुवाहाटी, असम में आधारित एम एंड एल लीगल लॉ चेम्बर में गुवाहाटी उच्च न्यायालय और इसके अधीनस्थ न्यायालयों में...
Firuz Khan Law Firm
गुवाहाटी, भारत

2013 में स्थापित
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फिरोज खान लॉ फर्म, 2013 में स्थापित, गुवाहाटी, असम में आधारित एक प्रतिष्ठित विधिक अभ्यास है जो भारत के पूर्वोत्तर...
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गुवाहाटी, भारत में यौन उत्पीड़न कानून का संक्षिप्त अवलोकन

गुवाहाटी में यौन उत्पीड़न से सुरक्षा के लिए POSH Act 2013 लागू है। यह कानून केवल वे संस्थान जिनमें कम से कम दस कर्मचारी हों वही नहीं, बल्कि सभी प्रकार के workplaces पर लागू होता है।

कानून का उद्देश्य महिलाओं के प्रति उत्पीड़न रोकना, सुरक्षा प्रदान करना और शिकायत प्रक्रिया को स्पष्ट करना है। संस्थानों को Internal Complaints Committee (ICC) बनानी चाहिए और शिकायत सुनवाई के लिए एक निष्पक्ष तंत्र उपलब्ध कराना होता है।

“An Act to provide for the prevention, prohibition and redressal of sexual harassment of women at workplace.”

महत्वपूर्ण अवधारणा POSH Act 2013 के अंतर्गत workplace में यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश दिए गए हैं। यह Vishaka guidelines के सिद्धांतों पर आधारित है और बाद में कानून का स्वरूप बन गया।

“No woman shall be subjected to sexual harassment at the workplace.”

इन उद्धरणों के स्रोत और आधिकारिक कानूनी टेक्स्ट के लिए नीचे दिए गए संसाधनों को देखें। POSH Act 2013 भारत सरकार के प्रासंगिक प्रावधानों में दर्ज है।

तुम्हें वकील की आवश्यकता क्यों हो सकती है

  • गुवाहाटी की एक निजी कंपनी में ICC सही से नहीं बनायी गयी है और शिकायत के दौरान प्रक्रियात्मक त्रुटियाँ हो रही हैं। एक कानूनी सलाहकार इसे सही कर सकता है और उचित समाधान सुझा सकता है।

  • कॉल सेंटर या होटल जैसी स्थितियों में वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ दायर शिकायत पर उचित कार्रवाई न हो। वकील चरणबद्ध तरीके से शिकायत की गति बढ़ा सकता है और Arbeitgeber के खिलाफ कदम सुझा सकता है।

  • शिक्षण संस्थान में छात्रा के साथ उत्पीड़न के आरोप सामने आने पर ICC के साथ साथ IPC के प्रावधानों के अनुसार सहयोग चाहिए हो सकता है।

  • कानूनी प्रक्रिया के दौरान गोपनीयता की सुरक्षा और मौजूदा नियमों के अनुरूप डिप्लॉयमेंट जरूरी हो सकता है। एक अनुभवी adv0कate मदद कर सकता है।

  • यदि शिकायत ICC से संतुष्ट न हो तो पुलिस थाने में IPC के प्रावधानों के अंतर्गत अपराध दर्ज कराने पर मार्गदर्शन चाहिए हो सकता है।

स्थानीय कानून अवलोकन

  • POSH Act 2013 Sexual Harassment of Women at Workplace (Prevention, Prohibition and Redressal) Act, 2013। यह कानून बताता है कि हर संस्थान को ICC बनानी चाहिए और शिकायत प्रक्रिया सुनिश्चित करनी चाहिए।

  • Indian Penal Code के प्रावधान IPC के प्रावधानों के अंतर्गत यौन उत्पीड़न के अपराधों को अपराध माना गया है, जैसे IPC 354A (Sexual harassment), 354D (Stalking), 509 (Insulting modesty) आदि।

  • राज्य या स्थानीय प्रशासन POSH Act के अनुपालन के लिए निगरानी और जागरूकता के कदम उठा सकता है। Guwahati में कार्यस्थल के लिए यह मानक केंद्रीय अधिनियम है।

प्रश्न और जवाब

यौन उत्पीड़न क्या है?

यौन उत्पीड़न कार्यस्थल पर किसी महिला की गरिमा के प्रतिकूल व्यवहार से है। यह शारीरिक, मौखिक या डिजिटल रूप से हो सकता है।

POSH Act किस पर लागू होता है?

यह कानून उन संस्थाओं पर लागू होता है जिनमें कम से कम दस कर्मचारी हों। कार्यस्थल पर महिलाओं के विरुद्ध उत्पीड़न रोकना इसका प्रमुख उद्देश्य है।

ICC किस बारे में है और इसे कैसे बनाएं?

ICC एक आंतरिक शिकायत समिति है जो शिकायतों की स्वतंत्र जाँच करती है। 10 से अधिक कर्मचारियों वाले सभी संस्थानों को ICC बनानी चाहिए।

कौन शिकायत कर सकता है?

महिला कर्मचारी या अनुचित व्यवहार का अनुभव करने वाले किसी व्यक्ति द्वारा शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। पुरुषों के लिए POSH के अंतर्गत शिकायत की गुंजाइश सीमित हो सकती है।

कब शिकायत दायर करनी चाहिए?

आमतौर पर घटना के तात्कालिक बाद शिकायत करें। § POSH कानून में समय-सीमा स्पष्ट है; हालांकि الظروف के अनुसार बढ़ाने के नियम हो सकते हैं।

क्या शिकायत के बाद नौकरी पर खतरे होते हैं?

नहीं, शिकायत करने पर प्रतिशोध या दवाब नहीं डाला जा सकता। संस्थान को सुरक्षा और संरक्षण प्रदान करना होता है।

क्या शिकायत के बाद आप पर्सनल हानि का दावा कर सकते हैं?

हां, नुकसान और भावनात्मक आघात के लिए दावेदारी संभव है, पर यह ICC के निर्णय और IPC के प्रावधानों पर निर्भर करेगा।

क्या शिकायत अगर निपट नहीं पाती है तो क्या करें?

यदि ICC संतुष्ट नहीं है, तो उच्च अधिकारी, राज्य आयोग, या पुलिस के पास IPC के अंतर्गत मामला दर्ज कराया जा सकता है।

क्या पुलिस रिपोर्ट आवश्यक है?

यह स्थिति पर निर्भर है। कुछ मामलों में IPC के अंतर्गत पुलिस कार्रवाई संभव है, अन्य में ICC प्राथमिकता रहती है।

क्या शिकायत गोपनीय रहेगी?

हाँ, POSH के अनुसार शिकायतकर्ता की पहचान और विवरण की गोपनीयता बनाए रखना आवश्यक है, ताकि प्रतिशोध रोका जा सके।

क्या बड़े समूहों के लिए विशेष नियम हैं?

जी हाँ, बड़ी संस्थाओं में ICC की प्रक्रिया और दायित्व अधिक स्पष्ट होते हैं, और HR पॉलिसी के अनुरूप काम किया जाता है।

मैं किस प्रकार के दावे दे सकता हूँ?

उच्चारण, मौखिक टिप्पणी, शारीरिक स्पर्श, या डिजिटल harassment जैसे दावे शामिल हो सकते हैं।

क्या POSH कानून पुरुषों पर लागू होता है?

POSH कानून महिलाओं के विरुद्ध उत्पीड़न को रोकने के लिए बना है; पुरुष complainant के लिए अन्य कानून उपलब्ध हो सकते हैं।

शिकायत के लिए कानूनी सहायता कहाँ मिलेगी?

कानूनी मदद के लिए आप एक अनुभवशील adv0kate से संपर्क करें जो POSH मामलों में अनुभव रखता हो।

अतिरिक्त संसाधन

  • National Commission for Women (NCW) - महिला सुरक्षा और यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों में मार्गदर्शन और शिकायत सहायता देता है।

  • Ministry of Women and Child Development (MWCD) - POSH Act 2013 के क्रियान्वयन हेतु आधिकारिक निर्देश और संसाधन देता है।

  • Assam State Commission for Women (ASCW) - असम राज्य में महिला सुरक्षा से जुड़े मामलों की निगरानी और सहायता प्रदान करता है (ASCW के official पन्ने पर देखें)।

अगले कदम

  1. घटना के तुरंत बाद अपने अनुभवों को स्पष्ट और क्रमबद्ध लिख लें।
  2. कम से कम एक विश्वसनीय वरिष्ठ कर्मचारी या HR को सूचना दें और प्रक्रिया शुरू करें।
  3. यदि संभव हो तो ICC के समक्ष शिकायत दर्ज कराएं और दस्तावेज जुटाएं।
  4. प्रारम्भिक कानूनी सलाहकार से मिलें जो POSH मामलों का अनुभव रखता हो।
  5. जाँच के दौरान सभी इलेक्ट्रॉनिक संदेश, ईमेल और अन्य प्रमाण सुरक्षित रखें।
  6. अगर ICC संतोषजनक कदम नहीं उठाती, तो स्थानीय पुलिस या राज्य आयोग से सीमा-रेखा के अनुसार सहायता लें।
  7. अगले कदम के लिए उपलब्ध फ्री या कम-लागत कानूनी सहायता विकल्पों पर विचार करें।

आधिकारिक उद्धरण और स्रोत

“An Act to provide for the prevention, prohibition and redressal of sexual harassment of women at workplace.” - POSH Act 2013, भारत सरकार
“No woman shall be subjected to sexual harassment at the workplace.” - Vishaka v State of Rajasthan, 1997

POSH Act 2013 के प्रारम्भिक पाठ and Vishaka guidelines के सत्यापन हेतु आधिकारिक स्रोत देखें:

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